बस्ती : गेहूं फसल अवशेष जलने की घटना का स्थलीय सत्यापन एवं घटनाओं के नियंत्रण के लिए क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से किसानों को जागरूक करने के साथ ही शासन एवं कृषि विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन कराने के लिए संयुक्त निदेशक, कृषि, अविनाश चंद्र तिवारी ने मंडल के तीनों उपनिदेशक कृषि एवं जिला कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया है.
अधिकारियों को लिखे पत्र में संयुक्त निदेशक, कृषि, अविनाश चंद्र तिवारी ने कहा है कि जनपद स्तर पर एक सेल का गठन करते हुए प्रत्येक दिन की घटनाओं का अनुश्रवण किए जाने एवं प्रत्येक गांव के ग्राम प्रधान एवं क्षेत्रीय लेखपाल को प्रत्येक दशा में अपने से संबंधित क्षेत्र में पराली/कृषि अपशिष्ट जलाने की घटना को रोके जाने के लिए निर्देशित करें.
उन्होंने कहा कि प्रत्येक राजस्व ग्राम अथवा राजस्व ग्राम क्लस्टर के लिए एक राजकीय कर्मचारी को नोडल अधिकारी नामित करें, जो कि सभी के बीच प्रचारप्रसार करते हुए फसल अवशेष आदि को न जलने के लिए प्रेरित करे. लेखपाल की जिम्मेदारी होगी कि अपने क्षेत्र में फसल अवशेष जलने की घटनाएं बिलकुल न होने दें, अन्यथा शिकायत मिलने पर उन के विरुद्ध भी कार्यवाही की जाएगी. जनपद स्तर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में एक सेल स्थापित करने के निर्देश पूर्व में दिए जा चुके हैं.
उपजिलाधिकारी के अंतर्गत गठित सचल दस्ते का दायित्व होगा कि फसल अवशेष आदि जलने की घटना की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंच कर संबंधित के विरुद्ध विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे.
उन्होंने बताया कि 2 एकड़ से कम जोत वाले किसानों के लिए फसल अवशेष जलाने पर 2,500 रुपए प्रति घटना और 2 एकड़ से अधिक जोत वाले किसानों से 5,000 रुपए प्रति घटना तहसीलदार के स्तर से आर्थिक दंड लगाया जाएगा.
उन्होंने आगे बताया कि फसल कटाई के दौरान प्रयोग की जाने वाली कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रेक एवं बेलर अथवा अन्य कोई फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का उपयोग किया जाना अनिवार्य होगा.
यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उक्त व्यवस्था बगैर आप के जनपद में कोई कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई न करने पाए. प्रत्येक कंबाइन हार्वेस्टर के साथ कृषि विभाग/ग्राम्य विकास का एक कर्मचारी नामित रहे, जो कि अपनी देखरेख में कटाई काम कराएं. फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों के बगैर चलते हुए पाए जाए, तो उस को तत्काल सीज कर लिया जाए और कंबाइन मालिक के स्वयं के खर्चे पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगवा कर ही छोड़ा जाए.





कार्यशाला के चीफ पैटर्न व हकृवि के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले समय में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में कृषि क्षेत्र की अह्म भूमिका रहेगी. कृषि हमेशा से हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है. यह लाखों लोगों को आजीविका प्रदान करती है और हमारी विशाल आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है. हाल ही के वर्षों में, इस क्षेत्र में उत्पादकता, स्थिरता और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कृषि पद्धतियों और प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जो इस क्षेत्र को बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारे संकल्प को मजबूत करने में मदद करेगी.
कुलपति डा. डीआर सिंह ने कहा कि अब तक 97 स्टार्टअप को उद्यम के रूप में स्थापित करने में तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की गई है. कुलपति ने कहा कि सबएग्रीस से प्रमाणित होने के बाद उस स्टार्टअप की अहमियत और बढ़ जाती है.
