उद्यानिकी फसलों (Horticultural Crops) के उत्पादन में मध्य प्रदेश देश का अग्रणी राज्य

भोपाल : उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह एग्रोविजन राष्ट्रीय कृषि मेले में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में मध्य प्रदेश देश का अग्रणी राज्य है. मध्य प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए बेहतर माहौल है.

उन्होंने आगे कहा कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काम करने वाली इकाइयों को केंद्र के साथ राज्य सरकार भी विशेष अनुदान मुहैया कराती है.

मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कृषि मेले में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट की और मेले के आयोजन को किसानों के हित में बताया. उन्होंने कहा कि एग्रोविजन मेले में स्टार्टअप्स एवं नवीन तकनीकियों, उन्नत खाद्य एवं बीज, कृषि उपकरणों के प्रदर्शन के साथ किसानों और उद्यमियों को नवीन इकाइयों की स्थापना के लिए शासन की योजनाओं की जानकारी दी जा रही है. इस से वे योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें. उन्होंने कहा कि इस तरह के मेले देश के अन्य राज्यों में भी आयोजित किए जाने चाहिए.

मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने राष्ट्रीय कृषि मेले में शामिल हुई विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर, उन्हें मध्य प्रदेश आने का आमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रचुर संभावनाएं हैं. वर्ष 2023-24 में 4.30 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की बोनी की गई, इस में 96 लाख, 11 हजार मीट्रिक टन से अधिक उद्यानिकी फसलों का उत्पादन हुआ है, जो कि एक रिकौर्ड है.

उन्होंने आगे बताया कि मध्य प्रदेश देश में संतरा, टमाटर, धनिया, लहसुन और मसाला फसलों के उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है. राज्य सरकार खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित कर रही है. मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के अंतर्गत 5 वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है. इस वजह से भारत सरकार द्वारा प्रदेश में इस योजना की अवधि एक वर्ष और बढ़ा दी गई है. अब यह योजना प्रदेश में मार्च, 2025 तक प्रभावी रहेगी. योजना में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काम करने वाली निजी इकाइयों को 35 फीसदी या अधिकतम 10 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाता है.

इस अवसर पर प्रमुख सचिव उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अनुपम राजन, आयुक्त हथकरघा एवं प्रबंध संचालक संत रविदास हस्तशिल्प विकास निगम मदन कुमार सहित विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे.

Food Processing: हर जिले में लगेगी फूड प्रोसैसिंग यूनिट

भोपाल : मध्य प्रदेश में “एक जिला एक उत्पाद” की तर्ज पर उद्यानकी फसलों की प्रोसैसिंग के लिए फूड प्रोसैसिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी. इस के लिए राज्य सरकार द्वारा विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

यह बात उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने पिछले दिनों नागपुर में आयोजित एग्रोविजन राष्ट्रीय कृषि मेले में आयोजित कार्यशाला में कही. उन्होंने कहा कि फूड प्रोसैसिंग यूनिट की स्थापना जिला और संभाग लैवल पर हो जाने से उत्पादक किसानों को उपज का वाजिब दाम मिल सकेगा.

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में 20 वर्षों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया गया है. खेतीकिसानी को सस्ती दर पर बिजली की आपूर्ति की जा रही है. इस के परिणामस्वरूप प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ा है. किसान परंपरागत खेती के स्थान पर कैश क्राप के प्रति आकर्षित हुए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश सरकार का प्रयास है कि उद्यानकी फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को फसल का सही दाम मिल सके. इस के लिए फूड प्रोसैसिंग यूनिट और मार्केटिंग का काम प्राथमिकता के साथ किया जाएगा.

Food Processing

मध्य प्रदेश में नागपुर की तर्ज पर होगी संतरे की खेती

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने नागपुर में पैदा किए जा रहे हैं और्गेनिक संतरे की फसल का अवलोकन किया. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भी संतरे का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है. संतरे की फसल को और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रदेश के किसानों को नागपुर स्टडी टूर पर भेजा जाएगा, जिस से कि किसान और्गेनिक संतरे की उत्पादन प्रक्रिया को देख और समझ सकेंगे.

