गन्ने को सबसे मीठा माना जाता है, पर एक फसल ऐसी भी है जिसकी कुछ पत्तियां गन्ने के पूरे खेत पर भारी हो सकती है. जी हां, स्टीविया (Stevia) एक ऐसी ही फसल है जिसमें गन्ने से 50 से 300 गुना तक अधिक मिठास होती है.

मतलब चुटकी भर पत्ती से पूरा गिलास पानी मीठा. इसीलिए शुगर के मरीजों की मिठाइयां और डाइट वाली कोल्ड ड्रिंक में इसी का इस्तेमाल हो रहा है.

किसान को क्या फायदा?

स्टीविया को एक बार लगा दिया तो 3 से 5 साल तक उसी पौधे से पत्तियां मिलती रहती हैं.
जो साल में 3 से 4 बार तक कटती हैं.

गन्ने से कम पानी की दरकार

गन्ने को बहुत पानी चाहिए, इसको गन्ने से आधे से भी कम पानी में उगाया जा सकता है और सालों तक उपज ली जा सकती है.

पहले बाजार तलाशें फिर खेती करें

गन्ने को आप मंडी में कहीं भी बेच सकते हैं. लेकिन स्टीविया के साथ ऐसा नहीं है. इसको बेचने के लिए कंपनी ढूंढनी पड़ती है.

इसलिए पौधा लगाने से पहले अपने जिले में खरीदार पक्का करें, उससे लिखित में भाव लें, फिर ही खेती शुरू करें.

एक एकड़ में कितना खर्च और कितनी कमाई?

पहले साल 1 एकड़ में करीब 30,000 पौधे लगते हैं। पौधे, ड्रिप, खाद-पानी मिलाकर 1 से 1.2 लाख रुपये तक खर्च आ जाता है.

पहले साल 600-800 किलो सूखी पत्ती मिलती है। दूसरे साल से 1000 किलो तक.

स्टीविया की खेती में सरकार से क्या मदद मिल सकती है?

स्टीविया की खेती (Stevia Farming) शुरू करने से पहले किसानों को सरकारी सहायता की जानकारी जरूर जुटानी चाहिए. किसान अपने जिले के कृषि विभाग, उद्यान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क कर पता कर सकते हैं कि स्टीविया की खेती के लिए पौधों की खरीद, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन या किसी सरकारी योजना के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध है या नहीं. इसलिए किसान यह मानकर निवेश न करें कि सरकार पौधे खरीदने पर सब्सिडी देगी या तैयार पत्तियों को खरीद लेगी. किसी भी योजना का लाभ लेने से पहले संबंधित विभाग से उसकी पात्रता, सहायता राशि और आवेदन प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी जरूर लें.

सावधानी जरूरी

बाजार के मामले में भी किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए. स्टीविया की पत्तियां खरीदने वाली कंपनियों और प्रसंस्करण इकाइयों से पहले ही संपर्क करें. खरीद का भाव, गुणवत्ता की शर्तें और भुगतान की प्रक्रिया समझने के बाद ही बड़े स्तर पर खेती शुरू करें.

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