Mulberry Farming: चीन से चलकर शहतूत समूची दुनिया में फैल चुका है. शहतूत का फल जितना रसीला और मीठा होता है, उतना ही मोटा मुनाफा देने वाला भी होता है. गर्मी के मौसम में इसे खाने से काफी ठंडक मिलती है, क्योंकि इसमें 91 फीसदी पानी की मात्रा होती है. लू से बचने के लिए इस फल को खाया जा सकता है. इसमें फ्रक्टोज के साथ विटामिन सी और ग्लूकोज की भरपूर मात्रा रहती है, जिससे यह कई रोगों के लिए लाभकारी होता है.

कैसे करें कलम से पौध तैयार

शहतूत के पेड़ से टहनियां काटकर उसकी 6 से 8 इंच लंबी कटिंग को मिट्टी में लगाया जाता है. इसके 6 महीने के बाद ही 3 से 4 फुट तक का पेड़ तैयार हो जाता है. 1 एकड़ खेत में शहतूत के 5000 पेड़ लगाए जा सकते हैं, जिनसे करीब 8000 किलोग्राम शहतूत के फल प्राप्त किए जा सकते हैं.

कब और कैसे करें पौधा रोपण

कृषि वैज्ञानिक बृजेंद्र मणि बताते हैं कि, शहतूत की खेती (Mulberry Farming) हर इलाके और परिस्थिति में की जा सकती है. बलुई दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए ज्यादा मुफीद होती है. इसकी खेती ऐसी जगहों पर की जानी चाहिए, जहां पानी का ठहराव नहीं होता हो. जुलाई और अगस्त महीने में इसके पौधों को लगाया जाता है, जिससे पौधों को बारिश के जरिए बेहतर पानी मिल जाता है. इसके बाद सितंबर और जनवरी महीने में ही पौधों की सिंचाई की जरूरत पड़ती है.

लाखों में आमदनी

बाजार में शहतूत की कीमत 600 से 800 रुपए प्रति किलोग्राम है. इस हिसाब से 1 एकड़ में शहतूत की खेती (Mulberry Farming) करने से कम से कम 35 लाख रुपए मिल सकते हैं. इस में से खेती की लागत 20 लाख रुपए घटा दी जाए तो सालाना 15 लाख रुपए का मुनाफा हो सकता है.

क्या है उपयोग

दक्षिण भारत के साथ उत्तर भारत में भी शहतूत का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. कई औषधीय गुणों से भरपूर शहतूत की पत्तियां और छाल भी इंसानी सेहत के लिए फायदेमंद हैं. इसकी छाल का काढ़ा बनाकर पीने से गले की खराश और सूजन में काफी राहत मिलती है. इसके पत्तों का लेप एक्जिमा और दाद में बहुत ही फायदा देता है. इसके बीजों की लुगदी को पैरों की बिवाइयों में लगाने से लाभ होता है. शहतूत में पाया जाने वाला रेजवटेर्रोल शरीर में फैले प्रदूषण को साफ कर संक्रमित तत्त्वों को बाहर निकाल देता है. शहतूत का जूस पीने से चेहरे की झुर्रियां गायब हो जाती हैं.

शहतूत को अच्छी तरह से धोकर उस पर काली मिर्च पाउडर और नमक छिड़क कर खाया जाता है. कच्चे शहतूत की सब्जी भी काफी स्वादिष्ठ होती है. पके शहतूत का स्वाद काफी मीठा होता है, इसलिए खाना खाने के बाद मिठाई के तौर पर लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. शहतूत को मिक्सी में पीसकर शरबत के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके शरबत को पीने से गरमी में लू लगने का खतरा काफी कम हो जाता है.

शहतूत और चौके छक्के

क्रिकेट मैच में चौका छक्का लगने पर खेल प्रेमी तालियां बजाते हैं और खुशी में झूमते – नाचते हैं. जिस बैट से चौके-छक्के लगते हैं, वह बैट शहतूत की लकड़ी से बनता है. इसके साथ ही हॉकी स्टिक, टेबल टेनिस रैकेट, बैडमिंटन रैकेट वगैरह भी शहतूत की लकड़ी से ही बनाए जाते हैं.

इस लिहाज से देखा जाए तो हेल्थ के साथ-साथ खेलों में भी शहतूत का बहुत बड़ा योगदान है. इसकी लकड़ी काफी हल्की और मजबूत होती है, जिसकी वजह से खेल के सामानों को बनाने में इसका काफी इस्तेमाल किया जाता है.

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