लखनऊ में मिला रामजी दुबे को बेस्ट फार्मर अवार्ड इन इंटीग्रेटेड फार्मिंग

रामजी दुबे ग्राम नुआंव, मिर्जापुर , उत्तर प्रदेश से हैं. और बड़े पैमाने पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर लगभग 15 लाख सालाना का मुनाफा ले रहे हैं. इसके अलावा स्ट्राबेरी, खीरा, केला आदि की खेती करते हैं. पॉलीहाउस में नर्सरी तैयार करते हैं. पशुपालन भी करते हैं जिससे उन्हें खेती में बाजार से रासायनिक उर्वरक भी नहीं खरीदना पड़ता. इन्हीं खासियतों के चलते हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फार्म एन फूड कृषि सम्मान मिला. जिसके तहत उन्हें ‘बेस्ट फार्मर अवार्ड फार्मर इन इंटीग्रेटेड फार्मिंग’ सम्मान दिया गया.

रामजी दुबे ने साल 2018 से एकीकृत बागबानी के तहत 2000 वर्गमीटर एरिया में पौलीहाउस बनाया है. उस के बाद पौलीहाउस में उच्च गुणवत्ता का खरबूजा, रंगीन शिमला मिर्च एवं खुले खेत में केला, स्ट्रौबेरी, पपीता एवं एक हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की खेती आरंभ की, जिस से उन्हें 12 महीने कुछ न कुछ फसल उत्पाद मिलता रहता है और पूरे साल अच्छीखासी आमदनी होती रहती है.

किसान रामजी दुबे ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती से उन्हें 10 से 15 लाख की सालाना आमदनी होती है. रामजी दुबे पर्यावरण के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं. इस के तहत वे अपने जिले और आसपास के क्षेत्र के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार आदि अनेक राज्यों में भी एक लाख से अधिक पौधों का वितरण कर चुके हैं. उन्हें जिला स्तर, राज्य स्तर के साथसाथ राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

रामजी दुबे का कहना है कि उन्हें स्ट्रौबेरी की खेती से 5 से 6 महीने में एक एकड़ में 8 से 10 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है. खेती में तकरीबन 2 से 3 लाख रुपए का खर्च भी आता है. इस प्रकार तकरीबन 7 लाख रुपए के आसपास शुद्ध आमदनी हो जाती है.

Integrated Farming

इसी प्रकार रामजी दुबे को रंगीन शिमला मिर्च से तकरीबन 8 से 10 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है, वहीं पशुपालन के तहत वे गौपालन भी करते हैं, जिस के गोबर से वह बिना किसी लागत के वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं. इस से उन्हें अपनी खेती में बाजार से उर्वरक नहीं खरीदना होता है.

रामजी दुबे साल 2018 के पहले पारंपरिक तरीके से गेहूं, धान, चना, मटर, सरसों की खेती करते थे, जिस से उन्हें बहुत अच्छा मुनाफा नहीं होता था, परंतु आज एकीकृत खेती के माध्यम से बागबानी के द्वारा साल में 25 से 30 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है. वे अब पपीता की खेती भी करते हैं. पपीते की पौध जूनजुलाई माह में लगाते हैं, जिस की हार्वेस्टिंग अगले वर्ष मार्चअप्रैल के महीने में शुरू हो जाती है. उस समय नवरात्र एवं अन्य त्योहारों के कारण डिमांड अच्छीखासी रहती है. उन्हें एक एकड़ में तकरीबन 5 से 6 लाख रुपए का मुनाफा एक एकड़ में हो जाता है.

इस तरह से रामजी दुबे को समेकित व एकीकृत खेती से अनेक लाभ हो जाते हैं. आज अपने क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि जिले एवं आसपास के दूसरे क्षेत्रों में आप प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं. आसपास के जिलों से क्षेत्र से तमाम किसान तमाम सरकारी अधिकारी उन के खेतों को देखने आते हैं, जिस से उन्हें भी काफी प्रेरणा मिलती है.

