Cotton Cultivation: कृषि जानकारों का मानना है कि नरमा यानि कपास की अच्छी पैदावार के लिए खेत में नरमा पौधों की सही संख्या होना और सिंचाई का सही इंतजाम होना जरूरी है. नरमा पौधों की सही संख्या के बाद पौधों के लिए सही मात्रा में खाद व पानी की जरूरत होती है. उस के अलावा खास बात लंबी अवधि तक फल देने वाले बीज का चुनाव भी है.

किसानों का कहना है कि 1 एकड़ में कपास के 4 हजार से 4800 तक पौधे होने चाहिए. पौधों के बीच में 3 से सवा 3 फुट तक का फासला होना चाहिए, ताकि पौधों को बढ़ने के लिए सही जगह मिले और पौधों के बीच में सही फासला होने पर पौधों को हवा धूप ठीक से मिले, जिस से उन में फुटाव ठीक होगा.

माहिरों का कहना है मौसम के मिजाज का कुछ पता नहीं चलता, इसलिए कपास की बोआई सीधी न कर के डोलियों (मेंड़ों) पर करें. अगर किसान हाथ से बोआई करते हैं, तो बीज के साथ गोबर की खाद जरूर डालें.

आज ज्यादातर किसान देशी कपास न बो कर बीटी कपास की ही बीजाई करते हैं. बीटी कपास के लिए किसानों को यह भी जानना जरूरी है कि उस के लिए ज्यादा खुराक चाहिए. इस की बीजाई के दौरान 1 एकड़ में 20 किलोग्राम पोटाश, एक बैग डीएपी, 20 किलोग्राम यूरिया, 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट जरूर डालें.

कुछ क्षेत्रों में जहां खारा पानी है, वहां 1 एकड़ में कम से कम 8 से 10 ट्राली प्रति एकड़ गोबर की खाद खेत तैयार करते समय जरूर डालें, क्योंकि नरमा में पौधे ज्यादा नमक सहन नहीं कर पाते और गोबर की खाद डालने से उन्हें ताकत मिलती है.

अंगरेजी में एक कहावत है ‘वैल बिगेन इज हाफ डन’ यानी किसी काम की अगर शुरुआत अच्छी हो तो समझ लो कि आधा काम निबट गया. यह बात खेती में भी लागू होती है. खेती की शुरुआत बीज से होती है. बीज ही खेती का मुख्य आधार है. बीज पर ही फसलों का उत्पादन टिका होता है. अच्छे बीज जहां औसतन 20 से 30 फीसदी ज्यादा पैदावार देते हैं. वहीं खराब बीजों से मेहनत, पैसा और समय दोनों बरबाद हो जाते हैं.

Cotton Cultivation

अच्छी शुरुआत अच्छे बीजों के साथ

डाक्टर बीज : ‘हर हाल में खुशहाल डाक्टर बीज का यही कमाल’  यह नारा है डाक्टर बीज उत्पादन करने वाली कंपनी सोलार एग्रोटैक का. कंपनी का 2 तरह का कपास बीज बाजार में है.

सोलार 65 : मध्यम अवधि, 155-160 दिनों तक फसल तैयार होने का समय. पौधे सीधी बढ़त वाले एक समान बड़े और वजनदार टिंडे.

कपास का खिलाव अच्छा चुगाई आसान. अधिक टिंडे. रस चूषक कीटों के प्रति सहनशील. पौधों की लंबाई 150 से 160 सेंटीमीटर. बीजाई का समय 31 मई तक. रेशे की लंबाई 29 से 30 मिलीमीटर. सभी प्रकार की नरमा उगाने वाली मिट्टी के लिए सही है.

गोल्ड स्टार : मध्यम अवधि 160-165 दिनों में तैयार होने वाली फसल. पौधे सीधी बढ़त वाले. मजबूत तना. हर तरह के मौसम में कामयाब पौधे की लंबाई 6 से 7 फुट. पौधे की ऊंचाई जल्दी बढ़ती है. टिंडे पासपास और ज्यादा संख्या में मिलते हैं. टिंडे मोटे व वजनदार तकरीबन 5 से 5.6 ग्राम. पौधों की संख्या ज्यादा और अच्छी पैदावार. खिलाव अच्छा चुगाई भी आसान. रस चूसक कीटों के प्रति सहनशील. हर प्रकार की नरमा लगाने वाली मिट्टी में कामयाब.

