रवि शंकर सिंह: बेस्ट फार्मर अवार्ड इन मेकेनाईजेशन

उत्‍तरप्रदेश के ग्राम चरहुआ, जनपद गोंडा के किसान रवि शंकर सिंह को उन के कृषि कार्यों के लिए अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं. जानते हैं उन के बारे में कुछ और अधिक:

उत्‍तरप्रदेश के ग्राम चरहुआ, जनपद गोंडा के किसान रवि शंकर सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय से परास्नातक हैं और उन के पास कुल खेती योग स्वयं की भूमि 2 हेक्टेयर और लीज पर 4 हेक्टेयर जमीन है. प्रमुख फसलों में धान, मक्का, अरहर, सावा, कोदो, मडुवा, ज्वार, बाजरा, काला नमक धान, गेहूं, गन्ना, मटर, सरसों, जौ, मसूर, आलू, टमाटर, लहसुन, धनिया, गोभी, रामदाना, अदरक आदि की खेती करते हैं. जायद के मौसम में वे मूंग, उड़द, सूरजमुखी और हरी मिर्च और केले की खेती करते हैं.

इस के अलावा खेती से जुड़े कामों में मछलीपालन के लिए 3 हेक्टेयर में तालाब हैं, जिस में बायोफ्लाक्स, फुंगेसियस, रोहू, कतला, ग्रास, सिल्वर किस्म की मछलियों का कारोबार है. रेशम कीट पालन के लिए एक हेक्टेयर में शहतूत के पेड़ एवं 1 एकड़ में नर्सरी भी है. पशुपालन के तहत आप के पास देशी साहिवाल गिर की 10 दुधारू गाएं हैं. मिल्क प्रोसैसिंग कर के आप अनेक प्रोडक्ट भी बनाते हैं. गोमूत्र से आप खेती के लिए वर्मी कंपोस्ट जीवामृत बनाने का काम भी करते हैं.

Ravi Shankar Singh

आधुनिकता के इस दौर में आप का कृषि यंत्रों पर खासा जोर है. आप ने कृषि यंत्र फार्म मशीनरी बैंक बनाया हुआ है, जिस में अनेक छोटेबड़े कृषि यंत्र आप के पास हैं, जिन्हें किसानों को किराए पर मुहैया कराते हैं. उन के पास प्रोसैसिंग यूनिट के तहत आटा मिल, दाल मिल हैं. वे मधुमक्खीपालन के लिए 150 बौक्स के द्वारा शहद उत्पादन भी करते हैं.

सिंचाई साधनों में स्वयं के ट्यूबवैल, सरकारी ट्यूबवैल, 2 सोलर पंप और 2 इंजन हैं.

शुभावरी चौहान: कम उम्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान

उत्‍तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा आयोजित कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के कोठडी गांव में जन्मी शुभावरी चौहान ने कम उम्र में अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाई. उन की इस उपलब्धि के लिए उन्हें फार्म एन फूड ‘बैस्ट  यंग फार्मर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. जानिए उन की जीवन यात्रा: 

शुभावरी का जन्म 4 अप्रैल, 2005 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के कोठडी गांव में हुआ था. उन के पिता संजय चौहान ने एमसी एग्रीकल्चर से पढ़ाईलिखाई की है और माता ममता चौहान संस्कृत विषय से एमए हैं.

शुभावरी चौहान की जिंदगी में साल 2015 में तब बड़ा बदलाव आया, जब उन्होंने अपने पिता के साथ खेती में सक्रिय रूप से काम करने का निर्णय लिया. साल 2016 से वे पूरी तरह से खेती में जुट गईं. शुरुआती दौर में रासायनिक पैस्टिसाइड का कम उपयोग होता था, लेकिन खरपतवार की समस्या के कारण उन्हें कुछ समय तक रासायनिक पैस्टिसाइड का इस्तेमाल करना पड़ा.