 

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वैसे, 63 साल की उम्र पर रामजी दुबे के इस तरह के काम देख कर लोग बहुत प्रभावित होते हैं और दूसरे लोगों को प्रेरणा भी मिलती है.

महिला किसानों के लिए प्रेरणा बनी पुष्पा गौतम

हाल ही में पुष्पा गौतम को दिल्ली प्रेस, नई दिल्ली द्वारा लखनऊ में राज्यस्तरीय फार्म एन फूड ‘बेस्ट फार्मर अवार्ड इन मार्केटिंग’ से नवाजा गया है.

पुष्पा गौतम बस्ती जिले के बिहरा खास गांव से हैं. आप अनेक कृषि उत्पादों जैसे मल्टीग्रेन आटा, चावल, चना, अचारमुरब्बा, आदि की प्रोसेसिंग कर बाजार से कई गुना अधिक मुनाफा कमाने के साथसाथ अनेक लोगों को ट्रेनिंग व रोजगार भी दे रही हैं.

पुष्पा गौतम एमएबीएड हैं. फैजाबाद विश्वविद्यालय से मुख्य 2020 में कोरोना के समय एनआरएलएम के तहत आप समूह से जुड़ीं और सरकार द्वार समूह में दी जाने वाली अनेक प्रकार की ट्रेनिंग सुविधायों का लाभ उठाया. अनेक प्रकार के प्रशिक्षण लेने के बाद पुष्पा गौतम को अनेक जानकारियां मिलीं. किस तरह से नए रोजगार का सृजन हो और उस को शुरू करने के लिए फंड कहां से मिल सकेगा, इस पर उन्होंने जानकारी प्राप्त की. उस के बाद पुष्पा गौतम ने ब्लौक, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, गन्ना विभाग, नाबार्ड और आरसेटी से जुड़ कर आज अनेक उत्पादों की प्रोसैसिंग शुरू की.

women farmers

इन दिनों पुष्पा गौतम मल्टीग्रेन आटा, मक्का आटा, बाजरा आटा, चना बेसन, मसाला, अचार, मुरब्बा, आवला लड्डू आदि की प्रोसैसिंग और पैकिंग कर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. अनेक तैयार उत्पादों की पैकिंग के लिए मशीन भी समूह द्वारा प्राप्त फंड से खरीदी गई हैं.

इन दिनों पुष्पा गौतम तकरीबन 30 महिलाओं के साथ काम कर रही हैं और उन्हें स्वावलंबी बनाने का काम कर रही हैं.

इस के अलावा पुष्पा गौतम ने जनवरी, 2021 से ले कर सितंबर, 2024 तक तकरीबन 300 महिलाओं को नर्सरी, वर्मी कंपोस्ट, डेयरी फार्मिंग, वाशिंग पाउडर बनाना, अचार, मसाला, पापड़, मोमबती आदि पर ट्रेनिंग करा कर उन को रोजगार से जोड़ने का काम किया है. उन की इन सफलताओं को देखते हुए नाबार्ड से उन्हें एक ग्राम दुकान स्वीकृत की और नाबार्ड ने 2 साल में साढ़े 3 लाख रुपए का फंड मुहैया कराया. उन के समूह की अनेक महिलाओं द्वारा बनने वाले उत्पाद की मार्केटिंग और सप्लाई में काफी मदद मिल रही है. उन्हें इस काम के लिए ब्लौक, जिला, केवीके, नाबार्ड आदि से समयसमय पर सम्मानित किया जाता रहा है.

 

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साधना सिंह : डेयरी फार्मिंग से लाखों की कमाई

लखनऊ में आयोजित दिल्‍ली प्रैस द्वारा ‘फार्म एन फूड’  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उत्तर प्रदेश के ग्राम बहुअन मदार माझा की साधना सिंह को  फार्म एन फूड ‘बैस्ट  डेयरी ऐंड एनिमल कीपर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया.

