Apple Cultivation. सेब का नाम आते ही हिमाचल प्रदेश, जम्मूकश्मीर और उत्तराखंड जैसे ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों की तसवीर सामने आती है. माना जाता रहा है कि सेब की खेती के लिए ठंडा मौसम और विशेष जलवायु जरूरी है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कम चिलिंग आवश्यकता वाली ऐसी सेब की किस्मों पर काम हुआ है, जो अपेक्षाकृत गरम और मैदानी क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती हैं. प्रगतिशील किसान मनोज सैनी ने इस सोच को बदलने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है. गरम तापमान वाले क्षेत्रों में सेब की खेती की संभावनाओं को तलाशने और किसानों तक नई किस्मों को पहुंचाने में उन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
इसी दिशा में वे लगातार काम कर रहे हैं.
मनोज सैनी की फरीदाबाद हरियाणा में ऑनलाइन नर्सरी है और वहीं पर उनका सेब परीक्षण केंद्र भी है. वे गरम जलवायु में सेब उत्पादन की संभावनाओं को ले कर किसानों के बीच काम कर रहे हैं.
गरम प्रदेशों में भी सेब उत्पादन
कृषि विशेषज्ञ मनोज सैनी की प्रमुख गरम तापमान वाले क्षेत्रों में भी सेब की किस्मों और उन की खेती की तकनीक को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं. वे सेब की अन्ना, डौर्सेट गोल्डन और हरमन एचआरएमएन-99 जैसी किस्मों की खेती करते हैं. सेब की खास किस्म हरमन एचआरएमएन-99 को गरम और मैदानी क्षेत्रों जहां का तापमान 40-45 डिगरी सैल्सियस तक रहता है वहां भी उगाया जा सकता है.
हरियाणा के मुखमंत्री तक ‘एप्पल क्रांति’ की पहल
मनोज सैनी और उन की टीम ने हरियाणा जैसे गरम मैदानी राज्य में सेब उत्पादन की संभावनाओं को लेकर भी काम आगे बढ़ाया है. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात के दौरान मनोज सैनी ने गरम तापमान वाले क्षेत्रों में सफल सेब उत्पादन के अपने अनुभव साझा किए और राज्य में ‘एप्पल क्रांति’ के लिए विशेष पायलट प्रोजैक्ट का प्रस्ताव रखा.
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हरियाणा में बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं. यदि गरम जलवायु में सेब उत्पादन का यह मौडल बड़े स्तर पर विकसित होता है तो किसानों को एक नई व्यावसायिक फसल का विकल्प मिल सकता है.
मनोज सैनी की भूमिका केवल सेब के पौधे उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है. उन का जोर गरम क्षेत्रों के किसानों को यह समझाने पर भी है कि नई किस्मों के साथ खेती की तकनीक में भी बदलाव जरूरी है. पौधों का चयन, रोपण का समय, सिंचाई, पोषण, छंटाई और तापमान प्रबंधन जैसे पहलुओं पर सही जानकारी मिलने से किसान इस नई फसल को बेहतर तरीके से अपना सकते हैं.
यही वजह है कि गरम जलवायु में सेब उत्पादन का उन का प्रयास केवल एक बाग लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि मैदानी इलाकों में सेब की पूरी नई खेती प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक प्रयोग के रूप में देखा जा सकता है. सेब की खेती का विस्तार होने से किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुल सकते हैं. आज सवाल केवल यह नहीं है कि सेब कहां उग सकता है, बल्कि यह भी है कि कौन सी किस्म और कौन सी तकनीक किस क्षेत्र के लिए उपयुक्त है?
मनोज सैनी की सब से बड़ी उपलब्धि यही मानी जा सकती है कि उन्होंने गरम जलवायु वाले किसानों के सामने सेब की खेती की एक नई संभावना रखी है और इसे प्रयोग से आगे बढ़ा कर व्यावसायिक खेती की दिशा में ले जाने की कोशिश की है. Apple Cultivation





