Dehydration in Animals : आग बरसाती गर्मी जहाँ आमजन को प्रभावित करती है वहीँ पशु भी इसके प्रभाव से अछूते नही रह सकते. वहीं पशुओं के लिए यह और भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है. खासकर जब तापमान 40–45 डिग्री तक पहुंच जाता है, तब पशुओं में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और हीट स्ट्रेस जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. यदि समय रहते इनका ध्यान न रखा जाए तो यह स्थिति पशु के लिए जानलेवा भी बन सकती है. साथ ही दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन कम हो जाता है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

पशुओं के लिए पानी क्यों है जरूरी?

पानी पशु के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण घटक है. यह शरीर का तापमान नियंत्रित करता है, पाचन प्रक्रिया को सुचारु रखता है, पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है, दूध उत्पादन को बनाए रखता है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पशु को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो उसकी पूरी शारीरिक प्रणाली प्रभावित होने लगती है.

गर्मियों में पानी की कमी क्यों होती है?

गर्मियों में पानी की कमी होने के कई कारण हैं. जिनमें अत्यधिक तापमान और लू, साफ पानी की अनुपलब्धता, पानी पीने की अनियमित व्यवस्था और सूखे चारे का अधिक उपयोग प्रमुख हैं.
1 किलो हरे चारे से पशु में 3–4 लीटर पानी की कमी पूरी हो सकती है, इसलिए हरा चारा बेहद जरूरी है.

पशुओं में पानी की कमी के लक्षण (Symptoms of Dehydration)

अगर पशु में ये लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं- भूख कम लगना, सुस्ती और कमजोरी, पेशाब का गाढ़ा होना, आंखों का सूख जाना, त्वचा का सूखा और खुरदरा होना, वजन कम होना और दूध उत्पादन में कमी. यदि पशु की त्वचा को उंगलियों से उठाने पर वह देर से अपनी जगह लौटे, तो यह डिहाइड्रेशन का स्पष्ट संकेत है.

पानी की कमी से होने वाले नुकसान

पानी की कमी केवल एक छोटी समस्या नहीं है, बल्कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

1. दूध उत्पादन में गिरावट- दुधारू पशुओं का दूध तेजी से कम हो जाता है.

2. पाचन तंत्र कमजोर- चारा खाने और पचाने की क्षमता घट जाती है.

3. पोषक तत्वों की कमी- जरूरी पोषक तत्व शरीर से बाहर निकलने लगते हैं.

4. प्रजनन क्षमता पर असर- गर्भधारण और प्रजनन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

5. खून गाढ़ा होना- शरीर में पानी की कमी से रक्त गाढ़ा हो जाता है.

6. बीमारियों का खतरा- बछड़ों में पेचिश, बड़े पशुओं में दस्त और हीट स्ट्रेस और थकावट होने का खतरा होता हैं.

गर्मियों में पशुओं को कितना पानी चाहिए?

ज्यादा दूध देने वाले पशुओं को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. पशु की जरूरत उसके आकार, उत्पादन और मौसम पर निर्भर करती है-

• दुधारू गाय/भैंस: 50–80 लीटर प्रतिदिन
• सामान्य पशु: 30–50 लीटर
• बछड़े: 10–20 लीटर

पानी की कमी से बचाव के उपाय

1. हमेशा साफ और ताजा पानी दें, दिन में 3–4 बार पानी बदलें, गंदा या बदबूदार पानी न दें.

2. हरा चारा जरूर खिलाएं- नेपियर घास, बरसीम, ज्वार जैसे हरे चारे से पानी की कमी काफी हद तक पूरी होती है.

3. छाया और ठंडी जगह रखें – पशुओं को सीधे धूप से बचाएं, शेड या पेड़ के नीचे रखें.

4. दिन में कई बार पानी पिलाएं, खासकर दोपहर के समय पशु को पानी पीने से न रोकें.

5. मिनरल मिक्सचर और नमक दें जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखता है.

6. पानी के टैंक/टब साफ रखें, ताकि बैक्टीरिया ना पनपें और बीमारी से बचाव हो सकें.

हीट स्ट्रेस से बचाने के उपाय

• पशुओं पर हल्का पानी छिड़काव करें,

• कूलर या फैन का उपयोग करें,

• सुबह और शाम के समय चारा दें,

• ज्यादा गर्मी में काम कम लें.

गर्मियों में पशुओं के लिए पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि जीवन का आधार है. चारे की कमी कुछ हद तक सहन की जा सकती है, लेकिन पानी की कमी सीधे पशु के स्वास्थ्य और जीवन पर असर डालती है. यदि पशुपालक समय पर पानी, हरा चारा और सही देखभाल सुनिश्चित करें, तो न केवल पशु स्वस्थ रहेंगे बल्कि दूध उत्पादन भी बेहतर बना रहेगा.

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