Guava Orchards : साल में कई बार मुनासिब मात्रा में अच्छी क्वालिटी वाली फसल लेने के लिए केंद्रीय उपोष्ण बागबानी संस्थान, लखनऊ में अमरूद के पौधों पर लगातार 5 साल तक सघन बागबानी के मुताबिक कटाईछंटाई विधि का इस्तेमाल किया जाता है.
पौधों में बारबार छंटाई की तकनीक मईसितंबर और दिसंबर माह में अपनाई जाती?है. बेमौसमी फल लेने के लिए मई में पकी हुई शाखाओं के 50 फीसदी हिस्से को ऊपर से काटा जाता है ताकि कटे हुए हिस्से के निचले हिस्से से नई शाखाओं को निकाल सकें. कटे हिस्से से निकली शाखा पर फूल आने के बाद दोबारा इन शाखाओं के आधे हिस्से को सितंबर माह में काट दिया जाता है.
फूल आना : अमरूद में नए फुटाव पर साल में 3 बार फूल आता है. मार्चअपै्रल माह के फूल से बारिश में फल तैयार होते हैं. जुलाईअगस्त माह के फूल से जाड़े में, ताकि अक्तूबरनवंबर माह के फूल से वसंत के मौसम में फल तैयार होते हैं.
आमतौर पर वसंत मौसम की अपेक्षा बारिश और सर्दी में ज्यादा फल आते हैं. बारिश में तापमान ज्यादा होने के चलते फल जल्दी पक जाते हैं, पर मिठास और विटामिन सी की मात्रा जाडे के फलों की तुलना में कम पाई जाती है.
बहार नियंत्रण :
अमरूद की सब से बेहतर फसल जाड़े की होती है. बारिश की फसल को रोकने के लिए गरमी में पानी देना बंद कर देते हैं. इस से छोटे फल पानी की कमी में गिर जाते हैं.
वहीं दूसरा तरीका वसंत में आए फलों को हाथ से तोड़ देते हैं, पर यह तरीका व्यावसायिक स्तर पर व्यावहारिक नहीं है. फूलों को गिराने के लिए नेफ्थलीन एसिटिक एसिड 100 मिग्रा. कैमिकल 1 लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करते हैं.
खाद और उर्वरक :
अमरूद के पेड़ों को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तत्त्वों की मात्रा ज्यादा देनी जरूरी होती है इसलिए पौधों की उम्र के मुताबिक अमरूद में प्रति पौधा खाद और उर्वरकों के इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाती है.
सिंचाई :
अमरूद के पौधे में फरवरी से मई माह तक सिंचाई नहीं की जानी चाहिए. इस तरह पेड़ गरमी के मौसम में यानी अप्रैलमई के दौरान पत्ते गिरा कर आराम करने के लिए चले जाते हैं. इस दौरान पेड़पौधे अपनी शाखाओं में खाद्य सामग्री जमा कर लेते हैं. जून के महीने में खेत की अच्छी तरह जुताई कर खाद देने के बाद पेड़ में ज्यादा मात्रा में फूल मिलते हैं.
सर्दियों में फल पक कर तैयार हो जाते हैं. नए पौधों में रोपाई के समय पानी पहले महीने के पहले हफ्ते के हर दूसरे दिन बाद और हफ्ते में 2 या 3 बार देना चाहिए.
बारिश में जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें. 2 साल या ऊपर के पौधों में सिचाई बढ़वार व फल के लिए फायदेमंद है. गरमियों में 7-10 दिन बाद व जाड़ों में 25 दिन के फासले पर सिंचाई करनी चाहिए. फूल व फल के दौरान हफ्ते में एक बार सिंचाई जरूर करें.
यह क्रम तकरीबन 40 साल तक चलता रहता है, पर सब से ज्यादा उपज 15-20 साल की उम्र वाले पौधों से हासिल होती है. जब फलों का रंग पीला हरा या हलका पीला होने लगे तो उन्हें तोड़ लेना चाहिए. बारिश के फल दूसरेतीसरे दिन बाद और जाडे़ के फल 4-5 दिन के अंतराल से तोड़ने चाहिए. उपज की मात्रा पेड़ों की उम्र, किस्म और फलने के समय पर निर्भर करती है. Guava Orchards





