इस समय बरसात का मौसम चल रहा है और इस समय भी कड़कनाथ मुर्गीपालन (Poultry Farming) का काम शुरू किया जा सकता है. मानसून में प्राकृतिक चारा मिलता है भरपूर, सही देखभाल और सरकारी सहायता से बढ़ा सकते हैं मुनाफा.
कैसे है लाभकारी ?
बारिश का मौसम कड़कनाथ मुर्गीपालन शुरू करने के लिए अच्छा समय माना जाता है. इस मौसम में हरियाली और प्राकृतिक कीट-पतंगे अधिक मिलने से मुर्गियों को अतिरिक्त प्राकृतिक आहार मिल जाता है. यदि साफ-सफाई और बीमारी से बचाव पर ध्यान दिया जाए तो कड़कनाथ पालन कम निवेश में अच्छी आय देने वाला व्यवसाय बन सकता है.
क्या है खासियतें?
कड़कनाथ मुर्गा मूल रूप से मध्य प्रदेश के झाबुआ क्षेत्र की प्रसिद्ध नस्ल है. अपने काले मांस, औषधीय गुणों और बेहतर पोषण के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि अब देशभर में किसान और युवा उद्यमी इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं.
क्यों बढ़ रही है कड़कनाथ की मांग?
कड़कनाथ के मांस में सामान्य चिकन की तुलना में अधिक प्रोटीन और आयरन पाया जाता है, जबकि वसा (फैट) और कोलेस्ट्रॉल अपेक्षाकृत कम होता है. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इसकी मांग शहरों, होटलों और ऑनलाइन बाजारों तक पहुंच चुकी है. इसके अंडों की भी अच्छी कीमत मिलती है.
बारिश में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
मानसून में नमी अधिक होने के कारण पोल्ट्री शेड में साफ-सफाई बनाए रखना सबसे जरूरी है.
- शेड में पानी जमा न होने दें.
- फर्श को सूखा और साफ रखें.
- पर्याप्त हवा और रोशनी की व्यवस्था करें.
- पीने का पानी हमेशा साफ रखें.
- समय-समय पर टीकाकरण और दवाओं का प्रयोग करें.
- बीमार पक्षियों को तुरंत अलग रखें.
कम निवेश से करें शुरुआत
किसान 100 से 500 चूजों के साथ भी इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं. एक चूजे की कीमत लगभग 70 रुपए से 100 रुपए तक होती है. शेड, दाना, पानी और शुरुआती देखभाल सहित करीब 50,000 रुपए के निवेश से यह कारोबार शुरू किया जा सकता है और लगभग 5 से 6 महीने में पक्षी बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं.
बाजार में मिलता है बेहतर दाम
जहां सामान्य ब्रॉयलर चिकन 150 रुपए से 200 रुपए प्रति किलो बिकता है, वहीं कड़कनाथ का मांस 800 से 1,200 रुपए प्रति किलो तक बिक सकता है. इसके अलावा एक अंडा 25 रुपए से 30 रुपए तक आसानी से बिक जाता है. अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने पर होटल, रेस्टोरेंट और हेल्थ फूड स्टोर्स से भी बेहतर दाम मिल सकते हैं.
सरकारी योजनाओं का उठाएं लाभ
कई राज्य सरकारें और नाबार्ड के सहयोग से संचालित योजनाओं के तहत पोल्ट्री शेड निर्माण, चूजे खरीदने और प्रशिक्षण के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है. किसान अपने जिले के पशुपालन विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क कर प्रशिक्षण और उपलब्ध योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. ध्यान रखें मुर्गीपालन का काम शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की राय भी जरूर लें.
खास बात
यदि आप कड़कनाथ पालन शुरू कर रहे हैं, तो शुरुआत से ही सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और स्थानीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपने फार्म का प्रचार करें. इससे अंडों और तैयार पक्षियों की सीधी बिक्री कर अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है.





