छेना एक मिठाई अनेक

मिठाई को बनाने के 2 तरीके होते हैं. पहला, मिठाई अनाज से तैयार हो या दूध से. जब दूध की बात आती है तो यहां भी 2 तरीके से मिठाई तैयार होती है. दूध से खोया बना कर या फिर छेना बना कर. खोये से बनी मिठाई के मुकाबले छेने से तैयार मिठाई सब से ज्यादा समय तक चलती है. छेने से ज्यादा किस्म की मिठाइयां तैयार होती हैं. अगर मिठाई की अलगअलग किस्मों की बात करें तो छेने से तैयार होने वाली मिठाइयों की तादाद ज्यादा होती है. मिठाई बनाने वाले कारीगर किसी भी तरह के प्रयोग से नई किस्म की मिठाई बना सकते हैं, छेना उस में उन का पूरा साथ देता है.

छेने में चीनी को मिक्स करने के साथ अब खोया, मलाई, मेवा और पनीर तक का प्रयोग कर के नईनई किस्म की मिठाइयां तैयार होने लगी हैं. आमतौर पर पहले ये केसर के रंग से ही तैयार होती थीं जिस की वजह से मिठाई का रंग सफेद या केसर सा होता था. अब इस में नए प्रयोग होने लगे हैं. खजूर के गुड़ और खाने वाले वैजिटेबल कलर से अलगअलग रंग की मिठाइयां तैयार की जा रही हैं. कई मिठाई कारीगर अब इस में चौकलेट और मेवा का प्रयोग भी करने लगे हैं.

लखऊ में कंचन स्वीट्स के नरेंद्र तोलानी कहते हैं, ‘‘बंगाली मिठाई का मुख्य आधार ही छेना होता है. पहले केवल सफेद रसगुल्ला ही छेना से तैयार होता था. धीरेधीरे छेना को ले कर बहुत सारे बदलाव हुए. इस का आकार बदला और आकार के हिसाब से मिठाइयों के नाम बदलने लगे.

‘‘इस के बाद छेना में अलगअलग तरह की चीजें मिलाई जाने लगीं जिस से छेना से तैयार होने वाली मिठाइयों की तादाद बढ़ने लगी.

‘‘मिठाई बाजार के बदलते तौरतरीकों के साथ अब छेना कदम से कदम मिला कर चल रहा है. किसी भी मिठाई की दुकान पर सब से ज्यादा बिकने वाली मिठाइयों में छेना की मिठाई सब से आगे होती है. जो लोग मिठाई को उस के मीठे रूप में पसंद करते हैं उन को छेना ही सब से ज्यादा पसंद आता है.

‘‘डायबिटीज के लोगों को चीनी से नुकसान होता था. ऐसे में अब छेना की मिठाई को तैयार करने के लिए खजूर के गुड़ का इस्तेमाल होने लगा है. यह जाड़े के मौसम में काफी लाभकारी होता है. हम बंगाली संदेश जैसी तमाम मिठाइयां खजूर के गुड़ से ही तैयार करते हैं.’’

छेना कुछकुछ पनीर जैसा होता है. यह पनीर से ज्यादा मुलायम होता है. आमतौर पर यह गाय के दूध से बनता है.

छेने का प्रयोग अलगअलग तरह की मिठाइयों को बनाने में किया जाता है. छेने से तैयार होने वाली मिठाइयों में रसगुल्ला, रसमलाई, लड्डू, छेना बरफी, छेना मुरकी, छेना टोस्ट, चमचम, छेना खीर, छेना रबड़ी, राजभोग, मलाईचाप, छेना खजूर, छेना मालपुआ, छेना रोल, छेना खुरमा, संदेश और छेना पेड़ा प्रमुख हैं.

छेने में प्रोटीन, कैल्शियम और कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो हमारी सेहत के लिए फायदेमंद होता है.

छेना बनाने के लिए सामग्री

150 ग्राम छेने को बनाने के लिए 1 लिटर दूध शुद्ध मलाई सहित, 1 बड़ा चम्मच सिरका या नीबू का रस, 2 और चीजें जिन की आप को जरूरत होगी, वे हैं सूप छानने की छलनी, चौथाई मीटर मलमल का कपड़ा या सूती मुलायम और महीन कपड़ा.

