देश के विकास का रास्ता गांव से होकर जाता है और गांव की तरक्की की असली ताकत महिलाएं (Village Women) बनेंगी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को विजयवाड़ा में यह बड़ी बात कही.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विजयवाड़ा के पुन्नमी घाट पर आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला 2026 का उद्घाटन करने पहुंची थीं. यह पहली बार है जब दिल्ली-NCR से बाहर इस राष्ट्रीय मेले का आयोजन हो रहा है.
मेले की खास बातें.
ये मेला 13 से 31 अक्टूबर तक चलेगा. केंद्र के ग्रामीण विकास मंत्रालय और आंध्र प्रदेश सरकार ने मिलकर इसका आयोजन किया है. मेले में 30 से ज्यादा राज्यों की 1500 से ज्यादा महिला उद्यमी अपने उत्पाद लेकर आई हैं. 650 से ज्यादा स्टॉल लगे हैं.
राष्ट्रपति ने कहीं – 3 बड़ी बातें
अब लक्ष्य करोड़पति दीदी
राष्ट्रपति ने कहा कि 12 साल में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा हो गई है. अब तक हम लखपति दीदी बना रहे थे, अब लक्ष्य होना चाहिए कि इन्हें करोड़पति दीदी बनाएं.
2047 तक विकसित भारत
यह तभी संभव है, जब विकास का फायदा हर गांव और हर घर तक पहुंचेगा. गांव की महिला अगर कमाएगी तो पूरा परिवार खुशहाल होगा और गांव आगे बढ़ेगा.
सरस मेले से बाजार तक
राष्ट्रपति ने स्टॉलों पर जाकर महिलाओं से बात की. उन्होंने कहा कि ये मेले महिलाओं को बिचौलिए के बिना सीधा ग्राहक से जोड़ते हैं.
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किए दो बड़े ऐलान
पहला – सरस मेले अब सिर्फ दिल्ली में नहीं लगेंगे, देश के अलग-अलग राज्यों में भी लगेंगे ताकि ज्यादा महिलाओं को मौका मिले.
दूसरा – हर जिले में शी मार्ट खोले जाएंगे. ये एक स्थायी दुकान होगी जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के बनाए उत्पाद हमेशा बिकेंगे. इससे उन्हें रोज बाजार मिलेगा, न कि सिर्फ मेले का इंतजार करना पड़ेगा.
आंध्र प्रदेश सबसे आगे
मंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश में 11 लाख स्वयं सहायता समूह हैं. लखपति दीदी बनाने में ये राज्य देश में सबसे आगे है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार महिलाओं को तकनीक और बाजार दोनों में मदद दे रही है.
आगे की राह क्या
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर महिलाओं को ट्रेनिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और स्थायी बाजार मिले तो वे परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ गांव में ही रोजगार भी पैदा करेंगी.
राष्ट्रपति का करोड़पति दीदी वाला बयान इसी दिशा में अगला कदम है. अब चुनौती है कि शी मार्ट और सरस मेले जैसी योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से लागू होती हैं.





