Company News. कॉर्टेवा ने भारत में धान की फसल को कीटों से बचाने के लिए पेश किया मैविलॉन, जिसकी नई ग्रेन्युलर इंसेक्टिसाइड तकनीक देगी 60 दिनों तक धान फसल को सुरक्षा, देश-भर के धान किसानों को फसल बचाने में मिलेगी मदद. मैविलॉन एक नई ग्रेन्युलर इंसेक्टिसाइड तकनीक है, जिसे धान की फसल में कीट नियंत्रण को नुकसान होने के बाद के बजाय पहले से रोकथाम करने यानी रिएक्टिव से प्रोएक्टिव बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.
कीटों का होगा सफाया, होगी बंपर पैदावार
भारत में चावल रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है और देश की कृषि अर्थव्यवस्था में भी इसकी बड़ी भूमिका है. लेकिन, इस बात से भी किनारा नहीं किया जा सकता कि धान उगाने वाले कई क्षेत्रों में किसान लंबे समय से कीटों की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं.
ब्राउन प्लांट हॉपर (बीपीएच) और स्टेम बोरर जैसे कीट फसल को काफी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उत्पादन कम होता है और अनाज की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है.
अधिकतर किसान इन कीटों का नियंत्रण तब करते हैं, जब फसल में नुकसान साफ दिखाई देने लगता है. लेकिन, अब समय से पहले ही कीटों का होगा खात्मा और किसान को मिलेगी बंपर पैदावार.
मैविलॉन कब करें इस्तेमाल
मैविलॉन को रोपाई के 30 से 35 दिनों बाद केवल एक बार इस्तेमाल करना होता है. इसको बार-बार स्प्रे करने की जरूरत नहीं है. यह फसल में नुकसान दिखाई देने से पहले ही सुरक्षा देना शुरू कर देता है. इसकी खास ग्रेन्युलर फॉर्मूलेशन बीपीएच के खिलाफ 60 दिनों तक और स्टेम बोरर के खिलाफ 15 दिनों तक सुरक्षा देती है. यह फसल के उन महत्वपूर्ण चरणों में सुरक्षा देने में मदद करता है, जब उत्पादन पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है. शुरुआती स्तर पर ही कीट नियंत्रण करके मैविलॉन किसानों को समस्या बढ़ने से पहले ही तैयार रहने में मदद करता है.
धान की खेती में समय रहते कीटों की रोकथाम से बेहतर फसल ली जा सकती है, इसलिए फसल सुरक्षा का रखें ध्यान, ताकि किसानों की फसल सुरक्षित रहे और उनकी आय बेहतर हो सके.





