Agricultural Equipment : कोनो वीडर – निराईगुड़ाई का खास कृषि यंत्र

Agricultural Equment: ipफसल से अधिक उत्पादन लेने के लिए खरपतवारों पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी होता है. अगर समय रहते इन को खत्म नहीं किया गया तो ये मुख्य फसल को उपजने नहीं देते. नतीजा फसल की पैदावार में कमी आती है. खरपतवार रोकथाम के लिए समयसमय पर निराईगुड़ाई बहुत जरूरी है. इस के लिए किसानों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है. अगर यही काम कृषि यंत्र से किया जाए तो किसानों को काफी सहूलियत हो जाती है.

इस के लिए कई अच्छे उपकरण आज बाजार में मौजूद हैं. इन्हीं उपकरणों में से एक कोनो वीडर कृषि यंत्र है, जो अत्यंत उपयोगी कृषि मशीन है. यह मशीन खेत में अच्छे से निराईगुड़ाई के साथ कई अन्य कार्यों को भी सरलता से कर लेती है. खास कर छोटे और मंझले किसानों के लिए कोनो वीडर यंत्र काफी अच्छा कृषि यंत्र है. इस यंत्र में दो रोटर, फ्लोट, फ्रेम और हैंडल दिए गए हैं, जिस की मदद से इसे चलाना काफी आसान हो जाता है.

यह कृषि यंत्र निश्चित गहराई तक निराईगुड़ाई का काम करता है. इसे चलाना बहुत ही आसान होता है. इसे महिला हो या पुरुष कोई भी आसानी से चला सकता हैं. क्योंकि, यह मशीन साइकिल की तरह हाथ से चलाई जाती है और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरलता से ले जाया जा सकता है. इस कोनो वीडर यंत्र की कीमत आम छोटे किसान की पहुंच में है. इस यंत्र को अनेक कृषि यंत्र निर्माता बना रहे हैं. लोकल स्तर पर भी यह यंत्र बहुत आसानी से मिल जाता है.

कोनो वीडर के फायदे

इस यंत्र के इस्तेमाल से फसलों के बीच में से खरपतवारों को निकालना आसान हो जाता है.

लाइनों में लगाई गई फसलों के लिए यह कृषि यंत्र बहुत ही सरलता से काम करता है. साथ ही, निराईगुड़ाई का काम कम समय में निपट जाता है. किसानों की मजदूरी भी कम लगती है और  कोनो वीडर का उपयोग खेत में करने से फसल की पैदावार भी बढ़ती है. कम कीमत में आने वाला यह कोनो वीडर यंत्र किसानों के लिए बड़े ही काम का कृषि यंत्र है. इस को चलाना आसान, रखरखाव आसान और कम दाम अच्छा काम इस के मुख्य गुण हैं.

Agricultural Machinery : निराईगुड़ाई व जुताईबोआई कृषि यंत्र

Agricultural Machinery  : हमारे देश की खेती पशुओं पर निर्भर रही है, लेकिन अब किसान खेती के नएनए तौरतरीके अपना रहे हैं. पहले निराईगुड़ाई जैसे काम के लिए काफी मजदूर लगाने पड़ते थे. समय बदलने लगा और मजदूरों की जगह मशीनों ने ले ली. कृषि मशीन निर्माता व अनेक संस्थाएं खेती की मशीनें बनाने लगे, जिन से किसानों का काम आसान हुआ.

अभी हाल ही में हमारे अनेक पाठकों ने निराईगुड़ाई की मशीन के बारे में जानकारी मांगी. उसी के संदर्भ में कुछ खास जानकारी :

‘पूसा’ पहिए वाला हो वीडर

यह बहुत साधारण प्रकार का कम कीमत का यंत्र है. इस यंत्र में खड़े हो कर निराईगुड़ाई की जाती है. इस का वजन लगभग 8 किलोग्राम है व इसे आसानी से फोल्ड कर के कहीं भी ले जाया जा सकता है. इस यंत्र को खड़े हो कर आगेपीछे धकेल कर चलाया जाता है. निराईगुड़ाई के लिए लगे ब्लेड को गहराई के अनुसार ऊपरनीचे किया जा सकता है. पकड़ने में हैंडल को भी अपने हिसाब से एडजस्ट कर सकते हैं. यह कम खर्चीला यंत्र है.

‘पूसा’ चार पहिए वाला वीडर

एकसार खेत से कतार में बोई गई उस फसल से खरपतवार निकालने के लिए यह अच्छा यंत्र है, जिन पौधों की कतारों के बीच की दूरी 40 सेंटीमीटर से अधिक है, क्योंकि इस मशीन का फाल 30 सेंटीमीटर चौड़ा है. इस मशीन को पकड़ कर चलाने वाले हैंडल को भी अपनी सुविधा के हिसाब में एडजस्ट कर सकते हैं.

इस यंत्र का वजन लगभग 11-12 किलोग्राम है. इसे फोल्ड कर के आसानी से उठा कर कहीं भी ले जाया जा सकता है. यह भी पूसा कृषि संस्थान, नई दिल्ली द्वारा बनाया गया है.

उपरोक्त दोनों यंत्र कृषि अभियांत्रिकी संभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, नई दिल्ली द्वारा बनाए गए हैं. इन के लिए आप इस संस्थान से संपर्क कर सकते हैं.

पावर टिलर द्वारा चालित यंत्र

यह कतार में बोई गई सोयाबीन, चना, अरहर, ज्वार, मक्का, मूंग आदि फसलों में निराईगुड़ाई के लिए उपयोगी यंत्र है. इस यंत्र को 8-10 हार्सपावर के पावर टिलर में जोड़ कर चलाया जाता है. इस की अनुमानित कीमत 1800 रुपए है.

यह यंत्र केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल द्वारा निर्मित है. आप इन के फोन नं. 2521133, 0755-2521139 पर संपर्क कर सकते हैं.

छोटा पावर वीडर

पैट्रोल से चलने वाला यह छोटा पावर वीडर निराईगुड़ाई के लिए अच्छा यंत्र है. इस में 2 स्ट्रोक इंजन लगा होता है. इस से 3 से 4 इंच गहराई तक निराईगुड़ाई होती है. इस के लिए जमीन में ल गभग 25 फीसदी नमी होना जरूरी है. इस यंत्र की कीमत तकरीबन 16 हजार रुपए है.

इस के अलावा 5 हार्स पावर के डीजल इंजन के साथ लगा कर चलाने वाले कई और वीडर भी उपलब्ध हैं, जिन की शुरुआत 65 हजार रुपए से होती है और मशीन के कूवत के हिसाब से यह कीमत बढ़ती जाती है.

