Fish Farming. हरियाणा का रोहतक अब मछली उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की तैयारी में है. यहां लाहली स्थित केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान में कौमन कौर्प मछली की तीसरी पीढ़ी तैयार करने पर शोध चल रहा है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि नई पीढ़ी की यह मछली पहले के मुकाबले तेजी से बढ़ेगी और खारे व क्षारीय पानी में भी आसानी से पाली जा सकेगी. इस से मछलीपालकों को कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर कमाई का मौका मिल सकता है.

तीसरी पीढ़ी पर वैज्ञानिकों की नजर

लाहली स्थित संस्थान में देश के अलगअलग हिस्सों से कौमन कौर्प मछलियां लाई गई हैं. वैज्ञानिक इन की प्रजनन प्रक्रिया के जरीए तीसरी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं. इस का मकसद ऐसी मछली विकसित करना है, जो तेजी से बढ़े और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छी तरह जीवित रह सके.

नई पीढ़ी की मछली अपने मातापिता के मुकाबले अधिक तेजी से बढ़ने की क्षमता रखेगी. इस के लिए वैज्ञानिक लगातार इस की बढ़वार और अन्य गुणों का अध्ययन कर रहे हैं.
खारे पानी में भी नहीं थमेगी बढ़वार

इस शोध की सब से खास बात यह है कि नई पीढ़ी की कौमन कौर्प मीठे पानी के साथ 8 पीपीटी तक लवणता वाले पानी में भी अनुकूल रह सकेगी. इस से उन किसानों को भी मछली पालन का अवसर मिल सकता है, जिन के तालाबों का पानी खारा या क्षारीय है.

अकसर पानी में अधिक लवणता होने के कारण मछलीपालन प्रभावित होता है. नई पीढ़ी की मछली ऐसी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करती है, तो किसानों के लिए मछली उत्पादन के नए रास्ते खुलेंगे.

बेकार पड़े तालाबों से भी होगी कमाई

खारे और क्षारीय पानी वाले कई तालाब मछलीपालन के लिए इस्तेमाल नहीं हो पाते. नई किस्म सफल रहती है, तो ऐसे तालाबों का उपयोग भी उत्पादन के लिए किया जा सकेगा. इस से किसानों को अतिरिक्त आमदनी का मौका मिलेगा.

तेजी से बढ़ने वाली मछली कम समय में बाजार के लिए तैयार हो सकेगी. इस से उत्पादनचक्र छोटा होने और मछलीपालकों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

आनुवांशिक सुधार से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान की वैज्ञानिक डा. सलोनी शिवम के मुताबिक, रोहतक केंद्र में कौमन कौर्प के आनुवांशिक सुधार पर काम किया जा रहा है. इस की तीसरी पीढ़ी तैयार कर उस के गुणों और बढ़वार का आकलन किया जा रहा है. अब तक के नतीजे सकारात्मक रहने की उम्मीद है. शोध का अंतिम चरण पूरा होने के बाद इस के प्रदर्शन की जांच दूसरे स्थानों पर भी की जाएगी.

मीठे पानी की प्रमुख मछली है कौमन कौर्प

कौमन कौर्प का वैज्ञानिक नाम साइप्रिनस कार्पियो है. इसे यूरोपीय कौर्प भी कहा जाता है. यह मीठे पानी की प्रमुख मछली है और दुनिया के कई देशों में इस का व्यावसायिक पालन किया जाता है. यह तालाबों, झीलों और नदियों के शांत पानी में आसानी से रह सकती है.

इस की सामान्य लंबाई 30 से 60 सैंटीमीटर और वजन करीब आधा से 4 किलोग्राम तक होता है. अनुकूल परिस्थितियों में यह एक मीटर तक लंबी हो सकती है. यह सर्वाहारी मछली है और पानी की तलहटी में मिलने वाले कीड़े, घोंघे, छोटे जलीय जीव, बीज और जलीय पौधे खाती है.

मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान लाहली के वैज्ञानिक डा. सत्यप्रकाश के अनुसार, कौमन कौर्प का पालन दुनिया के कई हिस्सों में किया जाता है. इस की अनुकूलन क्षमता और तेजी से बढ़ने की विशेषता इसे मछलीपालन के लिए उपयोगी बनाती है. Fish Farming

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