सांची का नैचुरल नारियल पानी (Coconut Water) लौंच

भोपाल: पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए दुग्ध उत्पादन से बड़ा कोई रास्ता नहीं है. मध्य प्रदेश सहकारी दुग्ध संघ अपने सांची ब्रांड के माध्यम से नएनए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में ला रहा है. हाल ही में सांची ने नैचुरल नारियल पानी लौंच किया है, जो कि अत्यंत गुणवत्तापूर्ण और स्वास्थ्यवर्धक है.भविष्य में दुग्ध संघ की माइनर मिलेट्स कोदोकुटकी के उत्पाद भी बाजार में लाने की योजना है.

मंत्री लखन पटेल ने भोपाल सहकारी दुग्ध संघ के मुख्य डेयरी प्लांट में सांची के नवीन उत्पाद पाश्चरीकृत नैचुरल नारियल पानी की बिक्री का शुभारंभ किया. इस अवसर पर वेटरनरी कौंसिल औफ इंडिया के अध्यक्ष डा. उमेश शर्मा, संचालक पशुपालन एवं डेयरी डा. पीएस पटेल आदि उपस्थित थे.

मंत्री लखन पटेल ने स्वयं भी नारियल पानी पिया और उस की सराहना की. कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने सांची नारियल पानी का सेवन किया और उसे गुणवत्ता एवं स्वादयुक्त बताया.

उन्होंने कहा कि भोपाल दुग्ध संघ की आय निरंतर बढ़ रही है. इस वर्ष अभी तक लगभग 700 करोड़ रुपए का लाभ दुग्ध संघ को हुआ है. दुग्ध संघ निरंतर किसानों के लाभ के लिए कार्य तो कर ही रहा है, संघ के कर्मचारियों के कल्याण में भी पीछे नहीं है. अब किसानों के साथ ही कर्मचारियों का भी बीमा कराया जाएगा.

मंत्री लखन पटेल ने आगे कहा कि सहकारिता का मूल सिद्धांत है पारदर्शिता और जुड़े हुए हर व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना. हमारी सरकार इसी सिद्धांत पर कार्य कर रही है. हमारा उद्देश्य है दुग्ध उत्पादक किसानों को अधिक से अधिक आमदनी हो और हम इस के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के नेतृत्व में इस वर्ष हमारी सरकार गौ संरक्षण एवं गौ संवर्धन वर्ष मना रही है. इन कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें और अपना योगदान दें.

भोपाल दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरपी तिवारी ने बताया कि दूध, दही, श्रीखंड, बृज पेड़ा, केशव पेड़ा, सांची नीर और सांची खीर के बाद अब सांची दुग्ध संघ अपना नया उत्पाद शुद्ध नैचुरल और पाश्चुरीकृत “सांची नारियल पानी” बाजार में लाया है. इसे नारियल उत्पादन क्षेत्र तमिलनाडु के पोलाची (जिला कोयंबटूर) में 200 एमएल की बोतल में पैक कराया जा रहा है. इस का बाजार मूल्य 50 रुपया प्रति बोतल रखा गया है और इस की उपयोग अवधि 9 माह है. इसे तैयार करने के लिए ताजे नारियल से संयंत्र में हैंड्स फ्री तकनीकी से पानी निकाला जाता है और उसे रिटोर्ट मेथड से 99 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान तक गरम कर पाश्चरीकृत कर बोतल में पैक किया जाता है.

उन्होंने बताया कि भविष्य में दुग्ध संघ की ब्रेड, चाय पत्ती, चिप्स आदि भी बाजार में लाने की योजना है.

6 महीने में 6 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण (Vaccination)

देवास : उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, देवास के डा. सीएस चौहान ने बताया कि केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा पशु कल्याण के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रमों में से मुख्य रूप से टीकाकरण, उपचार, चलित चिकित्सा इकाइयां संचालन, गौशाला संचालन एवं राजमार्गों से पशु हटाना आदि कार्य पशुपालन विभाग के अमले द्वारा जिले में किया जा रहा है.

उन्‍होंने आगे यह भी बताया कि विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक टीकाकरण में 6 लाख, 32 हजार, 619 पशुओं में विभिन्न टीका किया गया. 1 लाख, 38 हजार, 815 पशुओं का उपचार संस्थाओं द्वारा किया गया. चलित चिकित्‍सा इकाई का साल 1962 से संचालन किया जा रहा है, जो घरघर पहुंच कर पशुओं में उपचार करती है. इस में 4377 पशुपालकों को घर पहुंच कर सेवाएं दी गईं.

जिले के मुख्य राजमार्गों पर गौ पैट्रोलिंग द्वारा पशुओं को सड़क हादसों से बचाने के लिए सड़क से गौशाला पहुंचाया जा रहा है. जिले में 84 गौशाला संचालित हैं, जिस में 10 हजार, 845 गौवंश संरक्षित हैं, जिन को इस वर्ष वर्तमान तक 491.04 लाख का अनुदान सहायता दी गई है.