डीजल इंजन के साथ अनेक मशीनें जैसे लैवलर, स्प्रे पंप, रोटावेटर, सीड ड्रिल आदि को जोड़ कर खेती के काम किए जा सकते हैं.

अधिक जानकारी के लिए आप राघवेंद्र कुमार से उन के मोबाइल नंबर 09670632555 पर बात कर सकते हैं.

इस के अलावा बीसीएस इंडिया प्रा. लि. लुधियाना, पंजाब की कंपनी भी वीडर मशीन बना रही है, जिस का कृषि यंत्र निर्माताओं में अच्छा नाम है.

आप इन से भी इन के फोन नं. 08427800753 पर बात कर के तफसील से पूरी जानकारी ले सकते हैं.

Machines: किसान ने बनाई मल्टीपरपज ग्रेडिंग मशीन

Machine :    भरपूर मेहनत से उगाई गई फसल के भाव गुणवत्ता में थोड़ी सी गिरावट के चलते जब कम मिलने लगे, तो इब्राहीम अली जैसे मेहनतकश किसान ने अपने किसान साथियों को इस तकलीफ से नजात दिलाने के लिए ग्रेडिंग मशीन तैयार कर डाली.

राजस्थान के सिरोही जिले के काछौली गांव के सौंफ उत्पादक किसान द्वारा तैयार की गई यह मशीन (Machine) अरंडी जैसे बड़े बीजों से ले कर सौंफ जैसे छोटे और महीन बीजों तक की ग्रेडिंग करती है. गेहूं उत्पादक किसान इस मशीन से 1 ही बार में 3 श्रेणियों में गेहूं छांट कर अलग कर सकते हैं.

इब्राहीम अली ने इस मशीन को बहुद्देश्यीय बनाया है. इस मशीन के स्टैंड के नीचे पहिए होने के कारण इसे आसानी से इधरउधर खिसकाया जा सकता है. मशीन को लंबाई में इस तरह सैट किया गया है कि मिश्रित बीजों को 1 ही बार में 3 ग्रेडों में बांटा जा सकता है. ऊपर जहां से बीज डाला जाता है, वहां ‘गीयर गेज’ लगा हुआ है, जिसे जरूरत के हिसाब से एडजस्ट कर के डाले गए माल (जैसे अरंडी, गेहूं, सौंफ) के आकार के मुताबिक गैप छोटाबड़ा कर सकते हैं.

Machine

मशीन के साइड में भी हवा की मात्रा बढ़ाने के लिए ढक्कन लगा है. इस की मदद से अंदर किसी तरह से फंसे माल को हटाया या निकाला जा सकता है. मशीन के निचले हिस्से पर घिरनी, मोटर, बिजली या ट्रैक्टर की सहायता से चलने वाला फैनबेल्ट युक्त पंखा लगा होता है, जिसे किसी भी साइज के बीजों की ग्रेडिंग करने के लिए एडजस्ट किया जा सकता है. इसी के नीचे से होते हुए ढालू छलनीदार नाली होती है, जिस में से रेत, मिट्टी वगैरह के कण छनते हुए गिर जाते हैं और भारी व अच्छी गुणवत्ता के बीज सीधे ही बोरियों में भरे जा सकते हैं.

मशीन के दूसरे निचले हिस्से में पंखे की हवा से हलके व निम्न गुणवत्ता के बीज जमा हो जाते हैं, जिन्हें निकासी से बाहर निकाल लिया जाता है.

सोर्फ मशीन (Machine) से गन्ने (sugarcane) की अच्छी पैदावार

गन्ना उगाने के मामले में भारत पहले नंबर पर है, ऐसा माना जाता है. पर इसे पूरी दुनिया में उगाया जाता है. वैसे, इसे उगाने की शुरुआत ही भारत से मानी गई है और देश में गन्ना पैदा करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है. गन्ने की फसल को आम बोलचाल की भाषा में ईख भी कहा जाता है. इस फसल को एक बार बो कर इस से 3 साल तक उपज ली जा सकती है.

तकरीबन 50 मिलियन गन्ना किसान और उन के परिवार अपने दैनिक जीवनयापन के लिए इस फसल पर ही निर्भर हैं या इस से संबंधित चीनी उद्योग से जुड़े हुए हैं. इसलिए पेड़ी गन्ने की पैदावार में बढ़ोतरी करना बेहद जरूरी है, क्योंकि भारत में इस की औसत पैदावार मुख्य गन्ना फसल की तुलना में 20-25 फीसदी कम है. हर साल गन्ने के कुछ रकबे यानी आधा रकबा पेड़ी गन्ने की फसल के रूप में लिया जाता है.

गन्ने से अधिक उपज लेने में किल्ले की अधिक मृत संख्या, जमीन में पोषक तत्त्वों की कमी होना, ट्रेश यानी गन्ने की सूखी पत्तियां जलाना वगैरह खास कारण हैं.

इन बातों को ध्यान में रखते हुए गन्ना पेड़ी प्रबंधन के लिए ‘सोर्फ’ नाम से एक खास बहुद्देशीय कृषि मशीन मौजूद है. इस के इस्तेमाल से गन्ना पेड़ी से अच्छी फसल ली जा सकती है.

मशीन (Machine)

मशीन की खूबी : यह मशीन एकसाथ 4 काम करने में सक्षम है.

  1. पोषक तत्त्व प्रबंधन : सोर्फ मशीन गन्ने की सूखी पत्तियों वाले खेत में भी कैमिकल उर्वरकों को जमीन के अंदर पेड़ी गन्ने की जड़ों तक पहुंचाने में सहायक है.
  2. ठूंठ प्रबंधन : गन्ना फसल कटने के बाद खेत में जो ठूंठ रह जाते हैं या ऊंचेनीचे होते हैं, उन असमान ठूंठों को जमीन की सतह के पास से बराबर ऊंचाई पर काटने के लिए भी इस मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  3. मेंड़ों का प्रबंधन : गन्ने की पुरानी मेंड़ों की मिट्टी को अगलबगल से आंशिक रूप से काट कर यह मशीन उस को 2 मेंड़ों के बीच पड़ी सूखी पत्तियों पर डाल देती है, जिस से पत्तियां गल कर खाद का काम करती हैं.
  4. जड़ प्रबंधन : ‘सोर्फ’ मशीन द्वारा गन्ने की पुरानी जड़ों को बगल से काट दिया जाता है, जिस से नई जड़ें आ जाती हैं और पेड़ी गन्ने में किल्ले की संख्या में बढ़ोतरी होती है.

