मोबाइल वेटेरिनरी पहुंचेगी हर पशुपालक के द्वार, ऐसा है सरकार का विचार

जयपुर : पशुपालन, गोपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने वित्त वर्ष 2024-25 की बजट घोषणाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि पशु कल्याण और पशुपालक हमारी सरकार की प्राथमिकता है. पशुपालन मंत्री पिछले दिनों सचिवालय स्थित अपने कक्ष में विभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने बजट घोषणा के तहत पशुधन विकास कोष, सैक्स सोर्टेड सीमन और ब्रीडिंग पोलिसी की प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट के विशेष प्रचारप्रसार पर जोर देते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोगों तक इस की जानकारी से ही हमारी इस योजना का लाभ लोगों तक पहुंच पाएगा.

उन्होंने इसे हाइब्रिड मोड पर भी चलाने के निर्देश दिए, जिस से अधिक से अधिक लोग इस का लाभ उठा सकें.
उन्होंने प्रत्येक मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट में एक आगंतुकपंजिका रखने के निर्देश दिए, जिस से लाभार्थी अपने सुझाव और शिकायतें उस में दर्ज कर सकें और इस सेवा को और बेहतर करने में विभाग को मदद मिल सके.

मंत्री जोराराम कुमावत ने विभागीय पदोन्नति के लिए निदेशक सहित सभी पदों की डीपीसी जल्द से जल्द कराने के निर्देश दिए. साथ ही, रिक्त पदों की भरती की प्रक्रिया को भी गति प्रदान करने के निर्देश प्रदान किए.

उन्होंने भवनरहित संस्थाओं के लिए भवन निर्माण के कार्य को भी जल्द से जल्द योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया, जिस से पशुओं और पशुपालकों को समस्याओं से नजात मिल सके.

मंत्री जोराराम कुमावत ने पशु मेलों में प्रचारप्रसार की स्थिति पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि इसे दुरुस्त करने का प्रयास होना चाहिए, ताकि लोगों को मेलों और उन में होने वाली गतिविधियों की जानकारी हो सके.

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने गोशालाओं के जमीन की आवंटन नीति की समीक्षा करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस का सरलीकरण होना चाहिए. जिला गोपालन समिति की बैठक समय पर आयोजित करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि गोशालाओं को समय पर अनुदान मिलना चाहिए और इस के लिए गोशाला समितियों की बैठक समय पर होना आवश्यक है.

उन्होंने मध्य प्रदेश और ओड़िसा की तरह प्रदेश में भी गौ अभ्यारण्य की स्थापना पर बल दिया, जिस से गायों को आश्रय की सुविधा मिल सके. उन्होंने गाय के गोबर और गौमूत्र के प्रसंस्करण और उस से बनने वाले उत्पादों के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए, जिस से किसान और पशुपालक आर्थिक रूप से और मजबूत बन सकें.

उन्होंने गोशालाओं में एआई के उपयोग पर भी बल दिया. साथ ही, एनएलएम की तरह गायों के लिए भी परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए.

आगामी बजट घोषणा पर चर्चा करते हुए पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ऐसी योजना बनाएं, जो अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों के हित में हों और जिन का क्रियान्वयन धरातल पर सुगमता से हो सके.

बैठक में शासन सचिव, पशुपालन एवं गोपालन डा. समित शर्मा ने कहा कि प्रदेश में पशुपालन, डेयरी और पशु चिकित्सा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में हम इन संभावनाओं को धरातल पर लाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने राइजिंग राजस्थान को इस के लिए एक अच्छा अवसर बताया.

बैठक में पशुपालन निदेशक डा. भवानी सिंह राठौड़, गोपालन निदेशक डा. सुरेश मीणा, पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डा. आनंद सेजरा और प्रह्लाद सहाय नागा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

बकरीपालन (Goat Rearing) केंद्र का लिया जायजा, 536 पशुओं का हो रहा पालन

विदिशा : भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंह ने विदिशा प्रवास के दौरान शासकीय योजनाओं से लाभांवित होने वाले हितग्राही के इकाई यूनिट का भ्रमण कर जायजा लिया है. इस दौरान कलक्टर रोशन कुमार सिंह, एसडीएम क्षितिज शर्मा, तहसीलदार डा. अमित सिंह भी साथ मौजूद रहे.

