गांव के बहुत से बेरोजगार नौजवान पोल्ट्री बिजनेस (Poultry Farm) शुरू करना चाहते हैं, पर वे जानकारी न होने की वजह से इस कारोबार में हाथ डालने से घबराते हैं. कोई व्यक्ति इस काम में हाथ डाल भी देता है, तो पोल्ट्री बिजनेस की पूरी जानकारी नहीं होने की वजह से उस का पोल्ट्री कारोबार कामयाब नहीं होता. पोल्ट्री का बिजनेस शुरू करने से पहले इस बिजनेस की हर बारीकी को जान लेना चाहिए, जैसे कौन सी नस्ल (स्ट्रेन) को पाल कर कम खर्चे पर ज्यादा अंडे पैदा किए जा सकते हैं.

हमारे देश के गांवों में ज्यादातर किसान बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग कर के अंडे और चिकन मीट पैदा करते हैं, जिस का इस्तेमाल वे अपने परिवार के खाने में ही कर लेते हैं. अगर ये किसान अपनी बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग को कमर्शियल लेयर/ब्रायलर प्रोडक्शन की यूनिट में बदल दें, तो घर के खाने के अलावा कमाई का एक अच्छा जरीया बना सकते हैं. किसानों के पास खुद की जमीन होती है और शेड बनाने में ज्यादा खर्च भी नहीं होता.

उम्दा नस्ल का करें चुनाव

हमारे देश में अंडे पैदा करने के लिए बहुत सी मुरगियां यानी स्ट्रेन (ब्रीड) उपलब्ध हैं, पर हमारे देश की आबोहवा ऐसी नहीं है कि कोई भी स्ट्रेन कम खर्च पर ज्यादा अंडे पैदा करने की कूवत रखती हो. इसलिए ऐसी नस्ल का चुनाव करें जो आप के इलाके की आबोहवा में अच्छा उत्पादन कर सके.

अंडे पैदा करने के लिए  बीवी 300 स्ट्रेन और चिकन मीट पैदा करने के कोब्ब 400 स्ट्रेन बढि़या मानी गई हैं. ये दोनों स्ट्रेन हमारे देश के सभी राज्यों में गरमी, सर्दी व बरसात सभी मौसमों में कम खर्च पर ज्यादा उत्पादन देने की कूवत रखती हैं.

बीवी मुरगी : क्या है खासीयत

बीवी 300 मुरगी 18 हफ्ते की होने के बाद अंडे देना शुरू कर देती है और 80 हफ्ते तक 374 अंडे देती है. ये 374 अंडे पैदा करने के लिए (19 से 80 हफ्ते तक) यह मुरगी कुल 46.6 किलोग्राम दाना (फीड) खाती है और पहले दिन से ले कर 18 हफ्ते तक 5.60 किलोग्राम दाना खाती है. यह मुरगी अंडा देना शुरू करने के बाद 80 हफ्ते तक रोजाना औसतन 111 ग्राम दाना खाती है. पहले दिन से ले कर 18 हफ्ते तक डेप्लेशन यानी मोर्टेलिटी व कलिंग 3-4 फीसदी तक ही होती है और 19 हफ्ते से 80 हफ्ते तक डेप्लेशन 7 फीसदी तक होता है.

वेनकोब्ब मुरगी : उम्दा नस्ल

वेनकोब्ब 400 ब्रायलर दुनिया में जानीमानी कमर्शियल ब्रायलर की उम्दा स्ट्रेन (नस्ल) है. यह हमारे देश के सभी हिस्सों में अच्छे नतीजे देती है. ज्यादा गरमी और ठंड या बरसात के मौसम में इस स्ट्रेन में मोर्टेलिटी बहुत कम होती है और बढ़वार अच्छी होती है. बड़े पैमाने पर ब्रायलर फार्मिंग करने वाले किसान वेनकोब्ब 400 ब्रायलर को ही पालना पसंद करते हैं. वेनकोब्ब 400 ब्रायलर स्ट्रेन 35 दिनों में तकरीबन 3 किलोग्राम फीड खा कर 2 किलोग्राम तक यानी 1900-2000 ग्राम तक वजन हासिल करने की कूवत रखती है. फार्म पर मैनेजमेंट अच्छा हो तो 35 दिनों में केवल 2.75 फीसदी की मौत दर देखी गई है.

रखरखाव और बचाव

मुरगियों को जंगली जानवरों, कुत्ते व बिल्ली वगैरह से बचाने के लिए शेड की चैन लिंक (जाली) अच्छी क्वालिटी की होनी चाहिए. सर्दी के मौसम में शेड को गरम रखने और गरमी के मौसम में शेड को ठंडा रखने के लिए कूलर, पंखे, फागर वगैरह का भी इंतजाम रखें. शेड को थोड़ी ऊंचाई पर बनाएं जिस से बरसात का पानी शेड के अंदर नहीं घुसे.

