Varieties of Guava : अमरूद एक ऐसा फल है जिस की बागबानी कम उपजाऊ और हलकी लवणीय दशा में, जिस का पीएच मान 6.5-8.5 हो, अच्छा माना जाता है. अमरूद की बहुत कम देखभाल की जरूरत होती है.

उन्नतशील प्रजातियां

इलाहाबादी सफेदा, लखनऊ-49 (सरदार अमरूद), ललित, पंत प्रभात, श्वेता, अर्का मृदुला, अर्का अमूल्या, सफेद जाम, धारीदार, कोहिर सफेदा, हिसार सुरखा, हिसार सफेदा, पंजाब पिंक, इलाहाबाद सुरखा, एप्पल कलर, चित्तीदार, बनारसी सुरखा, बहेट कोकोनट, बेदाना, नासिक, घोलका, रेड फ्लेस्ड, सीडलेस वगैरह.

पौध प्रवर्धन तकनीक :

अमरूद की अच्छी उपज लेने के लिए अच्छी क्वालिटी वाले पौधों को बोना चाहिए. इस के पौधों का फैलाव काफी समय से बीज द्वारा होता रहा है.

बीज द्वारा बोए गए पौधे उत्पादन में तो कम होते ही हैं, साथ ही फल भी निम्न दर्जे के होते हैं. समय के साथ अमरूद के प्रवर्धन की विधियों में भी बदलाव आया है.

अमरूद के प्रवर्धन की कई विधियां चलन में हैं जैस भेंट कलम, बडिंग, गूटी, स्टूलिंग वगैरह. यद्यपि ये विधियां जगह विशेष पर प्रचलन में हैं, पर इन का कारोबारी इस्तेमाल अपेक्षा के हिसाब से नहीं हो पाया है क्योंकि इन विधियों में कुछ समस्याएं हैं.

पौध प्रवर्धन की नई तकनीक वेज ग्राफ्टिंग :

अमरूद प्रवर्धन में आने वाली तमाम समस्याओं को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्रीय उपोष्ण बागबानी संस्थान, लखनऊ ने अमरूद में तेजी से फैलने वाली नई तकनीक वेज ग्राफ्टिंग विकसित की है. इस विधि से अमरूद के पौधे बहुत ही कम समय में और पूरे साल तैयार किए जा सकते हैं.

इस तकनीक में समय बहुत कम लगता है. तापमान 12 डिगरी सैल्सियस पर पौलीथिन कैप की मदद से इस तकनीक से पौधे तैयार किए जाते हैं. यह तकनीक व्यावसायिक रूप से अपनाई जा सकती है.

सांकुर का चयन :

इस विधि में सही मातृ पौधों का चुनना जरूरी है, क्योंकि इन्हीं चुने गए मातृ पौधों से 3-4 महीने पुराने सांकुर का इस्तेमाल प्रवर्धन में किया जाता है.

सांकुर की उम्र 3-4 महीने की होनी चाहिए. सांकुर पर 3-4 कली लगी होनी चाहिए. सांकुर की लंबाई 15 से 18 सैंटीमीटर और मोटाई 0.5 से 1.0 सैंटीमीटर होनी चाहिए.

प्रवर्धन के लिए इस्तेमाल में लाने से 5-7 दिन पहले मातृ पौधे पर सांकुर की पत्तियों को तोड़ देना चाहिए और उसी समय सांकुर के ऊपरी भाग को भी काट देना चाहिए. इस से सांकुर पर लगी कली फूल जाती है. अब सांकुर शाख को प्रर्वधन के लिए काट लेते हैं.

प्रवर्धन तकनीक :

सांकुर शाख और जड़ शाख की एक ही मोटाई की होनी चाहिए. जड़ शाख को 15-18 सैंटीमीटर की ऊंचाई से काट देना चाहिए. जड़ शाख के चोटी कटे भाग से 4-4.5 सैंटीमीटर की लंबाई का चीरा बीचोंबीच सावधानी से लगाया जाता है.

पहले से तैयार सांकुर शाख के आधार पर 4-4.5 सैंटीमीटर दोनों तरफ से नुकीला काटते हैं. कटी हुई सांकुर शाख को कटे हुए जड़ शाख में डाल कर दबा कर प्लास्टिक पट्टी (2 सैंटीमीटर चौड़ी और 25 सैंटीमीटर लंबी) से बांध दिया जाता है. इस तरह बंधे पौधों में 1-2 हफ्ते में कलिका का फुटाव होता है और 5 माह में पौधा रोपने के लिए तैयार हो जाता है.

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