Landless Farmers. लीज या ठेके पर खेती करने वाले भूमिहीन किसानों, जिन्हें बंटाईदार भी कहा जाता है, को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा. उत्तर प्रदेश सरकार अब उनके लिए नियमों में छूट दने जा रही है. इसके लिए खेती की जमीन लीज पर देने के नियम आसान बनाने की तैयारी शुरू हो गई है.
बंटाईदार किसानों को मिलेगी कानूनी मान्यता
भारतीय रिजर्व बैंक, सार्वजनिक एवं निजी बैंकों के साथ हुई शासन व वित्त विभाग के अधिकारियों की बैठक में नीति आयोग के मॉडल एग्रीकल्चरल लैंड लीजिंग एक्ट-2016 को लागू करने पर विचार किया गया है. प्रस्ताव के तहत भूमिहीन, बंटाईदार और किराएदार किसानों को कानूनी मान्यता देकर बैंक ऋण, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ा जा सकता है.
सुझाव दिया कि एक्ट के मौजूदा प्रतिबंधों में ढील देकर लीज पर खेती करने वालों को 3 वर्ष की वैधता वाला लोन एलिजिबिलिटी कार्ड जारी किया जाए, जिससे वे बिना भूमि स्वामित्व दस्तावेज के और बिना भूमि को गिरवी रखे ऋण ले सकें.
बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ेंगे भूमिहीन किसान
इस मॉडल एक्ट का उद्देश्य भूमिहीन, सीमांत और बंटाई पर खेती करने वाले किसानों को कानूनी सुरक्षा देना और उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है. इसके तहत जमीन मालिक अपनी कृषि भूमि लीज पर दे सकेगा, जबकि खेती करने वाले बंटाईदार किसान को अनेक सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा.
जानें नियम
वर्ष 2016 में राजस्व संहिता में संशोधन कर ऐसे प्रावधान उत्तर प्रदेश में किए गए थे, जिनके तहत दिव्यांग या खेती करने में असमर्थ व्यक्ति अपनी भूमि अधिकतम 3 वर्ष के लिए लीज पर दे सकते हैं. हालांकि, यह व्यवस्था सीमित दायरे में है.
अधिकारियों का मानना है कि इससे एक ही भूमि पर कई बार ऋण लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान आसान होगी.
वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रस्ताव पर आगे विस्तृत अध्ययन और कानूनी परीक्षण किया जाएगा. यदि मॉडल लैंड लीजिंग एक्ट की तर्ज पर कानून में संशोधन किया जाता है तो उत्तर प्रदेश में लाखों भूमिहीन और किराएदार किसानों के लिए बैंक ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा.
देश में बड़ी संख्या में बंटाईदार, किराएदार और भूमिहीन किसान खेती तो करते हैं, लेकिन जमीन उनके नाम न होने से उन्हें बैंक ऋण, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें कई बार नुकसान उठाना पड़ता है. उसी की भरपाई के लिए उत्तर प्रदेश सरकार खेती के नियमों में कुछ संशोधन करने जा रही है, जिससे बंटाईदार किसानों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके.