संभागायुक्त संजीव सिंह ने ग्राम अमाछर में राष्ट्रीय पशुधन मिशन (उद्यमिता विकास) योजना से लाभांवित हितग्राही की इकाई का जायजा लिया. लाभांवित हितग्राही अवधेश यादव के द्वारा बकरीपालन इकाई के अंतर्गत 536 पशुओं का पालन किया जा रहा है. उन के द्वारा योजना के अंतर्गत शेड का निर्माण कराया जा चुका है और 500 से अधिक पशुओं का क्रय कर यूनिट का संचालन किया जा रहा है. पशु चिकित्सा विभाग द्वारा अनुदान की पहली किस्त प्रदाय की जा चुकी है.

उन्होंने हितग्राही से संवाद कर बकरीपालन यूनिट के संबंध में जानकारियां प्राप्त की, जिस में मुख्य रूप से बकरियों की देखभाल, चारा और बकरियां कहां से क्रय की गई के संबंध में पूछा है. इस दौरान पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उपसंचालक डा. एमके शुक्ला ने योजना के तहत स्वीकृत प्रोजेक्ट व बैंक द्वारा स्वीकृत लोन के संबंध में जानकारी दी है.

सांगोद में कृषि मेला : ऊर्जा मंत्री का नवीन तकनीक अपनाने पर जोर

जयपुर : कोटा जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कृषि एवं कृषि से संबंधित विभागों की विभिन्न लोक हितकारी योजनाएं, नवीन अनुसंधानों और कृषि विभाग के नूतन आयामों को किसानों एवं हितकारकों के मध्य लोकप्रिय बनाने के लिए पिछले दिनों कृषि उपज मंडी, सांगोद में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के मुख्य आतिथ्य में किसान मेले का आयोजन किया गया.

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने उपस्थित किसानों एवं हितधारकों को अधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने, प्रचलित आधुनिक तकनीक जैसे नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ाने, कृषि विभाग की नवीनतम तकनीक अपनाने के लिए भी प्रेरित किया.

उन्होंने किसानों का आव्हान किया कि वे अधिक उपज देने वाली किस्मों को बढ़ावा दें एवं जल बचत के लिए फव्वारा सिंचाई विधि व बूंदबूंद सिंचाई विधि को अपनाएं. साथ ही, जिले की प्रमुख फसलों प्रमुखतया सोयाबीन, लहसुन, चना आदि पर नवीनतम अनुसंधान एवं तकनीक को किसानों को अधिक से अधिक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया.

मंत्री हीरालाल नागर ने आगामी 2 सालों में किसानों को दिन के समय 6 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया. साथ ही, सोलर ऊर्जा को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करने एवं उपयोग करने के लिए निर्देशित किया.

संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार रवींद्र कुमार जैन ने बताया कि मेले में कृषि, उद्यान, पशुपालन, डेयरी, सहकारिता विभाग, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा, कृषि विज्ञान केंद्र, बोरखेड़ा, कोटा, नीबू उत्कृष्टता केंद्र, नान्ता फार्म, कोटा, राजीविका विभाग, नाबार्ड एवं एलडीएम, कृषि विपणन विभाग, राजस्थान बीज निगम, कोटा, राष्ट्रीय बीज निगम, इफको, कृभको, रामशांताय जैवी कृषि अनुसंधान केंद्र, जाखोड़ा, कोटा एवं चंबल फर्टिलाइजर एंड कैमिकल लिमिटिड, गढ़ेपान, कोटा द्वारा विभागीय योजनाओं, कृषि नवाचार एवं संस्थानिक योजनाओं की जानकारी दी गई.