सब से पहले दूध को उबालें. उबाल आने के बाद आंच को धीमा कर दें. अब दूध में सिरका या नीबू का रस डालें. अच्छे से मिलाएं. 10-15 सैकंड के लिए आंच तेज कर के फिर बंद कर दें. आप देखेंगे कि दूध फट गया है और उस में हरा सा पानी अलग हो गया है. एक मिनट के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें.

छलनी के ऊपर मलमल का कपड़ा लगाएं. छलनी को किसी भगोने के ऊपर रखें जिस से कि छेना का पानी बाहर न गिरे. अब छलनी के ऊपर फटा दूध डालें और बड़े चम्मच से दबा कर सारा पानी निकाल दें. छेने को एक घंटे के लिए अलग रखें. छेना अब तैयार है.

छेने को किसी भी मिठाई में इस्तेमाल करने के लिए उसे अच्छे से मसल कर चिकना करना होता है. ऐसे में अब छेना किसी भी तरह से मिठाई के बनने में इस्तेमाल होने के लिए तैयार होता है.

स्वाद का खजाना आम कलाकंद (Mango Kalakand)

आम को यों ही ‘फलों का राजा नहीं कहा जाता है, बल्कि इस की खूबियां और अलगअलग तरह के रंग, रूप और लाजवाब जायका इसे फलों के राजा का खिताब दिलाता है.

वैसे तो पका हुआ आम आमतौर पर मार्च महीने से मिलना शुरू हो जाता है, लेकिन मार्च से ले कर अप्रैल महीने तक बाजार में बिकने वाले पके आम में वह स्वाद नहीं होता है, जो मिलना चाहिए. इस की वजह यह होती है कि इस दौरान आम पूरी तरह से पका नहीं होता है. इसीलिए इस दौर में बिकने वाला आम रसायनों से पकाया जाता है. यही वजह है कि यह आम स्वाद और सेहत के लिहाज से ठीक नहीं होता है.

पके आम का मजा तभी आता है, जब वह डाल पर ही पके या पकने की अवधि पूरी होने के बाद तोड़ कर बिना रसायनों के प्रयोग किए ही पकाया गया हो.

आज के दौर में अगर देखा जाए, तो देश में देशीविदेशी किस्मों की सैकड़ों आम की किस्मों का वसायिक उत्पादन किया जा रहा है, जो अपने स्वाद और रंग, रूप के चलते लोगों की पहली पसंद भी होता है.

आम जितना पका हुआ खाने पर टेस्टी होता है, उतना ही इस के अचार, जैम, आम रस, आम पना भी टेस्टी होता है, इसीलिए आम खाने के लिहाज से और भी कई तरह की रैसिपी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

इसी में एक रैसिपी ऐसी है, जो आम और खास सभी लोगों को अपना मुरीद बना लेती है, जिसे हम आम कलाकंद के नाम से जानते हैं.

आम कलाकंद एक खास तरह की मिठाई होती है, जो पके हुए आम, इलाइची और दूध से खास तरीके से तैयार की जाती है.

बनाने की आसान रैसिपी

आम कलाकंद बनाने के लिए सब से पहले आप को अधपके आम, दूध और चीनी की जरूरत होगी. इस तरह की मिठाई बनाने के लिए पहले आम का गूदा निकाल लेंगे, फिर एक लिटर फुलक्रीम दूध को हलका गरम कर के इस में छिलके और गुठली से अलग किए आम के गूदे को डाल कर धीरेधीरे कलछी से चलाते हैं.

इस प्रक्रिया में दूध धीरेधीरे फटने लगता है, लेकिन अगर आम बहुत मीठा है, तो यह दूध तुरंत नहीं फटेगा, इस के लिए आप नीबू डाल कर दूध को फाड़ सकते हैं, इसीलिए आम कलाकंद बनाने के लिए खट्टामीठा किस्म का आम ही इसे फाड़ने में कारगर होता है.

यह ध्यान रखें कि दूध और आम को मिलाने के बाद गैस की आंच मीडियम रखें.

जब दूध फटने लगे, तो इसे लगातार चलाते रहें. जब दूध पूरा फट जाए तभी उस में से पानी और दूध अलग हो जाता है.

