Mustard Farming. सरसों की खेती से अच्छी कमाई करने के लिए शुरुआत से ही सही तैयारी जरूरी है. केवल महंगा बीज या ज्यादा खाद डालने से पैदावार नहीं बढ़ती. खेत की तैयारी, बोआई का समय, पौधों की सही दूरी और पोषक तत्वों का संतुलित इस्तेमाल भी फसल की उपज तय करते हैं.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सरसों अनुसंधान संस्थान के अनुसार, सरसों की सही किस्म और जरूरत के मुताबिक सल्फर जैसे पोषक तत्वों का इस्तेमाल बीज की पैदावार और तेल उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकता है. आइए जानते हैं सरसों की बोआई से ले कर खाद प्रबंधन तक जरूरी बातें :

सब से पहले मिट्टी की जांच कराएं

सरसों की बोआई से पहले मिट्टी की जांच कराना फायदेमंद है. इस से पता चलता है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और दूसरे पोषक तत्वों की कितनी जरूरत है.
मिट्टी की जांच के आधार पर खाद डालने से गैरजरूरी खर्च बचता है और फसल को जरूरत के मुताबिक पोषण मिलता है.

सरसों की बोआई का सही समय चुनें

सरसों की अच्छी पैदावार के लिए समय पर बोआई करना जरूरी है. सामान्य तौर पर कई सरसों उत्पादक क्षेत्रों में सितंबर के आखिरी हफ्ते से अक्तूबर के मध्य तक बोआई का अच्छा समय रहता है. कुछ क्षेत्रों और किस्मों में अक्तूबर के आखिर या नवंबर के पहले हिस्से तक भी बोआई की जाती है.

बोआई का सही समय

राज्य, किस्म, सिंचाई और मौसम के अनुसार बदल सकता है. देर से बोआई करने पर फसल को गरमी और कीटों का अधिक सामना करना पड़ सकता है, इसलिए अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विश्वविद्यालय की सलाह के अनुसार बोआई करें.

खेत की तैयारी ऐसे करें

-खरीफ फसल की कटाई के बाद खेत को अच्छी तरह तैयार करें.

-खेत की जरूरत के अनुसार जुताई करें और मिट्टी के बड़े ढेलों को तोड़ें.

-खेत को समतल रखें, ताकि बुवाई और सिंचाई में परेशानी न हो.

-खेत में पानी जमा न होने दें.

मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. नमी कम होने पर बोआई से पहले सिंचाई की जा सकती है.

कृषि यंत्रों का उपयोग से बढ़ती उपज

खेत तैयार करते समय उपलब्ध कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करने से काम आसान होता है और बीज की समान बोआई में मदद मिलती है और पैदावार भी अच्छी मिलती है.

सही किस्म से बढ़ाएं उपज और तेल उत्पादन

बीज खरीदते समय यह देखें कि किस्म आप के क्षेत्र, बोआई के समय और सिंचाई की सुविधा के अनुकूल है या नहीं.
आईसीएआर-भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर की सूची में कई उन्नत किस्में शामिल हैं. इन में गिरिराज (डीआरएमआरआईजे-31), एनआरसीडीआर -601 और डीआरएमआर 1165-40 प्रमुख हैं.

संस्थान की जानकारी के अनुसार, नई किस्म डीआरएमआरसीआई (क्यू) 172 को वर्ष 2025 में अधिसूचित किया गया. इस की औसत उपज लगभग 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा 41.8 फीसदी दर्ज की गई है.

यह राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के निर्धारित क्षेत्र में समय पर बोई जाने वाली सिंचित फसल के लिए सुझाई गई है.

सावधानी जरूरी

ध्यान रखें कि किसी किस्म की बताई गई औसत उपज हर खेत में मिलना जरूरी नहीं है. बीज खरीदने से पहले अपने क्षेत्र के अनुसार बीज तय करें.

सीड ड्रिल से करें बोआई

-लाइन में बोआई करने के लिए सीड ड्रिल का इस्तेमाल बेहतर विकल्प है. इस से बीज उचित दूरी पर पड़ता है और पौधों की संख्या नियंत्रित रखने में मदद मिलती है.

-कतार से कतार की दूरी करीब 30 सैंटीमीटर रखें.

-पौधे से पौधे की दूरी लगभग 10 से 15 सैंटीमीटर रखें.

-बीज को करीब 4 से 5 सैंटीमीटर गहराई पर बोएं.

-बोआई के लगभग 20 से 25 दिन बाद जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पौधे निकाल कर उचित दूरी बनाए रखें.

-बीज की मात्रा और दूरी में स्थानीय सिफारिशों को प्राथमिकता दें.

-बीज उपचार करना न भूलें.

खाद और उर्वरक का संतुलित इस्तेमाल करें

सरसों की अच्छी पैदावार के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ सल्फर की जरूरत पर भी ध्यान देना चाहिए. लेकिन सभी खेतों में इनकी जरूरत एक जैसी नहीं होती.

-नाइट्रोजन : पौधों की बढ़वार में मदद करता है.

-फास्फोरस : जड़ों के विकास और पौधों की शुरुआती बढ़वार के लिए जरूरी है.

-पोटाश : पौधों की मजबूती और तनाव सहने की क्षमता में मदद करता है.

-सल्फर : तेल वाली फसल होने के कारण सरसों में खास महत्व रखता है.

-जिंक और बोरौन : इन की कमी होने पर पौधों की बढ़वार, फूल और बीज बनने पर असर पड़ सकता है.

ज्यादा तेल के लिए सल्फर का रखें ध्यान

सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर महत्वपूर्ण पोषक तत्व है. लेकिन इस का फायदा खासतौर पर तब मिलता है, जब मिट्टी में इस की कमी हो या फसल को इस की पर्याप्त मात्रा नहीं मिल रही हो.

आईसीएआर की कृषि सलाह में कुछ परिस्थितियों के लिए 20 किलोग्राम सल्फर और 1 किलोग्राम बोरौन प्रति हेक्टेयर का उल्लेख है. वहीं, आईसीएआर के सरसों अनुसंधान संस्थान के शोध में सल्फर की कमी वाली मिट्टी में 40 किलोग्राम सल्फर और 1 किलोग्राम बोरौन प्रति हेक्टेयर के इस्तेमाल से बीज और तेल की उपज बढ़ने की जानकारी दी गई है.

सिंचाई और कीट प्रबंधन समय पर करें

सरसों की फसल को जरूरत के मुताबिक पानी मिलना चाहिए खासकर फूल आने और फलियां बनने के समय नमी की कमी से उपज प्रभावित हो सकती है. सिंचाई की जरूरत मिट्टी, मौसम और पहले से मौजूद नमी पर निर्भर करती है.
सरसों में माहू यानी एफिड जैसे कीट भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. खेत की नियमित निगरानी करें. कीट दिखाई देने पर पहले उन की पहचान कराएं और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही नियंत्रण का उपाय अपनाएं.

कटाई सही समय पर करें

जब सरसों की फलियां पीली पड़ने लगें और बीज पकने की अवस्था में पहुंच जाएं, तब फसल की कटाई की तैयारी करें. कटाई में बहुत देर होने पर फलियां चटक सकती हैं और बीज खेत में गिर कर नुकसान पहुंचा सकते हैं. सही समय पर कटाई और सुरक्षित भंडारण से उपज का नुकसान कम किया जा सकता है Mustard Farming

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