धीरेधीरे उन्हें समझ आया कि रासायनिक पैस्टिसाइड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और उन्होंने और्गेनिक खेती को अपनाने का फैसला किया. शुरू में लोग उन का मजाक उड़ाते थे, पर अब उन की फसलें दोगुनी कीमतों पर देश और विदेश में बिक रही हैं.शुभावरी चौहान के पास 25-30 गाएं हैं, जिन्हें वे और्गेनिक चारा खिलाती हैं. उन के दूध और घी की बिक्री अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होती है. उन की मुख्य फसल गन्ना है, जिसे वे अपने कोल्हू में प्रोसैस कर गुड़ और शक्कर बनाती हैं.

इन उत्पादों की भी देशविदेश में भारी मांग है. इस के अलावा उन के पास आम के बाग हैं, जिन में मल्लिका, आम्रपाली, दशहरी, लंगड़ा, चौसा जैसी किस्मों के आम उगाए जाते हैं, जिन की बिक्री दिल्लीएनसीआर, लुधियाना और छत्तीसगढ़ में होती है. उन का सालाना टर्नओवर तकरीबन 25 लाख रुपए है और वे 25-30 लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं.

 Shubhawari Chauhan

शुभावरी चौहान ने सहारनपुर कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से कई प्रशिक्षण प्राप्त किए हैं, जिन के कारण उन्हें जिला स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं. 23 दिसंबर, 2023 को उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मुरादाबाद में ‘किसान दिवस’ पर राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया था.

शुभावरी चौहान न सिर्फ एक सफल किसान हैं, बल्कि वे अपने पिता के साथ मिल कर ट्रैक्टर से खेतों की जुताई भी करती हैं और कालेज जाने के लिए मोटरसाइकिल का इस्तेमाल करती हैं. वर्तमान में वे अपने गांव से 45 किलोमीटर दूर सहारनपुर मुन्ना लाल गर्ल्स डिगरी कालेज में अपने बीए फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रही हैं.

शुभावरी चौहान के काम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे मिट्टी संरक्षण और जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देती हैं. वे अपने खेतों में जल संचयन के लिए बंधों और बांस के पौधों का उपयोग करती हैं, जिस से न केवल मिट्टी का क्षरण रुकता है, बल्कि अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है. इस के साथ ही उन्होंने अपने गांव की सड़कों के किनारे नीम और कनेर के पौधे लगाए हैं, जिस से हवा भी शुद्ध रहती है.

शुभावरी चौहान के जल संरक्षण के प्रयासों के कारण उन्हें अक्तूबर, 2024 में ‘वानी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जो उन्होंने भारतीय मृदा संरक्षण सोसाइटी से प्राप्त किया. इस के अलावा उन की खेती का एक और अनूठा पहलू यह है कि वे ड्रिप सिंचाई का उपयोग करती हैं, जिस से पानी की बचत होती है और फसलों को पर्याप्त नमी मिलती है.

इस तरह शुभावरी चौहान ने आधुनिक और परंपरागत कृषि विधियों का मिश्रण अपनाते हुए अपनी और अपने गांव की उन्नति की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं. उन के प्रयास, परिवार के सहयोग और दृढ़ संकल्प ने उन्हें सफलता के उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां वे न केवल माली रूप से मजबूत हुईं, बल्कि अपने गांव के लिए एक प्रेरणास्रोत भी बनीं.

विज्ञान शुक्ला : आधुनिक तकनीक व नवाचार से खेती कर बनाई पहचान

दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा लखनऊ में आयोजित  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में विज्ञान शुक्ला ‘बैस्‍ट फार्मर अवार्ड इन आर्गेनिक फार्मिंग’ से सम्मानित किए गए. उत्‍तरप्रदेश के बांदा जिले के विज्ञान शुक्ला आधुनिक तकनीक व नवाचार से खेती कर अपनी एक खास पहचान बना चुके हैं.