मत्स्यपालन के क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

नई दिल्ली : 22 सितंबर, 2024 को देश में मत्स्यपालन क्षेत्र के विकास के लिए कृषि भवन, दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पशुपालन, मत्स्यपालन एवं डेयरी व पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह के मध्य हुई.

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मत्स्यपालन के क्षेत्र में आईसीएआर द्वारा काफी अच्छा अनुसंधान किया जा रहा है, नई प्रौद्योगिकियां विकसित की गई हैं, वहीं अनेक पहल की गई हैं, इन सब का लाभ देशभर के किसानों को और भी तत्काल अधिकाधिक कैसे मिले, इस संबंध में विचारविमर्श हुआ एवं संबंधित अधिकारियों को दिशानिर्देश दिए गए.

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मत्स्यपालन का क्षेत्र गत वर्षों में देश में काफी विकास हुआ है, वहीं आगे और भी विकास की असीम संभावनाएं हैं, साथ ही, इस से रोजगार के अवसर भी बड़ी संख्या में बढ़ेंगे. इस दिशा में यह फैसला लिया गया है कि समस्त संभावनाओं को तलाशने, क्रियान्वित करने के लिए सभी संबंधित विभाग एकसाथ मिलबैठ कर काम करें, प्रधानमंत्री मोदी की भी यहीं मंशा रही है कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र मिल कर काम करें, ताकि किसानों, मत्स्यपालकों, पशुपालकों आदि को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचे.

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छोटे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले. माडल फार्म को विकसित किया जाना चाहिए, ताकि किसान संबद्ध कार्यों द्वारा भी अपनी आय बढ़ा सकें. खेती व संबद्ध क्षेत्रों में किसानों व अन्य लोगों की गरीबी दूर हो कर आमदनी बढ़ना चाहिए, इस पर सरकार का फोकस है और अनेक योजनाओं व कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिशा में काम किया जा रहा है.

fisheries

बैठक में इस संबंध में मत्स्यपालन के क्षेत्र में एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया है, जिस में मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय व आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित रहेंगे. समिति नियमित बैठकें करेगी व रोडमैप भी तैयार करेगी.

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस में राज्यों की सहायता ली जाए व सभी ताकत से जुटें, ताकि अच्छे परिणाम आएं. बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सफल किसानों की बातें अधिकाधिक प्रसारित करने के साथ ही जागरूकता कार्यक्रम और शिविर भी आयोजित किए जाएं.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि मत्स्यपालन में आईसीएआर ने काफी अच्छा रिसर्च किया है, जो बहुत उपयोगी है. इसे किसानों, गांवगांव, नए स्टार्टअप्स तक पहुंचाने के लिए बैठक की गई है, ताकि आगे और भी सुधार हो सके.

उन्होंने बताया कि मछली उत्पादन में नीली क्रांति हुई है और भारत आज विश्व में दूसरे स्थान पर है. सालाना 60,000 करोड़ रुपए का निर्यात हो रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ भी बड़े पैमाने पर देश के किसानों को मिल रहा है. साथ ही, दुग्ध उत्पादन में भारत दुनिया में पहले नंबर है, निर्यात बढ़ाने व देश को एफएमडी मुक्त करने पर केंद्र द्वारा योजनाबद्ध ढंग से काम किया जा रहा है.

बैठक में आईसीएआर के उपमहानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) डा. जेके जेना ने 8 मत्स्य अनुसंधान संस्थानों के महत्वपूर्ण अनुसंधान क्षेत्रों और प्रौद्योगिकी विकास की प्रस्तुति दी. बैठक में मत्स्यपालन विभाग के सचिव डा. अभिलक्ष लिखी और आईसीएआर के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक भी उपस्थित थे.

पशुपालक रामरतन यादव कर रहे अच्छी कमाई

कटनी : आचार्य गौ संवर्धन योजना से लाभान्वित गांव बड़खेड़ा के बाशिंदे पशुपालक रामरतन यादव की डेयरी का भ्रमण उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा किया. रामरतन यादव द्वारा वर्ष 2018 में योजनान्तर्गत स्टेट बैंक औफ इंडिया बहोरीबंद बैंक से 5 पशु के लिए लोन ले कर डेयरी व्यवसाय शुरू किया गया. इस व्यवसाय से इन्हें लगभग 30,000 रुपए प्रतिमाह की आय हो रही है.

व्यवसाय अच्छा चलने के कारण रामरतन द्वारा बैंक का लोन भी समय पर चुका दिया है. समय पर बैंक लोन चुका दने के कारण अब इन्हें बैंक से 1 लाख, 63 हजार रुपए का केसीसी भी लिया गया है, जिस का भुगतान भी रामरतन द्वारा समय पर किया जा रहा है.