साथ ही, शरणागति एफपीओ की निदेशक दुर्गेश कुमारी द्वारा ड्रोन के माध्यम से छिडकाव का लाइव प्रदर्शन किया गया.  उद्यान विभाग एवं सौर ऊर्जा निर्माता कंपनी के संयुक्त तत्वावधान में सोलर ऊर्जा का लाइव प्रदर्शन किया गया. राजीविका के स्वयं सहायता समूह को 1.34 करोड़ रुपए का चेक दिया गया.

गांव ढ़ोलीखेड़ा बनेगा स्मार्ट गांव 

उदयपुर : 30 नवंबर, 2024. कृषि विज्ञान केंद्र, भीलवाड़ा द्वारा राज्यपाल स्मार्ट विलेज पहल कार्यक्रम के तहत एकदिवसीय वरिष्ठ नागरिक सेवार्थ शिविर का आयोजन चयनित गांव ढ़ोलीखेड़ा में किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर डा. अजीत कुमार कर्नाटक ने बताया कि राज्यपाल स्मार्ट विलेज के तहत चयनित गांव ढ़ोलीखेड़ा को अब स्मार्ट गांव बनाया जाएगा.

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत कृषि के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी का समावेश कर गांव में फसल उत्पादन, पशुपालन, मुरगीपालन, बागबानी द्वारा किसानों को अधिक आमदानी अर्जित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा.

उन्होंने आगे यह भी बताया कि एमपीयूएटी ने स्मार्ट विलेज योजना के अंतर्गत पूरे सेवा क्षेत्र में 5 गांवों का चयन किया है और उन्हें उसी तरह स्मार्ट गांवों में परिवर्तित किया जाएगा, जैसा कि हम ने पिछले 3 सालों में मदार में किया था.

डा. आरएल सोनी, निदेशक, प्रसार शिक्षा ने बताया कि कृषि में कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए किसानों को औषधीय फसलों एवं व्यापारिक फसलों की उन्नत खेती करने की आवश्यकता है. केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. सीएम यादव ने बताया कि इस शिविर में 165 वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया, जिन्हें निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और वृद्धावस्था पेंशन, ईकेवाईसी खाते की नकल, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, उन्नत कृषि यंत्रों पर अनुदान, वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना आदि जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी के साथ ही आ रही समस्याओं का निवारण किया गया. शिविर में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य की जांच कर दवाई भी उपलब्ध करवाई गई.

इस अवसर पर टीएसपी कैपिटल योजना के तहत मिनी औयल मिल और सोलर थ्रैशर का उद्घाटन कुलपति डा. अजीत कुमार कर्नाटक द्वारा किया गया. इस दौरान सरपंच बद्री लाल जाट, डीन सीओए, भीलवाड़ा, मुख्य वैज्ञानिक डीएफआरएस, भीलवाड़ा, केवीके के अन्य कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थिति थे.

66 मीटर लंबी पगड़ी बांध कर कुलपति का किया सम्मान

कृषि विज्ञान केंद्र, शाहपुरा के सेवा क्षेत्र के बोरानी गांव के लोगों द्वारा कुलपति डा. अजीत कुमार कर्नाटक को सम्मानित किया गया. वहां 6 गांवों के 66 किसानों ने 66 मीटर लंबी पगड़ी बांध कर उन के 66वें साल के जीवन की शुरुआत की व बधाई दी.

National Milk Day: राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2024 के मौके पर बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी 2024 का लेखाजोखा

नई दिल्ली: केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग के ‘बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी 2024’ के वार्षिक प्रकाशन का विमोचन किया. इस अवसर पर मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और जार्ज कुरियन के साथसाथ पशुपालन और डेयरी विभाग की सचिव अलका उपाध्याय और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे.

बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी (बीएएचएस)- 2024 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो पशुधन और डेयरी क्षेत्र के रुझानों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करता है. बीएएचएस -2024, 1 मार्च, 2023 से 29 फरवरी, 2024 तक एकीकृत नमूना सर्वेक्षण के परिणामों पर आधारित है.