सोर्फ मशीन से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय अजैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान, (समतुल्य विश्वविद्यालय), मालेगाव, बासमती 413115, पुणे (महाराष्ट्र) फोन : 02112-254057 पर जानकारी ले सकते हैं.

खेती को लाभकारी और आसान बनाते हैं कृषि यंत्र

आज दुनियाभर में खेतीबारी कृषि यंत्रों पर आधारित है. भारत भी इस से अछूता नहीं है. आज देश का हर छोटाबड़ा किसान अपनीअपनी जरूरत के अनुसार खेती में कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करता है. कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से कम लागत व कम समय में अधिक खेती के काम किए जाते हैं, इसलिए हमारे लिए खेती में कृषि यंत्रों का उपयोग ज्यादा जरूरी हो गया है.

* कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से शारीरिक मेहनत, किसानों का समय और लागत में बचत होती है.

* कृषि यंत्रों द्वारा समयसमय पर खेती के काम किए जा सकते हैं.

* कृषि यंत्रों के द्वारा जैविक और रासायनिक निवेशों का कुशलतापूर्वक उपयोग कर फसल पैदावार को बढ़ाया जा सकता है. साथ ही, लागत भी कम की जा सकती है.

* कृषि यंत्रों के उपयोग से फसल की सघनता को बढ़ाने के साथसाथ फसल पैदावार में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है.

कृषि यंत्रों से खेती को लाभ

* कृषि यंत्रों से बोआई करने पर 10 से 20 फीसदी तक बीज की बचत होती है.

* कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से 15 से 20 फीसदी खाद भी कम लगती है.

* मजदूरों की लागत घटती है और 20 से 30 फीसदी की मजदूरी लागत में कमी आती है.

* फसल सघनीकरण में तकरीबन 5 से 22 फीसदी तक का फायदा होता है.

* फसल उत्पादन 12 से 34 फीसदी तक बढ़ जाता है.

कुलमिला कर अगर किसान कृषि यंत्रों पर आधारित खेती करें, तो कम से कम 20 फीसदी तक अपनी आमदनी बढ़ा सकता है.

हैप्पी सीडर

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हैप्पी सीडर यंत्र भी धान कटाई के बाद बिना खेत तैयार किए गेहूं बोआई का काम करता है. देरी से धान की कटाई करने के बाद भी इस यंत्र से समय पर गेहूं की बोआई हो जाती है, क्योंकि खेत तैयार करने का समय बचता है. यंत्र से बोआई करने पर खरपतवार भी कम पनपते हैं.

जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल

agriculture machinesयह यंत्र फसल कटाई के बाद बिना जुताई किए खेत में बीज बोने का काम करता है. सभी फसलों में तो नहीं, लेकिन धान की फसल की कटाई के बाद रबी सीजन के लिए गेहूं की सीधी बोआई करने का काम बहुत अच्छे से करता है.

इस से खेत की जुताई व खेत तैयार करने की लागत भी बचती है और समय की भी बचत होती है. धान की फसल कटने के बाद उस में नमी भी रहती है, जिस से रबी फसल का अंकुरण भी अच्छा होता है.

इस यंत्र से सामान्य फसलों की बोआई सामान्य सीड ड्रिल की तरह ही की जाती है. यह ट्रैक्टरचालित कृषि यंत्र है, जिस से खाद और बीज दोनों एकसाथ ही लग जाते हैं.

स्ट्रा रीपर यंत्र

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यह यंत्र फसल अवशेष का भूसा बनाने का काम करता है. यह पर्यावरण हितैषी यंत्र है. आजकल कंबाइन हार्वेस्टर से गेहूं, धान जैसी फसलों की कटाई की जाती है, तो वह ऊपरी अनाज वाले हिस्से की तो कटाई कर लेते हैं, लेकिन उस के नीचे का तना, जो लगभग एक से डेढ़ फुट तक का होता है, वह फसल अवशेष के रूप में खेत में खड़े रह जाते हैं. इन्हें किसान आग लगा कर नष्ट करता है. इस से पर्यावरण को नुकसान होता है. खेत की मिट्टी खराब होती है, जमीन की पैदावार कूवत कम होती है. खेती में सहायक जीवजंतु मर जाते हैं, जिस से सिर्फ नुकसान ही होता है.

इसी नुकसान से हमें बचने के लिए स्ट्रा रीपर यंत्र द्वारा खेत में खड़े फसल अवशेष से भूसा बनाना चाहिए. गेहूं फसल अवशेष से अगर हम भूसा बनाते हैं, तो एक एकड़ में 8 से 10 क्विंटल भूसा मिलता है और केवल एक घंटे में एक एकड़ खेत की कटाई की जा सकती है.

भूसा स्टोर करने के लिए ट्रौली में भूसे को एकत्र किया जाता है, जो सालभर पशु चारे के काम में आता है. जिन के पास पशु नहीं हैं, अगर वह इस भूसे को इकट्ठा कर के औफ सीजन में बेचते हैं, तो फसल पैदावार जैसा अच्छा मुनाफा भी ले सकते हैं. बहुत से लोग तो भूसे का कारोबार कर के सालभर अच्छी कमाई भी करते हैं. यह रोजगार का भी अच्छा साधन बन सकता है.

अनेक कृषि यंत्र निर्माता इस स्ट्रा रीपर को बना रहे हैं, क्योंकि यह यंत्र आज भी किसानों की जरूरत है.

मल्टीक्रौप प्लांटर

agriculture machinesजैसा कि नाम से पता चल रहा है, यह मल्टीक्रौप प्लांटर है. इस यंत्र से एक ही समय में एक से अधिक फसलों की बोआई की जा सकती है.

इसे ‘बहुफसली बोनी मशीन’ भी कहा जाता है. इस मशीन के द्वारा मक्का, मटर, मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन, बाजरा, चना और कपास के बीज बोने का काम किया जाता है.

उपरोक्त बीजों की बोआई के लिए बीजों के बीच की दूरी और कतार से कतार की दूरी निश्चित रहती है. इस बहुफसली बोनी यंत्र को ट्रैक्टर द्वारा चलाया जाता है.

बेलर

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फसल अवशेष प्रबंधन का यह खास यंत्र है. इस यंत्र द्वारा फसल की कटाई के बाद खेत में गेहूं, धान आदि के बचे हुए डंठल (फसल अवशेषों) को उपयोग में लाने के लिए उन का गट्ठर बनाने का काम करता है.