पशुओं की संख्या बढ़ने के कारण 60 से 70 लिटर दूध प्रतिदिन उत्पादन होने से डेयरी का व्यवसाय अच्छा चलने के परिणामस्वरूप प्राप्त हाने वाली आय से ही रामरतन द्वारा ढाई एकड़ जमीन भी खरीद ली है और पशुओं की खुराक के लिए इन्हें चारा काटने की मशीन भी पशुपालन विभाग से प्रदान की गई है.

टोल फ्री नंबर 1962 पर घर बैठे पशुओं का इलाज

कटनी : जिले में चलित पशु चिकित्सा इकाई के तहत संचालित 7 एंबुलेंस वाहनों के माध्यम से अब तक 8,000 पशुओं का घर पहुंच कर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई है. घर पहुंच कर चिकित्सा सुविधा के संचालन के लिए काल सैंटर के टोल फ्री नंबर 1962 पर डायल कर किसान और पशुपालक पशुओं के लिए घर पर ही चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकते हैं.

उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के डा. आरके सिंह ने बताया कि जिले में संचालित 7 एंबुलेंस वाहन में प्रत्येक में एक डाक्टर, एक पैरावेट और एक ड्राइवर कम अटेंडेंट की तैनाती की गई है. एंबुलेंस वाहन में पशुओं के उपचार से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

घरबैठे चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए पशुपालकों से मात्र 150 रुपए लिया जाता है और सभी उपचार एवं दवाएं निःशुल्क हैं. पशुपालकों से पशुओं के उपचार के बाद अब तक 12 लाख रुपए का शुल्क भी प्राप्त हुआ है.

पशुपालकों के लिए वरदान बनी पशु चिकित्सा एंबुलेंस योजना केंद्र और राज्य सरकार की सहभागिता से संचालित हुई है. प्रदेश में टी एंड एम प्राइवेट लिमिटेड आउटसोर्स एजेंसी द्वारा पशु चिकित्सा एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है. चिकित्सा एंबुलेंस योजना कटनी जिले के सभी 6 विकासखंडों और कटनी शहर मे संचालित है.

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‘गायपालन’ (Cow husbandry) विषय पर पांचदिवसीय प्रशिक्षण

भागलपुर : कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर के प्रशिक्षण कक्ष में ‘गायपालन’ विषय पर पांचदिवसीय प्रशिक्षण का उद्घाटन केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, डा. राजेश कुमार द्वारा किया गया. प्रशिक्षण के उद्घाटन के अवसर उन्होंने कहा कि पशुपालन का काम छोटे किसान से ले कर बड़े किसान तक करते हैं. इस प्रशिक्षण के माध्यम से गायपालन की विभिन्न तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिस का उपयोग कर के आप एक सफल पशुपालक बन  सकते हैं और इसे स्वरोजगार के रूप में अपना कर आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं.

प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में बिहार कृषि महाविद्यालय के सस्य वैज्ञानिक डा. संजीव गुप्ता ने हाइड्रोपोनिक्स के माध्यम से सालभर पौष्टिक चारा उत्पादन संबंधी जानकारी दी

केंद्र के पशु वैज्ञानिक डा. मो. ज्याउल होदा द्वारा गायपालन से संबंधित विभिन्न आयामों की तकनीकी जानकारी जैसे गाय के रहने के लिए जगह का चयन एवं बनावट, उस के खाने के लिए उचित सामग्री एवं मात्रा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई गई. साथ ही, समेकित कृषि प्रणाली, कृषि विज्ञान केंद्र एवं प्रक्षेत्र, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर का दुग्ध उत्पादन इकाई/बकरीपालन इकाई एवं अन्य इकाई का परिभ्रमण कराया गया.

इस अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिक ई. पंकज कुमार, डा. पवन कुमार, डा. मनीष राज, रूबी कुमारी, ईश्वर चंद्र सहित जिले के 25 गायपालक और किसानों ने भाग लिया.

पालतू भेड़ और बकरियों (Pet Sheep and Goats) को एफएमडी (FMD) से बचाने के लिए होगा टीकाकरण (Vaccination)

नई दिल्ली : केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने टीकाकरण के जरीए वर्ष 2030 तक एफएमडी मुक्त भारत (एफएमडी खुरपरा एवं मुंहपका रोग) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की.

उन्होंने कहा कि पशुधन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाता है. यह क्षेत्र पशुधन की देखभाल करने वाले किसानों, विशेषकर ग्रामीण परिवारों और महिलाओं की आजीविका में योगदान देने वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल जागरूकता, पहुंच और रुचि चिंता का विषय है, जिस के कारण आजीविका में भारी नुकसान हो रहा है. बैठक में मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और पशुपालन एवं डेयरी विभाग की सचिव अलका उपाध्याय भी उपस्थित थीं.

