लखनऊ में मिला रामजी दुबे को बेस्ट फार्मर अवार्ड इन इंटीग्रेटेड फार्मिंग

रामजी दुबे ग्राम नुआंव, मिर्जापुर , उत्तर प्रदेश से हैं. और बड़े पैमाने पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर लगभग 15 लाख सालाना का मुनाफा ले रहे हैं. इसके अलावा स्ट्राबेरी, खीरा, केला आदि की खेती करते हैं. पॉलीहाउस में नर्सरी तैयार करते हैं. पशुपालन भी करते हैं जिससे उन्हें खेती में बाजार से रासायनिक उर्वरक भी नहीं खरीदना पड़ता. इन्हीं खासियतों के चलते हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फार्म एन फूड कृषि सम्मान मिला. जिसके तहत उन्हें ‘बेस्ट फार्मर अवार्ड फार्मर इन इंटीग्रेटेड फार्मिंग’ सम्मान दिया गया.

रामजी दुबे ने साल 2018 से एकीकृत बागबानी के तहत 2000 वर्गमीटर एरिया में पौलीहाउस बनाया है. उस के बाद पौलीहाउस में उच्च गुणवत्ता का खरबूजा, रंगीन शिमला मिर्च एवं खुले खेत में केला, स्ट्रौबेरी, पपीता एवं एक हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की खेती आरंभ की, जिस से उन्हें 12 महीने कुछ न कुछ फसल उत्पाद मिलता रहता है और पूरे साल अच्छीखासी आमदनी होती रहती है.

किसान रामजी दुबे ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती से उन्हें 10 से 15 लाख की सालाना आमदनी होती है. रामजी दुबे पर्यावरण के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं. इस के तहत वे अपने जिले और आसपास के क्षेत्र के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार आदि अनेक राज्यों में भी एक लाख से अधिक पौधों का वितरण कर चुके हैं. उन्हें जिला स्तर, राज्य स्तर के साथसाथ राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

रामजी दुबे का कहना है कि उन्हें स्ट्रौबेरी की खेती से 5 से 6 महीने में एक एकड़ में 8 से 10 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है. खेती में तकरीबन 2 से 3 लाख रुपए का खर्च भी आता है. इस प्रकार तकरीबन 7 लाख रुपए के आसपास शुद्ध आमदनी हो जाती है.

Integrated Farming

इसी प्रकार रामजी दुबे को रंगीन शिमला मिर्च से तकरीबन 8 से 10 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है, वहीं पशुपालन के तहत वे गौपालन भी करते हैं, जिस के गोबर से वह बिना किसी लागत के वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं. इस से उन्हें अपनी खेती में बाजार से उर्वरक नहीं खरीदना होता है.

रामजी दुबे साल 2018 के पहले पारंपरिक तरीके से गेहूं, धान, चना, मटर, सरसों की खेती करते थे, जिस से उन्हें बहुत अच्छा मुनाफा नहीं होता था, परंतु आज एकीकृत खेती के माध्यम से बागबानी के द्वारा साल में 25 से 30 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है. वे अब पपीता की खेती भी करते हैं. पपीते की पौध जूनजुलाई माह में लगाते हैं, जिस की हार्वेस्टिंग अगले वर्ष मार्चअप्रैल के महीने में शुरू हो जाती है. उस समय नवरात्र एवं अन्य त्योहारों के कारण डिमांड अच्छीखासी रहती है. उन्हें एक एकड़ में तकरीबन 5 से 6 लाख रुपए का मुनाफा एक एकड़ में हो जाता है.

इस तरह से रामजी दुबे को समेकित व एकीकृत खेती से अनेक लाभ हो जाते हैं. आज अपने क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि जिले एवं आसपास के दूसरे क्षेत्रों में आप प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं. आसपास के जिलों से क्षेत्र से तमाम किसान तमाम सरकारी अधिकारी उन के खेतों को देखने आते हैं, जिस से उन्हें भी काफी प्रेरणा मिलती है.