साधना सिंह साल 2012 से कृषि क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं. इस समय वे कृषि आधारित कई व्यवसाय भी कर रही हैं. उन्होंने 2 भैंसों के साथ पशुपालन का काम शुरू किया और इस समय उन के पास 35 दुधारू भैंसें हैं. उन के दूध से पारंपरिक बिलोना विधि से भैंस का देशी घी तैयार किया जाता है, जो ‘अवध गोल्ड’ के नाम से बिकता है.

साधना सिंह के पास 2 पोल्ट्री फार्म हैं, जिस में एक पोल्ट्री फार्म 10,000 वर्गफुट का है, जिस से उन्हें सालाना 7 से 8 लाख का मुनाफा होता है. इस के अलावा 2 हेक्टेयर में वे मछलीपालन व्यवसाय से भी जुड़ी हैं, जिस से उन्हें सालाना 10 लाख का लाभ प्राप्त होता है.

dairy farming

साधना सिंह का कहना है कि हम पंगास मछली का उत्पादन करते हैं. यह हाईडेंसिटी में उत्पादन होने वाली मछली है, जिस से ज्यादा मुनाफा होता है. मछलीपालन में फायदा होते देख कई महिला किसानों ने मछलीपालन शुरू किया है, जिस से गांव में अनेक महिला किसान मछलीपालन से फायदा उठा रही हैं.

इस के अलावा उन्होंने बताया कि वे 40 एकड़ में गन्ने की खेती और 20 एकड़ में धान की खेती करती हैं. 2 एकड़ में वे जैविक खेती से धान और गेहूं उत्पादन करते हैं.

साधना सिंह के पास सोलर ड्रायर है, जिस में आम, टमाटर, तुलसी के पत्तों को सुखा कर बेचा जाता है. कृषि विभाग द्वारा मसूर उत्पादन के लिए उन्हें जिले में प्रथम पुरस्कार दिया गया है. नाबार्ड द्वारा जिले में 8 मार्च, 2024 (महिला दिवस) को ‘सक्रिय महिला’ का प्रथम पुरस्कार दिया गया. कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 15 अगस्त के शुभ अवसर पर प्रगतिशील महिला किसान के रूप में उन्हें सम्मानित किया गया. एनआरएलएम द्वारा मुरगीपालन के लिए ‘शक्ति वंदन सम्मानपत्र’ दिया गया. उपकृषि निदेशक गोंडा द्वारा कृषि क्षेत्र में महिला प्रगतिशील किसान से रूप में प्रशस्तिपत्र दिया गया. जिला अधिकारी गोंडा द्वारा जैविक खेती के लिए प्रशस्तिपत्र दिया गया

 

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नारायण दत्त जोशी: सोंठ प्रोसैसिंग से तरक्की

राजधानी लखनऊ में आयोजित  दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ की ओर से  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उत्तराखंड के नारायण दत्त जोशी को  ‘बैस्‍ट फार्मर अवार्ड इन हार्वेस्टिंग ऐंड प्रोसैसिंग’ का सम्‍मान  दिया गया.

नारायण दत्त जोशी लगभग 30 वर्षों से खेती कर रहे हैं, जिस में उन के द्वारा मुख्य रूप से अदरक, गेहूं, मक्का, सरसों और राजमा की खेती की जाती है. इन सभी फसलों में इन के क्षेत्र की सब से महत्त्वपूर्ण व लाभप्रद फसल अदरक है. अदरक एक औषधीय जड़ वाली फसल है. अदरक की फसल को जमीन की खुदाई कर उसे निकाला जाता है, तत्पश्चात उसे प्रोसैस कर के उस से सोंठ बनाई जाती है. सोंठ के मंडी में अच्छे दाम मिलते हैं.

ginger processing

नारायण दत्त जोशी ने बताया कि सोंठ 2 प्रकार की होती हैं. एक सुखझोल सोंठ और दूसरी पनझोल सोंठ.