यह अनूठा सर्वे दूध, अंडे, मांस और ऊन जैसे प्रमुख पशुधन उत्पादों के उत्पादन अनुमानों पर महत्वपूर्ण डेटा उत्पन्न करता है, जो पशुधन क्षेत्र में नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस प्रकाशन में दुधारू पशुओं, पोल्ट्री पालतू पक्षी प्रजातियां, मारे गए जानवरों और ऊन निकाले गए भेड़ों की अनुमानित संख्या सहित प्रमुख पशुधन उत्‍पाद और प्रति व्यक्ति उपलब्धता का राज्यवार अनुमान शामिल है.

इस के अलावा यह पशु चिकित्सा अस्पतालों, पौलीक्लिनिक्स, गौशालाओं, राज्य फार्मों और अन्य बुनियादी ढांचे के विवरणों के साथसाथ कृत्रिम गर्भाधान की संख्या और पशुधन क्षेत्र संबंधित वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर बहुमूल्य डेटा प्रस्तुत करता है.

National Milk Day

साल 2023-24 में दूध, अंडा, मांस और ऊन उत्पादन

बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी (बीएएचएस) देश में दूध, अंडे, मांस और ऊन के उत्पादन का सालाना अनुमान जारी करता है. यह एकीकृत नमूना सर्वे (आईएसएस) के परिणामों पर आधारित होता है, जो देशभर में 3 मौसमों यानी गरमी (मार्चजून), बरसात (जुलाईअक्तूबर) और सर्दी (नवंबरफरवरी) में आयोजित किया जाता है. इस सर्वे के नतीजे  इस प्रकार दिए गए हैं:

दूध उत्पादन

बीएएचएस 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2023-24 के दौरान देश में कुल दूध उत्पादन 239.30 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो पिछले 10 सालों की तुलना में 5.62 फीसदी ज्‍यादा है. साल 2014-15 में यह 146.3 मिलियन टन था. इस के अलावा, साल 2022-23 के अनुमानों की तुलना में साल 2023-24 के दौरान उत्पादन में 3.78 फीसदी की वृद्धि हुई है.

साल 2023-24 के शीर्ष 5 दूध उत्पादक राज्यों के बारे में बात की जाए तो, उत्तर प्रदेश 16.21 फीसदी के साथ कुल दूध उत्पादन में पहले स्‍थान पर था. उसके बाद राजस्थान (14.51 फीसदी), मध्य प्रदेश (8.91 फीसदी), गुजरात (7.65 फीसदी) और महाराष्ट्र (6.71 फीसदी) का स्‍थान है.

वार्षिक वृद्धि दर के संदर्भ में पिछले वर्ष की तुलना में सब से अधिक वृद्धि पश्चिम बंगाल (9.76 फीसदी) ने दर्ज की. उस के बाद झारखंड (9.04 फीसदी), छत्तीसगढ़ (8.62 फीसदी) और असम (8.53 फीसदी) का स्थान रहा.

अंडा उत्पादन

देश में साल 2023-24 के दौरान कुल अंडा उत्पादन 142.77 बिलियन रहने का अनुमान है. पिछले 10 सालों में साल 2014-15 के दौरान 78.48 बिलियन के अनुमान की तुलना में 6.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. इस के अलावा साल 2022-23 की तुलना में साल 2023-24 के दौरान उत्पादन में सालाना 3.18 फीसदी की वृद्धि हुई है.

कुल अंडा उत्पादन में सब से बड़ा योगदान आंध्र प्रदेश का है, जिस की कुल अंडा उत्पादन में हिस्सेदारी 17.85 फीसदी है. इस के बाद तमिलनाडु (15.64 फीसदी), तेलंगाना (12.88 फीसदी), पश्चिम बंगाल (11.37 फीसदी) और कर्नाटक (6.63 फीसदी) का स्थान है. सब से अधिक वार्षिक वृद्धि दर लद्दाख (75.88 फीसदी) में दर्ज की गई और उस के बाद मणिपुर (33.84 फीसदी) और उत्तर प्रदेश (29.88 फीसदी) का स्थान है.

