West Bengal Crisis. पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान जिले में मवेशियों के कारोबार से जुड़े लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं. राज्य सरकार ने नए नियम लागू किए हैं, जिसके कारण पशुओं की खरीद-बिक्री और वध करना और भी कठिन हो गया है. इसका सबसे ज्यादा प्रभाव ग्रामीण इलाकों के छोटे पशुपालकों, डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोगों और व्यापारियों पर पड़ रहा है. व्यवसाय में गिरावट के कारण कई परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. उन्हें अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

मवेशी बाजारों में कम हुई आवाजाही

पूर्व बर्दवान जिले में लोगो की आवाजाही कम होने से पशु बाजारों में अब पहले जैसी रौनक नजर नहीं आ रही है. समुद्रगढ़ का बिबीरहाट बाजार, जो हर बुधवार बड़े पशु हाट के लिए जाना जाता था, अब सूना पड़ा है. जहां हर सप्ताह खरीद और बिक्री के लिए लोगों की आवाजाही कम नहीं होती थी, अब वहां की सड़कें सूनी पड़ी हैं. कारोबारियों का कहना है कि, नए नियमों और सख्त प्रक्रियाओं की वजह से लोग पशुओं की खरीद-बिक्री करने में हिचकिचा रहे हैं.

नए नियम बने किसानो के लिए आर्थिक संकट

ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले कई परिवारों की आजीविका पशु पालन से ही होती है, वे पहले तो उनका दूध बेचकर अपना गुजारा करते है फिर जब वो बूढ़े हो जाये या दूघ देना बंद कर दे तो उनको बेचकर अपना गुजारा करते है. लेकिन अब इन नए नियमो के लागू होने से आर्थिक संकट बढ़ गया है, सरकार ने 14 साल से कम उम्र के पशुओं के वध पर रोक लगा दी है. साथ ही 14 साल से ज्यादा उम्र के पशुओं के लिए सरकारी सर्टिफिकेट जरूरी कर दिया गया है.

कई पशुपालकों का मानना है कि कुछ गायें और भैंसें 14 साल की उम्र से पहले ही बीमार पड़ जाती हैं और दूध देना बंद कर देती हैं. इन जानवरों का इलाज कराना भी बहुत मुश्किल है, क्योंकि गांवों में अच्छे पशु चिकित्सकों और अस्पतालों की कमी है. इस वजह से किसानों को रोजाना पशुओं को खिलाने-पिलाने का खर्च बढ़ता जा रहा है.

पशु व्यापार में बढ़ती चुनौतियाँ

पशुपालकों का कहना है कि, नए नियमों के तहत अब मवेशियों की खरीद-बिक्री के लिए सरकारी दस्तावेज और प्रमाणपत्र जरूरी हो गए हैं. व्यापारियों को लगता है कि, लंबी प्रक्रिया और कागजी फार्मिलिटी के कारण भ्रष्टाचार बढ़ सकता है, जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे और गरीब कारोबारियों पर पड़ेगा. अगर इसी तरह कारोबार प्रभावित होता रहा, तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

त्यौहारों से पहले तनाव का माहौल

बकरीद का त्यौहार 27 या 28 मई को मनाया जाएगा. बकरीद नजदीक आने के साथ ही, पशु व्यापारियों को अपने कारोबार की चिंता सताने लगी है. आमतौर पर यह समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जब बाजारों में पशु की खरीद-बिक्री तेजी से होती है. लेकिन इस बार, नए नियमों और सख्त प्रक्रियाओं के कारण व्यापारी निराश दिख रहे हैं. उनका कहना है कि, त्यौहार से पहले ही बाजारों में कारोबार बहुत धीमा हो गया है.

स्थानीय लोगो ने की प्रशासन से करी राहत की अपील

स्थानीय निवासी और पशु व्यापारी इस बात पर जोर देरहे हैं कि नियमों की जरूरत है, लेकिन इन्हें इस तरह से लागू किया जाना चाहिए कि गरीबों और छोटे व्यवसायियों की आजीविका पर कोई असर न पड़े. इसी चिंता को लेकर ‘बांगिया वक्फ बचाओ मंच’ ने जिला प्रशासन को एक याचिका सौंपी है, जिसमें पशुपालकों के हितों की रक्षा करने और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है.

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