देश का 85 प्रतिशत मखाना बिहार (Bihar Makhana) में पैदा होता है. लेकिन अब मध्यप्रदेश सरकार भी इसे अपने राज्य में बढ़ावा दे रही है. इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार एक योजना लाई है. क्या है यह योजना ?

सरकार ने इसके लिए 4 जिले चुने हैं. छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, बालाघाट और सिवनी. यहां पर सेंट्रल सेक्टर स्कीम के तहत मदद दी जा रही है. आवेदन शुरू हो गए हैं.

मखाना में इतना मुनाफा क्यों ?

ब्लैक डायमंड बनी पहचान

मखाना एक जलीय फसल है. ये तालाब या पानी भरे खेत में उगता है और फल पानी के नीचे होता है. इसके बीज को ही भूनकर मखाना बनाया जाता है. बाजार में इसका भाव 800 से 1200 रुपये किलो तक रहता है. इसलिए इसे ब्लैक डायमंड भी कहते हैं. एक हेक्टेयर में 15 से 20 क्विंटल तक पैदावार हो जाती है.

सरकार कितनी मदद दे रही ?

तालाब में खेती पर

अगर आपके पास पहले से तालाब है तो उसमें मखाना लगाओ. सरकार 71,600 रुपये प्रति हेक्टेयर देगी. कुल 3 हेक्टेयर का लक्ष्य है.

खेत में भी मखाने की खेती

अगर आपके पास गहराई वाला खेत है और आप खेत में पानी रोक सकते हैं तो खेत में मखाना की खेती कर सकते हैं. इस पर 52,800 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे. इसका भी 3 हेक्टेयर का लक्ष्य है.

नया तालाब बनाने पर

अगर आप नया तालाब बनाकर मखाना उगाना चाहते हैं , तो सरकार नया तालाब बनाने के लिए 2,80,000 रुपये प्रति हेक्टेयर दे रही है. ये योजना की सबसे बड़ी मदद है. इसका लक्ष्य 0.800 हेक्टेयर रखा गया है.

टोकरी के लिए

मखाना फसल तैयार होने पर उसे तोड़ा जाता है. पानी में उतरकर मखाना तोड़ने के लिए गांज नाम की टोकरी लगती है. इसकी कीमत 3,200 रुपये है. इस पर 50 प्रतिशत यानी 1,600 रुपये सरकार देगी.

कैसे होती है मखाने की खेती?

मखाना के लिए 1 से 1.5 फीट गहरा पानी चाहिए. दिसंबर-जनवरी में नर्सरी डाली जाती है और फरवरी-मार्च में तालाब में मखाना के पौधे लगते हैं. इसके बाद उचित देखभाल के बाद अगस्त सितंबर में फसल तैयार हो जाती है.

इसे तालाब से निकालना थोड़ा मेहनत वाला काम है. पानी में डूबकर फल तोड़ना पड़ता है. लेकिन मुनाफा भी खूब है.

आवेदन कैसे करें ?

अपने क्षेत्र के उद्यान विभाग के अधिकारी से संपर्क करें. आधार कार्ड, जमीन की नकल और बैंक पासबुक भी साथ ले कर जाएं. Bihar Makhana

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