इस दौरान हमें खास खयाल रखना होता है कि इसे लगातार चलाते रहें, जिस से पानी भाप बन कर उड़ जाए. जब इस में से पानी खत्म होने लगे और बहुत थोड़ा पानी रह जाए, तो इस में पिसी इलायची और चीनी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं.

जैसे ही पूरा पानी उड़ जाता है, तो समझिए कि आप का आम कलाकंद तैयार है. अब इसे किसी प्लेट में घी लगा कर रख देते हैं. इस के बाद इस के ऊपर कुछ कटा हुआ पिस्ता डाल कर कम से कम 2 घंटे के लिए इसे बाहर रख देते हैं. 2 घंटे बाद इस के पीस काट कर इसे सर्व कर सकते हैं.

बेसन की बरफी (Gram flour barfi) : देशी मिठाई, किसानों की भलाई

भारत में चने की खेती सब से ज्यादा होती है. यह कम पानी की फसल है. पौष्टिक होने के साथसाथ चना खाने में काफी स्वादिष्ठ होता है. चने की दाल व बेसन से खाने की तमाम चीजें तैयार होती हैं.

बेसन से तैयार होने वाली मिठाई बहुत ज्यादा पसंद की जाती है. लड्डू और बरफी ही नहीं कई और तरह की मिठाइयां भी इस से तैयार की जाती हैं. अब बेसन, चीनी के साथ कुछ मेवा मिला कर बेसन मेवा बरफी भी तैयार होने लगी है.

बेसन मेवा बरफी की कीमत ज्यादा होती है जबकि बेसन और चीनी से बनने वाली मिठाइयों की कीमत कम होती है. बेसन का मिठाइयों में सब से ज्यादा इस्तेमाल इसलिए होता है क्योंकि से बनी मिठाइयां ज्यादा दिनों तक चलती हैं.

बेसन और घी से तैयार होने वाली मिठाइयों में सब से ज्यादा स्वाद आता है. पहले बेसन से तैयार मिठाइयों को सस्ती मिठाई माना जाता था, पर अब मेवा मिलने के बाद यह मिठाई भी महंगी हो गई है. यह अब खास मिठाइयों में गिनी जाने लगी है.

अगर शहरी बाजार से दूर हम गांव के इलाकों के बाजार को देखें तो वहां बेसन से बनने वाली मिठाइयां सब से ज्यादा चलन में हैं.

खोया से तैयार होने वाली मिठाइयों में मिलावट का डर बना रहता है. कई बार खोया ही मिलावटी हो जाता है. ऐसे में बेसन से तैयार मिठाई बहुत खालिस होती है. इस में मिलावट और खराब होने वाली चीजें नहीं होती हैं, जिस से यह सेहत के लिहाज से भी अच्छी मानी जाती है.

लड्डू के बाद बेसन की सब से ज्यादा बरफी चलन में है. शहर से ले कर गांव तक यह खूब बनती है. बेसन की बरफी चौकोर, तिकोनी अलगअलग आकार की बनती हैं. अब बेसन की बरफी को अच्छा बनाने के लिए उस में मेवा भी मिलाया जाने लगा है. मेवे वाली बरफी महंगी हो जाती है. बरफी को इस तरह से रखा जाता है कि उन का कुरकुरापन बना रहे इसलिए उन की पैकिंग पर खासा ध्यान दिया जाता है.

बेसन की बरफी बनाने का तरीका

बेसन की बरफी बनाने के लिए 250 ग्राम बेसन, 250 चीनी, 200 ग्राम घी, 2 बड़े चम्मच दूध, 2 बड़े चम्मच काजू पिसा हुआ, 1 चम्मच पिस्ता और 4 छोटी इलायची लें.

बरफी बनाने के लिए बेसन को प्लेट में रख लें. दूध और घी डाल कर मिश्रण तैयार कर लें. मिश्रण को?ठीक तरह से छान लें. बेसन का दाना तैयार हो जाएगा. काजू, पिस्ता और इलायची को तैयार रखें. कड़ाही में घी डाल कर गरम कीजिए. घी में बेसन का तैयार दाना डालिए और बेसन को धीरेधीरे भून लें.

जब बेसन से घी अलग होने लगे तो भूनना बंद कर उसे किसी प्लेट में निकाल लें. अब कड़ाही में चीनी और आधा कप पानी डाल लें. चीनी घुलने तक चाशनी को पकाएं. चाशनी को 2 तार की तैयार होने तक पकाएं.

