Snails Problem . घोंघे अभी तकरीबन सुषुप्त अवस्था में हैं, लेकिन जैसे ही मानसून की पहली वर्षा होगी, ये सक्रिय अवस्था में आ जाएंगे और आसपास के पूरे इलाके व खेतों में फैल जाएंगे, फिर फसल की बरबादी की वजह बनेंगे, इसलिए समय रहते इन का उचित प्रबंधन जरूरी है.
बारिश के दौरान होते हैं आक्रमणकारी
कृषि विभाग, राजस्थान द्वारा उदयपुर में विगत 3 वर्षों से अफ्रीकन घोंघे की समस्या के मूल्यांकन हेतु विषय विशेषज्ञों की कमेटी द्वारा सर्वे किया गया. सर्वे के दौरान गांव में विभिन्न स्थलों, नदी, खेत, घरों व गांवों की नालियों में घोंघे की बड़ी संख्या में देखा गया, लेकिन वर्तमान में ये अपनी सुषुप्त अवस्था में पाए गए जो अमूमन बारिश के मौसम में ज्यादा सक्रीय रहते हैं. इस सर्वे के आधार पर मानसून पर प्रथम वर्षा के साथ ही घोंघे सुषुप्त अवस्था से सक्रिय अवस्था में आ जाएंगे और पूरे गांव व खेतों में फैल जाएंगे.
फसल करते चौपट, समय रहते इलाज जरूरी
किसानों ने बताया कि पिछले साल इनकी संख्या इतनी अधिक हो गई थी कि राह चलना भी कठिन हो गया था और खेतों की सारी फसलें चौपट हो गई थीं. सर्वे के दौरान देखा गया कि इस वर्ष भी यदि इन पर नियंत्रण करने हेतु समय रहते उचित प्रबंधन के प्रयास नहीं किए गए तो यह समस्या गत वर्षों से अधिक विकराल रूप ले सकती है, जिससे किसानों की फसलों में भारी नुकसान होने की संभावना है.
आईसीएआर को सौंपी रिपोर्ट
गांव बिछीवाड़ा का सर्वे करने के पश्चात सर्वे दल द्वारा रिपोर्ट महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय व आईसीएआर को रिपोर्ट दे दी गई है एवं इस समस्या और विकराल रूप के बारे में निदेशक अनुसंधान को अवगत करा दिया गया है. उम्मीद है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में अफ्रीकन घोंघे को खत्म करने का पूरा प्रयास किया जाएगा.
ऐसे होगी घोंघे की रोकथाम
दिल्ली के वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ. श्रवण हलधर एवं डॉ. शशांक ने बताया कि अफ्रीकन घोंघा के नियंत्रण हेतु पेस्टीसाइड रसायन मेटाएलडीहाईड 2.5 प्रतिशत को 5 से 8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से एवं फेरीक फस्फेट 2.94 प्रतिशत 7 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व कॉपर सल्फेट 6 से 10 किलोग्राम प्रति हेक्टयर व कैल्सियम ऑक्साइड (क्वीकलाइम) 5 ग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से प्रयोग किया जाना चाहिए.
किसान भी ये करें काम
डॉ. कुलदीप सुथार ने घोंघे के नियंत्रण हेतु किसानों को बताया कि वे खेत की मेड़ों व नालियों में उगे खरपतवारों को हटाकर साफ-सफाई करें, जिससे सुषुप्त अवस्था में पड़े घोंघों को नष्ट किया जा सके तथा इसके प्रभावी नियंत्रण हेतु आसपास के क्षेत्रों को भी निगरानी हेतु सतर्क रहने सुझाव दिया गया.
मानसून वर्षा से पहले समय रहते घोंघे का नियंत्रण आवश्यक है, नहीं तो भविष्य में यह समस्या अधिक बढ़ सकती है तथा इसके विकराल रूप का सामना करना पड़ सकता है व रासायनिक नियंत्रण के साथ ही नमी वाली जगह को साफ किया जाना आवश्यक है.