बैठक में भारत को वर्ष 2030 तक एफएमडी मुक्त बनाने की कार्ययोजना पर चर्चा की गई. बैठक के दौरान यह बताया गया कि देश में, विशेष रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में सीरो सर्विलांस के आधार पर जोन बनाने के लिए सभी आकलन किए गए हैं, जहां टीकाकरण अग्रिम चरण में है, उन्हें एफएमडी मुक्त क्षेत्र घोषित करने के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है. इस से निर्यात के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ने बताया कि पशुओं में होने वाले रोग, पशुधन क्षेत्र के विकास में एक गंभीर बाधा है. अकेले एफएमडी के कारण, प्रति वर्ष लगभग 24,000 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है. इस बीमारी के नियंत्रण और उन्मूलन के परिणामस्वरूप दूध उत्पादन में वृद्धि होगी, लाखों किसानों की आजीविका सुदृढ़ होगी और उन की आय में वृद्धि होगी. इतना ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार दूध और पशुधन उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होगी.

भारत सरकार ने 2 प्रमुख बीमारियों एफएमडी और ब्रुसेलोसिस की रोकथाम के उद्देश्य से टीकाकरण के लिए एनएडीसीपी की प्रमुख योजना शुरू की. कार्यक्रम के तहत मवेशियों और भैंसों में एफएमडी की रोकथाम के लिए 6 मासिक टीकाकरण भेड़ और बकरियों में शुरू किया जाता है. देश के 21 राज्यों में पशुओं में एफएमडी की रोकथाम हेतु टीकाकरण का चौथा दौर पूरा हो चुका है. अब तक कुल मिला कर लगभग 82 करोड़ टीकाकरण किए गए हैं. कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों में राउंड 5 पहले ही पूरा हो चुका है.

कार्यक्रम के तहत टीकाकरण के माध्यम से देश से एफएमडी के उन्मूलन के उद्देश्य को पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2030 है. इस समय टीकाकरण के माध्यम से मिलने वाले लाभों को सुरक्षित और कारगर बनाने के लिए एफएमडी मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में संबंधित राज्यों के साथसाथ पशुओं की आवाजाही का पता लगाने, रोग की निगरानी, जैव सुरक्षा संबंधी उपायों आदि जैसे क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने की आवश्यकता है.

इस पहल को तेज करने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रियों ने जमीनी स्तर पर जोनिंग की अवधारणा को लागू करने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करने के क्रम में समर्थन और मार्गदर्शन दिया है. जोनिंग की अवधारणा और जोन को एफएमडी मुक्त बनाए रखने की पूर्व शर्तों और जरूरतों के बारे में चर्चा की गई.

यह देखा गया कि इस के लिए न केवल संबंधित राज्यों के साथ गहन सूक्ष्म नियोजन की आवश्यकता है, बल्कि टीकाकरण के माध्यम से वर्ष 2030 तक इस बीमारी को खत्म करने के अंतिम उद्देश्य को निर्धारित करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप की भी आवश्यकता है.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि इस बृहद क्रियाकलाप में राज्यों को गुणवत्तापूर्ण वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है. उन्होंने यह भी बताया कि यह गर्व की बात है कि सभी पशु टीके आईसीएआर संस्थानों द्वारा विकसित किए गए हैं और घरेलू स्तर पर उत्पादित किए जा रहे हैं. भारत अब अन्य चुनिंदा एशियाई देशों को टीके निर्यात करने में सक्षम है.

विभाग की ओर से राज्य सरकारों को सहायक उपकरण, टीका लगाने वालों को पारिश्रमिक, जागरूकता पैदा करने और अपेक्षित कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना आदि के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है. एफएमडी टीकाकरण की प्रभावकारिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए गतिविधियों की निगरानी अत्यधिक वैज्ञानिक तरीके से सीरो मौनिटरिंग और सीरो सर्विलांस के माध्यम से की जाती है, जो दुनिया में पशुधन में सब से बड़ा अभियान है.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के निर्देशों के तहत एफएमडी के खिलाफ चरने वाले भेड़ और बकरियों के टीकाकरण का निर्णय देश की ऐसी सभी आबादी तक बढ़ा दिया गया है. टीके की आपूर्ति शुरू हो गई है और लद्दाख ने पहले ही झुंडों का टीकाकरण शुरू कर दिया है. यह सरकार द्वारा प्रतिबद्ध सौ दिवसीय कार्ययोजना में से एक है. अतिसंवेदनशील और चरने वाले झुंडों में टीकाकरण की बारीकी से निगरानी की जाती है. इस का एक कारण यह भी है कि कई क्षेत्रों में भेड़बकरियों को पर्यावरण में संक्रामक वायरस की अनुपस्थिति स्थापित करने के लिए प्रहरी जानवरों के रूप में भी इस्तेमाल किया जाना है.