 

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वैसे, 63 साल की उम्र पर रामजी दुबे के इस तरह के काम देख कर लोग बहुत प्रभावित होते हैं और दूसरे लोगों को प्रेरणा भी मिलती है.

महिला किसानों के लिए प्रेरणा बनी पुष्पा गौतम

हाल ही में पुष्पा गौतम को दिल्ली प्रेस, नई दिल्ली द्वारा लखनऊ में राज्यस्तरीय फार्म एन फूड ‘बेस्ट फार्मर अवार्ड इन मार्केटिंग’ से नवाजा गया है.

पुष्पा गौतम बस्ती जिले के बिहरा खास गांव से हैं. आप अनेक कृषि उत्पादों जैसे मल्टीग्रेन आटा, चावल, चना, अचारमुरब्बा, आदि की प्रोसेसिंग कर बाजार से कई गुना अधिक मुनाफा कमाने के साथसाथ अनेक लोगों को ट्रेनिंग व रोजगार भी दे रही हैं.

पुष्पा गौतम एमएबीएड हैं. फैजाबाद विश्वविद्यालय से मुख्य 2020 में कोरोना के समय एनआरएलएम के तहत आप समूह से जुड़ीं और सरकार द्वार समूह में दी जाने वाली अनेक प्रकार की ट्रेनिंग सुविधायों का लाभ उठाया. अनेक प्रकार के प्रशिक्षण लेने के बाद पुष्पा गौतम को अनेक जानकारियां मिलीं. किस तरह से नए रोजगार का सृजन हो और उस को शुरू करने के लिए फंड कहां से मिल सकेगा, इस पर उन्होंने जानकारी प्राप्त की. उस के बाद पुष्पा गौतम ने ब्लौक, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, गन्ना विभाग, नाबार्ड और आरसेटी से जुड़ कर आज अनेक उत्पादों की प्रोसैसिंग शुरू की.

women farmers

इन दिनों पुष्पा गौतम मल्टीग्रेन आटा, मक्का आटा, बाजरा आटा, चना बेसन, मसाला, अचार, मुरब्बा, आवला लड्डू आदि की प्रोसैसिंग और पैकिंग कर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. अनेक तैयार उत्पादों की पैकिंग के लिए मशीन भी समूह द्वारा प्राप्त फंड से खरीदी गई हैं.

इन दिनों पुष्पा गौतम तकरीबन 30 महिलाओं के साथ काम कर रही हैं और उन्हें स्वावलंबी बनाने का काम कर रही हैं.

इस के अलावा पुष्पा गौतम ने जनवरी, 2021 से ले कर सितंबर, 2024 तक तकरीबन 300 महिलाओं को नर्सरी, वर्मी कंपोस्ट, डेयरी फार्मिंग, वाशिंग पाउडर बनाना, अचार, मसाला, पापड़, मोमबती आदि पर ट्रेनिंग करा कर उन को रोजगार से जोड़ने का काम किया है. उन की इन सफलताओं को देखते हुए नाबार्ड से उन्हें एक ग्राम दुकान स्वीकृत की और नाबार्ड ने 2 साल में साढ़े 3 लाख रुपए का फंड मुहैया कराया. उन के समूह की अनेक महिलाओं द्वारा बनने वाले उत्पाद की मार्केटिंग और सप्लाई में काफी मदद मिल रही है. उन्हें इस काम के लिए ब्लौक, जिला, केवीके, नाबार्ड आदि से समयसमय पर सम्मानित किया जाता रहा है.

 

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साधना सिंह : डेयरी फार्मिंग से लाखों की कमाई

लखनऊ में आयोजित दिल्‍ली प्रैस द्वारा ‘फार्म एन फूड’  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उत्तर प्रदेश के ग्राम बहुअन मदार माझा की साधना सिंह को  फार्म एन फूड ‘बैस्ट  डेयरी ऐंड एनिमल कीपर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया.

