Irrigation. फसलों में ज्यादा पैदावार के लिए सिंचाई की खास जरूरत होती है. हमारे देश में केवल 40 फीसदी खेती की जमीन में ही सिंचाई का इंतजाम है. देश में अनाज, फल व सब्जी की पैदावार बढ़ाने के लिए सिंचाई की सहूलियतों को बढ़ाने की जरूरत है.

मैदानी इलाकों के मुकाबले में पहाड़ों पर केवल 20 फीसदी खेती में ही सिंचाई का इंतजाम है. हमारे देश में जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, फल व सब्जी उत्पादन में प्रमुख राज्यों के रूप में उभर रहे हैं. यहां से तकरीबन 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का उत्पाद देश के दूसरे राज्यों में भेजा जाता है. इसलिए अगर हम पहाड़ी इलाकों में सिंचाई में सुधार करेंगे तो हम देश में खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर सकते हैं.

पहाड़ी इलाकों में सिंचाई व्यवस्था मैदानों से अलग है और हमें इन इलाकों में भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रख कर सिंचाई का इंतजाम करना होता है.

बारिश के पानी को बचाना : पहाड़ों में सिंचाई के लिए बारिश का अहम रोल है. हमारे देश में करीब 11 सौ मीटर के बराबर औसतन सालाना बारिश होती है. अगर हम देश में 5 फीसदी बारिश के पानी को इकट्ठा कर लें तो हमें 9 सौ मिलियन लीटर पानी मिल जाएगा, जिस से हम अपनी खेती की उपज को 50 से सौ फीसदी तक बढ़ा सकते हैं.

बारिश के पानी को हम अपने खेतों और बगीचों के ऊंचाई वाले हिस्सों में कच्चे या पक्के तालाब बना कर इकट्ठा कर सकते हैं. अगर हम अपने खेतों में ही रहते हैं तो घरों की छतों के पानी को भी कच्चे या पक्के तालाब में इकट्ठा कर के रख सकते हैं. पहाड़ों में आजकल पौलीहाउस की खेती का भी बहुत चलन बढ़ गया है, इसलिए हम अपने पौलीहाउस की बनावट में फेरबदल कर के भी बारिश के पानी को जमा कर सकते हैं.

पहाड़ों में होने वाली बारिश का अगर 60 से 70 फीसदी पानी भी हम अपने पौलीहाउस की छतों द्वारा जमा करें तो हम पौलीहाउस के अंदर लगने वाली फसलों की सिंचाई की मांग को पूरा कर सकते हैं. तालाबों में इकट्ठा किए गए पानी से हम प्लास्टिक की पाइपों द्वारा खेतों में सिंचाई कर सकते हैं. इस के साथ हम ‘ड्रिप’ यानी टपक सिंचाई या ‘स्प्रिंकलर’ सिंचाई द्वारा बारिश के पानी को तालाब से फसलों और बगीचों में पौधों को दे सकते हैं.

पहाड़ों में बारिश के पानी को खेतों के साथ बहने वाले छोटेछोटे नालों में चैक डैम लगा कर भी हम इकट्ठा कर सकते हैं. ऐसे चैक डैम लगाने के लिए राष्ट्रीय रोजगार परियोजना ‘मनरेगा’, वन विभाग और जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण से किसान मदद हासिल कर सकते हैं. ऐसे कामों को किसान आपस में मिल कर भी पूरा कर सकते हैं और इकट्ठा किए गए पानी का सामूहिक इस्तेमाल कर सकते हैं.

नदीनालों से सिंचाई : पहाड़ों में साल भर बहने वाले छोटे नदीनालों से सीधे या फिर चैक डैम लगा कर भी हम उस पानी को इकट्ठा कर के सिंचाई के काम में ला सकते हैं. इस के लिए हम केंद्र सरकार की योजनाओं और राष्ट्रीय बागबानी मिशन जैसी परियोजना की मदद ले सकते हैं.

जमीनी पानी : पहाड़ों में सिंचाई के लिए हमें जमीनी पानी को कम इस्तेमाल में लाना चाहिए, लेकिन फिर भी हम कुएं खोद कर जमीनी पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए कर सकते हैं. इस के लिए भी हमें केंद्र सरकार की परियोजनाओं से मदद मिलती है, लेकिन हमें इस तरह के कुओं को बारिश के पानी से बरसात में रिचार्ज करते रहना चाहिए. Irrigation

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