मंत्री राजीव रंजन ने प्रतिभागियों से एफएमडी मुक्त भारत की इस चुनौती को स्वीकार करने की अपील करते हुए पशुपालन क्षेत्र के गैरसरकारी संगठनों सहित सभी हितधारकों से एफएमडी मुक्त भारत के लक्ष्य में योगदान देने को कहा. उन्होंने पशुओं में टीकाकरण की सख्त निगरानी और पर्यवेक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला.

जनसमर्थ पोर्टल (Jan Samarth Portal) से पूरे देश के मछुआरों को सुविधा

नई दिल्ली: मत्स्यपालन विभाग ने जनसमर्थ पोर्टल पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) मत्स्यपालन योजना के एकीकरण का सफलतापूर्वक उद्घाटन किया, जिस से पूरे देश में मछुआरों, मछली किसानों आदि के लिए ऋण सुविधा तक पहुंच में क्रांतिकारी बदलाव आया है. वर्चुअल समारोह में मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार, के संयुक्त सचिव, सागर मेहरा, वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव, पंकज शर्मा, और मुख्य महाप्रबंधक, (डिजिटल परिवर्तन और ई-कौमर्स), भारतीय स्टेट बैंक के राजीव रंजन प्रसाद सहित सम्मानित गणमान्य व्यक्तियों ने भाग ले कर केसीसी मत्स्यपालन अनुप्रयोग प्रसंस्करण प्रणाली के डिजिटलीकरण में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया.

कार्यक्रम में बोलते हुए सागर मेहरा ने मत्स्यपालन क्षेत्र में ऋण प्रणाली के डिजिटलीकरण में सरकार के अथक प्रयासों पर प्रकाश डाला. उन्होंने योजना को जनसमर्थ पोर्टल पर एकीकृत करने के परिवर्तनकारी प्रभाव पर जोर दिया, जो संस्थागत ऋण सुविधाओं तक निर्बाध पहुंच की सुविधा प्रदान करेगा और मत्स्यपालन के समावेशी विकास को बढ़ावा देगा.

जनसमर्थ पोर्टल पर केसीसी मत्स्यपालन योजना का एकीकरण मछलीपालन क्षेत्र में मछली किसानों और हितधारकों के लिए एक डिजिटल मंच प्रदान करने की दिशा में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है. इस पहल का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, वर्कफ्लो को डिजिटल बनाना और लाभार्थियों के लिए बेहतर पहुंच और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए कुशल ऋण प्रबंधन सेवाएं प्रदान करना है.

मत्स्यपालन विभाग के प्रभावशाली नेतृत्व में, केसीसी मत्स्यपालन योजना के बारे में जागरूकता लाने के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं, जिस के परिणामस्वरूप देशभर में मत्स्यपालन और जलीय कृषि गतिविधियों में लगे लाभार्थियों को 3,01,309 से अधिक केसीसी कार्ड जारी किए गए हैं. यह ठोस प्रयास मछुआरों और मछली किसानों को ऋण सुविधाओं को सशक्त बनाने और मत्स्यपालन उद्योग के विकास को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.

जनसमर्थ पोर्टल पर केसीसी मत्स्य

पालन योजना का एकीकरण मत्स्य पालन क्षेत्र में दक्षता, पारदर्शिता और समावेशिता के एक नए युग की शुरुआत है. देशभर के मछुआरे और मछली किसान अब आसानी से अपने केसीसी ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं और अपने ऋण खातों का औनलाइन प्रबंधन भी कर सकते हैं

पशुओं को गरमी और लू (Heat and Humidity) से यों बचाएं

वर्तमान में जरूरत से ज्यादा गरम मौसम और तेज हवाओं का प्रभाव पशुओं की सामान्य दिनचर्या को प्रभावित करता है. भीषण गरमी की स्थिति में पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबंधन और उपायों, जिन में ठंडा व छायादार पशु आवास, साफ पीने का पानी आदि पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

तेज गरमी से बचाव प्रबंधन में जरा सी लापरवाही से पशु को ‘लू’ लग सकती है. ‘लू’ से ग्रस्त पशु को तेज बुखार हो जाता है और पशु सुस्त हो कर खानापीना बंद कर देता है. शुरू में पशु की सांस गति या नाड़ी की गति तेज हो जाती है. कभीकभी नाक से खून भी बहने लगता है.

पशुपालक के समय पर ध्यान न देने से पशु की सांस गति धीरेधीरे कम होने लगती है व पशु चक्कर खा कर बेहोशी की दशा में ही मर जाता है.

पशुओं के लिए पक्के पशु आवास की छत पर सूखी घास या कडबी रखें, ताकि छत को गरम होने से रोका जा सके.

पशु आवास की कमी में पशुओं को छायादार पेड़ों के नीचे बांधें. पशु आवास में गरम हवाओं को सीधा न आने दें. इस के लिए लकड़ी के फट्टे या बोरी के टाट को गीला कर दें, जिस से पशु आवास में ठंडक बनी रहे. पशु आवास में आवश्यकता से अधिक पशुओं को न बांधें और रात में पशुओं को खुले स्थान पर बांधें.