साधना सिंह साल 2012 से कृषि क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं. इस समय वे कृषि आधारित कई व्यवसाय भी कर रही हैं. उन्होंने 2 भैंसों के साथ पशुपालन का काम शुरू किया और इस समय उन के पास 35 दुधारू भैंसें हैं. उन के दूध से पारंपरिक बिलोना विधि से भैंस का देशी घी तैयार किया जाता है, जो ‘अवध गोल्ड’ के नाम से बिकता है.

साधना सिंह के पास 2 पोल्ट्री फार्म हैं, जिस में एक पोल्ट्री फार्म 10,000 वर्गफुट का है, जिस से उन्हें सालाना 7 से 8 लाख का मुनाफा होता है. इस के अलावा 2 हेक्टेयर में वे मछलीपालन व्यवसाय से भी जुड़ी हैं, जिस से उन्हें सालाना 10 लाख का लाभ प्राप्त होता है.

dairy farming

साधना सिंह का कहना है कि हम पंगास मछली का उत्पादन करते हैं. यह हाईडेंसिटी में उत्पादन होने वाली मछली है, जिस से ज्यादा मुनाफा होता है. मछलीपालन में फायदा होते देख कई महिला किसानों ने मछलीपालन शुरू किया है, जिस से गांव में अनेक महिला किसान मछलीपालन से फायदा उठा रही हैं.

इस के अलावा उन्होंने बताया कि वे 40 एकड़ में गन्ने की खेती और 20 एकड़ में धान की खेती करती हैं. 2 एकड़ में वे जैविक खेती से धान और गेहूं उत्पादन करते हैं.

साधना सिंह के पास सोलर ड्रायर है, जिस में आम, टमाटर, तुलसी के पत्तों को सुखा कर बेचा जाता है. कृषि विभाग द्वारा मसूर उत्पादन के लिए उन्हें जिले में प्रथम पुरस्कार दिया गया है. नाबार्ड द्वारा जिले में 8 मार्च, 2024 (महिला दिवस) को ‘सक्रिय महिला’ का प्रथम पुरस्कार दिया गया. कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 15 अगस्त के शुभ अवसर पर प्रगतिशील महिला किसान के रूप में उन्हें सम्मानित किया गया. एनआरएलएम द्वारा मुरगीपालन के लिए ‘शक्ति वंदन सम्मानपत्र’ दिया गया. उपकृषि निदेशक गोंडा द्वारा कृषि क्षेत्र में महिला प्रगतिशील किसान से रूप में प्रशस्तिपत्र दिया गया. जिला अधिकारी गोंडा द्वारा जैविक खेती के लिए प्रशस्तिपत्र दिया गया

 

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नारायण दत्त जोशी: सोंठ प्रोसैसिंग से तरक्की

राजधानी लखनऊ में आयोजित  दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ की ओर से  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उत्तराखंड के नारायण दत्त जोशी को  ‘बैस्‍ट फार्मर अवार्ड इन हार्वेस्टिंग ऐंड प्रोसैसिंग’ का सम्‍मान  दिया गया.

नारायण दत्त जोशी लगभग 30 वर्षों से खेती कर रहे हैं, जिस में उन के द्वारा मुख्य रूप से अदरक, गेहूं, मक्का, सरसों और राजमा की खेती की जाती है. इन सभी फसलों में इन के क्षेत्र की सब से महत्त्वपूर्ण व लाभप्रद फसल अदरक है. अदरक एक औषधीय जड़ वाली फसल है. अदरक की फसल को जमीन की खुदाई कर उसे निकाला जाता है, तत्पश्चात उसे प्रोसैस कर के उस से सोंठ बनाई जाती है. सोंठ के मंडी में अच्छे दाम मिलते हैं.

ginger processing

नारायण दत्त जोशी ने बताया कि सोंठ 2 प्रकार की होती हैं. एक सुखझोल सोंठ और दूसरी पनझोल सोंठ.