नई तकनीक वाले इस कृषि यंत्र को फसल अवशेष के बंडल बनाने वाला यंत्र भी कहा जाता है. इस मशीन के द्वारा बने फसल अवशेषों के बंडल, चीनी उद्योग, बायोमास बिजली उत्पादन, पेपर इंडस्ट्रीज, डेयरी फार्मिंग, प्राकृतिक खाद, वर्मी कंपोस्ट जैसे कामों में भी इस्तेमाल किया जाता है. इस के अच्छे दाम भी मिलते हैं. यह मशीनफसल अवशेषों को कम्प्रैस कर बंडल बनाती है, जिन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान है.

रीपर कम बाइंडर

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यह इंजन से जुड़ा हुआ कृषि यंत्र है, जो गेहूं, धान, जौ, जई जैसी फसलों की कटाई का काम करता है. साथ ही, उन का बंडल भी बनाता चलता है, इसलिए इस का नाम ‘रीपर कम बाइंडर’ है. कुछ सामान्य रीपर होते हैं, जो केवल कटाई का काम करते हैं.

आमतौर पर रीपर कम बाइंडर मशीन में 11 हौर्सपावर का इंजन लगा होता है. इस से एक घंटे में 1.25 लिटर डीजल की खपत होती है और घंटेभर में एक एकड़ खेत की कटाई कर बंडल बनाए जा सकते हैं.

बंडल बांधने के लिए इस में सन की रस्सी का इस्तेमाल किया जाता है. इस इंजन में रीपर की जगह ट्रौली भी जोड़ी जा सकती है, जिस में 6 क्विंटल तक का वजन ढोया जा सकता है.

इस यंत्र को चलाने के लिए केवल एक व्यक्ति की जरूरत होती है. इस के लिए यंत्र पर बैठने की जगह भी होती है.

एक दिन में तकरीबन 10 एकड़ में लगी फसल की कटाई व बंडल बनाने का काम इस यंत्र से किया जा सकता है. इस यंत्र से मजदूरों द्वारा 10 दिन की कटाई का काम एक दिन में ही पूरा किया जा सकता है.

स्पाइरल सीड ग्रेडर

यह यंत्र बिना ईंधन, बिना बिजली के चलने वाला कृषि यंत्र है. इस से गोल आकार वाले सभी बीजों की गे्रडिंग की जाती है. इस में सोयाबीन, अरहर, मसूर आदि शामिल हैं.

एक घंटे में 3 क्विंटल बीजों की ग्रेडिंग वाले इस यंत्र से बीज की सप्लाई भी हो जाती है. बीज की गुणवत्ता बढ़ जाती है. इस यंत्र का वजन मात्र 30 से 35 किलोग्राम तक ही होता है. इसलिए इस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना आसान है.

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सीड ट्रीटिंग ड्रम (बीज उपचार यंत्र)

बीजोपचार करने वाला यह यंत्र हाथ से चलाया जाता है. इस यंत्र से एक बार में 15 से 20 किलो बीज उपचारित किया जा सकता है. इस यंत्र से एक घंटे में तकरीबन एक क्विंटल बीज उपचारित किया जा सकता है.

यंत्र की बनावट इस तरह की होती है कि दवा व कल्चर बीज के चारों तरफ लग जाता है, जिस से सौ फीसदी बीजोपचार होता है.

बीजोपचार करने वाला यह यंत्र बंद ड्रम सा आकार लिए होता है, इसलिए बीज उपचार के समय किसान की सेहत पर रासायनिक दवाओं का बुरा असर भी नहीं होता. यह पूरी तरह से सुरक्षित बीजोपचार यंत्र है.

रिवर्सिबल प्लाऊ

रबी फसल की कटाई के बाद खासकर गेहूं फसल की कटाई के बाद खेतों की गहरी जुताई करना फायदेमंद होता है. ऐसा करने से खरपतवार और हानिकारक कीट आदि नष्ट हो जाते हैं.

रिवर्सिबल प्लाऊ यंत्र गहरी जुताई करने का खास यंत्र है. यह 12 इंच से 15 इंच की गहराई तक जुताई करता है. जुताई करते समय खेत में नाली नहीं बनती. गहरी जुताई के कारण जमीन में पानी सोखने की कूवत बढ़ती है. इस यंत्र को ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जाता है.

भोपाल में लगे कृषि मेले में ‘फार्म एन फूड’ का जलवा

मध्य प्रदेश खेतीकिसानी पर निर्भर राज्य है, वहां कि सानों, बागबानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों को कृषि, बागबानी, डेयरी व कृषि अभियांत्रिकी से जुड़ी नवीनतम और उन्नत जानकारियों से लैस करने के लिए भोपाल के केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान में पिछले दिनों 20 से ले कर 22 दिसंबर, 2024 को विशाल कृषि मेले का आयोजन हुआ.

यह आयोजन भारतीय मीडिया ऐंड इवैंट्स लिमिटेड व बीएसएल कौंफ्रैंस ऐंड ऐक्जीबिशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भोज आत्मा समिति, भोपाल के सहयोग से किया गया, जिस  में मीडिया पार्टनर के रूप में ‘फार्म एन फूड’ पत्रिका की अहम भूमिका रही.

मंत्री लखन पटेल ने किया आह्वान

भोपाल के सीआईएई में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में अतिथि के रूप में पहुंचे मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों को तकनीक का लाभ उठा कर स्वावलंबी बनने का प्रयास करना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं और नई तकनीकों का मुख्य उद्देश्य किसानों को रोजगार और आत्मनिर्भरता प्रदान करना है. उन्होंने किसानों से सरकार की स्कीमों का लाभ ले कर आमदनी बढ़ाने का आह्वान किया. इस दौरान मंत्री लखन पटेल नें प्रदर्शनी में लगाए गए सभी स्टालों पर पहुंच कर जानकारी ली.

इस अवसर पर विधायक घनश्याम रघुवंशी ने प्रदेश सरकार की कृषि हितैषी नीतियों और खेती को लाभकारी बनाने के प्रयासों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने और उन की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है.

 

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विशेषज्ञों ने साथ किए टिप्स

9वें इंटरनैशनल एग्री ऐंड हौर्टी टैक्नोलौजी ऐक्सपो में भारत सहित अन्य कई देशों के कृषि विशेषज्ञों की भागीदारी रही. इस दौरान मेले में भ्रमण पर आए किसानों और कृषि के छात्रों को विशेषज्ञों द्वारा खेतीबारी से जुड़ी जानकारी भी दी गई.