शिल्पा व कार्तिक : कपास की उन्नत किस्मों में शिल्पा और कार्तिक भी शामिल है. इन में मरोडिया नामक बीमारी से छुटकारा मिल जाता है. इन दोनों किस्मों में फल झड़ने के बाद भी अंकुरण होता है. इन में विपरीत परिस्थितियों में जूझने की कूवत भी है.

फसल मई के आखिरी महीने तक बोई जा सकती है और पकने की अवधि 155 से 160 दिन है.

विक्रम 310 : इस के टिंडे मध्यम आकार के होते हैं. फसल तैयार होने का समय 160-170 दिन है. इस किस्म की बोआई मई के आखिर तक होती है. सामान्य नरमे की तुलना में कम दूरी पर बोया जाता है.

दक्ष सी 111 : टाटा कंपनी के दक्ष सी 111 बीज की खासीयत के बारे में बीज कंपनी का कहना है कि इस के टिंडे बड़े साइज के व अधिक मात्रा में आते हैं.

फसल पकने तक हरी रहती है व पौधे की टहनियों में लचक होने के कारण नरमा चुनते समय पौधा टूटता नहीं है. रस चूसक कीटों के प्रकोप में कमी होती है. फसल पकने की अवधि 155-165 दिन है. पौधों की लंबाई 5.5 से 6 फुट तक होती है. बोआई मई के आखिर तक कर सकते हैं.

राघव, बलवान, एनसीएस 9013 : नुजिवीडू सीड्स लि. की एनसीएस-9013, राघव व बलवान जैसी वैराइटी हैं, जिन्हें हरियाणा व पंजाब में किसानों ने आजमाया है और अच्छी पैदावार ली है.

सुपर श्रद्धा : सुपर सीड्स कंपनी का सुपर श्रद्धा संशोधित देशी कपास बीज है. फसल पकने का समय 155-160 दिन है और फसल बीजाई का समय अप्रैल से जून महीने तक है.

सुपर 931 : इस पौधे का ऊंचा कद, मोटे टिंडे होते हैं व पूरी पैदावार मिलती है. फसल पकने का समय 160-165 दिन है व टिंडों का वजन 5 से साढ़े 5 ग्राम होता है. इस के रोएंदार पत्ते होते हैं. यह रसचूसक कीट के लिए प्रतिरोधक व सिंचित व असिंचित दोनों क्षेत्रों के लिए सही है.

कावेरी बुलेट व कावेरी जादू : कावेरी बुलेट में फसल पकने का समय 145 से 150 दिन है. इस में 2 से 3 फल शाखाएं व 21 से 24 तक उपफल शाखाएं निकलती हैं. फूल आने की अवधि 40 से 45 दिन है.

इस के अलावा अंकुर 3228, अंकुर 3028, अंकुर 3244 , जेके 0109, जेके 8940 जैसी अनेक वैराइटियां हैं, इसलिए किसान बीज बोने से पहले अपने इलाके के आधार पर सही बीज का चुनाव करें और संबंधित जानकारी ले कर बीज जरूर बोएं. कंपनी के वादों से पहले पड़ताल भी जरूरी है.

मशीन से भी बोआई

पशुचालित प्लांटर: केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल द्वारा बनाई गई पशुओं से चलने वाली बोआई मशीन से भी कपास की बोआई की जाती है. इस पशुचालित प्लांटर से कतार से कतार की दूरी व बीज से बीज की दूरी नियंत्रित की जाती है. चूंकि कपास का बीज महंगा होता है, इसलिए इस मशीन से बोने पर बीज की बरबादी नहीं होती.

इस मशीन से सरसों जैसे छोटे बीज से ले कर मध्यम और बड़े बीज जैसे सोयाबीन मूंगफली, मक्का आदि की भी बोआई की जा सकती है. इस मशीन के लिए केवल 1 जोड़ी बैलों की जरूरत होती है, जो मशीन को खींच कर चलाते हैं. मशीन की अनुमानित कीमत 15 हजार रुपए है.

इस मशीन से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए किसान केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के  नंबरों 0755-2521133, 2521139 व 2521142 पर बात कर सकते हैं.

स्वचलित सीड ड्रिल मशीन : हाथ से चलने वाली सीड ड्रिल मशीन और ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलने वाली आटोमैटिक सीड ड्रिल मशीन से भी कपास की बिजाई कर सकते हैं. इस के लिए भारत एग्रो इंजीनियरिंग की मशीनें उपलब्ध हैं, जिन पर सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाती है. इन मशीनों से संबंधित जानकारी के लिए कंपनी के फोन नंबर 02827-253858पर बात कर सकते हैं.

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