नारायण दत्त जोशी से प्रेरणा ले कर क्षेत्र के अनेक किसान अदरक की खेती करते हैं. इस के अलावा सोंठ प्रोसैसिंग में कार्य करने वाली अनेक महिलाओं को भी रोजगार प्राप्त होता हैं. सोंठ के द्वारा ही हमारा क्षेत्र तरक्की की ओर अग्रसर होता जा रहा है.

 

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नारायण दत्त जोशी को उन के कामों के लिए अनेक पुरस्कार भी मिल चुके हैं.

पुष्पा नेगी : गोपालन से प्रकृति संरक्षण और रोजगार सृजन

ग्राम कोटी अठुरर्वाला अठूरवाला, जनपद देहरादून, उत्तराखंड की रहने वाली पशुपालक पुष्पा नेगी पशुपालन के क्षेत्र में नवीनतम तकनीक अपना कर स्थानीय किसानों को भी जागरूक करती हैं. उनके इन्ही योगदानों के लिए उन्हें दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा लखनऊ में आयोजित  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में ‘बैस्‍ट  डेयरी ऐंड एनिमल कीपर अवार्फाड ‘ से सम्मानित किया गया.

cow rearing

पशुपालक पुष्पा नेगी के द्वारा साल 2016 से गोपालन किया जा रहा है और इस समय उन के पास लगभग 30 गाय हैं, जिन में होल्सटीन फ्रीसियन और साहीवाल दोनों नस्ल की गई गाय शामिल हैं. पुष्पा नेगी गाय के दूध से घी, छाछ, मक्खन आदि बना कर बाजार में अच्छे दामों पर बेचती हैं और प्रकृति संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उन के यहां गाय के गोबर से दीया दीपक, मूर्ति, समरानी कप, गौ काष्ठ एवं वर्मी कंपोस्ट आदि चीजें तैयार की जाती हैं. इस काम में उन्होंने अनेक लोगों को जोड़ रखा है, जिस से उन्हें भी रोजगार मिल रहा है.

 

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प्रगतिशील पशुपालक के रूप में पुष्पा नेगी को मुख्यमंत्री द्वारा ‘किसानश्री सम्मान’, हंस फाउंडेशन और आरडीसी -2024 में केंद्रीय मंत्री परशोत्तम रूपाला द्वारा दिल्ली में सम्मानित किया गया जा चुका है. पुष्पा नेगी अपने खेत में उत्तराखंड का प्रसिद्ध अनाज मंडावा उगा रही हैं, जो अपने पौष्टिक गुणों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. पुष्पा नेगी का कहना है कि उन के इन कामों में परिवार ने सदैव पूरा सहयोग किया है.

कर्नल हरिश्चंद्र सिह: चिया सीड की खेती की प्रशंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की

कर्नल हरिश्चंद्र सिह लखनऊ, उत्तरप्रदेश से हैं और 54 वर्ष की उम्र में सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्ष 2016 में जनपद बाराबंकी से जैविक खेती की शुरुआत की. उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ आयोजित कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उन्हें बैस्ट फार्मर अवार्ड इन और्गेनिक फार्मिंग अवार्ड से सम्मानित किया गया.

उन की पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी इस में योगदान रहा.

कर्नल हरिश्चंद्र सिंह का उद्देश्य उन फलों, फसलों और सब्जियों को उगाना है, जो स्वास्थ्यवर्धक हों, जिन में कम से कम देखरेख हो, कम से कम लागत लगे और अच्छा मुनाफा हो. इस क्रम में उन्होंने चिया सीड, ड्रैगन फ्रूट, एप्पल बेर, जिमीकंद और कालेबैगनी आलू की खेती से अपने नए शौक की शुरू की. इस में वे काफी हद तक सफल रहे. बाद में उन्होंने अपनी फसलों में केला, लाल गूदे वाले आलू, क्वीनोआ, रामदाना, काले चावल और काले गेहूं आदि को भी सम्मिलित किया.