प्राकृतिक तरीके से बागबानी 

विज्ञान शुक्ला 400 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक तरीके से अनेक फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिन्हें दोगुना से अधिक दाम पर अपनी उपज बेच रहे हैं. वैदिक और्गेनिक फार्म के जरीए वे अनेक लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं. आप के द्वारा 150 एकड़ जमीन पर बागबानी भी की जा रही है. विज्ञान शुक्ला फलदार पेड़ों से अच्छाखासा मुनाफा ले रहे हैं.

खेतीबारी के साथसाथ वे पशुपालन भी

विज्ञान शुक्ला खेतीबारी के साथसाथ पशुपालन भी कर रहे हैं और उन  के पास 500 से अधिक साहीवाल गिरी, थारपारकर नस्ल की गाएं हैं, जिन के दूध से घी बना कर आप 3,000 रुपए से 3,500 रुपए प्रति लिटर तक लखनऊ, दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों तक अनेक संस्थाओं को बेच रहे हैं.

विज्ञान शुक्ला (Vigyan Shukla)

कई पुरस्कारों से सम्मानित 

विज्ञान शुक्ला का वैदिक फार्म बुंदेलखंड का मौडल बन चुका है, जहां अनेक अधिकारियों और किसानों का आना लगा रहता है. किसान उन के यहां से फार्म की गतिविधियों को जान कर अपने कृषि कार्यों को कर रहे हैं, जिस से उन की आमदनी बढ़ रही है. खेती में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकी से उन की पहले से कहीं अधिक आमदनी बढ़ गई है. इस नवाचार के लिए भारत सरकार द्वारा ‘जगजीवन राम अभिनव पुरस्कार’ से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है. विज्ञान शुक्ला को प्रदेश द्वारा भी, मंडल द्वारा भी और जनपद द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है.

श्रीधर पांडेय: एक सामान्य युवक की असाधारण यात्रा

उत्‍तरप्रदेश के श्रीधर पांडेय दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा आयोजित कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में ‘बैस्‍ट फार्मर अवार्ड इन हार्वैस्टिंग ऐंड प्रोसैसिंग’ से सम्मानित किए गए.

सिद्धार्थ नगर जनपद के एक छोटे से गांव तेतरी बुजुर्ग में एक सामान्य किसान परिवार में जनमे श्रीधर पांडेय ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन संघर्ष किया. बचपन से ही उन्होंने पढ़ाई के साथसाथ छोटेछोटे व्यवसाय भी किए, जिस में वाहनों का टायर पंचर बनाना भी शामिल था.

श्रीधर पांडेय का लक्ष्य एक कुशल चिकित्सक बनना था, लेकिन आरक्षण, प्रतिस्पर्धा और आर्थिक संकट के कारण उन्हें अपना रास्ता बदलना पड़ा. इस के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और विज्ञान वर्ग से स्नातक की परीक्षा पास की.

पिता और परिवार की इच्छा थी कि वे एक कुशल उद्यमी बनें, लेकिन श्रीधर की इच्छा थी कि सरकारी सेवा के माध्यम से एक कुशल जनसेवक बनना. इस दिशा में उन्होंने गौतम बुद्ध जागृति समिति नामक एक सामाजिक संस्था की स्थापना की, जिस का उद्देश्य गरीब, वंचित और पीड़ित वर्ग का आर्थिक और सामाजिक उत्थान करना था.

 Shridhar Pandey

उन्होंने कृषि को प्रमुखता से लिया और आपदा जोखिम मुक्त कृषि को बढ़ावा दिया, जिस से हजारों किसानों को अपने फसल चक्र को बदलते हुए आय में वृद्धि करने में मदद मिली. उन्होंने किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने के लिए एक किसान उत्पादक कंपनी का गठन किया.

