Seed Production. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के बीज उत्पादन कार्यक्रम को आगामी 10 वर्षों में विस्तारित एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विगत दिनों एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. क्या रहा खास इस बैठक में, जानें इस ख़बर में –
बढ़ेगा बीज उत्पादन
बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों के फार्म प्रभारियों ने अपने-अपने फार्म की उपलब्ध भूमि, संसाधनों एवं उत्पादन क्षमता का आकलन प्रस्तुत करते हुए आगामी 10 वर्षों के लिए बीज उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं एवं लक्ष्यों पर आधारित एक प्रारूप बीज उत्पादन कार्यक्रम प्रस्तुत किया ताकि विश्वविद्यालय स्तर पर एक समन्वित दस वर्षीय बीज उत्पादन रोलिंग प्लान तैयार किया जा सके.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय में बीज उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई. कुलगुरु ने सभी संबंधित फार्म प्रभारियों एवं वैज्ञानिकों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र की उपलब्ध संसाधनों एवं क्षमता का समुचित आकलन करते हुए बीज उत्पादन में वृद्धि हेतु ठोस एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें.
भूमि का हो उचित उपयोग
प्रो. प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की कोई भी भूमि अनुपयोगी या खाली नहीं रहनी चाहिए. जहां खेती योग्य भूमि उपलब्ध है वहां बीज उत्पादन को प्राथमिकता दी जाए तथा जहां फसल उत्पादन संभव नहीं है वहां नर्सरी, वर्मी कंपोस्ट इकाई, पौध उत्पादन, संरक्षित खेती अथवा अन्य आयवर्धक इकाईयां स्थापित कर भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि विश्वविद्यालय की आय में वृद्धि हो तथा उसकी आत्मनिर्भरता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके.
इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. आर.एल. सोनी ने कुलगुरु का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय में बीज उत्पादन की महत्ता एवं कृषि विकास में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला. उसके बाद सहनिदेशक कृषि एवं फार्म डॉ. हेमलता शर्मा ने विश्वविद्यालय में संचालित बीज उत्पादन कार्यक्रमों की जानकारी दी और वर्तमान में बीज उत्पादन स्थिति से अवगत कराया. Seed Production





