El Nino Alert से भेड़-बकरी पालक अभी संभल जाएं, ये वैज्ञानिक उपाय बचाएंगे पशुधन. कम बारिश और बढ़ती गर्मी के बीच केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान ने जारी की जरूरी सलाह.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वर्ष 2026 में अल–नीनो के प्रभाव के चलते कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा और अधिक तापमान की संभावना जताई है. ऐसी स्थिति भेड़, बकरी और अन्य पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादन और प्रजनन पर प्रतिकूल असर डाल सकती है. इसे देखते हुए केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर ने पशुपालकों के लिए विशेष वैज्ञानिक सलाह जारी की है.

संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने बताया कि यदि समय रहते वैज्ञानिक पशुपालन अपनाया जाए तो अल-नीनो के दुष्प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है और पशुओं के स्वास्थ्य व उत्पादकता को सुरक्षित रखा जा सकता है.

चारा और पानी का करें बेहतर प्रबंधन

डॉ. अरुण कुमार तोमर के अनुसार, संभावित चारा संकट को देखते हुए पशुपालक रेवड़ का आकार आवश्यकता के अनुसार सीमित रखें और कमजोर तथा अनुत्पादक पशुओं को अलग करें. इससे उपलब्ध चारा और पानी का उपयोग गर्भित, दुग्धारू और स्वस्थ पशुओं के लिए प्राथमिकता से किया जा सकेगा.

उन्होंने सलाह दी कि सूखा चारा, पराली और फसल अवशेषों का सुरक्षित भंडारण करें. साथ ही संकर नेपियर, ज्वार, बाजरा, लोबिया जैसी सूखा-सहनशील चारा फसलों की खेती बढ़ाएं. पूरक चारे के रूप में नीम, खेजड़ी, बबूल, पीपल, बरगद, शहतूत और कांटारहित नागफनी की पत्तियों का भी उपयोग किया जा सकता है.

हीट स्ट्रेस से ऐसे बचाएं पशु

संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नृपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में पशुओं को दिन में 3–4 बार स्वच्छ और ताजा पानी अवश्य उपलब्ध कराएं. वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें तथा पशुशालाओं में पर्याप्त छाया और हवा की व्यवस्था रखें.

उन्होंने सलाह दी कि पशुओं की चराई सुबह 8:30 से 11:00 बजे तथा शाम 4:00 से 6:30 बजे के बीच ही कराई जाए. जरूरत पड़ने पर पशुशाला में पंखे, फॉगर्स या पानी के छिड़काव की व्यवस्था कर हीट स्ट्रेस को कम किया जा सकता है.

संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी

गर्भित और दुधारू पशुओं को संतुलित आहार, दाना, खल और खनिज मिश्रण अवश्य दें. यदि चारे की कमी हो तो टोटल मिक्स कंप्लीट फीड ब्लॉक चारा का उपयोग किया जा सकता है. इसके साथ ही नियमित टीकाकरण का ध्यान रखें. पशुओं के शरीर का तापमान, श्वसन दर और चारा-पानी की खपत पर निगरानी रखने की भी सलाह दी गई है.

सामुदायिक स्तर पर भी करें तैयारी

संस्थान ने पशुपालकों से सामुदायिक चारा बैंक बनाने और साइलेज जैसी चारा संरक्षण तकनीकों को अपनाने तथा वैज्ञानिक सलाह के अनुसार पशुपालन करने की अपील की है.

मुख्य बातें एक नजर में

  • रेवड़ का आकार जरूरत के अनुसार सीमित रखें.
  •  सूखा चारा और फसल अवशेष पहले से सुरक्षित रखें.
  •  सूखा-सहनशील चारा फसलों की खेती बढ़ाएं.
  •  पशुओं को दिन में 3–4 बार स्वच्छ पानी दें.
  • सुबह और शाम के समय ही चराई कराएं.
  •  पशुशालाओं में छाया, हवा और ठंडक की व्यवस्था करें.
  •  नियमित टीकाकरण, कृमिनाशन और स्वास्थ्य निगरानी करें.
  •  चारा बैंक, हे और साइलेज जैसी तकनीकों को अपनाएं.
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