नारायण दत्त जोशी से प्रेरणा ले कर क्षेत्र के अनेक किसान अदरक की खेती करते हैं. इस के अलावा सोंठ प्रोसैसिंग में कार्य करने वाली अनेक महिलाओं को भी रोजगार प्राप्त होता हैं. सोंठ के द्वारा ही हमारा क्षेत्र तरक्की की ओर अग्रसर होता जा रहा है.

 

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नारायण दत्त जोशी को उन के कामों के लिए अनेक पुरस्कार भी मिल चुके हैं.

पुष्पा नेगी : गोपालन से प्रकृति संरक्षण और रोजगार सृजन

ग्राम कोटी अठुरर्वाला अठूरवाला, जनपद देहरादून, उत्तराखंड की रहने वाली पशुपालक पुष्पा नेगी पशुपालन के क्षेत्र में नवीनतम तकनीक अपना कर स्थानीय किसानों को भी जागरूक करती हैं. उनके इन्ही योगदानों के लिए उन्हें दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा लखनऊ में आयोजित  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में ‘बैस्‍ट  डेयरी ऐंड एनिमल कीपर अवार्फाड ‘ से सम्मानित किया गया.

cow rearing

पशुपालक पुष्पा नेगी के द्वारा साल 2016 से गोपालन किया जा रहा है और इस समय उन के पास लगभग 30 गाय हैं, जिन में होल्सटीन फ्रीसियन और साहीवाल दोनों नस्ल की गई गाय शामिल हैं. पुष्पा नेगी गाय के दूध से घी, छाछ, मक्खन आदि बना कर बाजार में अच्छे दामों पर बेचती हैं और प्रकृति संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उन के यहां गाय के गोबर से दीया दीपक, मूर्ति, समरानी कप, गौ काष्ठ एवं वर्मी कंपोस्ट आदि चीजें तैयार की जाती हैं. इस काम में उन्होंने अनेक लोगों को जोड़ रखा है, जिस से उन्हें भी रोजगार मिल रहा है.

 

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प्रगतिशील पशुपालक के रूप में पुष्पा नेगी को मुख्यमंत्री द्वारा ‘किसानश्री सम्मान’, हंस फाउंडेशन और आरडीसी -2024 में केंद्रीय मंत्री परशोत्तम रूपाला द्वारा दिल्ली में सम्मानित किया गया जा चुका है. पुष्पा नेगी अपने खेत में उत्तराखंड का प्रसिद्ध अनाज मंडावा उगा रही हैं, जो अपने पौष्टिक गुणों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. पुष्पा नेगी का कहना है कि उन के इन कामों में परिवार ने सदैव पूरा सहयोग किया है.

कर्नल हरिश्चंद्र सिह: चिया सीड की खेती की प्रशंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की

कर्नल हरिश्चंद्र सिह लखनऊ, उत्तरप्रदेश से हैं और 54 वर्ष की उम्र में सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्ष 2016 में जनपद बाराबंकी से जैविक खेती की शुरुआत की. उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ आयोजित कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उन्हें बैस्ट फार्मर अवार्ड इन और्गेनिक फार्मिंग अवार्ड से सम्मानित किया गया.

उन की पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी इस में योगदान रहा.

कर्नल हरिश्चंद्र सिंह का उद्देश्य उन फलों, फसलों और सब्जियों को उगाना है, जो स्वास्थ्यवर्धक हों, जिन में कम से कम देखरेख हो, कम से कम लागत लगे और अच्छा मुनाफा हो. इस क्रम में उन्होंने चिया सीड, ड्रैगन फ्रूट, एप्पल बेर, जिमीकंद और कालेबैगनी आलू की खेती से अपने नए शौक की शुरू की. इस में वे काफी हद तक सफल रहे. बाद में उन्होंने अपनी फसलों में केला, लाल गूदे वाले आलू, क्वीनोआ, रामदाना, काले चावल और काले गेहूं आदि को भी सम्मिलित किया.