चाशनी बनने के बाद बेसन डालिए और मिक्स करें. अब काजू और इलायची दाना डाल कर दोबारा मिक्स कीजिए. जब बेसन जमने वाला हो जाए तो बाहर निकाल लें.

किसी प्लेट में पहले घी लगा कर चिकना करें और बरफी का तैयार मिश्रण इस में रख दें और बराबर फैला दें. बरफी के ऊपर कटा पिस्ता लगा दें और थोड़ा सा चम्मच से दबा दें. कुछ देर में बरफी जम जाएगी.

जमी हुई बरफी को मनपसंद आकार में काट लें. बरफी को हमेशा एयरटाइट बौक्स में रखें. इस से यह लंबे समय तक खराब नहीं होगी.

ममता चौहान कहती हैं, ‘‘बेसन की बरफी बना कर घर में आने वाले मेहमानों को खिलाया जा सकता है. इसे बनाना बेहद आसान होता है. इस को सभी लोग पसंद भी करते हैं.’’

कमाल की काजू कतली (Kaju Katli)

भारत में बनने वाली मिठाइयों में मेवे का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है. मेवे को ले कर मिठाई बनाने वाले हर तरह के प्रयोग कर रहे हैं. ऐसे में खोये की मिठाई की जगह मेवे की मिठाई ज्यादा पसंद की जा रही हैं.

मेवे की मिठाई के चलन में आने का सब से बड़ा कारण यही है कि यह लंबे समय तक चल जाती है, खोए की मिठाई की तरह यह जल्दी खराब नहीं होती है. यही वजह है कि खोए से ज्यादा काजू की बरफी पसंद की जा रही है. इस को ‘काजू कतली’ के नाम से भी जाना जाता है. यह खोए की बरफी के मुकाबले काफी पतली होती है.

काजू बरफी भी खोया बरफी के आकार की होती है. काजू बरफी चीनी और काजू को मिला कर तैयार की जाती है. यह उत्तर भारत की सब से खास मिठाइयों में से एक है. इस को चांदी के वर्क में लगा कर खाने वालों को दिया जाता है. सूखी मिठाई के रूप में काजू बरफी सब से अच्छी होती है.

ऐसे बनाएं काजू बरफी

काजू बरफी बनाने के लिए 200 ग्राम काजू, 100 ग्राम चीनी, पानी और घी का इस्तेमाल किया जाता है. काजू को सब  पहले साफ कर के ठीक से सुखा लें. इस को पीस कर काजू पाउडर बना लें.

एक कड़ाही में जरूरत के मुताबिक पानी गरम करें. पानी उबलने लगे तो उस में चीनी डाल दें. धीमी आंच पर चीनी को पकने दें. बीचबीच में इसे चलाते भी रहें ताकि चीनी कड़ाही में लगने न पाए. अब यह गाढ़ी चाशनी के रूप में दिखने लगती है.

काजू कतली के लिए 3 तार की चाशनी बेहतर रहती है. चाशनी को आंच से नीचे उतार लें. अब इस में काजू पाउडर मिला लें. कड़ाही को वापस धीमी आंच पर चढ़ाएं. इस को चाशनी के साथ तब तक मिलाएं जब तक यह अच्छी तरह से मिल न जाए.

अब काजू बरफी जमाने के लिए एक ट्रे लें. ट्रे की तली में घी की कुछ बूंदें डालें और उस में फैला दें. चौथाई इंच मोटाई में काजू बरफी का तैयार पेस्ट इस में डाल दें. बेलन का सहारा ले कर इस को चिकना कर दें. 20 मिनट बाद यह ठंडी हो जाएगी. तब मनचाहे आकार में इस को काटें. इस को सजाने के लिए चांदी वर्क का सहारा लें.

काजू बरफी की सब से खास बात यह होती है कि यह खोए की बरफी के मुकाबले ज्यादा दिन तक चल जाती है. यह 3 से 4 हफ्ते तक खराब नहीं होती है. इस को कहीं भी ले जाना आसान होता है. सूखी होने के चलते लोग इस को काफी पसंद करते हैं.

