मधुमक्खीपालन करने वाले किसानों और उद्यमियों के लिए हरियाणा सरकार ने बड़ी राहत दी है. अब मधुमक्खीपालकों को भी बीमा सुरक्षा (Beekeeping Insurance) मिलेगी. सरकार ने मधुमक्खीपालन को मुख्यमंत्री बागबानी बीमा योजना में शामिल कर लिया है. इस से प्राकृतिक आपदा या दूसरी अनहोनी के कारण मधुमक्खियों और उन के बक्सों को होने वाले नुकसान की भरपाई का रास्ता खुलेगा.

केवल 50 रुपए में होगा बीमा

इस योजना के तहत एक मधुमक्खीपालक अधिकतम 250 मधुमक्खी कालोनियों और 250 बक्सों का बीमा (Beekeeping Insurance) करा सकेगा. दोनों को मिला कर अधिकतम 6.25 लाख रुपए तक का बीमा कवर मिलेगा. खास बात यह है कि इस के लिए प्रति कालोनी और प्रति बौक्स केवल 50 रुपए बीमा शुल्क देना होगा.

बाढ़ और आग से नुकसान पर भी मिलेगी राहत

मधुमक्खीपालन में किसानों को कई तरह के जोखिम उठाने पड़ते हैं. बाढ़ आने पर मधुमक्खियों के बक्से पानी में डूब जाते हैं, जबकि आग लगने से पूरी कालोनी और बक्से नष्ट हो सकते हैं. कई बार मधुमक्खियों में बीमारी फैलने से भी पालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है.

नई व्यवस्था में इन सभी स्थितियों को बीमा सुरक्षा के दायरे में रखा गया है. बाढ़ में कालोनियों और बक्सों के डूबने, आग से नष्ट होने तथा मधुमक्खियों में महामारी फैलने से हुए नुकसान पर योजना के नियमों के अनुसार बीमा राशि मिलेगी.

परिवहन के दौरान दुर्घटना भी बीमा में शामिल

मधुमक्खीपालन में बेहतर शहद उत्पादन के लिए पालकों को समयसमय पर अपनी कालोनियां एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जानी पड़ती हैं. इस दौरान दुर्घटना होने पर भी नुकसान का खतरा रहता है.
सरकार ने परिवहन के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को भी बीमा में शामिल किया है. हालांकि, इस के लिए दुर्घटना हरियाणा की सीमा के भीतर होनी चाहिए और संबंधित मामले में एफआईआर या डीडीआर दर्ज होना जरूरी है.

ऐसे समझें बीमा का गणित

सरकार ने मधुमक्खीपालकों पर बीमा शुल्क का बोझ कम रखा है. प्रति कालोनी 50 रुपए और प्रति बौक्स 50 रुपए बीमा शुल्क निर्धारित किया गया है. इस के बदले प्रत्येक कालोनी और बौक्स पर 1,250 रुपए का बीमा कवर मिलेगा.

एक मधुमक्खीपालक अधिकतम 250 कालोनियों और 250 बक्सों का बीमा करा सकता है. इस हिसाब से 250 कालोनियों पर 3,12,500 रुपए और 250 बक्सों पर अलग से 3,12,500 रुपए का बीमा कवर मिलेगा. इस तरह कुल बीमा सुरक्षा 6.25 लाख रुपए तक हो सकती है. अधिकतम सीमा पर दोनों का कुल बीमा शुल्क 25,000 रुपए होगा.

भावांतर भरपाई योजना में पंजीकरण जरूरी

इस बीमा योजना का लाभ लेने के लिए मधुमक्खी पालकों को भावांतर भरपाई योजना-शहद के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य है. साथ ही प्रत्येक मधुमक्खी बौक्स पर भावांतर भरपाई योजना का यूनिक नंबर होना भी जरूरी है, इसलिए बीमा कराने से पहले पालकों को अपना पंजीकरण और बौक्स से संबंधित जानकारी पूरी कर लेनी चाहिए.

कहां से मिलेगी योजना की जानकारी

मधुमक्खीपालक योजना की पात्रता, पंजीकरण और बीमा संबंधी जानकारी के लिए अपने जिले के जिला उद्यान अधिकारी के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं. इस के अलावा हरियाणा उद्यान विभाग के टोल फ्री नंबर 1800-180-2021 पर भी जानकारी ली जा सकती है.

सरकार की इस पहल से मधुमक्खीपालन को सुरक्षित व्यवसाय बनाने में मदद मिल सकती है खासकर उन किसानों को राहत मिलेगी, जो खेती के साथ शहद उत्पादन को अतिरिक्त आमदनी का जरीया बना रहे हैं.

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