गरमी के मौसम में पशुओं को हरा चारा अधिक खाने को दें. पशु इसे बड़े ही चाव से खाते हैं और हरे चारे में 70-90 फीसदी पानी की मात्रा होती है, जो समयसमय पर पशु के शरीर को पानी की आपूर्ति भी करता है.

इस मौसम में पशुओं को भूख कम व प्यास अधिक लगती है. इस के लिए गरमी में पशुओं को पीने के लिए साफ पानी जरूरत के मुताबिक अथवा दिन में कम से कम 3 बार अवश्य पिलावें. इस से पशु शरीर के तापमान को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिलती है.

इस के अलावा पानी में थोड़ी मात्रा में नमक व आटा मिला कर पशु को पिलाना भी अधिक उपयुक्त है. इस से अधिक समय तक पशु के शरीर में पानी की आपूर्ति बनी रहती है, जो शुष्क मौसम में लाभकारी भी है. पशु को प्रतिदिन ठंडे पानी से नहलाने की भी व्यवस्था करें.

पशुपालकों को यह भी सलाह दी जाती है कि पशुओं को ‘लू’ लगने पर प्याज का रस और पानी में ग्लूकोज अथवा नमक व शक्कर घोल कर पिलाएं.

इस के अलावा पशुओं को वेटकूल दवा पिलाएं, जो पशु के शरीर को अंदर से ठंडा रखती है. पशुओं का हाजमा ठीक रखती है, जिस से पशु का दूध कम नहीं होता.

पशु को ‘लू’ लगने पर ठंडी जगह पर बांधने के अलावा माथे पर बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी रखें, जिस से पशु को तुरंत आराम मिले.

पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से सलाह ले कर उस का उपचार कराएं, जिस से पशुओं व उस के उत्पादन में होने वाले नुकसान से बचा जा सके.

मत्स्य आहार संयंत्र (Fish Feed Plant) से सानिया बनी सफल उद्यमी

छिंदवाड़ा : प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड परासिया के ग्राम जाटाछापर की सानिया अली और उन के पति जुनेद खान के लिए खासी अच्छी साबित हुई है. इस योजना के अंतर्गत जिले के विकासखंड छिंदवाड़ा के ग्राम भैंसादंड में लगभग साढ़े 3 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित 20 टन प्रति दिवस के उत्पादन क्षमता के प्रदेश के पहले मत्स्य आहार संयंत्र की स्थापना कर सानिया अली और उन के पति जुनेद खान सफल उद्यमी बन गए हैं. उन की माली हालत अब अत्यंत सुदृढ़ हो गई है.

सानिया अली और उन के पति जुनेद खान ने अपनी जेके इंडस्ट्रीज की स्थापना से जहां वर्ष 2023-24 में लगभग 90 लाख रुपए और वर्ष 2023-24 में लगभग पौने 2 करोड़ रुपए का टर्नओवर प्राप्त किया है, वहीं अपने इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 200 व्यक्तियों को रोजगार भी दिया है. अब वर्ष 2024-25 में उन्हें अपने व्यापार से लगभग ढाई से 3 करोड़ रुपए का टर्नओवर प्राप्त होने की संभावना है. हितग्राही को इस मत्स्य आहार संयंत्र में उत्पादित मत्स्य आहार के विक्रय से प्रतिवर्ष लगभग 8 से 10 लाख रुपए तक की आय प्राप्त हो रही है.

जेके इंडस्ट्रीज, भैंसादंड की स्वामी सानिया अली अपने पति जुनेद खान के साथ इस मत्स्य आहार संयंत्र का संचालन कर रही हैं. उन्होंने अपने पति जुनेद खान को इस इंडस्ट्रीज का मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया है. मुख्य कार्यपालन अधिकारी जुनेद खान इस इंडस्ट्रीज को संचालित करने के लिए अपनी पत्नी सानिया अली को भरपूर सहयोग देते हैं. उन की मेहनत व संघर्ष का नतीजा है कि उन का व्यापार अब सफलता की ओर निरंतर बढ़ रहा है और एक सफल उद्यमी के रूप में उन की पहचान बन रही है.

जुनेद खान ने बताया कि वे लगभग 16 वर्ष की आयु से मत्स्यपालन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, इस के पूर्व वे वर्ष 2018 में जिले के जुन्नारदेव विकासखंड के ग्राम घोड़ावाड़ी में एक पौंड को किराए पर ले कर मत्स्यपालन कर चुके हैं.

