Process of Puddling. धान की खेती करने के लिए सबसे पहले हमें खास तकनीक के तहत खेत तैयार करना होता है, उसके बाद तैयार किए गए खेत में धान पौध की रोपाई का काम होता है. आइए जानते हैं उस खास प्रक्रिया के बारे में जिसे हम पडलिंग, मचाना या लेव भी कहते हैं.
धान की रोपाई से पहले खेत तैयार करना क्यों जरूरी है?
आमतौर पर धान की रोपाई पानी भरे खेत में की जाती है और धान की रोपाई से पहले जिस खेत में धान लगाना है उसे तैयार करना होता है. इसके लिए खेत में एक खास तरह की तकनीक अपनाई जाती है, जिसे हम पडलिंग, लेव या मचाना कहते हैं.
क्या होती है पडलिंग, लेव या मचाने की प्रक्रिया?
इस खास काम के अंतर्गत खेत की गीली जुताई करनी होती है. जिसके लिए अंतिम जुताई के बाद तैयार खेत में बड़ी मात्रा में पानी भरा जाता है. उसके बाद उस पानी भरे खेत में कृषि यंत्र जैसे देशी हल, प्लाऊ या कल्टीवेटर की मदद से खेत की मिट्टी को अच्छी तरह से मथा जाता है. जिससे खेत की मिट्टी एक नरम घोल के रूप में तैयार हो जाती है और खेत धान रोपाई के लिए तैयार हो जाता है.
पडलिंग के बाद कैसे होती है धान की रोपाई?
इस प्रक्रिया के बाद फिर होती है धान पौध की रोपाई. धान पौध की रोपाई खेतिहर मजदूरों द्वारा भी की जा सकती है या कृषि यंत्र पैडी प्लांटर की मदद से भी रोपाई का काम किया जा सकता है.
पैडी प्लांटर से धान रोपाई के फायदे
कृषि यंत्र पैडी प्लांटर से धान की रोपाई का काम आधुनिक तरीके से होता है, जिससे धान की अच्छी पैदावार मिलती है. जबकि पारंपरिक तरीके से अगर हम धान की रोपाई करते हैं तो हमें सामान्य पैदावार मिलती है.
पडलिंग प्रक्रिया से किसानों को क्या लाभ मिलता है?
पडलिंग की प्रक्रिया से पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता आसानी से हो जाती है. वहीं मिट्टी की उर्वरक क्षमता में इजाफा भी होता है.