लगभग 4 साल पहले कर्नल हरिश्चंद्र सिंह के चिया सीड की खेती की प्रशंसा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात कार्यक्रम’ में करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत में एक बड़ा कदम बताया.

स्वास्थ्यवर्धक एवं लाभप्रद फसलों, फलों तथा सब्जियों की जैविक खेती स्वयं करना तथा ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस मुहिम से जोड़ना अब कर्नल हरिश्चंद्र सिंह का जुनून सा बन गया है. उन्होंने बताया कि साल 2023 में भारत सरकार द्वारा प्रकाशित ‘कौफी टेबल बुक’ में मुझे एक प्रगतिशील किसान के रूप में स्थान दिया गया है. यह मेरे लिए गर्व की बात है.

 

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कर्नल हरिश्चंद्र सिंह का कहना है कि हमारे इस प्रयास में कृषि क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं, कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील कृषकों, पत्र पत्रिकाओं एवं मीडियाकर्मियों का बहुत बड़ा योगदान है, जो हमारे मार्ग दर्शक और प्रेरणास्रोत हैं. इन से प्रेरित हो कर अब मैं अपने जैविक खेती के रकबे को बढ़ा रहा हूं, साथ ही श्रीअन्न और नीबू की खेती भी शुरू कर चुका हूं.

किसानों को नई तकनीक से जोड़ उन की आमदनी बढ़ा रहीं डा. पूजा गौड़

उत्‍तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा आयोजित कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में बैस्ट फार्मर अवार्ड इन मार्केटिंगसे सम्मानित उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में जन्मी पूजा गौड़ की शुरुआती पढ़ाईलिखाई मऊ में और बाद की पढ़ाईलिखाई मुंबई में हुई.

मुंबई में मल्टीनैशनल कंपनी इनफोर्मेशन टैक्नोलौजी में उच्च पद पर वे आसीन रहीं, लेकिन शादी उत्तराखंड में होने के बाद उन का झुकाव वहां के जनजातीय इलाके से हुआ. वहां उन्होंने समाजसेवा का काम शुरू किया, लेकिन लौकडाउन के दौरान जब साल 2020 में वे वर्क फ्रोम होम होने की वजह से जब ससुराल आईं, तब देहरादून के सुंदर आदिवासी इलाके के गांव में समाजसेविका के रूप में काम करना शुरू किया और समाजसेवा के रूप उन्होंने उन आदिवासी किसान  महिला को चुना, जो दिनभर खेत, जंगल और चूल्हा व परिवार में अपनी पूरी जिंदगी काठिन मेहनत और बहुत ही न्यूनतम आय के साथ व्यतीत कर रही थीं.

Dr. Pooja Gaur

डा. पूजा गौड़ व्यावसायिक रूप से सूचना प्रौद्योगिक के क्षेत्र में मुख्य प्रबंधक, पश्चिमी भारत में कार्यरत रही हैं और प्रबंधक में ही डाक्टर औफ फिलौसफी (पीएचडी) की उपाधि हासिल की है, लेकिन 2 मास्टर डिगरी एवं पीएचडी की डिगरी लेने के बावजूद भी एवं सूचना प्रौद्योगिकी में अच्छे पद पर कार्यरत होने के बवजूद भी जिंदगी में उन्हें कहीं न कहीं कमी सी लगती थी और दिल में एक कसक सी थी कि कहीं दूर जा कर गंवई इलाके में काम करने की.  और एक ग्रामीण समाज की सेवा का भाव  ने उन को गांव की तरफ मोड़ दिया.

जब वे गांव लौटीं तो उन्होंने देखा कि किसानों की दशा व दिशा को सुधारने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही दूरदर्शी योजना से किसान व गांव वाले इस के वास्तविक हकदार थे, वे लोग इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे थे और यही हाल उन के खेतों में उगाई जा रही फसलों और सब्जियों आदि का था, जिस का उन को उन की मेनहत का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा था. इस तरह की विषम परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक रूप से उन की स्थिति को उभरने के लिए 2 संगठनों की स्थापना की और उन्हें रजिस्टर्ड कराया.