मांस उत्पादन

देश में 2023-24 के दौरान कुल मांस उत्पादन 10.25 मिलियन टन होने का अनुमान है. साल 2014-15 में 6.69 मिलियन टन के अनुमान की तुलना में पिछले 10 सालों में 4.85 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. इस के अलावा साल 2022-23 की तुलना में साल 2023-24 में उत्पादन में 4.95 फीसदी की वृद्धि हुई.

कुल मांस उत्पादन में मुख्य योगदान पश्चिम बंगाल का है. इस की हिस्सेदारी 12.62 फीसदी है, उस के बाद उत्तर प्रदेश (12.29 फीसदी), महाराष्ट्र (11.28 फीसदी), तेलंगाना (10.85 फीसदी) और आंध्र प्रदेश (10.41 फीसदी) का स्थान है. उच्चतम वार्षिक वृद्धि दर असम (17.93 फीसदी) में दर्ज की गई है, जिस के बाद उत्तराखंड (15.63 फीसदी) और छत्तीसगढ़ (11.70 फीसदी) का स्थान है.

ऊन उत्पादन

देश में साल 2023-24 के दौरान कुल ऊन उत्पादन 33.69 मिलियन किलोग्राम रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में 0.22 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्शाता है. साल 2019-20 के दौरान यह 36.76 मिलियन किलोग्राम और उस से पिछले साल 33.61 मिलियन किलोग्राम था.

कुल ऊन उत्पादन में सब से बड़ा योगदान राजस्थान का है, जिस की हिस्सेदारी 47.53 फीसदी है. उस के बाद जम्मू और कश्मीर (23.06 फीसदी), गुजरात (6.18 फीसदी), महाराष्ट्र (4.75 फीसदी) और हिमाचल प्रदेश (4.22 फीसदी) का स्थान है. सब से अधिक वार्षिक वृद्धि दर पंजाब (22.04 फीसदी) में दर्ज की गई. उस के बाद तमिलनाडु (17.19 फीसदी) और गुजरात (3.20 फीसदी) का स्थान है.

विश्व परिदृश्य

भारत दूध उत्पादन में विश्व में अग्रणी है, जबकि अंडा उत्पादन में दूसरे स्‍थान पर है.

पालतू पशुओं की होगी गिनती – जिले में 21वीं पशु संगणना का काम शुरू

नीमच : उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं ने बताया कि जिले में 21वीं पशु संगणना 2024 का काम प्रारंभ किया जा चुका है. पशु संगणना का यह काम भारत सरकार का राष्ट्रीय कार्यकम है. यह कार्य प्रत्येक 5 साल में किया जाता है.

जिले में 21वीं पशु गणना का काम ग्रामीण क्षेत्रों में 48 प्रगणकों एवं शहरी क्षेत्रों में 17 प्रगणकों और 7 सुपरवाइजरों द्वारा किया जा रहा है. नीमच जिले के तीनों विकासखंडों में पशुगणना का काम 4 माह में पूरा किया जावेगा.

पशु गणना का काम औनलाइन एप के माध्यम से किया जा रहा है. पशु गणना में सभी 16 प्रकार के पालतू पशुओं की गणना घरघर जा कर की जाएगी, जिस में एप पर पशु के प्रकार को दर्ज करने के लिए विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्‍त की जाएगी. साथ ही, क्षेत्र के अंतर्गत पाए जाने वाले सभी प्रकार के पशुओं के नस्लों की जानकारी भी ली जाएगी.

पशु चिकित्‍सा विभाग द्वारा जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं की सहीसही जानकारी विभागीय अमले को अवगत कराएं, जिस से कि भविष्य में शासन द्वारा पशुपालन विकास की योजनाओं को मूर्त रूप दिया जा सके.