25 वर्षों तक भारत सरकार और राज्य सरकार से पैरवी करने के बाद उन्हें सिद्धार्थ नगर जनपद के विश्व विरासत कालानमक धान को पहचान दिलाने में सफलता मिली.

आज श्रीधर पांडेय को सैकड़ों पुरस्कारों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 3 बार पुरस्कार दिया गया है.

farming : राममूर्ति मिश्र का वकालत से प्रोग्रेसिव किसान बनने तक का सफर

 

दिल्‍ली प्रैस की कृषि से जुड़ी पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ की ओर से उत्‍तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में राममूर्ति मिश्र को  ‘बैस्‍ट फार्मर अवार्ड अन इनोवेटिव फार्मिंग’ का सम्‍मान  दिया गया.  उप्र के बस्‍ती जनपद के रहने वाले राममूर्ति मिश्र का कृषि में योगदान के बारे में जानकार हैरान रह जाएंगे. यहां पढ़ें –

 

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कोर्ट से खेत तक का सफर

राम मूर्ति मिश्र के पास कानून की डिगरी और शुरुआत के 5 साल तक उन्होंने प्रयागराज हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस भी की थी. लेकिन बड़े भाइयों के बड़े ओहदों पर नियुक्ति होने और विदेशों में बसने के चलते उन के पिताजी खेतीबारी में अकेले पड़ गए थे. ऐसे में उन्होंने हाईकोर्ट के वकालत का पेशा छोड़ कर खेतीबारी करने का मन बनाया.तकरीबन 25 साल पहले प्रयागराज से गांव वापस आ कर राम मूर्ति मिश्र ने खेतीबारी की बागडोर को संभाल लिया. उन्होंने खेती की लागत में कमी लाने के लिए नई टैक्नोलौजी, यंत्रीकरण, उन्नत बीजों का प्रयोग करना शुरू किया. इस से खेती में आने वाली लागत में काफी कमी आई और मुनाफा भी बढ़ा.

पराली प्रबंधन से रहे हैं जुड़े

राम मूर्ति मिश्र ने सिद्धार्थ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के डायरैक्टर के तौर पर पराली प्रबंधन और जैविक खेती को ध्यान में रखते हुए अपने एफपीओ के सदस्य और गैरसदस्य पशुपालक किसानों को 2 ट्रौली पराली के बदले एक ट्रौली गोबर की खाद दिए जाने की पहल की शुरुआत की है.
राम मूर्ति मिश्र के जिले के किसान अपनी पराली पशुपालकों के साथ आपस में साझा कर रहे हैं, जहां पर उन को 2 ट्रौली पराली देने पर एक ट्रौली गोबर मिल जाता है. इस गोबर को किसान जैविक खाद के रूप में अपने खेतों में प्रयोग कर रहे हैं. खेतों में पराली जलाने के बजाय अब किसान अपनी पराली की समस्या को बहुत ही आसान तरीके से समाधान कर रहे हैं, जिस से उन को पराली की समस्या से नजात तो मिली है, बदले में उन के खेतों के लिए जैविक खाद के रूप में गोबर भी मुफ्त में मिल रहा है.

ड्रिप इरिगेशन सिस्‍टम पर यकीन

राम मूर्ति मिश्र के द्वारा कृषि विविधीकरण का सफल मौडल अपनाया गया है, जिस से आय में वृद्धि हुई है. उन के द्वारा सब्जी और अनाज की अंतःफसलें ली जाती हैं और मिश्रित खेती से जोखिम व लागत में कमी ला कर लाभ को बढ़ाने में कामयाबी मिली है.
राम मूर्ति मिश्र के द्वारा सब्जी की समस्त फसल में उद्यान विभाग के अनुदान से ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया गया है. इस से जल उपयोग एफिशिएंसी के अत्यधिक होने से वे तकरीबन 50 से 70 फीसदी पानी की बचत करने में कामयाब रहे हैं और उन्हें प्रति हेक्टेयर 50 फीसदी तक फसल उत्पादन में वृद्धि करने में कामयाबी मिली है. उन के इस प्रयास से फर्टिलाइजर में भी बचत हुई. उन के द्वारा खेती में ड्रिप सिस्टम अपनाने से न केवल 30 से 40 फीसदी ऊर्जा की बचत करने में कामयाबी मिली है, बल्कि इस पद्धति के प्रयोग से पौधों की अच्छी बढ़वार भी संभव हो पाई है.