लगभग 4 साल पहले कर्नल हरिश्चंद्र सिंह के चिया सीड की खेती की प्रशंसा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात कार्यक्रम’ में करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत में एक बड़ा कदम बताया.

स्वास्थ्यवर्धक एवं लाभप्रद फसलों, फलों तथा सब्जियों की जैविक खेती स्वयं करना तथा ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस मुहिम से जोड़ना अब कर्नल हरिश्चंद्र सिंह का जुनून सा बन गया है. उन्होंने बताया कि साल 2023 में भारत सरकार द्वारा प्रकाशित ‘कौफी टेबल बुक’ में मुझे एक प्रगतिशील किसान के रूप में स्थान दिया गया है. यह मेरे लिए गर्व की बात है.

 

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कर्नल हरिश्चंद्र सिंह का कहना है कि हमारे इस प्रयास में कृषि क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं, कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील कृषकों, पत्र पत्रिकाओं एवं मीडियाकर्मियों का बहुत बड़ा योगदान है, जो हमारे मार्ग दर्शक और प्रेरणास्रोत हैं. इन से प्रेरित हो कर अब मैं अपने जैविक खेती के रकबे को बढ़ा रहा हूं, साथ ही श्रीअन्न और नीबू की खेती भी शुरू कर चुका हूं.

किसानों को नई तकनीक से जोड़ उन की आमदनी बढ़ा रहीं डा. पूजा गौड़

उत्‍तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा आयोजित कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में बैस्ट फार्मर अवार्ड इन मार्केटिंगसे सम्मानित उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में जन्मी पूजा गौड़ की शुरुआती पढ़ाईलिखाई मऊ में और बाद की पढ़ाईलिखाई मुंबई में हुई.

मुंबई में मल्टीनैशनल कंपनी इनफोर्मेशन टैक्नोलौजी में उच्च पद पर वे आसीन रहीं, लेकिन शादी उत्तराखंड में होने के बाद उन का झुकाव वहां के जनजातीय इलाके से हुआ. वहां उन्होंने समाजसेवा का काम शुरू किया, लेकिन लौकडाउन के दौरान जब साल 2020 में वे वर्क फ्रोम होम होने की वजह से जब ससुराल आईं, तब देहरादून के सुंदर आदिवासी इलाके के गांव में समाजसेविका के रूप में काम करना शुरू किया और समाजसेवा के रूप उन्होंने उन आदिवासी किसान  महिला को चुना, जो दिनभर खेत, जंगल और चूल्हा व परिवार में अपनी पूरी जिंदगी काठिन मेहनत और बहुत ही न्यूनतम आय के साथ व्यतीत कर रही थीं.

Dr. Pooja Gaur

डा. पूजा गौड़ व्यावसायिक रूप से सूचना प्रौद्योगिक के क्षेत्र में मुख्य प्रबंधक, पश्चिमी भारत में कार्यरत रही हैं और प्रबंधक में ही डाक्टर औफ फिलौसफी (पीएचडी) की उपाधि हासिल की है, लेकिन 2 मास्टर डिगरी एवं पीएचडी की डिगरी लेने के बावजूद भी एवं सूचना प्रौद्योगिकी में अच्छे पद पर कार्यरत होने के बवजूद भी जिंदगी में उन्हें कहीं न कहीं कमी सी लगती थी और दिल में एक कसक सी थी कि कहीं दूर जा कर गंवई इलाके में काम करने की.  और एक ग्रामीण समाज की सेवा का भाव  ने उन को गांव की तरफ मोड़ दिया.

जब वे गांव लौटीं तो उन्होंने देखा कि किसानों की दशा व दिशा को सुधारने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही दूरदर्शी योजना से किसान व गांव वाले इस के वास्तविक हकदार थे, वे लोग इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे थे और यही हाल उन के खेतों में उगाई जा रही फसलों और सब्जियों आदि का था, जिस का उन को उन की मेनहत का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा था. इस तरह की विषम परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक रूप से उन की स्थिति को उभरने के लिए 2 संगठनों की स्थापना की और उन्हें रजिस्टर्ड कराया.