बनाया फेडीज कपसाड वेलफेयर एसोसिएशन

फेडीज कपसाड़ कृषि बहुद्देशीय सहकारी समिति लिमिटेड के माध्यम से किसानों को सुखसुविधाएं प्रदान की गई हैं. यह एक साधरण सहकारी समिति नहीं है. इस समिति के माध्यम से पूजा गौड़ ने अपने वेतन का पैसा खर्च कर तकरीबन 7,000 वर्गफुट की जमीन पर कोऔपरेटिव हाउस बनाया. उन्हें संगठित किया गया और उन के अधिकार को समझाया गया. सरकार की विभिन्न दूरदर्शी इन महत्त्वपूर्ण योजनाओं के बारे में जनजागरूकता अभियान चलाया गया, जिस का परिणाम यह रहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, जनजीवन मिशन और जिला परिषद और ब्लौक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर चलाई गई योजना का सीधा लाभ वास्तविक लोगों को पहुंचना शुरू हुआ.

यह डा. पूजा गौड़ की दूरदर्शी सोच थी, जो वर्तमान में अध्यक्ष के रूप में हैं और चकराता प्रखंड के किसानों की भलाई के बारे में सोचा और उन को रोजगार मुहैया कराने की योजना बनाई और पुनर्वास की मुहिम को सफल बनाने में योगदान दिया. डा. पूजा गौड़ की पहली प्रथमिकता है कि किसानों को नई तकनीक से जोड़ कर उन की आमदनी को बढ़ाया जा सके.

 

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डा. पूजा गौड़ ने किसानों और महिलाओं को उन की माली स्थिति को बेहतर करने के लिए कोरोना काल में भी किसानों और महिलाओं द्वारा उत्पादित चीजों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया. इस का नतीजा यह हुआ कि ये कंपनियां सीधे कोऔपरेटिव हाउस पहुंचीं एवं किसानों के समस्त उत्पाद जैसे टमाटर, गोभी, शिमला मिर्च, खीरा, सेब, आड़ू और अन्य घरलू उत्पाद आदि को एक अच्छा बाजार दिलाया, जिस से किसानों को इलाके में तकरीबन डेढ़ करोड़ रुपए का राजस्व हासिल हुआ.

रवि शंकर सिंह: बेस्ट फार्मर अवार्ड इन मेकेनाईजेशन

उत्‍तरप्रदेश के ग्राम चरहुआ, जनपद गोंडा के किसान रवि शंकर सिंह को उन के कृषि कार्यों के लिए अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं. जानते हैं उन के बारे में कुछ और अधिक:

उत्‍तरप्रदेश के ग्राम चरहुआ, जनपद गोंडा के किसान रवि शंकर सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय से परास्नातक हैं और उन के पास कुल खेती योग स्वयं की भूमि 2 हेक्टेयर और लीज पर 4 हेक्टेयर जमीन है. प्रमुख फसलों में धान, मक्का, अरहर, सावा, कोदो, मडुवा, ज्वार, बाजरा, काला नमक धान, गेहूं, गन्ना, मटर, सरसों, जौ, मसूर, आलू, टमाटर, लहसुन, धनिया, गोभी, रामदाना, अदरक आदि की खेती करते हैं. जायद के मौसम में वे मूंग, उड़द, सूरजमुखी और हरी मिर्च और केले की खेती करते हैं.

इस के अलावा खेती से जुड़े कामों में मछलीपालन के लिए 3 हेक्टेयर में तालाब हैं, जिस में बायोफ्लाक्स, फुंगेसियस, रोहू, कतला, ग्रास, सिल्वर किस्म की मछलियों का कारोबार है. रेशम कीट पालन के लिए एक हेक्टेयर में शहतूत के पेड़ एवं 1 एकड़ में नर्सरी भी है. पशुपालन के तहत आप के पास देशी साहिवाल गिर की 10 दुधारू गाएं हैं. मिल्क प्रोसैसिंग कर के आप अनेक प्रोडक्ट भी बनाते हैं. गोमूत्र से आप खेती के लिए वर्मी कंपोस्ट जीवामृत बनाने का काम भी करते हैं.