कितना दाना है जरूरी

अंडे देने वाली मुरगी को लगातार अंडे देने के लिए 2500 से 2650 किलोग्राम कैलोरी वाले फीड की जरूरत होती है, उम्र और अंडे के वजन के मुताबिक ही फीड की कैलोरी तय की जाती है. 1 से 7 हफ्ते के चूजे को 2900 किलोग्राम कैलोरी का फीड, जबकि ग्रोवर को 2800 किलोग्राम कैलोरी का फीड देना चाहिए. मुरगी दाने और फीड बनाने वाले इंग्रेडिएंट (मक्का वगैरह) में नमी कभी भी 10-11 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

अगर मक्के में नमी ज्यादा होती है, तो फंगस लग सकता है और फंगस लगा मक्का फीड में इस्तेमाल करने से उस में अफ्लाटाक्सिन (एक प्रकार का जहर) की मात्रा बढ़ जाएगी, जो मुरगी की इम्युनिटी (बीमारी झेलने की कूवत) को कमजोर कर देगी और मुरगी जल्द ही बीमारी की चपेट में आ जाएगी.

बेहतर होगा कि पोल्ट्री फीड प्राइवेट कंपनी से खरीदा जाए ताकि फीड से जुड़ी किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके. उत्तरा फीड कंपनी देश में बड़े पैमाने पर उम्दा क्वालिटी का पोल्ट्री फीड बेचती है. इस कंपनी की सेल्स टीम से संपर्क कर के फीड खरीदें.

मुरगियों के लिए रोशनी सब से खास चीज है. अंडे देने वाली कमर्शियल मुरगी को 16 घंटे लाइट देते हैं और चूजे को ब्रूडिंग के दौरान 24 घंटे, ग्रोवर/पुलेट को 12 घंटे  लाइट (नेचुरल लाइट) देते हैं. लाइट मौसम व स्ट्रेन वगैरह पर निर्भर करती है और इसी आधार पर ही लाइट का मैनेजमेंट करते हैं. कमर्शियल लेवल पर पीली, लाल, आरेंज रंग की लाइट से अच्छे नतीजे मिलते हैं. ब्रायलर को 24 घंटे लाइट दी जाती है. लाइट देने में किसी तरह की कोई कंजूसी न करें. लाइट 1 वाट प्रति 4 वर्ग फुट के हिसाब से दें.

समय पर टीकारण

अपने  फार्म  की  मुरगियों (फ्लाक) को समय पर टीके दें. सामान्य वैक्सीनेशन शिड्यूल इलाके और फार्म के मुताबिक पोल्ट्री चूजा बेचने वाली कंपनी से लें और उसे अपनाएं.

फार्म की मुरगियों से लगातार अच्छे अंडे लेने और उन को बीमारी से बचाने के लिए पानी भी सब से अहम चीज है. फार्म की मुरगियों को हमेशा ताजा व साफ पानी यानी जो इनसानों के लिए भी पीने लायक हो, देना चाहिए.  ई कोलाई, साल्मोनेला बैक्टीरिया, पीएच, हार्डनेस, कैल्शियम वगैरह की जांच के लिए पानी की जांच समयसमय पर कराते रहें. अगर जांच में पानी में कोई कमी मिलती है, तो उसे फौरन दुरुस्त करें. सब से अच्छा होगा कि पोल्ट्री फार्म पर आरओ प्लांट लगा कर मुरगियों को उस का पानी दें, इस से मुरगियों की अंडा पैदा करने की कूवत में काफी इजाफा होगा और वे ज्यादा अंडे देंगी और पानी से जुड़ी बीमारियों से भी बची रहेंगी. 3000 लीटर प्रति घंटा आरओ का पानी तैयार करने के लिए आरओ प्लांट पर तकरीबन 5-6 लाख रुपए का खर्च आएगा.

फार्म पर बायो सिक्योरिटी अपनाएं मतलब फार्म पर बाहर के किसी भी शख्स को न आने दें. आप के फार्म पर बायोसिक्योरिटी जितनी अच्छी होगी तो फार्म की मुरगियों को बीमारी लगने की संभावना उतनी ही कम होगी.

अपने मुरगी फार्म से अच्छा मुनाफा कमाने के लिए सभी मुरगीपालकों को बायोसिक्योरिटी पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. फार्म माइक्रो लेवल पर साइंटिफिक मैनेजमेंट अपनाना जरूरी है, तब जा कर पोल्ट्री फार्म से अच्छे मुनाफेकी उम्मीद की जा सकती है.

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