कालाधान की प्रो‍सेसिंग में विशेष योगदान

राम मूर्ति मिश्र के द्वारा कीट व बीमारियों के नियंत्रण के लिए जैव कवकनाशी व कीटनाशी का सौ फीसदी उपयोग किया जाता है, जिस में ट्राईकोडर्मा, बावेरिया बैसियाना सहित दसपर्णी, पंचपर्णी सहित खुद के द्वारा निर्मित जैविक उत्पादों का प्रयोग कीट व बीमारियों के नियंत्रण व प्रबंधन के लिए किया जाता है. साथ ही, उन के द्वारा इन दिनों कालानमक धान और श्रीअन्न का प्रसंस्करण यानी प्रोसैसे कर उस का मूल्य संवर्धन किया जा रहा है, जिस से उन्हें 3 से 4 गुना ज्यादा मुनाफा प्राप्त हो रहा है.

राम मूर्ति मिश्र के द्वारा प्रसंस्करण के बाद कालानमक धान और मोटे अनाज के मौलिक गुणों को बचाए रखने के लिए पैकिंग के लिए मटके का उपयोग किया जाता है. इस से उत्पाद न केवल देखने में सुंदर लगता है, बल्कि उस के मूल गुण सुरक्षित रहते हैं और मूल्य सामान्य से दोगुना ज्यादा मिलता है.

जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों को घर पर तैयार किया

राम मूर्ति मिश्र के सहयोग से कृषि महकमे में वर्मी कंपोस्ट की स्थापना की गई है, जिस का उपयोग सब्जियों की खेती में किया जाता है. इस के अलावा सागरिका, वैस्ट डीकंपोजर जैसे दर्जनों जैविक उत्पादों का प्रयोग फसल उत्पादन में किया जा रहा है.
राम मूर्ति मिश्र जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों को घर पर ही तैयार करते है. अलगअलग तरीकों से जैविक खाद तैयार किया जाता है. आप के द्वारा जैव उर्वरक भी तैयार किए गए हैं. वे वैस्ट डीकंपोजर के जरीए पराली की समस्या को नियंत्रित करते हैं. महज 20 रुपए में वैस्ट डीकंपोजर की एक सीसी आती है.
राम मूर्ति मिश्र के द्वारा सिद्धार्थ फार्मर प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया है, जिस में वे डायरैक्टर और अध्यक्ष पद पर हैं. उन की अगुआई में इस एफपीसी द्वारा लगभग 300 सदस्य किसानों की आय में वृद्धि करने में कामयाबी पाई गई है. इन सदस्य किसानों, जिस में महिला किसान भी सदस्य हैं, के जरीए कालानमक धान की खेती कराई जा रही है. उन के उत्पाद को खरीदनेबेचने में मदद की जा रही है, जिस से उन्हें वाजिब कीमत मिल पा रही है.

राम मूर्ति मिश्र की अगुआई में श्रीअन्न की खेती करने वाले किसानों के साथ मिल कर प्रोसैसिंग प्लांट की स्थापना का बिजनैस प्लान तैयार किया गया है. जल्द ही प्रोसैसिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा. अभी उन के साथ जुड़े सभी किसान पारंपरिक तरीके से प्रोसैसिंग कर अपनी आय में वृद्धि करने में कामयाब हो रहे हैं.

