Mango and Climate change : ‘फलों का राजा’ कहलाने वाला आम आज बदलते मौसम की चुनौती से जूझ रहा है. जलवायु परिवर्तन का असर अब आम की बागवानी पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है. तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव, लंबे शीतकाल, अनियमित वर्षा और कीट प्रकोप के कारण न केवल फलन प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम की गुणवत्ता और मिठास पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ी है.
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक और जलवायु-अनुकूल खेती तकनीकों को नहीं अपनाया गया, तो आने वाले वर्षों में आम उत्पादन के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.
मंजर आने में देरी, उत्पादन पर पड़ सकता है असर
इस वर्ष कई क्षेत्रों में आम के पेड़ों पर मंजर सामान्य समय से देर से आए. रात के तापमान में गिरावट और मौसम के असामान्य व्यवहार ने पुष्पन चक्र को प्रभावित किया है. आम में बेहतर फूल आने के लिए नियंत्रित तापमान जरूरी होता है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता के कारण देर से आने वाले मंजर अधिक संवेदनशील हो जाते हैं और रोग-कीटों का खतरा भी बढ़ जाता है. इसका सीधा असर फल बनने और टिकने की क्षमता पर पड़ सकता है. Mango and Climate change
‘मिली बग’ बना बड़ी चिंता
इन दिनों कई बागों में मिली बग का प्रकोप भी चुनौती बना हुआ है. यह कीट मंजर और छोटे फलों का रस चूसकर नुकसान पहुंचाता है, जिससे फल झड़ने लगते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यह कीट चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है, जिस पर काली फफूंद जम जाती है. इससे पत्तियों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता घटती है और पेड़ों की सेहत कमजोर होती है. यदि समय रहते नियंत्रण न किया जाए, तो पैदावार में भारी कमी संभव है.
पुराने पेड़ ज्यादा संवेदनशील
वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि पेड़ों की उम्र भी जलवायु प्रभाव को प्रभावित करती है. युवा पेड़ मौसम के बदलाव को अपेक्षाकृत बेहतर सहन कर लेते हैं, जबकि 15 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों में तापमान तनाव का असर अधिक दिखाई देता है. ऐसे बागों में विशेष प्रबंधन, पोषण और रोग-कीट निगरानी की जरूरत बढ़ जाती है.
जलवायु परिवर्तन और भविष्य की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी परागण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है. अचानक गर्मी बढ़ने से परागण करने वाले मित्र कीटों की सक्रियता घटती है, जिससे फल झड़ने की समस्या बढ़ सकती है. इस स्थिति में जलवायु सहनशील किस्मों, बेहतर बाग प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों को अपनाना भविष्य की जरूरत बनता जा रहा है. Mango and Climate change
आम की मिठास बचाने के 5 जरूरी उपाय
1. मिली बग नियंत्रण पर ध्यान दें
पेड़ों के तनों पर प्लास्टिक या पॉलिथीन पट्टी बांधकर कीटों को ऊपर चढ़ने से रोका जा सकता है. शुरुआती अवस्था में निगरानी और नियंत्रण बेहद जरूरी है.
2. संतुलित पोषण अपनाएं
केवल नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों पर निर्भर न रहें. एनपीके के साथ बोरॉन, जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व फल विकास और गुणवत्ता सुधार में मदद करते हैं.
3. ड्रिप और मल्चिंग अपनाएं
जलवायु अनिश्चितता के दौर में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग नमी संरक्षण के प्रभावी उपाय हैं. इससे पानी की बचत के साथ पौधों को तनाव से राहत मिलती है.
4. डिजिटल मौसम जानकारी का उपयोग करें
मौसम आधारित मोबाइल ऐप, अलर्ट और डिजिटल फार्मिंग टूल किसानों को पहले से निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं.
5. नियमित निरीक्षण और वैज्ञानिक सलाह लें
बाग की नियमित निगरानी, सूखी टहनियों की छंटाई और विशेषज्ञ सलाह के अनुसार प्रबंधन अपनाना जरूरी है.
क्या करें, क्या न करें
करें
• बाग का नियमित निरीक्षण करें
• संतुलित खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करें
• मित्र कीटों की सुरक्षा का ध्यान रखें
• साफ-सफाई और वायु संचार बनाए रखें
न करें
• मंजर अवस्था में तेज रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग न करें
• अत्यधिक सिंचाई से बचें
• बागों में अत्यधिक घनत्व न रखें
• कीट प्रकोप को नजरअंदाज न करें
परंपरा नहीं, विज्ञान बन रही है आम की खेती
आम की बागवानी अब सिर्फ अनुभव आधारित खेती नहीं रही, बल्कि वैज्ञानिक प्रबंधन और जलवायु समझ की मांग करती है. यदि किसान प्रकृति के संकेत समझकर ‘क्लाइमेट स्मार्ट’ खेती अपनाएं, तो बदलते मौसम (Mango and Climate change) के बीच भी आम की मिठास और उत्पादन दोनों सुरक्षित रखे जा सकते हैं.