Ravi Shankar Singh

आधुनिकता के इस दौर में आप का कृषि यंत्रों पर खासा जोर है. आप ने कृषि यंत्र फार्म मशीनरी बैंक बनाया हुआ है, जिस में अनेक छोटेबड़े कृषि यंत्र आप के पास हैं, जिन्हें किसानों को किराए पर मुहैया कराते हैं. उन के पास प्रोसैसिंग यूनिट के तहत आटा मिल, दाल मिल हैं. वे मधुमक्खीपालन के लिए 150 बौक्स के द्वारा शहद उत्पादन भी करते हैं.

सिंचाई साधनों में स्वयं के ट्यूबवैल, सरकारी ट्यूबवैल, 2 सोलर पंप और 2 इंजन हैं.

शुभावरी चौहान: कम उम्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान

उत्‍तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा आयोजित कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के कोठडी गांव में जन्मी शुभावरी चौहान ने कम उम्र में अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाई. उन की इस उपलब्धि के लिए उन्हें फार्म एन फूड ‘बैस्ट  यंग फार्मर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. जानिए उन की जीवन यात्रा: 

शुभावरी का जन्म 4 अप्रैल, 2005 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के कोठडी गांव में हुआ था. उन के पिता संजय चौहान ने एमसी एग्रीकल्चर से पढ़ाईलिखाई की है और माता ममता चौहान संस्कृत विषय से एमए हैं.

शुभावरी चौहान की जिंदगी में साल 2015 में तब बड़ा बदलाव आया, जब उन्होंने अपने पिता के साथ खेती में सक्रिय रूप से काम करने का निर्णय लिया. साल 2016 से वे पूरी तरह से खेती में जुट गईं. शुरुआती दौर में रासायनिक पैस्टिसाइड का कम उपयोग होता था, लेकिन खरपतवार की समस्या के कारण उन्हें कुछ समय तक रासायनिक पैस्टिसाइड का इस्तेमाल करना पड़ा.

धीरेधीरे उन्हें समझ आया कि रासायनिक पैस्टिसाइड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और उन्होंने और्गेनिक खेती को अपनाने का फैसला किया. शुरू में लोग उन का मजाक उड़ाते थे, पर अब उन की फसलें दोगुनी कीमतों पर देश और विदेश में बिक रही हैं.शुभावरी चौहान के पास 25-30 गाएं हैं, जिन्हें वे और्गेनिक चारा खिलाती हैं. उन के दूध और घी की बिक्री अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होती है. उन की मुख्य फसल गन्ना है, जिसे वे अपने कोल्हू में प्रोसैस कर गुड़ और शक्कर बनाती हैं.

इन उत्पादों की भी देशविदेश में भारी मांग है. इस के अलावा उन के पास आम के बाग हैं, जिन में मल्लिका, आम्रपाली, दशहरी, लंगड़ा, चौसा जैसी किस्मों के आम उगाए जाते हैं, जिन की बिक्री दिल्लीएनसीआर, लुधियाना और छत्तीसगढ़ में होती है. उन का सालाना टर्नओवर तकरीबन 25 लाख रुपए है और वे 25-30 लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं.

 Shubhawari Chauhan

शुभावरी चौहान ने सहारनपुर कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से कई प्रशिक्षण प्राप्त किए हैं, जिन के कारण उन्हें जिला स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं. 23 दिसंबर, 2023 को उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मुरादाबाद में ‘किसान दिवस’ पर राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया था.

शुभावरी चौहान न सिर्फ एक सफल किसान हैं, बल्कि वे अपने पिता के साथ मिल कर ट्रैक्टर से खेतों की जुताई भी करती हैं और कालेज जाने के लिए मोटरसाइकिल का इस्तेमाल करती हैं. वर्तमान में वे अपने गांव से 45 किलोमीटर दूर सहारनपुर मुन्ना लाल गर्ल्स डिगरी कालेज में अपने बीए फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रही हैं.

