Agricultural Machinery Banks-
खेती में ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन महंगी मशीनें खरीदना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आसान नहीं है. राजस्थान सरकार ने इस समस्या को देखते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था को बढ़ावा दिया है.
प्रदेश में अब तक 1,575 कस्टम हायरिंग सैंटर संचालित किए जा रहे हैं. इन केंद्रों से किसान ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रैशर और सीडड्रिल जैसे कृषि यंत्र अपनी जरूरत के अनुसार किराए पर ले सकते हैं.
इस व्यवस्था से किसानों को महंगी मशीनें खरीदने के लिए कर्ज लेने की जरूरत कम होगी. वे बोआई से ले कर कटाई तक के काम के लिए मशीनें किराए पर ले कर खेती की लागत घटा सकते हैं.
30 लाख रुपए तक के केंद्र पर 80 फीसदी अनुदान
राजस्थान में कस्टम हायरिंग सैंटर स्थापित करने के लिए सरकार आर्थिक मदद भी दे रही है. प्रत्येक केंद्र की स्थापना पर 30 लाख रुपए तक की लागत निर्धारित है और इस पर 80 फीसदी तक अनुदान दिया जा रहा है. इस से सहकारी समितियों के माध्यम से गांवों में कृषि यंत्रों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल रही है.
इन केंद्रों का सब से अधिक फायदा उन किसानों को हो सकता है, जिन के पास छोटी जोत है और जो महंगे कृषि यंत्र खरीदने में सक्षम नहीं हैं. जरूरत के समय किराए पर मशीन मिलने से उन का समय और मजदूरी खर्च भी बच सकता है.
200 गोदामों से मजबूत होगी अनाज भंडारण व्यवस्था
किसानों के लिए केवल मशीनों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि फसल को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी जरूरी है. इसी दिशा में अन्न भंडारण योजना के तहत राजस्थान में 130 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 70 गोदामों का निर्माण जारी है.
इन गोदामों का इस्तेमाल समर्थन मूल्य पर खरीदी गई फसलों, राशन, प्रमाणित बीज और खाद के भंडारण के लिए किया जाएगा. इस से अनाज और दूसरी कृषि सामग्री को सुरक्षित रखने की सुविधा बढ़ेगी. साथ ही सरकारी खरीद और वितरण व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
सोजत की मेहंदी से मथानिया की मिर्च तक को मिलेगा बाजार
राजस्थान के कई कृषि उत्पाद देशभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं. सरकार अब इन उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाश रही है. इस के तहत सोजत की मेहंदी, नागौर की मेथी और जीरा, बारां के चावल तथा मथानिया की मिर्च के निर्यात को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई.
इन उत्पादों की गुणवत्ता और खास पहचान का फायदा किसानों को तभी मिलेगा, जब उन्हें बेहतर बाजार और उचित कीमत मिलेगी. निर्यात बढ़ने से स्थानीय उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और कारोबारियों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
खेती से ले कर बाजार तक किसानों को सहारा
राजस्थान में कृषि यंत्र किराया केंद्रों, गोदामों और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की पहल का मकसद खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाना है. किराए पर मशीनें मिलने से छोटे किसानों का खर्च घटेगा, गोदामों से उपज सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और निर्यात से स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार मिल सकेंगे.
इन सुविधाओं का सही ढंग से इस्तेमाल हो तो किसानों की खेती की लागत घटाने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है.