खेती के साथ पोपलर (poplar) उगाएं, ज्यादा कमाएं

कई सालों से यह देखा गया है कि कुछ किसान अपने खेतों की मेंड़ों पर पौपलर के पेड़ लगा रहे हैं जो कतार में खड़े हुए ऐसे लगते हैं जैसे खेतों के प्रहरी हों. आमतौर पर खेतों की मेंड़ पर कुछ नहीं उगाया जाता लेकिन आजकल कुछ किसान ऐसा कर के इन पेड़ों से अलग आमदनी ले रहे हैं.

पोपलर कम समय में तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है. इस की अच्छी नस्लें तकरीबन 5 से 8 साल में तैयार हो जाती हैं. पोपलर की पौध एक साल में तकरीबन 3 से 5 मीटर तक ऊंची हो जाती है.

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में इन को देखा जा सकता है.

पोपलर जंगल की कमी को भी पूरा करते हुए लकड़ी उद्योग की भी मांग को पूरा करता है. साथ ही, किसानों को भी फायदा देता है.

पोपलर की लकड़ी का इस्तेमाल : पोपलर की लकड़ी से दियासलाई की तीली, प्लाइवुड, चम्मच, खेलों के कई तरह के सामान, फर्नीचर, पैंसिल वगैरह अनेक चीजें बनाई जाती हैं जो हमारी रोजमर्रा की जरूरतें हैं.

कहां से लें पौध : पोपलर की पौध के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय, वन विभाग से संपर्क कर सकते हैं. वहां से आप को अच्छी नस्ल की पौध मिलेगी. इस के अलावा कुछ प्राइवेट नर्सरी भी पौधे तैयार करती हैं. वहां से भी पौध खरीद सकते हैं.

Wimco

पोपलर और विमको लिमिटेड : विमको लिमिटेड तकरीबन 30-32 सालों से पोपलर की नई और तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों को तैयार कर रही है.

यह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब में कृषि वैज्ञानिकों की निगरानी में पौध तैयार कराती है और किसानों को सही दाम पर पौध भी मुहैया कराती है.

पौध लगाने का समय और अच्छी किस्में : पोपलर की पौध लगाने का सब से अच्छा समय दिसंबर माह के आखिरी हफ्ते से फरवरी माह के आखिर तक होता है.

पौध खरीदने में सावधानी : पौधों की खरीद भरोसे की नर्सरी या कृषि संस्थानों के पौध विक्रय केंद्र से ही करें. सड़क पर चलतेफिरते पौध बेचने वालों से न खरीदें क्योंकि इन की नस्ल के बारे में उन को भी सटीक जानकारी नहीं होती इसलिए पौध की प्रजाति का भी पता होना चाहिए.

कुछ दलाल टाइप लोग भी खुद को कृषि संस्था से जुड़ा हुआ बता कर पौध बेच देते हैं. उन पर जरा भी भरोसा न करें. इस के लिए जरूरी है कि सीधे कृषि विज्ञान केंद्रों से या भरोसेमंद नर्सरी से ही पौध खरीदें.

पौध खरीदते समय खराब या बीमारी वाले पौधे न लें. अच्छी क्वालिटी वाले पौधे मान्यताप्राप्त जगह से ही लें. पहले से जमीन से निकाले गए पौधे न रोपें.

विमको की खास किस्में?

विमको के कृषि विशेषज्ञों द्वारा विकसित की गई किस्मों में उदय, क्रांति, पोपलर बिहार, विमको ए 22, विमको ए 27, विमको 32, विमको 39, विमको 49, विमको 81, विमको 83, विमको 108, विमको 109 और विमको 110 हैं.

इस के अलावा दूसरी किस्मों में पोपलर की डी 61, डी 66, एस 7सी 8, एल 247, एल 143, एल 154 वगैरह हैं. किसान अपने इलाके के कृषि विज्ञान केंद्र से भी अधिक जानकारी ले सकते हैं.