लखनऊ में मिला रामजी दुबे को बेस्ट फार्मर अवार्ड इन इंटीग्रेटेड फार्मिंग

रामजी दुबे ग्राम नुआंव, मिर्जापुर , उत्तर प्रदेश से हैं. और बड़े पैमाने पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर लगभग 15 लाख सालाना का मुनाफा ले रहे हैं. इसके अलावा स्ट्राबेरी, खीरा, केला आदि की खेती करते हैं. पॉलीहाउस में नर्सरी तैयार करते हैं. पशुपालन भी करते हैं जिससे उन्हें खेती में बाजार से रासायनिक उर्वरक भी नहीं खरीदना पड़ता. इन्हीं खासियतों के चलते हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फार्म एन फूड कृषि सम्मान मिला. जिसके तहत उन्हें ‘बेस्ट फार्मर अवार्ड फार्मर इन इंटीग्रेटेड फार्मिंग’ सम्मान दिया गया.

रामजी दुबे ने साल 2018 से एकीकृत बागबानी के तहत 2000 वर्गमीटर एरिया में पौलीहाउस बनाया है. उस के बाद पौलीहाउस में उच्च गुणवत्ता का खरबूजा, रंगीन शिमला मिर्च एवं खुले खेत में केला, स्ट्रौबेरी, पपीता एवं एक हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की खेती आरंभ की, जिस से उन्हें 12 महीने कुछ न कुछ फसल उत्पाद मिलता रहता है और पूरे साल अच्छीखासी आमदनी होती रहती है.

किसान रामजी दुबे ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती से उन्हें 10 से 15 लाख की सालाना आमदनी होती है. रामजी दुबे पर्यावरण के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं. इस के तहत वे अपने जिले और आसपास के क्षेत्र के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार आदि अनेक राज्यों में भी एक लाख से अधिक पौधों का वितरण कर चुके हैं. उन्हें जिला स्तर, राज्य स्तर के साथसाथ राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

रामजी दुबे का कहना है कि उन्हें स्ट्रौबेरी की खेती से 5 से 6 महीने में एक एकड़ में 8 से 10 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है. खेती में तकरीबन 2 से 3 लाख रुपए का खर्च भी आता है. इस प्रकार तकरीबन 7 लाख रुपए के आसपास शुद्ध आमदनी हो जाती है.

Integrated Farming

इसी प्रकार रामजी दुबे को रंगीन शिमला मिर्च से तकरीबन 8 से 10 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है, वहीं पशुपालन के तहत वे गौपालन भी करते हैं, जिस के गोबर से वह बिना किसी लागत के वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं. इस से उन्हें अपनी खेती में बाजार से उर्वरक नहीं खरीदना होता है.

रामजी दुबे साल 2018 के पहले पारंपरिक तरीके से गेहूं, धान, चना, मटर, सरसों की खेती करते थे, जिस से उन्हें बहुत अच्छा मुनाफा नहीं होता था, परंतु आज एकीकृत खेती के माध्यम से बागबानी के द्वारा साल में 25 से 30 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है. वे अब पपीता की खेती भी करते हैं. पपीते की पौध जूनजुलाई माह में लगाते हैं, जिस की हार्वेस्टिंग अगले वर्ष मार्चअप्रैल के महीने में शुरू हो जाती है. उस समय नवरात्र एवं अन्य त्योहारों के कारण डिमांड अच्छीखासी रहती है. उन्हें एक एकड़ में तकरीबन 5 से 6 लाख रुपए का मुनाफा एक एकड़ में हो जाता है.

इस तरह से रामजी दुबे को समेकित व एकीकृत खेती से अनेक लाभ हो जाते हैं. आज अपने क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि जिले एवं आसपास के दूसरे क्षेत्रों में आप प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं. आसपास के जिलों से क्षेत्र से तमाम किसान तमाम सरकारी अधिकारी उन के खेतों को देखने आते हैं, जिस से उन्हें भी काफी प्रेरणा मिलती है.

 

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वैसे, 63 साल की उम्र पर रामजी दुबे के इस तरह के काम देख कर लोग बहुत प्रभावित होते हैं और दूसरे लोगों को प्रेरणा भी मिलती है.