संगोष्ठी में वैज्ञानिकों में प्रमुख रूप से

डा. एसएस सिंधु, एमेरिट्स वैज्ञानिक, आईएआरआई, नई दिल्ली, डा. वाईसी गुप्ता, पूर्व डीन, एफएलए विभाग, डा. पीबी भदोरिया, आईआईटी खड़गपुर, प्रोफैसर डा. सीके गुप्ता, पूर्व डीन, डीवाईएस परमार विश्वविद्यालय, सोलन, डा. सीआर मेहता, डायरैक्टर, सीआईएई, डा. सुरेश कौशिक, पूर्व सीटीओ, आईएआरआई पूसा, नई दिल्ली, डा. प्रकाश, पूर्व अध्यक्ष, स्टूडैंट्स वर्ल्ड, नेपाल की भागीदारी रही.

वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं को सुना और उन के समाधान के लिए उपयोगी सुझाव  दिए. किसानों ने संगोष्ठी में अपनी जिज्ञासाओं को साथ किया और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया.

इस दौरान मंच संचालन का जिम्मा संभाल रहे कृषि वैज्ञानिक विजी श्रीवास्तव ने खेतीबारी से जुड़ी उन्नत जानकारियों को प्रभावी ढंग से पेश करते हुए किसानों को कार्यक्रम के अंत तक बांधे रखा. उन्होंने कृषि स्टूडैंट्स के कैरियर से जुड़े सवालों का समाधान करते हुए उन्हें प्रोत्साहित भी किया.

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आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन

कृषि, बागबानी, डेयरी एवं कृषि अभियांत्रिकी से जुड़े इस मेले में देश की नामी कृषि यंत्र और ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों ने खेतीबारी के साथ ही हार्वेस्टिंग, प्रोसैसिंग और सिंचाई से जुड़े छोटेबड़े कृषि यंत्रों का प्रदर्शन और बिक्री की.

यंत्र निर्माता कंपनियों ने प्रदर्शनी में छोटे और मंझले किसानों का खास खयाल रखा था, जिस में कोनो वीडर, छोटी और बड़ी पावर के ट्रैक्टर, जायरोवेटर, रोटावेटर, बूम छिड़काव मशीन, मिनी हार्वेस्टर सहित सैकड़ों तरह के यंत्रों और कंबाइन का प्रदर्शन कर मौके पर बुकिंग कराने वालों को विशेष छूट का लाभ भी दिया गया.

इस प्रदर्शनी में खरपतवार नियंत्रण के लिए मैनुअल यंत्रों, फसल कटाई, निराईगुड़ाई सहित तमाम छोटे यंत्रों की रिकौर्डतोड़ बिक्री भी हुई. इस में सौ से अधिक कंपनियों ने आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया. संगोष्ठी में प्रमुख वैज्ञानिकों ने किसानों को तकनीक और समस्याओं के समाधान पर मार्गदर्शन दिया.

ड्रिप इरिगेशन, रेनगन और सिंचाई प्रबंधन से जुड़े उत्पादों को बनाने वाली देश की जानीमानी कंपनी जैन इरिगेशन सिस्टम लिमिटेड ने भी सिंचाई प्रबंधन से जुड़ी जानकारियों और विधियों को साथ करते हुए अपने उत्पादों को प्रोत्साहित किया.

इस के अलावा ट्रैक्टर, कंबाइन और अन्य कृषि यंत्रों में उपयोग होने वाले टायर की प्रमुख कंपनियों में बालकृष्ण इंडस्ट्रीज लिमिटेड (बीकेटी) और जेके टायर्स ने भी अपनी विस्तृत रेंज पेश की.

इस के अलावा करतार ट्रैक्टर, कंबाइन, वंसुधरा कंपनी के छोटे और मंझले हार्वेस्टिंग से जुड़े कृषि यंत्र, रिपर, शक्तिमान कंपनी के जुताई और छिड़काव से जुड़े यंत्रों की भारी रेंज किसानों को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल रही.

प्रदर्शनी में आने वाले किसानों को अपने उत्पादों से जोड़ने के लिए निर्माता कंपनियों ने जम कर गिफ्ट भी बांटे.

सरकारी महकमों के स्टाल पर रही भीड़

केंद्रीय कृषि अभियान अभियांत्रिकी संस्थान के प्रदर्शनी ग्राउंड में लगे अंतर्राष्ट्रीय मेले में मध्य प्रदेश सहित देश के तमाम राज्यों के कृषि और बागबानी के महकमों और आईसीएआर से जुड़ी संस्थाओं, डीआरडीओ, जल संसाधन विभाग आदि ने अपने स्टाल लगा कर किसानों को सरकारी योजनाओं सहित उन्नत खेती की जानकारियां साथ कीं, जिस में प्रमुख रूप से उद्यान विभाग, उत्तर प्रदेश, उद्यान विभाग, मध्य प्रदेश, उद्यान विभाग, तमिलनाडु, पंजाबहरियाणा और अन्य राज्यों के कृषि महकमों ने अपने स्टाल पर आने वाले किसानों को जानकारियां दीं.

रंगबिरंगी सब्जियां और फल रहे आकर्षण का केंद्र

मेले में विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार के महकमों के स्टाल पर प्रदर्शित की गई सब्जियों और फलों ने लोगों को अपनी तरफ खूब आकर्षित किया. इस में देशी और विदेशी दोनों तरह की सब्जियां और फल शामिल रहे.

इस मौके पर किसानों को रंगीन देशीविदेशी सब्जियों और फलों के व्यावसायिक उत्पादन व फायदे पर भी जानकारियां दी गईं, जिस में प्रमुख रूप से रंगीन पत्तागोभी, रंगीन फूलगोभी, रंगबिरंगी शिमला मिर्च की किस्में, चेरी, टमाटर की किस्में, रंगीन आम, स्ट्राबेरी, कमलम यानी ड्रैगन फू्रट सहित तमाम चीजें शामिल रहीं.

खूब बिके पौधे

भोपाल में लगे इस मेले में उन्नत किस्मों के फल और सब्जियों के पौधों की जम कर खरीदारी हुई, जिस में सब से ज्यादा, टमाटर, गोभी, बैगन, शिमला मिर्च सहित जैन इरिगेशन सिस्टम लिमिटेड द्वारा तैयार किए गए उन्नत किस्मों के आम, अमरूद, कटहल और केले की किस्मों की खरीदारी किसानों द्वारा की गई.

Farm N Food

‘फार्म एन फूड’ के स्टाल पर हुआ अवार्ड नौमिनेशन

इस कृषि मेले के मीडिया पार्टनर के रूप में दिल्ली प्रैस की पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा भी स्टाल लगाया गया था, जिस में ‘फार्म एन फूड’ के अलावा दिल्ली प्रैस की अन्य पत्रिकाओं ‘सरस सलिल’, ‘सरिता’, ‘चंपक’, ‘गृहशोभा’, ‘सत्यकथा’, ‘मनोहर कहानियां’ सहित अन्य भाषाओं की पत्रिकाओं का प्रदर्शन भी किया गया.