शुभावरी चौहान के काम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे मिट्टी संरक्षण और जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देती हैं. वे अपने खेतों में जल संचयन के लिए बंधों और बांस के पौधों का उपयोग करती हैं, जिस से न केवल मिट्टी का क्षरण रुकता है, बल्कि अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है. इस के साथ ही उन्होंने अपने गांव की सड़कों के किनारे नीम और कनेर के पौधे लगाए हैं, जिस से हवा भी शुद्ध रहती है.

शुभावरी चौहान के जल संरक्षण के प्रयासों के कारण उन्हें अक्तूबर, 2024 में ‘वानी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जो उन्होंने भारतीय मृदा संरक्षण सोसाइटी से प्राप्त किया. इस के अलावा उन की खेती का एक और अनूठा पहलू यह है कि वे ड्रिप सिंचाई का उपयोग करती हैं, जिस से पानी की बचत होती है और फसलों को पर्याप्त नमी मिलती है.

इस तरह शुभावरी चौहान ने आधुनिक और परंपरागत कृषि विधियों का मिश्रण अपनाते हुए अपनी और अपने गांव की उन्नति की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं. उन के प्रयास, परिवार के सहयोग और दृढ़ संकल्प ने उन्हें सफलता के उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां वे न केवल माली रूप से मजबूत हुईं, बल्कि अपने गांव के लिए एक प्रेरणास्रोत भी बनीं.

विज्ञान शुक्ला : आधुनिक तकनीक व नवाचार से खेती कर बनाई पहचान

दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ द्वारा लखनऊ में आयोजित  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में विज्ञान शुक्ला ‘बैस्‍ट फार्मर अवार्ड इन आर्गेनिक फार्मिंग’ से सम्मानित किए गए. उत्‍तरप्रदेश के बांदा जिले के विज्ञान शुक्ला आधुनिक तकनीक व नवाचार से खेती कर अपनी एक खास पहचान बना चुके हैं.

प्राकृतिक तरीके से बागबानी 

विज्ञान शुक्ला 400 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक तरीके से अनेक फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिन्हें दोगुना से अधिक दाम पर अपनी उपज बेच रहे हैं. वैदिक और्गेनिक फार्म के जरीए वे अनेक लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं. आप के द्वारा 150 एकड़ जमीन पर बागबानी भी की जा रही है. विज्ञान शुक्ला फलदार पेड़ों से अच्छाखासा मुनाफा ले रहे हैं.

खेतीबारी के साथसाथ वे पशुपालन भी

विज्ञान शुक्ला खेतीबारी के साथसाथ पशुपालन भी कर रहे हैं और उन  के पास 500 से अधिक साहीवाल गिरी, थारपारकर नस्ल की गाएं हैं, जिन के दूध से घी बना कर आप 3,000 रुपए से 3,500 रुपए प्रति लिटर तक लखनऊ, दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों तक अनेक संस्थाओं को बेच रहे हैं.

विज्ञान शुक्ला (Vigyan Shukla)

कई पुरस्कारों से सम्मानित 

विज्ञान शुक्ला का वैदिक फार्म बुंदेलखंड का मौडल बन चुका है, जहां अनेक अधिकारियों और किसानों का आना लगा रहता है. किसान उन के यहां से फार्म की गतिविधियों को जान कर अपने कृषि कार्यों को कर रहे हैं, जिस से उन की आमदनी बढ़ रही है. खेती में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकी से उन की पहले से कहीं अधिक आमदनी बढ़ गई है. इस नवाचार के लिए भारत सरकार द्वारा ‘जगजीवन राम अभिनव पुरस्कार’ से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है. विज्ञान शुक्ला को प्रदेश द्वारा भी, मंडल द्वारा भी और जनपद द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है.