Compost and Bio-Fertilizers : उदयपुर, 16 मई, 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र, चित्तौड़गढ़ और चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में कृषि महोत्सव के तहत उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर फसल सेमिनार का आयोजन गांव मंडावरी, पंचायत समिति बेगूं में किया गया.
उर्वरकों का संतुलित उपयोग जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. प्रताप सिंह, कुलगुरु, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने अपने उद्बोधन में ‘उर्वरकों का संतुलित उपयोग एक अनिवार्यता’ विषय पर मृदा एवं जल संरक्षण तथा सतत कृषि के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को एक आवश्यक घटक के रूप में बढ़ावा देने तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने, लागत कम करने तथा पर्यावरणीय जोखिमों को न्यूनतम करने के लिए जैविक, जैव एवं अकार्बनिक पोषक स्रोतों के समन्वित उपयोग पर जोर दिया.
डा. प्रताप सिंह ने कहा कि ढलान वाली भूमि तथा अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती के व्यापक अनुभव के आधार पर यह बताया गया कि जैविक खादों एवं जैव उर्वरकों का संतुलित उपयोग मृदा एवं जल संरक्षण उपायों को प्रभावी रूप से पूरक बनाता है.
मेड़बंदी, खाई निर्माण, समोच्च खेती, मल्चिंग, हरी खाद, आवरण फसलों के उपयोग तथा मिश्रित खेती, अंतरवर्तीय खेती एवं फसलचक्र जैसी उन्नत फसल प्रणालियों के महत्व पर विशेष बल दिया गया.
रासायनिक उर्वरकों की कमी और जैव उर्वरकों में बनें आत्मनिर्भर
डा. आर. एल. सोनी, निदेशक प्रसार, प्रसार शिक्षा निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने कार्यकम के दौरान रासायनिक उर्वरकों की वर्तमान कमी तथा उनके अंधाधुंध उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए जैविक खादों एवं जैव उर्वरकों के उत्पादन और उपयोग में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया.
मिट्टी जांच और पोषक तत्व प्रबंधन
डा. रतन लाल सोलंकी, वरिष्ठ मृदा वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, चित्तौड़गढ़ ने किसानों को फसल उत्पादन की विभिन्न शस्य क्रियाएं, पोषक तत्व प्रबंधन का महत्व एवं आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी, पौधों पर पोषक तत्व की कमी के लक्षण एवं कमी को पूरा करने के उपाय के साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच हेतु मिट्टी नमूना लेने के तकनीकी से अवगत कराया. मृदा स्वास्थ्य हेतु जैविक खादों का प्रयोग, वर्मी कंपोस्ट बनाने की विभिन्न विधियां व जैविक खाद वर्मीवाश तैयार करने की प्रायोगिक जानकारी दी.
मिट्टी की उर्वराशक्ति बनाए रखने के लिए करें यह काम
डा. शंकर लाल जाट, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, बेगूं ने कहा कि किसान भाई डीएपी और यूरिया का असंतुलित उपयोग कम करें. नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश (NPK) के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों (जिंक, सल्फर) का संतुलित प्रयोग जरूरी है. मिट्टी की उर्वराशक्ति बनाए रखने के लिए रासायनिक खादों के साथ गोबर की खाद, कंपोस्ट और जैव उर्वरकों का उपयोग अनिवार्य रूप से करने की सलाह दी.
कीट और खरपतवार की करें रोकथाम
शमुनीष भाटिया, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक, उदयपुर ने खरीफ फसलों (मक्का, सोयाबीन, कपास) में खरपतवार 45 प्रतिशत और कीट 30 प्रतिशत तक उपज कम कर सकते हैं. प्रभावी प्रबंधन के लिए पेंडिमेथालिन (बोआई के बाद), इमेजाथापायर (दलहन/सोयाबीन में) खरपतवारनाशी और कीटों के लिए नीम तेल, क्लोरेंट्रानिलिप्रोले (कोराजन) का प्रयोग करें.
सही समय पर सही खाद जरूरी
नंद किशोर जाट, क्षेत्रीय प्रबंधक (विपणन), उदयपुर ने किसानो को बताया कि खरीफ फसलों (मक्का, सोयाबीन, मूंगफली) में बेहतर पैदावार के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन आवश्यक है. इसमें मृदा परीक्षण के आधार पर एनपीके, जैविक खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों (जिंक, सल्फर) का सही समये पर उपयोग करना शामिल है तथा इनके प्रमुख स्त्रोत यूरिया, डीएपी, पोटाश और हरी खाद हैं.
कार्यक्रम का संचालन चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के पवन कुमार शर्मा, उप प्रबंधक (विपणन), चित्तौड़गढ़ ने किया. कार्यकम में कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी हंसराज, कृषि पर्यवेक्षक मंडावली राधेश्याम धाकड़, जनप्रतिनिधिगण आदि उपस्थित रहे. सेमिनार में 200 किसानों ने भाग लिया.Compost and Bio-Fertilizers