महिला किसानों के लिए प्रेरणा बनी पुष्पा गौतम

हाल ही में पुष्पा गौतम को दिल्ली प्रेस, नई दिल्ली द्वारा लखनऊ में राज्यस्तरीय फार्म एन फूड ‘बेस्ट फार्मर अवार्ड इन मार्केटिंग’ से नवाजा गया है.

पुष्पा गौतम बस्ती जिले के बिहरा खास गांव से हैं. आप अनेक कृषि उत्पादों जैसे मल्टीग्रेन आटा, चावल, चना, अचारमुरब्बा, आदि की प्रोसेसिंग कर बाजार से कई गुना अधिक मुनाफा कमाने के साथसाथ अनेक लोगों को ट्रेनिंग व रोजगार भी दे रही हैं.

पुष्पा गौतम एमएबीएड हैं. फैजाबाद विश्वविद्यालय से मुख्य 2020 में कोरोना के समय एनआरएलएम के तहत आप समूह से जुड़ीं और सरकार द्वार समूह में दी जाने वाली अनेक प्रकार की ट्रेनिंग सुविधायों का लाभ उठाया. अनेक प्रकार के प्रशिक्षण लेने के बाद पुष्पा गौतम को अनेक जानकारियां मिलीं. किस तरह से नए रोजगार का सृजन हो और उस को शुरू करने के लिए फंड कहां से मिल सकेगा, इस पर उन्होंने जानकारी प्राप्त की. उस के बाद पुष्पा गौतम ने ब्लौक, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, गन्ना विभाग, नाबार्ड और आरसेटी से जुड़ कर आज अनेक उत्पादों की प्रोसैसिंग शुरू की.

women farmers

इन दिनों पुष्पा गौतम मल्टीग्रेन आटा, मक्का आटा, बाजरा आटा, चना बेसन, मसाला, अचार, मुरब्बा, आवला लड्डू आदि की प्रोसैसिंग और पैकिंग कर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. अनेक तैयार उत्पादों की पैकिंग के लिए मशीन भी समूह द्वारा प्राप्त फंड से खरीदी गई हैं.

इन दिनों पुष्पा गौतम तकरीबन 30 महिलाओं के साथ काम कर रही हैं और उन्हें स्वावलंबी बनाने का काम कर रही हैं.

इस के अलावा पुष्पा गौतम ने जनवरी, 2021 से ले कर सितंबर, 2024 तक तकरीबन 300 महिलाओं को नर्सरी, वर्मी कंपोस्ट, डेयरी फार्मिंग, वाशिंग पाउडर बनाना, अचार, मसाला, पापड़, मोमबती आदि पर ट्रेनिंग करा कर उन को रोजगार से जोड़ने का काम किया है. उन की इन सफलताओं को देखते हुए नाबार्ड से उन्हें एक ग्राम दुकान स्वीकृत की और नाबार्ड ने 2 साल में साढ़े 3 लाख रुपए का फंड मुहैया कराया. उन के समूह की अनेक महिलाओं द्वारा बनने वाले उत्पाद की मार्केटिंग और सप्लाई में काफी मदद मिल रही है. उन्हें इस काम के लिए ब्लौक, जिला, केवीके, नाबार्ड आदि से समयसमय पर सम्मानित किया जाता रहा है.

 

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साधना सिंह : डेयरी फार्मिंग से लाखों की कमाई

लखनऊ में आयोजित दिल्‍ली प्रैस द्वारा ‘फार्म एन फूड’  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उत्तर प्रदेश के ग्राम बहुअन मदार माझा की साधना सिंह को  फार्म एन फूड ‘बैस्ट  डेयरी ऐंड एनिमल कीपर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया.

साधना सिंह साल 2012 से कृषि क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं. इस समय वे कृषि आधारित कई व्यवसाय भी कर रही हैं. उन्होंने 2 भैंसों के साथ पशुपालन का काम शुरू किया और इस समय उन के पास 35 दुधारू भैंसें हैं. उन के दूध से पारंपरिक बिलोना विधि से भैंस का देशी घी तैयार किया जाता है, जो ‘अवध गोल्ड’ के नाम से बिकता है.