इस दौरान ‘फार्म एन फूड’ पत्रिका द्वारा फरवरी महीने में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्तावित ‘फार्म एन फूड कृषि सम्मान अवार्ड’ के लिए मौके पर ही तमाम किसानों और वैज्ञानिकों द्वारा अपने नौमिनेशन पेश किए गए.

इस दौरान दिल्ली प्रैस में ‘फार्म एन फूड’ पत्रिका की जिम्मेदारी संभाल रहे भानु प्रकाश राणा और मध्य प्रदेश में दिल्ली प्रैस ब्रांच के इंचार्ज भारत भूषण श्रीवास्तव द्वारा प्रकाशन से जुड़ी जानकारियां भी दी गईं.

इस के अलावा कृषि की पढ़ाई और शोध कर रहे छात्रों द्वारा अपनी नवीनतम खोज और शोध का प्रस्तुतीकरण भी किया गया. इस दौरान कार्यक्रम के संचालक वीजी श्रीवास्तव ने छात्रों से सवालजवाब भी किए, जिस में सवालों के सही जवाब देने वाले छात्रों को इनाम के रूप में ‘फार्म एन फूड’ पत्रिका दी गई.

डेयरी की खास चारा कटर मशीन

खेती के साथ ही किए जाने वाले कामों में पशुपालन भी एक खास काम है. पशुपालन में चारे का अहम रोल है खासकर डेयरी फार्मिंग में.  बहुत से किसान दुधारू पशुओ को  पाल कर डेयरी रोजगार से अच्छाखासा मुनाफा कमाते हैं.

किसानों के पास खेती की जमीन भी होती है, जिस में वह चारा फसल ज्वार, बाजरा, लोबिया, ग्वार, बरसीम, जई आदि फसलें उगा कर पशु के लिए चारे का इंतजाम करते हैं. हालांकि, 1-2 पशु रखने वाले किसान कुट्टी या चारा काटने के लिए हाथ से चलने वाली मशीन लगा कर रखते हैं, जिसे आम बोलचाल में टोका मशीन यानी गंड़ासा कहा जाता है.

इसी मशीन से किसान चारे की कटाई कर पशुओं को चारा खिलाते हैं. कुछ हरे चारे जैसे बरसीम, जई आदि तो इस मशीन से सरलता से कट जाते हैं, लेकिन जब ज्वार बाजरा, गन्ना (अंगोला), मक्का जैसी फसल से चारा बनाना हो, तो उन की कटाई में काफी मेहनत लगती है.

तब हमें जरूरत महसूस होती है किसी शक्ति चालित चारा कटाई मशीन की, जिस से कम मेहनत और कम समय में अधिक चारे की कटाई हो सके.

पशुपालकों और किसानों की इस समस्या का समाधान करती हैं पावर चालित एवं ट्रैक्टर चालित चारा काटने वाली मशीनें.

यहां ट्रैक्टर से चलने वाली कुट्टी मशीन के बारे में जानकारी दी गई है. यह चारा कटाई मशीन किसी भी तरह के चारे को आसानी से काट सकती है. ट्रैक्टर या इंजन चालित और बिजली से चलने वाली इस मशीन को चाफ कटर भी कहा जाता है.

ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाई जाने वाली यह मशीन कम समय में अधिक चारे की कटाई आसानी से करती है.

चाफ कटर मशीन

इस यंत्र की मदद से किसी भी तरह के चारे को छोटेछोटे साइज में कुट्टी करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. चारा काटने वाली मशीनों में इलैक्ट्रिक चाफ कटर और पोर्टेबल ट्रैक्टर से चलने वाली चारा काटने वाली मशीनें शामिल हैं, हम जिसे चाफ कटर मशीन कहते हैं.

fodder cutter machine

ट्रैक्टर से चलने वाली चारा कटाई मशीनें

ट्रैक्टर से चलने वाली कुट्टी मशीन को ट्रैक्टर के पीछे पीटीओ शाफ्ट से जोड़ कर चलाया जाता है. यह मशीन हर तरह के चारे को आसानी से काट सकती है. यह चाफ कटर मशीन एक आधुनिक हैवी ड्यूटी मशीन है. इस चाफ कटर मशीन का इस्तेमाल ज्यादातर डेयरी फार्मिंग करने वाले लोग भी करते हैं.

ट्रैक्टर से चलने वाली यह चारा कटर मशीन एक हैवी चेसिस फ्रेम के साथ जुड़ी रहती है, जिसे ट्रैक्टर में पीछे जोड़ कर एक जगह से दूसरी जगह आसानी से लाया और ले जाया जा सकता है. इस चाफ/चैफ कटर में एक बड़े ह्वील पर कई सारे हैवी ड्यूटी ब्लेड लगे होते हैं.

ट्रैक्टर से चलने वाली इस कुट्टी मशीन में 2, 3 और 4 ब्लेड लगे होते हैं. पशुपालक अपनी जरूरत के अनुसार ब्लेड की संख्या को कम या ज्यादा कर सकते हैं.

इस कटर मशीन में पीछे की ओर एक गियर भी होता है, जिस की मदद से आप चारे की मोटाई और बारीकी सैट कर सकते हैं. मशीन में गियर सिस्टम भी है. जरूरत पड़ने पर इसे रिवर्स भी घुमा सकते हैं. इस गियर से कटर की स्पीड भी एडजस्ट की जा सकती है.

चारा कटर मशीन से कटा हुआ चारा सीधे जमीन पर गिरता है. अगर आप चाहते हैं कि चारा जमीन पर न गिर कर एक जगह इकट्ठा हो, तो उस के लिए भी बंदोबस्त है. यह मशीन कटाई के बाद चारे को सीधे ही ट्रौली में भी गिरा सकती है.

यह चारा कटाई मशीन कई घंटों तक लगातार काम कर सकती है. इस के लिए किसी खास देखभाल की भी जरूरत नहीं है.

मिनी चारा कटर एग्रोमैक-1000 एम.

सम्यक एग्रो इंडस्ट्रीज के पास चारा काटने वाली मशीनों की कई सीरीज हैं, जिन की अपनी अलगअलग खूबियां हैं.

इस मिनी चारा कटर से ज्वार, बाजरा, गन्ना, बरसीम, सूखा व हरे अन्य चारे कड़वा आदि की कटाई की जाती है.

