Farming Work : साल का यह समय  फसलों की देखभाल के लिहाज से बड़ा अहम होता है. उत्तर भारत में गरमियों का दौर शुरू हो जाता है और दिन में सुस्ती का माहौल बनने लगता है. पर किसानों को इस से कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि अप्रैल-मई महीने में रबी मौसम की तमाम फसलों की कटाई का सिलसिला शुरू हो जाता है.

* अनाज गेहूं की फसल अमूमन अप्रैल-मई तक पक कर तैयार रहती है, लिहाजा इस महीने का अहम काम गेहूं की फसल की कटाई का होता है.

* गेहूं की फसल काटने के बाद उसे अच्छी तरह सुखा कर उस की गहाई करें. अगर गेहूं के भंडारण का इरादा है, तो उस के लिए भंडारण के नए से नए व उन्नत तरीकों को आजमाएं.

* चना पुराने जमाने से गेहूं का खास जोड़ीदार माना जाता है. पहले काफी लोगा बराबर मात्रा में गेहूं चना मिला कर ही आटा पिसवाते थे, जिसे मिस्सा आटा कहते हैं. अप्रैल-मई तक चने की भी फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है, लिहाजा इस की कटाई का काम भी फौरन निबटा लें.

* चने की देरी से बोई जाने वाली फसल अलबत्ता कटाई लायक नहीं होती. उस में इस दौरान दाना पड़ने लगता है. इस की कटाई की नौबत बाद में आती है.

* देरी से बोई गई चने की फसल पर अगर फलीछेदक कीट का असर नजर आए तो वैज्ञानिकों से राय ले कर मुनासिब इलाज करें. इस के लिए जैविक तरीके आजमाना बेहतर रहेगा.

* आमतौर पर अप्रैल-मई में बारिश का कोई अंदेशा नहीं रहता और खेत सूखने लगते हैं. ऐसी हालत में गन्ने की फसल में जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें.

* गन्ने के खेत में बाकायदा निराईगुड़ाई करें और किसी तरह के खरपतवार न पनपने दें. बेहतर होगा कि निराईगुड़ाई से पहले खेत में गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद, कंपोस्ट खाद या केंचुआ खाद डालें. इस के बाद निराईगुड़ाई करने से खादें खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाएंगी इस के खेत की मिट्टी की पानी जज्ब करने की करने की कूवत में भी इजाफा होगा और यकीनन बेहतर क्वालिटी के गन्ने पैदा होंगे.

* अपने सूरजमुखी के खेत का मुआयना करें. उन में अप्रैल-मई तक फूल आने लगते हैं. ऐसे में खेत की निराईगुड़ाई करना जरूरी होता है. तभी फूल बेहतर निकलते हैं. खेत की नमी का जायजा भी लें. नमी में कमी होने पर तरीके से सिंचाई करें. जरूरी लगे तो माहिरों से पूछ कर खेत में यूरिया खाद का छिड़काव करें.

* बैसाखी मौसम की मूंग बोने का भी यह माकूल वक्त होता है. अगर ऐसा इरादा हो तो 15 अप्रैल तक मूंग की बोआई का काम निबटा लें.

* जो मूंग मार्च महीने में बोई गई थी, उस के खेत की जांच भी करें. अमूमन अप्रैल में इसे सिंचाई की दरकार होती है. अगर खेत नमी रहित यानी सूखे नजर आएं तो बगैर चूके उन की सिंचाई करें.Farming Work

* इनसानों की तरह गायभैंसों वगैरह को भी सारे साल खाने यानी चारे की दरकार रहती है. पशुओं के चारे के लिहाज से अप्रैल-मई में मक्का, लोबिया व बाजरे की बोआई करें, ताकि मईजून में चारे की किल्लत न रहे.

* फरवरी में चारे के लिए जो फसलें बोई थीं, उन की खोजखबर लेते रहें. उन में नाइट्रोजन की खुराक देने के लिए यूरिया खाद डालें और खेत में बराबर नमी कायम रखें.

* इस बीच फूलगोभी की बीज वाली फसल आमतौर पर कटाई लायक हो जाती है, लिहाजा उस की कटाई का काम निबटा लें. कटाई के बाद फसल को सूखा कर बीज निकाल लें. बीजों को सही तरीके से पैक कर के ही उन का भंडारण करें.

* तुरई की नर्सरी अप्रैल के पहले हफ्ते के दौरान जरूर डालें, ताकि समय पर पौध पनप सकें. फरवरीमार्च महीनों के दौरान डाली गई नर्सरी की पौध की रोपाई कर दें. रोपाई 100×50 सैंटीमीटर की दूरी पर करें. रोपाई करने के बाद सिंचाई करना न भूलें.

* अरबी की खेती का इरादा हो तो अप्रैल महीने में ही इस की अगेती किस्मों की बोआई का काम निबटा लें.

* जनवरीफरवरी के दौरान नर्सरी में तैयार की गई करेले व लौकी की पौधों की रोपाई करें. करेले की रोपाई 150×60 सैंटीमीटर की दूरी पर करें, जबकि लौकी की रोपाई 2×1 मीटर फासले पर करें.

* मार्च महीने में रोपी गई बैगन की फसल में निराईगुड़ाई करें व जरूरत के हिसाब से सिंचाई भी करें. नाइट्रोजन के लिहाज से खेत में यूरिया खाद डालें व बराबर नमी बरकरार रखें.

* इस महीने लहसुन की फसल की खुदाई निबटा लें. खोदने के बाद फसल को 3 दिनों तक खेत में रहने दें. इस के बाद फसल को छाया में ठीक से सुखा कर लहसुन का भंडारण करें.

* अब तक मूली व गाजर की बीज वाली फसल कटाई के लिए तैयार हो गई होगी. उस की कटाई कर के फसल को ढंग से सुखाने के  बीज निकालें. बीजों को ठीक से सुखा कर पैक करें और फिर उन का भंडारण करें.

* अदरक की बोआई का काम भी अप्रैल में निबटाएं. बोआई के लिए लगभग 20 ग्राम वाले कंदों का इस्तेमाल करें. इस की बोआई 30-40 सेंटीमीटर की दूरी पर मेड़ें बना कर करें. कंदों के बीच 20 सैंटीमीटर का फासला रखें.

* अगर शिमला मिर्च की फसल लगाई हो तो उस की निराईगुड़ाई Farming Work करें व जरूरत के लिहाज से उस की सिंचाई भी करें. यूरिया खाद भी डालें ताकि नाइट्रोजन की कमी न रहे और फल बढि़या किस्म के आएं.

* आम का मीठमीठा मौसम दस्तक दे रहा है. आम के बागों की सिंचाई करें ताकि नमी कम न हो पाए. पेड़ों पर कीटों या बीमारियों के लक्षण नजर आएं तो कृषि वैज्ञानिक से राय ले कर सही दवा का इस्तेमाल करें.

* ठंड से पिछले दिनों परेशान रहे अपने जानवरों का उन के माहिर डाक्टरों से मुआयना कराएं. कोई दिक्कत हो तो इलाज कराने में कोताही न करें.

* पशुओं को जरूरी टीके वगैरह लगवाने का पूरा खयाल रखें. Farming Work

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