बढ़ता जा रहा प्रयोग

खोए की मिठाई में मिलावट होने का खतरा रहता है. काजू बरफी को बनाने के लिए किसी भी तरह की मिलावट नहीं की जा सकती है. काजू और चीनी से बनी काजू बरफी अच्छी होती है जिस से लोग इस को खूब प्रयोग करते हैं. यह खोया बरफी के मुकाबले ज्यादा महंगी होने के बाद भी पसंद की जा रही है.

बाजार में काजू बरफी की कीमत 500  रुपए प्रति किलोग्राम से शुरू हो कर 7 सौ रुपए प्रति किलोग्राम तक होती है.

काजू से कई तरफ की मिठाइयां तैयार की जाती हैं. काजू वैसे भी बहुत स्वादिष्ठ होता है. चीनी के साथ मिल कर यह और भी ज्यादा स्वादिष्ठ हो जाता है.

त्योहार के अलावा शादीब्याह में दी जाने वाली मिठाइयों में इस की खपत खूब होने लगी है. बहुत सारे लोगों के लिए यह कारोबार करने का जरीया भी बन सकता है.

काजू बरफी को तैयार करना वैसे तो सरल काम होता है पर काजू की क्वालिटी भी सही रखनी चाहिए. खराब काजू इस के स्वाद को बरबाद कर सकते हैं. इसलिए काजू बहुत ही देखभाल कर के लें. चीनी की चाशनी अच्छी रखनी चाहिए.

सेब की जलेबी : स्वाद फल और मिठाई का जायका

जलेबी भारत की सब से पुरानी और पसंद की जाने वाली मिठाई है. देशभर में तरहतरह की मिठाइयां बन रही हैं. इन में मैदा जलेबी के अलावा पनीर जलेबी सब से मशहूर हैं. सेब की जलेबी भी इसी तरह की एक मिठाई है. इस को कुछ इस तरह तैयार किया जाता है कि सेब का स्वाद भी मिलता रहे.

फलों में सेब को सब से ज्यादा पसंदीदा माना जाता है. यह पूरे साल बाजार में मिलता है. बहुत सारे लोगों को यह खाने में पसंद भी होता है.

सेब की जलेबी तैयार करते समय यह ध्यान रखने वाली बात है कि सेब की क्वालिटी बहुत अच्छी हो. सेब वैसे तो ठंडे प्रदेश का फल है और यह देर से खराब होता है. इस के अलावा यह मीठा होते हुए भी हलका सा खट्टापन लिए होता है. लखनऊ के श्रीराजभोग रैस्टोरैंट में खाने के बाद स्वीट डिश के रूप में सेब की जलेबी का बहुत प्रयोग होता है.

श्रीराजभोग रैस्टौरेंट के सुदीप रस्तोगी कहते हैं, ‘‘फल को ले कर अब तमाम तरह की मिठाइयां बन रही हैं. सेब की जलेबी उन में से एक है. सेब की जलेबी राजस्थान, गुजरात और दिल्ली में खासा पसंद की जाती है. अब उत्तर प्रदेश में भी यह खूब तैयार होने लगी है.

‘‘इस का नाम भले ही सेब की जलेबी है, पर यह देखने में मलाई पुआ की तरह दिखती है. इस का स्वाद ही इस की पहचान है. कई लोग इस को घर में भी बनाने की कोशिश करते हैं.’’

सेब की जलेबी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला सेब लाल होना चाहिए. यह बहुत पका न हो. दाग वाला सेब इस में कतई इस्तेमाल न करें, नहीं तो पूरी जलेबी का स्वाद खराब हो जाएगा.

सेब को छील कर उस को गोलगोल आकार में काट लें. सेब की खास बात यह होती है कि उस में चाशनी भर जाती है, पर उस की खुशबू और स्वाद बना रहता है.

बनाने के लिए जरूरी सामान

मैदा 3 बड़ा चम्मच, दही 1 चम्मच, दालचीनी 1 छोटा चम्मच, सेब 1, तलने के लिए तेल, शक्कर 1 कटोरी.

बनाने की विधि

सब से पहले 3 चम्मच मैदा में दही डाल कर मिलाएं और थोड़ा सा पानी डाल कर एक पतला घोल बना लें. 2 घंटे के लिए किसी गरम जगह पर रख दें. 2 घंटे बाद सेब को छील कर गोलगोल काट लें. एक प्लेट में 2 चम्मच मैदा में दालचीनी का पाउडर मिक्स करें. कड़ाही में तेल गरम करें. सेब का एकएक टुकड़ा लें. फिर उसे मैदे के घोल में डुबो कर निकालें. सूखे मैदे में लपेट कर तेल में सुनहरा होने तक तल लें.