बनाया फेडीज कपसाड वेलफेयर एसोसिएशन

फेडीज कपसाड़ कृषि बहुद्देशीय सहकारी समिति लिमिटेड के माध्यम से किसानों को सुखसुविधाएं प्रदान की गई हैं. यह एक साधरण सहकारी समिति नहीं है. इस समिति के माध्यम से पूजा गौड़ ने अपने वेतन का पैसा खर्च कर तकरीबन 7,000 वर्गफुट की जमीन पर कोऔपरेटिव हाउस बनाया. उन्हें संगठित किया गया और उन के अधिकार को समझाया गया. सरकार की विभिन्न दूरदर्शी इन महत्त्वपूर्ण योजनाओं के बारे में जनजागरूकता अभियान चलाया गया, जिस का परिणाम यह रहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, जनजीवन मिशन और जिला परिषद और ब्लौक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर चलाई गई योजना का सीधा लाभ वास्तविक लोगों को पहुंचना शुरू हुआ.

यह डा. पूजा गौड़ की दूरदर्शी सोच थी, जो वर्तमान में अध्यक्ष के रूप में हैं और चकराता प्रखंड के किसानों की भलाई के बारे में सोचा और उन को रोजगार मुहैया कराने की योजना बनाई और पुनर्वास की मुहिम को सफल बनाने में योगदान दिया. डा. पूजा गौड़ की पहली प्रथमिकता है कि किसानों को नई तकनीक से जोड़ कर उन की आमदनी को बढ़ाया जा सके.

 

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डा. पूजा गौड़ ने किसानों और महिलाओं को उन की माली स्थिति को बेहतर करने के लिए कोरोना काल में भी किसानों और महिलाओं द्वारा उत्पादित चीजों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया. इस का नतीजा यह हुआ कि ये कंपनियां सीधे कोऔपरेटिव हाउस पहुंचीं एवं किसानों के समस्त उत्पाद जैसे टमाटर, गोभी, शिमला मिर्च, खीरा, सेब, आड़ू और अन्य घरलू उत्पाद आदि को एक अच्छा बाजार दिलाया, जिस से किसानों को इलाके में तकरीबन डेढ़ करोड़ रुपए का राजस्व हासिल हुआ.

बाजरे की प्रोसेसिंग (Processing of Millets) – रोजगार का जरीया

एक मोटे अनाज के रूप में पहचान बनाने वाले बाजरे से आज अनेक खाद्य पदार्थ बनाए जा रहे हैं. खासकर बाजरे का दलिया बना कर आज अनेक कंपनियां खासी कमाई कर रही हैं. आजकल बाजरे के नमकीन सेब, लड्डू, बरफी, शकरपारा, ढोकला, केक, पास्ता, मट्ठी व बिस्कुट वगैरह भी काफी पसंद किए जा रहे हैं. बाजरे में काफी मात्रा में प्रोटीन, वसा, रेशा व खनिज लवण होते हैं, जो हमारे लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं.

बाजरे की प्रोसेसिंग कर के ये सब व्यंजन बड़ी आसानी से तैयार किए जा सकते हैं. लघु उद्योग के रूप में गांव वाले या शहरी लोग भी इसे कारोबार के रूप में अपना सकते हैं. काम शुरू करने के लिए इस की ट्रेनिंग लेना बहुत जरूरी है.

ट्रेनिंग के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार (हरियाणा) के खाद्य एवं पोषण विभाग से संपर्क किया जा सकता है. इस कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े गृह विज्ञान महाविद्यालय में बाजरे के कई प्रकार के व्यंजनों को बनाना सिखाया जाता है. बाजरे की प्रोसेसिंग को ले कर इन का एक खास विभाग है ‘बाजरा उत्कृष्टता केंद्र’. इस के तहत इन के विशेषज्ञ समयसमय पर लोगों को ट्रेनिंग देते हैं, जो कि बहुत कम दिनों की होती है. इन के अनुभवी लोग तमाम जगहों पर जा कर भी ट्रेनिंग देते हैं.

