Azotobacter-

फसलों में नाइट्रोजन नामक पोषक तत्त्व की पूर्ति के लिए केमिकल खादों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, लेकिन एक तो खादों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और ये कभी समय पर मिल भी नहीं पाती हैं. वैसे केमिकल खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी, पानी और आबोहवा सभी प्रदूषित हो रहे हैं.

इन से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिकों का ध्यान इन के विकल्प की ओर लगा हुआ है. उन्होंने नाइट्रोजन के रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैव उर्वरकों को इस्तेमाल करने का रास्ता सुझाया है, जिन में एजेटोबैक्टर खास है, क्योंकि यह सस्ता, सभी जगह मिलने वाला और हमारी आबोहवा के मुफीद है. आइए, इस के बारे में पूरी जानकारी हासिल करें:

एजेटोबैक्टर के जीवाणु मिट्टी में पौधे के जड़ क्षेत्र में रहते हैं, ये आबोहवा की नाइट्रोजन को अमोनियम में बदल देते हैं, जो पौधों को मिल जाती है. ये कुछ हारमोन जैसे जिबे्रलिक एसिड भी पैदा करते हैं, जिस से पौधों के विकास में तेजी आती है.

अनाज वाली फसलों में नाइट्रोजन की आपूर्ति के लिए 20वीं शताब्दी के शुरू में सोवियत वैज्ञानिक बैजरींक ने एजोबैक्टर नामक जीवाणु को जमीन से निकाल कर उस की क्वालिटी और काम का पता लगाया था. यह एक बड़ी कामयाबी थी, जिस का आज कई देशों में फायदा उठाया जा रहा है.

भारतीय मिट्टी में एजेटोबैक्टर की ‘एजेटोबैक्टर कोकोकम’ नामक वैरायटी पाई जाती है, जो पौधों की जड़ों पर रहती है. यह वैरायटी आक्सीजन की मौजूदगी में नाइट्रोजन को इकट्ठा कर के उसे अमोनियम में बदल कर पौधों को मुहैया कराती है. तमाम जांचों से पता चला है कि एजेटोबैक्टर जीवाणुओं का सभी तरह की गैर दलहनी फसलों में इस्तेमाल किया जा सकता है.

एजेटोबैक्टर का इस्तेमाल धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, गेहूं, जौ, सरसों, तिल, सूरजमुखी, अरहर, मूंग, उड़द, मटर, मसूर, गन्ना, कपास, तंबाकू, जूट, आलू, टमाटर, प्याज, लहसुन, बैगन, गोभी, मिर्च, केला, अंगूर, पपीता वगैरह फसलों में किया जाता है.

कैसे करें इस्तेमाल

एजेटोबैक्टर को बीज व मिट्टी उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

बीजोपचार : एजेटोबैक्टर कल्चर से बीजों को बोने से पहले उपचारित किया जाता है. इस के लिए थोड़ा पानी लें और उस में 2 सौ ग्राम एजेटोबैक्टर कल्चर ले कर उस की लुगदी तैयार कर लें. लुगदी में थोड़ी मिट्टी और गुड़ मिला सकते हैं. गुड़ की वजह से कल्चर बीजों के ऊपर आसानी से चिपक जाएगा. इस तैयार लुगदी को एक एकड़ में बोए जाने वाले बीजों में मिलाएं और तब तक पलटते रहें जब तक कि सभी बीजों पर लुगदी की परत न चढ़ जाए. उपचारित बीजों को छाया में सुखाएं और जल्दी ही बोआई कर दें.

मिट्टी उपचार: एजेटोबैक्टर कल्चर को भुरभुरी मिट्टी, खाद या कंपोस्ट के साथ 1:5 अनुपात में मिला कर समान रूप से खेत में बिखेर दिया जाता है. अगर इसे कूंड़ों में डाला जाए तो ज्यादा फायदा होता है.

इस से मिट्टी का उपचार तब करें जब:

* फसल की बोआई गरम मौसम में करनी हो.

* जब उपचारित की जाने वाली जमीन में डिनाइट्रीकारक की मात्रा ज्यादा हो.

पौध उपचार: इस का इस्तेमाल धान, सब्जियों व फलों के पौधे लगाते समय किया जाता है. इस के लिए 3 पैकेट एजेटोबैक्टर कल्चर को 15-20 लीटर पानी (प्रति एकड़ के हिसाब से) में डाल कर घोल बना लें और इस में पौधों की जड़ों को 10-15 मिनट तक डुबो कर कर उन्हें रोपें.

गन्ना, आलू और केले के टुकड़ों, कंदों व जड़ों के गुच्छों को उपचारित करने के लिए 3 पैकेट कल्चर को 40-45 लीटर पानी में डाल कर घोल बनाएं और इस घोल में टुकड़ों, कंदों व जड़ों को उपचारित कर के उन की तुरंत बोआई कर दें.

एजेटोबैक्टर के फायदे

एजेटोबैक्टर कल्चर से उपचारित बीजों, कंदों व टुकड़ों वगैरह का अंकुरण जल्दी होता है.

इस से मिट्टी उपचार करने से उस की भौतिक, रासायनिक व जैविक स्थिति में सुधार होता है और उर्वरा ताकत बढ़ती है.

इस के इस्तेमाल से मक्का में प्रोटीन, आलू में स्टार्च और चुकंदर में शर्करा की मात्रा में इजाफा होता है. सूरजमुखी को उपचारित करने से बीजों में तेल की मात्रा बढ़ती है.

एजेटोबैक्टर कल्चर से हर साल औसतन 25-30 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर इकट्ठा हो जाती है.

सावधानियां

एजेटोबैक्टर के इस्तेमाल में कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए:

– पारे वाले केमिकलों से बीज उपचारित करने पर इस के कल्चर की मात्रा दोगुनी कर देनी चाहिए.

– आमतौर पर एक एकड़ के लिए कल्चर का एक पैकेट 10 किलोग्राम बीज उपचारित करने के लिए काफी होता है. अगर बीज अधिक मात्रा मात्रा में बोना हो तो कल्चर की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए.

  •  कल्चर अधिक पुराना नहीं होना चाहिए और कल्चर को रासायनिक उर्वरकों, कीट व फफूंदी नाशकों के साथ नहीं मिलाना चाहिए.

– दलहनी फसलों में जैव उर्वरकों का प्रचलन काफी हो चुका है. जरूरत इस बात की है कि गैर दलहनी फसलों में एजेटोबैक्टर का इस्तेमाल प्रमुखता के साथ किया जाए और देश का कृषि उत्पादन बढ़ाया जाए. Azotobacter

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें...