Herbal cosmetic : हर्बल कास्मेटिक लघु उद्योग का उत्पाद है. इस की मार्केटिंग और एक्सपोर्ट में सरकार कई तरह की सहायता करती है, साथ ही कर्ज भी मुहैया कराती है.

घर में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगा कर कम लागत में अच्छी कमाई की जा सकती है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोग लागत को ले कर काफी सेंसटिव हैं. हमारे देश के लोग भी त्वचा की देखभाल को ले कर सजग हुए हैं.

भारत में जड़ीबूटियां काफी मात्रा में उपलब्ध हैं, इसलिए यहां हर्बल कास्मेटिक का उत्पादन अपेक्षाकृत आसान व कम लागत में संभव है.

मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने का खर्च ?

हर्बल कास्मेटिक मैन्यूफैक्चरिंग का आधार जड़ीबूटियां हैं, जिन में चंदन, हलदी, तुलसी, नीम, एलोवेरा नारियल तेल व लौंग वगैरह का इस्तेमाल किया जाता है. इस कच्चे माल के साथसाथ जरूरी बरतन, गरम करने के लिए गैस और एक कमरे की जरूरत होती है, जहां एक यूनिट लग सके.

मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए खर्च का 90 फीसदी भाग कर्ज के रूप में प्राप्त किया सकता है. यह कर्ज पब्लिक सेक्टर के बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और केंद्र व राज्य सरकार की वित्तीय संस्थाएं देती हैं.

पैकेजिंग और मार्केटिंग

आजकल उत्पाद की क्वालिटी के साथसथ पैकेजिंग पर भी काफी जोर दिया जाने लगा है. इस की पैकिंग मार्केट की मांग और निर्यात किए जाने वाले देश के लोगों के शौपिंग बिहेवियर को देखते हुए कर सकते हैं.

हर्बल कास्मेटिक की मांग भारत के बाजार में काफी है, लेकिन इन दिनों विदेशों के स्पा सेंटरों में भी हर्बल कास्मेटिक के बढ़ते उपयोग ने उद्यमियों के लिए एक्सपोर्ट की संभावनाओं का काफी विस्तार किया है.

बनने वाले प्रोडक्ट

हर्बल मैन्यूफैक्चरिंग में साबुन, क्रीम, तेल और शैंपू जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिन में सिर्फ जड़ीबूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. कभीकभी एलोपैथी मैटीरियल्स को भी प्रयोग में लाया जाता है.

हर्बल शैंपू मेकिंग

आज के दौर में शैंपू का प्रचलन बहुत हो गया है. इस के इस्तेमाल से बाल मुलायम और चमकीले बने रहते हैं. व्यावसायिक तौर पर यह काफी लाभप्रद है और इस की मांग भी बहुत ज्यादा है.

आवश्यक सामग्री

नारियल का तेल, कास्टिक पोटाश, शुद्ध पानी (डिस्टिल वाटर) पोटिशियम कार्बोनेट, सुगंधित पदार्थ.

बनाने की विधि

सब से पहले नारियल तेल का पूरी तरह साबुनीकरण करने के लिए उस में कास्टिक पोटाश मिलाया जाता है. उस के बाद उस में डिस्टिल वाटर मिला कर 75 सेंटीग्रेड तापमान तक गरम किया जाता है. फिर इस घोल को धीरेधीरे डिस्टिल वाटर की सहायता से पतला कीजिए. उस के बाद पोटेशियम कार्बोनेट मिला दीजिए. अंत में सुगंधित पदार्थ मिला दीजिए.

इस मिश्रण को बड़े पारदर्शक जार में रख दीजिए. कुछ देर रखा रहने पर भारी भाग जार की तली में बैठ जाएगा. ऊपर वाले तरल भाग को निकाल कर छान लीजिए और प्लास्टिक की सुंदर शीशियों में पैक कर के और लेबल लगा कर बाजार में बेच दीजिए. इसी तरह आप दूसरे उत्पाद भी तैयार कर सकते हैं और उन्हें आमदनी का जरीया बना सकते हैं.

प्रशिक्षण संस्थान

देश में कई ऐसे संस्थान हैं, जहां से  तकरीबन 30 दिनों का कास्मेटिक मैन्यूफैक्चरिंग का प्रशिक्षण हासिल किया जा सकता है. ऐसे संस्थानों के पते नीचे दिए जा रहे हैं.

* खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन, गांधी आश्रम राजघाट, नई दिल्ली.

* डा. बीआर अंबेडकर इंस्टीट्यूट औफ रूरल टेक्नोलोजी एंड मैनेजमेंट, खादी और विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन, त्रियंबक विद्या मंदिर, नासिक.

* मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रेनिंग सेंटर, दूरवानी नगर, बेंगलूरू, कर्नाटक.

* खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन के ब्लाक, चौधरी बिल्डिंग, कनाट प्लेस,नई दिल्ली.

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