Fruit Farming-

भारत में अनार के पेड़ सभी जगह पर पाए जाते हैं. कंधार, काबुल और भारत के उत्तरी भाग में पैदा होने वाले अनार बहुत रसीले और अच्छी किस्म के होते हैं. अनार का पेड़ कई शाखाओं वाला लगभग 20 फुट ऊंचा होता है. इस की छाल चिकनी, पतली, पीली या गहरेभूरे रंग की होती है. अनार के पत्ते कुछ लंबे व कम चौड़े होते हैं और फूल नारंगी व लाल रंग के, कभीकभी पीले 5-7 पंखुडि़यों वाले अकेले या 3-4 के गुच्छे में होते हैं.

अनार की खासीयत

अनार का छिलका लाल, हरा और दाना लाल व सफेद होता है. फल खट्टा, मीठा और फीका होता है. यह भारत के हर स्थान पर मिलता है. पंजाब और काबुल की तरफ का अनार अधिक मीठा होता है. अनार की तासीर ठंडी होती है.

खेती:

अनार की खेती के लिए गरम व सूखी आबोहवा ज्यादा ठीक रहती है. अनार आमतौर पर घर की बगिया में उगाया जाता है, लेकिन राजस्थान में इस की कारोबारी खेती की भारी संभावनाएं मौजूद हैं, क्योंकि इस की खेती कम पानी और खराब मौसम में भी आसानी से की जा सकती है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कारोबारी स्तर पर इस की खेती की जा रही है.

मिट्टी व आबोहवा:

अनार की खेती के लिए गरम व सूखी आबोहवा ज्यादा मुफीद रहती है. इस के पौधों में ज्यादा तापमान व सूखा सहने की कूवत होती है. गरम व सूखी आबोहवा में फल मीठे व अच्छी क्वालिटी वाले होते हैं. पानी निकास और उपजाऊ भारी दोमट मिट्टी वाले खेत इस की खेती के लिए एकदम माकूल होते हैं.

पौध रोपाई:

अनार के पौधों को फरवरीमार्च और जूनजुलाई महीने में मुख्य खेत में लगाया जा सकता है. पौधे लगाने के एक महीना पहले खेत में 5-5 मीटर की दूरी पर निशान बना कर 60×60×60 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे बना लें.

बारिश शुरू होने से पहले हर गड्ढे में 10 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद, ढाई सौ ग्राम एनपीके, 2 किलो वर्मी कंपोस्ट, 2 किलो नीम की खली और 50 ग्राम मिथाइल पैराथियान पाउडर का मिश्रण भर कर सिंचाई कर देनी चाहिए. इस के 4-5 दिन बाद गड्डों के खरपतवारों को खत्म कर के उन में पौधे लगा कर सिंचाई कर देनी चाहिए.

खाद:

अच्छी पैदावार के लिए पौधों में खाद की खुराक पर खास ध्यान रखने की जरूरत है. अनार की जड़ें ज्यादा गहराई तक नहीं जातीं, इसलिए तने के आसपास जड़ में खाद देनी चाहिए.

अनार में खाद फरवरी महीने में देते हैं, लेकिन खाद का समय पेड़ के फूलनेफलने पर भी निर्भर करता है. अंबे बहार के लिए दिसंबरजनवरी, मृग बहार के लिए मईजून और हस्त बहार के लिए सितंबरअक्तूबर महीने में खाद देनी चाहिए.

सिंचाई:

अनार के पौधों में सूखा सहन करने की कूवत होती है, लेकिन ज्यादा पैदावार हासिल करने के लिए 10-15 दिन के अंतर पर सिंचाई करनी चाहिए. नमी की हिफाजत के लिए तने के आसपास जैविक मल्चिंग यानी घासफूस से मिट्टी को ढकना फायदेमंद रहता है. ज्यादा सिंचाई से फल फटना व फल झड़ने की समस्या पैदा हो जाती है.

अनार के बगीचे में 2-3 साल तक दलहनी फसलें जैसे मटर, लोबिया, चना, मूंग, उड़द व मूंगफली वगैरह उगाई जा सकती हैं. पौधों के पूरी तरह बड़ा हो जाने के बाद कोई फसल नहीं लेनी चाहिए.

अच्छी क्वालिटी वाली ज्यादा पैदावार हासिल करने के लिए खरपतवार की रोकथाम, मिट्टी में हवा का आनाजाना बढ़ाने व पानी धारण की कूवत बढ़ाने के लिए जुताई व गुड़ाई करते रहना चाहिए.

पौधों की काटछांट:

अनार के पौधे झाड़ी की तरह होते हैं, इसलिए इन की कटाईछंटाई कर के अच्छा आकार देना जरूरी है. आमतौर पर पौधे में 4-5 बड़ी टहनियां रखने के बाद बाकी को काट देना चाहिए. जब पौधे बड़े हो जाएं तो समसमय पर बीमार व सूखी टहनियों को निकालते रहना चाहिए.

तुड़ाई व ग्रेडिंग:

4-5 साल के पौधों पर तकरीबन 20-25 फल ही हासिल होते हैं. पूरी तरह जवान पेड़ों से तकरीबन डेढ़ सौ फल हर साल हासिल किए जा सकते हैं.

किस्म के मुताबिक फल का रंग विकसित होने के बाद फलों को तेज चाकू या सिकेटियर की मदद से काटना चाहिए. आकार, रंग, वजन के मुताबिक फलों की ग्रेडिंग कर के बांस की टोकरियों या गत्ते के बौक्स में सूखी घास या पुआल के बीच फलों को रखना चाहिए. अनार के फलों की स्टोर कूवत बहुत अच्छी होती है. इन को 7 से 15 दिन तक बिना किसी नुकसान के महफूज रखा जा सकता है.

नए बाग लगाने के लिए समय पर सही जानकारी हासिल कर अमल में लाएं, ताकि आप का बगीचा फलताफूलता रहे.    Fruit Farming

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