इस यंत्र में लगे ब्लेड एमएस स्टील के बने होते हैं. इलैक्ट्रिक मोटर के साथ वी वैल्ट पुली के साथ फिट की गई है.

मिनी चारा कटर एग्रोमैक 1000 एम. की खासीयतें

इस में 2 हौर्सपावर की मोटर लगी है और चारा कटाई के लिए 2 ब्लेड लगे हैं. चारे को आगे बढ़ाने के लिए 2 रोलर लगे हैं. इस मशीन के काम करने की कूवत 1000 किलोग्राम प्रति घंटा तक है. हरे व सूखे चारे में बदलाव हो सकता है.

कड़वा कुट्टी मशीन/रोका- एग्रोमैक-200 एचएम

बिजली व हाथ दोनों तरह से चारा काटने वाली इस मशीन को रोका मशीन भी कहते हैं. यह पुराने समय में इस्तेमाल होने वाली चारा मशीन का ही आधुनिकीकरण है. इस में काफी कम बिजली की खपत होती है. अगर बिजली नहीं है, तो काम चलाने लायक चारा हाथ से भी काटा जा सकता है.

यह पावर कम हैंड औपरेटिड चारा कटाई मशीन है, जो सस्ते दाम में बाजार में मिल जाती है. इस रोका (चारा कटाई) मशीन को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भी इस्तेमाल किया जाता है. यह मशीन ग्राहकों की जरूरत के अनुसार अनेक विशेषताओं में भी मिल जाती है.

डेयरी फार्म व वर्मी कंपोस्ट बनाने वाली इकाइयों में भी यह चारा कटाई मशीन काफी उपयोगी साबित हो रही है.

खासीयतें

इस मशीन को अगर हाथ से न चला कर पावर से चलाना है, तो इस के लिए 1.5 हौर्सपावर की मोटर या 2 हौर्सपावर का इंजन चाहिए.

इस में चारा काटने के लिए 2 ब्लेड लगे होते हैं. इस में चारा आधा इंच से ले कर पौना इंच तक के साइज में काटा जाता है और एक घंटे में लगभग 300 किलोग्राम चारा कट जाता है.

प्रकाश चारा कटर मशीन

यह ट्रैक्टर चालित चारा कटर मशीन है, जो 2, 3 और 4 ब्लेडों में उपलब्ध है. इस मशीन से हरा व सूखा चारा, जिस में ज्वार, बाजरा, मक्का का कड़वा भी काटा जाता है.

इस मशीन में मजबूत फ्रैक और हैवी ड्यूटी गियर होने के कारण मशीन लंबे समय तक काम करती है.

यह चारा कटर मशीन 2 टायरों वाले फ्रैम पर लगी होती है, इसलिए इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सकता है.

अधिक जानकारी के लिए फोन नंबर 0562-4042153 या फिर मोबाइल नंबर 09897591803 पर बात कर सकते हैं.

इन कृषि यंत्रों की खरीद पर सरकार की ओर से सब्सिडी का भी लाभ मिलता है.

केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत चारा काटने वाली मशीनों पर पशुपालकों और किसानों को अच्छीखासी सब्सिडी देती है. प्रदेश सरकारें भी अपने नियमानुसार छूट देती हैं. यह सब्सिडी 50 फीसदीतक भी हो सकती है या इस से अधिक भी हो सकती है.

आलू खुदाई करने वाला खालसा पोटैटो डिगर (Potato Digger)

खालसा डिगर आवश्यक जनशक्ति और समय बचाता है. इस डिगर को जड़ वाली फसलों की खुदाई के लिए डिजाइन किया गया है. इस का गियर बौक्स में गुणवत्तापूर्ण पुरजों का इस्तेमाल किया गया है, जो लंबे समय तक साथ देने का वादा करते हैं.

कृषि यंत्र पर आप के द्वारा किया गया खर्चा आप को रिटर्न देने की गारंटी के साथ हार्वेस्टर वाली सभी जरूरतें पूरी करता है. इस पोटैटो डिगर से एक दिन में तकरीबन 6-8 एकड़ क्षेत्रफल की आलू खुदाई की जा सकती है.

यह भारत सरकार द्वारा परीक्षण किया गया आलू खुदाई यंत्र है.

खालसा सिंगल कन्वेयर पोटैटो डिगर

यह सिंगल कन्वेयर 2 लाइनों में आलू खुदाई करने वाला यंत्र है. भारी मिट्टी वाले खेत में भी यह आसानी से काम करता है. इस यंत्र में लगा ङ्क आकार का नोज ब्लेड आलू को खराब होने से बचाता है और सिंगल कन्वेयर आलू से मिट्टी अलग कर उसे साफसुथरा करता है.

इस यंत्र में लगा बैक रोलर खेत की मिट्टी को समतल कर उचित सतह बनाता है, जिस से खुदाई के बाद सभी आलू ऊपरी सतह पर आ जाते हैं. इस वजह से आलू चुनने में दिक्कत नहीं होती.

सभी तरह की मिट्टी के लिए खास पोटैटो डिगर

खालसा ब्रांड का 2 लाइनों में आलू खोदने वाला यह यंत्र चलाने में बहुत आसान है. यह आसानी से ट्रैक्टर से जुड़ सकता है. यह यंत्र सभी प्रकार की मिट्टी, जैसे रेतीली, चिकनी और कठोर सभी के लिए उपयुक्त है. कम समय में भी अधिक रकबे को यह कवर करता है और आलू को नुकसान पहुंचाए बिना उस की बेहतर खुदाई करता है.

फ्रंट कन्वेयर और यंत्र में लगी यूनिट के साथ यह आलू का 100 फीसदी ऐक्सपोजर सुनिश्चित करता है अर्थात आलू मिट्टी के ऊपर आ कर दिखता है, जिस से आलू को खेत से उठाने में भी आसानी होती है.

खालसा विंड्रो पोटैटो डिगर

विंड्रो सिस्टम के साथ लगे 2 पंक्ति वाले डिगर एलिवेटर कटाई की नवीनतम तकनीक प्रदान करते हैं. यह पूरी तरह से एडजस्टेबल है और 20 इंच की डिगर हाई कार्बन स्टील डिस्क में गहराई बनाए रखने के लिए पीछे की तरफ 2 पहिए लगे हैं.

इस यंत्र से आलू खुदाई का समय अन्य डिगर के मुकाबले एकतिहाई ही लगता है, जिस से मेहनत, समय और पैसे की काफी अधिक बचत होती है.

2 पंक्ति वाला पोटैटो हार्वेस्टर

खालसा का ट्रैक्टरचालित 2 पंक्ति आलू कंबाइन हार्वेस्टर वी-नोज खुदाई फ्रंट ब्लेड के साथ आता है. यह भारत का पहला स्वचालित आलू हार्वेस्टर है.

कन्वेयर बेल्ट की मदद से आलू बिना मिट्टी के साफसुथरा निकलता है, जो यंत्र में लगे आलू टैंकर में इकट्ठा किया जाता है. उस के बाद आलू को अपनी सुविधानुसार  ट्रौली/बालटियों में ले जाया जा सकता है. ये सभी काम स्वचालित तरीके से होते हैं. इस में किसी मानवशक्ति की जरूरत नहीं होती.

अधिक जानकारी के लिए आप फोन नंबर 0121-2511627, 6541627 पर बात कर सकते हैं या वैबसाइट पर जानकारी ले सकते हैं.

गहरी जुताई और मल्चिंग के लिए ट्रैक औन रोटरी टिलर (Rotary Tiller)

गहरी जुताई और गन्ना अवशेष प्रबंधन के लिए ट्रैक औन का रोटरी टिलर (Rotary Tiller) एक मजबूत कृषि यंत्र है. यह बेहतर किस्म का रोटावेटर है. यह रोटरी टिलर (Rotary Tiller) खासकर गहरी जुताई के लिए बनाया गया है. यंत्र की मजबूती और गियर बौक्स भारी काम करने योग्य है. साथ ही, इस की खासीयत यह है कि इसे मध्यम और भारी ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर काम किया जा सकता है. 40 हौर्सपावर से ले कर 75 हौर्सपावर तक के ट्रैक्टर के साथ यह बखूबी काम करता है.

खासीयतें

ट्रैक औन रोटरी टिलर यंत्र (Rotary Tiller) 1 या 2 जुताई में ही वर्षा से पहले या वर्षा के बाद बोआई के लिए खेत तैयार कर देता है.

गन्ना फसल कटने के बाद उस की जड़ों को, केले, कपास, अरंडी, गेहूं, मक्का, सब्जियों आदि वाले खेतों के अवशेषों को भी मिट्टी में मिलाने का काम करता है.

इस के अलावा यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में सहायक है. इस से बीज प्रजनन, उस का अंकुरण अच्छा होता है, जिस से फसल पैदावार अच्छी मिलती है.

यह रोटरी टिलर (Rotary Tiller)  गीले, सूखे या फिर सख्त खेत में भी काम करने की कूवत रखता है. यह एक मजबूत कृषि यंत्र है.

रोटरी टिलर (Rotary Tiller)इस यंत्र को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिस से ट्रैक्टर पर भी अधिक लोड नहीं पड़ता. टायर स्लिप नहीं होते. इसी वजह से डीजल की खपत में कमी होती है. इस रोटरी टिलर (Rotary Tiller) में 4 मौडल उपलब्ध हैं.

एसआरटी-5 : यह रोटरी टिलर (Rotary Tiller) तकरीबन 150 सैंटीमीटर (5 फुट) की चौड़ाई में काम करने में सक्षम है. इसे 45 हौर्सपावर या अधिक  हौर्सपावर के ट्रैक्चर के साथ चलाया जाता है. इस में 36 एल व सी टाइप के ब्लेड लगे हैं, जो 177 मिलीमीटर की गहराई तक काम करते हैं. इस यंत्र का कुल वजन 437 किलोग्राम है.

एसआरटी-6 : रोटरी टिलर (Rotary Tiller) का यह मौडल 178 सैंटीमीटर की चौड़ाई के एरिया को कवर करता है और इसे 55 हौर्सपावर या अधिक हौर्सपावर के ट्रैक्टर के साथ इस्तेमाल किया जाता है. इस में 42 ब्लेड लगे हैं, जो 177 मिलीमीटर की गहराई तक काम करते हैं और इस यंत्र का वजन लगभग 467 किलोग्राम है.

एसआरटी-7 : 200 सैंटीमीटर तक चौड़ाई में काम करने वाले इस रोटरी टिलर (Rotary Tiller) में 48 ब्लेड लगे हैं. इस यंत्र को 65 हौर्सपावर या इस से अधिक हौर्सपावर वाले ट्रैक्टर के साथ काम किया जा सकता है. इस यंत्र का कुल वजन 497 किलोग्राम है.

एसआरटी-8 : यह यंत्र 221 सैंटीमीटर की चौड़ाई तक काम करता है. इस यंत्र को चलाने के लिए 75 हौर्सपावर के ट्रैक्टर की जरूरत होगी. इस यंत्र का कुल वजन 527 किलोग्राम है. इस में 54 ब्लेड लगे हैं, जो अपने काम को बखूबी अंजाम देते हैं.

इस यंत्र के बारे में कहा जाए, तो यह एक मजबूत, चलने में हलका और काम में बेहतर है.

इस के मौडल की अलगअलग खासियतें हैं. जैसे हैवी ड्यूटी साइड गियर, मजबूत चेन, मल्टीस्पीड हैवी ड्यूटी गियर बौक्स सी और एल आकार में मजबूत ब्लेड, हैवी ड्यूटी साइड डिस्क आदि, जो इस यंत्र की मजबूती को दिखाते हैं.

जीवन सुरक्षा योजना में आयु सीमा समाप्त, मिलेगी 5 लाख तक मदद

चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार द्वारा किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना में आयु सीमा को समाप्त करने का बड़ा फैसला लिया है. अब 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 65 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों को भी योजना के तहत लाभ मिल सकेगा. इस योजना के अंतर्गत किसानों, खेतिहर मजदूरों, मार्केट यार्ड में काम करने वाले मजदूरों को कृषि मशीनरी पर काम करने के दौरान मृत्यु या अंगहानि होने पर 37,500 रुपए से ले कर 5 लाख रुपए तक की माली मदद प्रदान की जाती है.

यह निर्णय मुख्यमंत्री  नायब सिंह की अध्यक्षता में यहां हुई कृषि एवं किसान कल्याण, बागबानी विभाग और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की समीक्षा बैठक में लिया गया. बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  कंवर पाल भी मौजूद रहे.

मुख्यमंत्री नायब सिंह ने बिंदुवार सभी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए विस्तृत दिशानिर्देश दिए.  उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी परियोजनाओं को तय समय में पूरा किया जाए. किसी भी स्तर पर ढिलाई बरदाश्त नहीं की जाएगी. इस के साथ ही आगामी 15 जुलाई से कालका में सेब मंडी में भी काम शुरू किया जाए.