2 साल तक उन्हें इस काम में घाटा हुआ और तीसरे वर्ष इस काम से उन्हें लाभ प्राप्त होना शुरू हुआ, किंतु अनुभव की कमी के कारण इस में अधिक सफलता नहीं मिली. वे मत्स्य आहार के क्षेत्र में कुछ बेहतर करना चाहते थे, इसलिये वे उचित मार्गदर्शन के लिए मत्स्य विभाग पहुंचे, जहां तत्कालीन सहायक संचालक मत्स्योद्योग द्वारा पुन: 5 लाख रुपए तक की मत्स्य यूनिट की जानकारी दी गई, जिस से उन्हें संतुष्टि नहीं मिली.

उन्होंने अन्य बड़ी योजनाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त करना चाही, तो उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी हुई, जिस में निजी क्षेत्र में मत्स्य आहार संयंत्र की स्थापना के लिए 2 करोड़ रुपए तक का लोन और 60  फीसदी का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है. इस जानकारी से उन का मन प्रसन्न हो गया और उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से इस योजना के अंतर्गत अपना प्रकरण तैयार कराया और मत्स्य विभाग के माध्यम से उन्हें 2 करोड़ रुपए का लोन और 60 फीसदी अर्थात 1.20 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ. इस संयंत्र की 13 सितंबर, 2021 को स्थापना की गई, जिस का उद्घाटन तत्कालीन संचालक मत्स्योद्योग भरत सिंह, संयुक्त संचालक शशिप्रभा धुर्वे और सहायक संचालक मत्स्योद्योग रवि गजभिये द्वारा किया गया.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री डा. एल. मुरुगन ने 4 अप्रैल, 2023 को मध्य प्रदेश के इस प्रथम मत्स्य आहार संयंत्र का अवलोकन किया और संयंत्र के माध्यम से तैयार किए जा रहे मत्स्य आहार की प्रक्रिया की जानकारी के साथ ही मत्स्य आहार की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता, विक्रय दर, मत्स्य आहार की पैकिंग, निर्यात आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर इस संयंत्र के माध्यम से तैयार किए जा रहे मत्स्य आहार और अन्य प्रक्रियाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए इस की सराहना भी की.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के देश में क्रियान्वयन के सफल 3 वर्ष पूरे होने पर 15 सितंबर, 2023 को ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में भी उन्होंने प्रदेश के प्रथम मत्स्य आहार संयंत्र के रूप में अपने संयंत्र का स्टाल लगा कर प्रदर्शन भी किया, जिस की केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री डा. एल. मुरुगन और प्रदेश के अन्य मंत्रियों ने सराहना की.

मत्स्य आहार संयंत्र से छिंदवाड़ा जिले के साथ ही आसपास के जिलों बैतूल, सिवनी, बालाघाट, इंदौर, भोपाल, खंडवा, राजगढ़, नर्मदापुरम आदि एवं प्रदेश के बाहर के प्रदेशों असम, ओड़िसा, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि में भी विक्रय किया जा रहा है.

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जुनेद खान ने बताया कि इस संयंत्र की स्थापना में उन की पत्नी और उन्हें अत्यंत कड़ा संघर्ष करना पड़ा.

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संयंत्र की स्थापना के लिए मत्स्य विभाग से लोन और अनुदान प्राप्त करने के अलावा अपने पिता जमील खान से लगभग 30 लाख रुपए की लागत से एक एकड़ भूमि खरीदवाई, बैंक औफ बड़ौदा की छिंदवाड़ा शाखा से 50 लाख रुपए का कर्जा लिया, व्यक्तिगत कर्ज लिया और अपनी सारी जमापूंजी लगाने के साथ ही अन्य रिश्तेदारों से भी माली मदद ली. भवन व अधोसंरचना निर्माण में लगभग 80 लाख रुपए, मुख्य आहार निर्माण मशीन में लगभग सवा करोड़ रुपए निजी ट्रांसफार्मर की स्थापना पर लगभग 12 लाख रुपए, रौ मेटेरियल पर लगभग 13 से 14 लाख रुपए, पैकिंग सामग्री पर लगभग 4 लाख रुपए, ट्रेड मार्क लेने पर लगभग 3 लाख रुपए और अन्य मदों पर राशि खर्च हुई.

उन्होंने आगे बताया कि आहार संयंत्र की स्थापना में पहले 2 साल बहुत ही मुश्किल हालात में बीते. राजस्थान और चीन से आहार संयंत्र की अत्याधुनिक मशीनें खरीदी गई थीं, किंतु राजस्थान से खरीदी मशीन बारबार बंद हो रही थी और उस के पार्ट्स व इंजीनियर को राजस्थान से बुलवाने में काफी समय लगता था. ऐसी स्थिति में 4 से 7 दिनों तक उत्पादन प्रभावित होता था. सुबह 9 बजे से लगातार रात 4 से 5 बजे तक मशीन का सुधार कार्य चलता था और इस काम में 3 से 4 दिन लग जाते थे. इस स्थिति से परेशान हो कर संबंधित कंपनी को मशीन वापस भेज कर उस से दूसरी मशीन रिप्लेस करवाई गई और काम शुरू किया गया.