साधना सिंह के पास 2 पोल्ट्री फार्म हैं, जिस में एक पोल्ट्री फार्म 10,000 वर्गफुट का है, जिस से उन्हें सालाना 7 से 8 लाख का मुनाफा होता है. इस के अलावा 2 हेक्टेयर में वे मछलीपालन व्यवसाय से भी जुड़ी हैं, जिस से उन्हें सालाना 10 लाख का लाभ प्राप्त होता है.

dairy farming

साधना सिंह का कहना है कि हम पंगास मछली का उत्पादन करते हैं. यह हाईडेंसिटी में उत्पादन होने वाली मछली है, जिस से ज्यादा मुनाफा होता है. मछलीपालन में फायदा होते देख कई महिला किसानों ने मछलीपालन शुरू किया है, जिस से गांव में अनेक महिला किसान मछलीपालन से फायदा उठा रही हैं.

इस के अलावा उन्होंने बताया कि वे 40 एकड़ में गन्ने की खेती और 20 एकड़ में धान की खेती करती हैं. 2 एकड़ में वे जैविक खेती से धान और गेहूं उत्पादन करते हैं.

साधना सिंह के पास सोलर ड्रायर है, जिस में आम, टमाटर, तुलसी के पत्तों को सुखा कर बेचा जाता है. कृषि विभाग द्वारा मसूर उत्पादन के लिए उन्हें जिले में प्रथम पुरस्कार दिया गया है. नाबार्ड द्वारा जिले में 8 मार्च, 2024 (महिला दिवस) को ‘सक्रिय महिला’ का प्रथम पुरस्कार दिया गया. कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 15 अगस्त के शुभ अवसर पर प्रगतिशील महिला किसान के रूप में उन्हें सम्मानित किया गया. एनआरएलएम द्वारा मुरगीपालन के लिए ‘शक्ति वंदन सम्मानपत्र’ दिया गया. उपकृषि निदेशक गोंडा द्वारा कृषि क्षेत्र में महिला प्रगतिशील किसान से रूप में प्रशस्तिपत्र दिया गया. जिला अधिकारी गोंडा द्वारा जैविक खेती के लिए प्रशस्तिपत्र दिया गया

 

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नारायण दत्त जोशी: सोंठ प्रोसैसिंग से तरक्की

राजधानी लखनऊ में आयोजित  दिल्‍ली प्रैस की कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ की ओर से  कृषि सम्‍मान अवार्ड 2024 में उत्तराखंड के नारायण दत्त जोशी को  ‘बैस्‍ट फार्मर अवार्ड इन हार्वेस्टिंग ऐंड प्रोसैसिंग’ का सम्‍मान  दिया गया.

नारायण दत्त जोशी लगभग 30 वर्षों से खेती कर रहे हैं, जिस में उन के द्वारा मुख्य रूप से अदरक, गेहूं, मक्का, सरसों और राजमा की खेती की जाती है. इन सभी फसलों में इन के क्षेत्र की सब से महत्त्वपूर्ण व लाभप्रद फसल अदरक है. अदरक एक औषधीय जड़ वाली फसल है. अदरक की फसल को जमीन की खुदाई कर उसे निकाला जाता है, तत्पश्चात उसे प्रोसैस कर के उस से सोंठ बनाई जाती है. सोंठ के मंडी में अच्छे दाम मिलते हैं.

ginger processing

नारायण दत्त जोशी ने बताया कि सोंठ 2 प्रकार की होती हैं. एक सुखझोल सोंठ और दूसरी पनझोल सोंठ.

नारायण दत्त जोशी से प्रेरणा ले कर क्षेत्र के अनेक किसान अदरक की खेती करते हैं. इस के अलावा सोंठ प्रोसैसिंग में कार्य करने वाली अनेक महिलाओं को भी रोजगार प्राप्त होता हैं. सोंठ के द्वारा ही हमारा क्षेत्र तरक्की की ओर अग्रसर होता जा रहा है.

 

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नारायण दत्त जोशी को उन के कामों के लिए अनेक पुरस्कार भी मिल चुके हैं.