देशी गायों (Desi Cows) का पालन करने वाले पशुपालकों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने अच्छी पहल की है. सरकार ने ‘गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ को मंजूरी दी है. इस के तहत देशी नस्ल की सब से अधिक दूध देने वाली गायों के पालकों को प्रदर्शन के आधार पर नकद पुरस्कार दिए जाएंगे. प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले पशुपालक को 1 लाख रुपए, दूसरे स्थान पर रहने वाले को 50 हजार रुपए और तीसरा स्थान पाने वाले को 25 हजार रुपएमिलेंगे.
इस योजना का मुख्य उद्देश्य देशी गोवंश का संरक्षण करना, अच्छी नस्लों को बढ़ावा देना और प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाना है. सरकार चाहती है कि पशुपालक देशी गायों की बेहतर देखभाल करें और उन के खानपान व नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दें.
सब से बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को मिलेगा इनाम
योजना के तहत पशुपालकों को 3 श्रेणियों में पुरस्कार दिया जाएगा. सब से अधिक दूध देने वाली पात्र देशी गायों के प्रदर्शन के आधार पर विजेताओं का चयन होगा.
पहला पुरस्कार : 1 लाख रुपए.
दूसरा पुरस्कार : 50 हजार रुपए.
तीसरा पुरस्कार : 25 हजार रुपए.
इस तरह तीनों स्थानों पर चुने गए पशुपालकों को कुल 1.75 लाख रुपए तक के पुरस्कार दिए जाएंगे. हालांकि, पुरस्कार की राशि का इस्तेमाल अपनी मरजी से किसी भी काम में नहीं किया जा सकेगा. इस का उपयोग केवल उन्नत देशी गोवंश की खरीद, संरक्षण और संवर्धन के लिए करना होगा.
गिर और साहीवाल सहित कई नस्लें होंगी शामिल
इस प्रतियोगिता में देश की प्रमुख अधिसूचित देशी नस्लों को शामिल किया गया है. इन में गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी और निवाड़ी नस्ल की गायें प्रमुख हैं. इन नस्लों को उन की दूध उत्पादन क्षमता और बेहतर आनुवांशिक गुणों के लिए जाना जाता है.
सरकार का मानना है कि देशी नस्लों को प्रोत्साहन मिलने से पशुपालकों का रुझान इन के पालन की ओर बढ़ेगा. इस से अच्छी नस्लों का संरक्षण होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए इन की उपलब्धता भी बनी रहेगी.
प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में होगी प्रतियोगिता
योजना को वित्तीय वर्ष 2027-28 से 2030-31 तक लागू करने की तैयारी है. इस के तहत मध्य प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. इस से ग्रामीण क्षेत्रों के अधिक से अधिक पशुपालकों को अपनी गायों की दूध उत्पादन क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा.
प्रतियोगिता में गायों के दूध उत्पादन का आकलन किया जाएगा. इस के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को विजेता चुना जाएगा. प्रतियोगिता के आयोजन और चयन की विस्तृत प्रक्रिया विभागीय दिशानिर्देशों के अनुसार तय होगी.
गोवर्धन पर्व पर सम्मानित होंगे विजेता
योजना के तहत हर साल गोवर्धन पर्व के अवसर पर विजेता पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा. इस से पशुपालन के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले किसानों को पहचान मिलेगी. साथ ही दूसरे पशुपालकों को भी बेहतर नस्ल की गायें पालने और दूध उत्पादन बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी.
देशी गोवंश के संरक्षण के साथ बढ़ेगी कमाई
गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी कई अच्छी देशी नस्लें अपनी विशेषताओं के लिए पहचानी जाती हैं. इन के संरक्षण और संवर्धन के लिए पशुपालकों को प्रोत्साहित करना जरूरी है. ‘गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ इसी दिशा में एक प्रयास है.
इस योजना से गांवों में पशुपालन को आमदनी का बेहतर जरीया बनाने में मदद मिल सकती है. अच्छी नस्लों का पालन, बेहतर देखभाल और दूध उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है. Desi cow