मशीनरी ठीक होने के बाद जब अप्रैलमई, 2022 में उत्पादन प्रारंभ हुआ, तो मार्केटिंग की समस्या सामने आई और इस में एक वर्ष तक घाटे की स्थिति रही. ऐसा प्रतीत हो रहा था कि संयंत्र को बंद करना पड़ सकता है, किंतु उन्होंने हार नहीं मानी और न ही उन की हिम्मत टूटी.

अपनी जिद और जुनून के दम पर उन्होंने मार्केटिंग के लिए अपनी इंडस्ट्री का ट्रेडमार्क लिया और देश के विभिन्न राज्यों में 15 डीलर नियुक्त किए, जिन के माध्यम से उन्हें व्यापार में सफलता मिलनी शुरू हुई.

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जुनेद खान ने बताया कि मत्स्य आहार बनाने के लिए उन्होंने कोलकाता और नई दिल्ली के वैज्ञानिकों और डाक्टरों से रेसिपी प्राप्त की और आहार बनाना शुरू किया. मत्स्य आहार बनाने के लिए रौ मेटेरियल के रूप में सोयाबीन व सरसों की खली, गेहूं, मक्का, चावल, सूखी मछली, मछली का तेल, मेडिसन, मिनरल्स और अन्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है. उन के संयंत्र में मछलियों के साइज के हिसाब से आहार तैयार किया जाता है, जिस में 20 किलोग्राम और 35 किलोग्राम के पैकेट तैयार किए जाते हैं. 20 किलोग्राम की पैकिंग में 4 प्रकार के आहार बनाए जाते हैं, जिस में डस्ट में 40 फीसदी प्रोटीन व 6 फीसदी फेट, एक एमएम में 32 फीसदी प्रोटीन व 6 फीसदी फेट, 2 एमएम में 30 फीसदी प्रोटीन व 5 फीसदी फैट और 28 फीसदी प्रोटीन व 5 फीसदी फैट रहता है.

वहीं दूसरी ओर 35 किलोग्राम की पैकिंग में 3 एमएम में 28 फीसदी प्रोटीन व 5 फीसदी फैट, 4 व 6 एमएम में 28 फीसदी प्रोटीन व 5 फीसदी फैट, 4 एमएम में 26 फीसदी प्रोटीन व 5 फीसदी फैट, 4 एमएम में 24 फीसदी प्रोटीन व 5 फीसदी फैट और 4 एमएम में 20 फीसदी प्रोटीन व 5 फीसदी फैट रहता है.

इस पौष्टिक आहार से 6 माह में ही मछलियों का विकास एक से डेढ़ किलोग्राम तक होने पर वे बिकने को तैयार हो जाती हैं. इन के बिकने से कम समय में अधिक आय प्राप्त होती है और मत्स्यपालक लाभान्वित होते हैं, जबकि दूसरी कंपनियों के आहार में यह विकास 8 से 10 माह में होता है. बाजार मूल्य से 20 फीसदी कम मूल्य पर मत्स्य आहार उपलब्ध कराने पर हमारे संयंत्र से उत्पादित पौष्टिक आहार की मांग बढ़ती जा रही है.

उन्होंने आगे बताया कि मुख्य संयंत्र में प्रत्यक्ष रूप से 20 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिन्हें स्थायी रोजगार मिला है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से 15 डीलरों के पास 10-10 किसानों के अलावा 15 से 20 अन्य व्यक्ति रोजगार प्राप्त करते हैं और ट्रांसपोर्ट के काम में लगे 10 ट्रकों के 20-20 ड्राइवरों व कंडक्टरों को भी स्थायी रोजगार मिला है.

उन्होंने यह भी बताया कि उन के परिवार में पतिपत्नी के अलावा उन का एक 7 साल का बेटा व 3 साल की बेटी है. उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की तालीम हासिल की है, जबकि उन की पत्नी इलेक्ट्रिक इंजीनियर हैं.

अपने मत्स्य आहार संयंत्र को उन्होंने भारत का सब से बड़ा आहार निर्माण संयंत्र बनाने का संकल्प लेते हुए अपने लक्ष्य की पूर्ति की ओर वे निरंतर बढ़ रहे हैं.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने से उन्हें समाज में भी सम्मान मिला है. वह और अन्य उद्यमियों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं.

उन्होंने अपने पिता जमील खान, जिन्हें वे अपना गुरु मान कर उनके सिखाए रास्ते पर अपने उद्योग को चला रहे हैं, के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया है. साथ ही, इस योजना के अंतर्गत मत्स्य आहार संयंत्र चलाने में मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए सहायक संचालक मत्स्योद्योग राजेंद्र सिंह, सहायक मत्स्योद्योग अधिकारी संजय अंबोलीकर और मत्स्य निरीक्षक अनिल राउत के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया है.