Animal Care. यह बीमारी एक बैक्टीरिया पाश्चुरेल्ला मल्टोसिडा के द्वारा फैलती है और यह गाय, भैंस, भेड़ व बकरी में पाई जाने वाली एक खतरनाक व जानलेवा बीमारी है. यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और बीमार पशु अकसर मर जाते हैं, जिस के कारण पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है.
ये जीवाणु सड़ेगले चारे व गंदे पानी के द्वारा पशुओं के शरीर में पहुंच जाता है और पशु के खून में आते ही अपनी तादाद तेजी से बढ़ा लेता है. आमतौर पर इस बीमारी का हमला बरसात शुरू से ले कर नवंबर महीने तक रहता है. इस के अलावा मौसम में नमी ज्यादा होने पर और तापमान अधिक होने पर यह बीमारी तेजी से फैल जाती है. समय से उपचार न करने पर पशु की मौत हो जाती है.
बीमारी की पहचान:
बीमार पशुओं में तेज बुखार, गले के निचले भाग में सूजन, आंखें लाल, सांस लेने में कठिनाई, मुंह से लार या झाग गिरना, सांस लेते समय घुड़घड़ की आवाज, भूख न लगना और सुस्त हो कर लेट जाने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
उपचार
बरसात से पहले 6 महीने से ऊपर के पशुओं को गलघोंटू के टीके लगवाना चाहिए, लेकिन 6 महीने से अधिक गर्भधारण किए हुए पशु को टीका नहीं लगवाना चाहिए.
बीमार पशु का उपचार अपने नजदीकी पशु अस्पताल में तुरंत करवाना चाहिए.
पशु को खराब दाना, चारा और गंदे पानी से बचाना चाहिए और उन्हें हवादार मकान या गौशाला में बांधना चाहिए. पशु आवास की साफसफाई का खास ध्यान रखना चाहिए.
बीमार पशु को सेहतमंद पशुओं से अलग रखना चाहिए, क्योंकि यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में फैल जाती है.