पोपलर के साथ लें दूसरी फसलें भी

पतझड़ का मौसम आने पर पोपलर से दिसंबर से मार्चअप्रैल महीने तक सारी पत्तियां झड़ जाती हैं और पेड़ बिना पत्तों का हो जाता है इसलिए इस दौरान उस के नीचे गेहूं, जौ, बरसीम, सरसों, मिर्च, बैगन वगैरह की फसलें ली जा सकती हैं.

कोशिश करें कि पेड़ से नीचे गिरे पत्तों को गेहूं जैसी फसल के पौधे के ऊपर से हटा कर अलग कर दें वरना पत्तों के नीचे दबे पौधों की बढ़वार नहीं हो पाएगी. इन पत्तों को बीन कर अलग एक गड्ढे में डालते रहें, फिर उन पत्तों को मिट्टी में दबा दें. उन पत्तों से खाद बन जाएगी. खरीफ मौसम में भी कुछ फसलें उगाई जा सकती हैं. 4-5 सालों तक पुराने पोपलर के नीचे छाया में पनपने वाली फसलें जैसे हलदी, अदरक, पुदीना वगैरह उगा सकते हैं.

ध्यान देने वाली बातें

पोपलर की अच्छी पैदावार के लिए प्रति पौधा 20-25 वर्गमीटर दूरी पर लगाएं. खेत की मेंड़ों की बाउंडरी पर अकेली लाइन में पौधे लगाने के लिए 3 मीटर की दूरी ठीक रहती है.

बीमारियों से बचाव के लिए पौधों की निचली जड़ वाले एक मीटर हिस्से को एमीसान 6 के घोल में 15-20 मिनट डुबा कर उपचारित कर लेना चाहिए और दीमक से बचाव के लिए क्लोरोपायरीफास 20 ईसी दवा का इस्तेमाल करना चाहिए.

गड्ढों में भरी जाने वाली ऊपरी सतह की भुरभुरी और नमी वाली मिट्टी में 100 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 2-3 किलोग्राम अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद मिला कर गड्ढे में भर देनी चाहिए. पौधे रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई कर देनी चाहिए. गरमियों में सिंचाई 7 से 10 दिनों के अंतर पर और सर्दियों में 15 दिनों के अंतर पर करनी चाहिए.

पोपलर के साथ धान की खेती को छोड़ कर बाकी फसलें जैसे गन्ना, गेहूं, हलदी, अदरक, मिर्च, बंदगोभी, बरसीम, चारा वगैरह फसलों की खेती भी की जा सकती है.

पोपलर से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए आप विमको लिमिटेड के जिला और नर्सरी अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. इस के अलावा आप अपने नजदीकी जिला कार्यालय में पता कर सकते हैं या फिर संबंधित जानकारी इसी लेख के बौक्स में दी गई है.

पोपलर के लिए यहां से लें अधिक जानकारी

अमृतसर : 262 बी, गुरु अर्जुनदेव नगर, निकट पुतलीघर. फोन : 0183-2565492, मोबाइल: 9878862002.

होशियारपुर : 607, माउंट एवेन्यू, ब्लौक सी, निकट सतनाम अस्पताल, फगवाड़ा रोड. फोन 01882-248145, मोबाइल  : 9878862003.

लुधियाना : 108/100, जे ब्लौक, भाई रणधीर सिंह नगर, फोन : 0161-2450625, मोबाइल : 9878862005.

रोपड़ : 108, बेअंत सिंह नगर, मोबाइल : 9878862007.

यमुनानगर : पंजाब नैशनल बैंक के ऊपर, अग्रसेन चौक, जगादरी, जिला यमुनानगर. मोबाइल : 9729062630.

करनाल : निकट श्री राम प्रोपर्टी, विश्वकर्मा कालोनी, मेरठ रोड, करनाल. मोबाइल : 9729061620.

सहारनपुर : निकट जैन डिगरी कालेज, प्रद्युम्न नगर, फोन : 0132-761322. मोबाइल : 9917470187.