इस के बाद शक्कर की एक तार की चाशनी बना लें. उस में तले हुए सेब डुबोडुबो कर प्लेट में निकाल लें और सर्व करें.

अगर आप चाहें तो उस में ऊपर से आइसक्रीम डाल कर भी खा सकते हैं.

आइसक्रीम के साथसाथ पिस्ता और बादाम के कटे हुए टुकड़े डाल कर भी इस को सजाया जा सकता है.

जिस ने एक बार सेब की जलेबी का स्वाद चख लिया, वह इस का दीवाना हो जाता है.

छेना और चीनी का स्वाद छेना गाजा

पश्चिम बंगाल और ओडिशा की बहुत पुरानी मिठाई छेना गाजा है. इस को थोड़ा सा बदल कर पश्चिम बंगाल का मशहूर छेना रसगुल्ला भी बना है. रसगुल्ले के पेटेंट को ले कर पश्चिम बंगाल और ओडिशा आमनेसामने थे. उस समय ओडिशा का कहना यही था कि रसगुल्ला छेना गाजा मिठाई का ही एक रूप है, इसलिए इस को ओडिशा की मिठाई माना जाना चाहिए.

छेना गाजा का आकार थोड़ा अलग होता है. रसगुल्ला गोल आकार का होता है पर छेना गाजा मिठाई ज्यादातर चौकोर आकार की बनती है. इसे चाशनी में डुबो कर निकाल लिया जाता है, जबकि रसगुल्ला पूरी तरह चाशनी में डूबा रहता है.

आज भी आडिशा के साथ बिहार में छेना गाजा सब से ज्यादा बिकता है. इस मिठाई की खास बात यह है कि यह लंबे समय तक खराब नहीं होती है. इस को बनाना और बेचना दोनों ही आसान है. बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सब से ज्यादा इस की बिक्री होती है, क्योंकि यह पारंपरिक मिठाई होने के साथसाथ वहां काफी मशहूर है. अब उत्तर भारत के कई राज्यों में भी यह मिठाई खूब पसंद की जा रही है.

जरूरी सामग्री

छेना गाजा बनाने के लिए सब से पहले छेना बनाने की जरूरत होती है. 1 लिटर दूध छेना बनाने के लिए 1 नीबू का रस, 2 बड़ा चम्मच सूजी, 2 कप चीनी, आधा कप पानी, 1 छोटा चम्मच गुलाबजल और तलने के लिए तेल चाहिए.

छेना बनाने की विधि

धीमी आंच पर एक बरतन में दूध गरम करने के लिए रखें और उस में थोड़ा नीबू का रस निचोड़ें. जब दूध पूरा फट जाए तो आंच बंद कर दें और उसे एक साफ कपड़े में छान कर ऊपर से ठंडा पानी डालें. अब कपड़े को बांध कर उसे अच्छी तरह दबाएं ताकि फटे हुए दूध का सारा पानी निकल जाए. लीजिए, अब छेना तैयार है.

इस छेना को एक प्लेट में निकालें और इस में सूजी मिला कर अच्छे से गूंद लें. गूंदे हुए मिश्रण से 15 से 20 बौल्स बनाते हुए इन्हें मनचाहा आकार दें. अब दोबारा धीमी आंच पर एक कड़ाही में तेल गरम करने के लिए रखें. तेल के गरम होते ही सभी तैयार छेना बौल्स को सुनहरा होने तक दोनों साइड से तल लें और आंच बंद कर दें. अब छेना बौल्स तैयार हैं.

चाशनी बनाने के लिए

चाशनी के लिए अब दोबारा एक दूसरे बरतन में पानी और चीनी को मिला कर 5 से 6 मिनट तक उबालें. चाशनी बनने के 1 मिनट पहले गुलाबजल मिलाएं और आंच बंद कर दें. अब तैयार छेना बौल्स को उस में डुबोएं ताकि वे चाशनी को सही से सोख लें. छेना गाजा मिठाई तैयार है.