प्रोसेसिंग तकनीक से बाजरा व अन्य अनाजों को उत्पाद के रूप में बदला जा सकता है. पुराने समय के लोग पारंपरिक तरीकों से इन अनाजों की प्रोसेसिंग करते थे जैसे बाजरे का आटा बनाने के लिए उसे हाथ से कूटना, हाथ की चक्की से पीसना, छिलका उतारना, दलिया बनाना वगैरह. लेकिन इन तरीकों से मेहनत और समय तो ज्यादा लगता था, पर उत्पादन कम होता था. साथ ही अनाज में छिलका आदि भी लगा रह जाता था, जिस से सही गुणवत्ता भी नहीं मिल पाती थी.

अब इन कामों के लिए प्रोसेसिंग की मशीनें आ गई हैं. इन मशीनों से ये काम बहुत आसानी से किए जा सकते हैं. मशीनों के इस्तेमाल से समय की बचत के साथसाथ मेहनत भी कम लगती है. मशीनों की जानकारी ले कर इस रोजगार की दिशा में काम किया जा सकता है.

बाजरे की प्रोसेसिंग के लिए कुछ खास मशीनें

डिस्टोनर, ग्रेडर व एस्पिरेटर : यह बाजरे की ग्रेडिंग करने की मशीन है. इस मशीन से बाजरे से रेत, कंकड़ व पत्थर वगैरह को अलग किया जाता है और बाजरे के दानों की ग्रेडिंग भी की जाती है.

छिलका उतारने की मशीन : इस मशीन से बाजरे की ऊपरी मोटी परत दानों से अलग की जाती है. छिलका उतारते समय दाने थोड़ी मात्रा में टूट भी जाते हैं, लेकिन छिलका उतरे अनाज से बाजरे के व्यंजन ज्यादा स्वादिष्ठ बनते हैं.

अनाज उबालने की मशीन (पारबौयलिंग मशीन) : यह मशीन 2 भागों में बनी होती है. इस मशीन में अनाज भिगोया व थोड़ी देर तक उबाला जाता है, जिस से बाजरे के अपोषक तत्त्व कम हो जाते हैं और बाजरे को ज्यादा समय तक रखा जा सकता है. साथ ही बाजरे की पौष्टिकता बढ़ जाती है, जिस से बने खाद्य पदार्थ ज्यादा पौष्टिक व स्वादिष्ठ होते हैं.

दलिया बनाने की मशीन (हैमर मिल/पुलवेरीजर) : आज बाजरे का दलिया काफी पसंद किया जाता है. इस मशीन से बढि़या क्वालिटी का दलिया निकाला जाता है. इस मशीन से छिलका उतारे गए बाजरे का दलिया बनाया जाता है और इसे मोटा आटा बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. दलिया बनने के बाद मोटे आटे व दलिया को छान कर अलग कर लिया जाता है. यह मशीन अलगअलग कूवत में मिलती है.

सोलर टनल ड्रायर : यह मशीन सोलर ऊर्जा द्वारा चलती है. इस मशीन से बाजरे व किसी भी खाद्य पदार्थ को सुखाया जाता है. इस मशीन से समय व ईंधन की बचत होती है.

इस का तापमान नियंत्रित होता है. चूंकि यह मशीन सौर ऊर्जा से चलती है, इसलिए इस की कार्य क्षमता आकार व मौसम पर निर्भर करती है.

अगर आप भी बाजरे के उत्पाद बना कर बेचना चाहते हैं यानी अपनी इकाई लगाना चाहते हैं, तो सब से पहले ट्रेनिंग लेना जरूरी है. संस्थान द्वारा कम समय के कोर्स भी चलाए जा रहे हैं, जिन्हें कर के आप अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं.

ज्यादा जानकारी के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार (हरियाणा) के बाजरा उत्कृष्टता केंद्र, खाद्य एवं पोषक विभाग, गृह विज्ञान महाविद्यालय से संपर्क कर सकते हैं.