Straw Reaper : फसल अवशेषों का लिए स्ट्रा रीपर से बनाएं भूसा

Straw Reaper : कंबाइन हार्वेस्टर से फसल कटने के बाद खेत में लगभग 8 से 12 इंच लंबे फसल अवशेष यानी पराली खड़ी रह जाती है, इसलिए कंबाइन हार्वेस्टर द्वारा छोड़े गए डंठल की कटाई स्ट्रा रीपर (Straw Reaper)  से कर के उस का भूसा बनाया जा सकता है. स्ट्रा रीपर (Straw Reaper) ट्रैक्टर से चलने वाला कृषि यंत्र है, जो पराली को काट कर भूसे में बदल देता है. इस से उन्हें जलाने की जरूरत नहीं रह जाती है. भूसे का इस्तेमाल किसान पशुओं को खिलाने के लिए और अतिरिक्त आय के साधन के रूप में भी कर सकता है. गेहूं का भूसा तो पशुओं के चारे के रूप में भी काम आता है.

स्ट्रा रीपर (Straw Reaper) ट्रैक्टर के पीटीओ से चलने वाला यंत्र है. इस के द्वारा काटे गए फसल अवशेष भूसे के रूप में यंत्र के पीछे लगी हुई बंद ट्राली में इकट्ठे हो जाते हैं.

यंत्र द्वारा 1 घंटे में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में कटाई की जा सकती है, जिस से फसल के अनुसार 7 से 10 क्विंटल तक भूसा प्राप्त होता है. इस के अलावा नरवाई समाधान के लिए अन्य कृषि यंत्रों का भी इस्तेमाल किया जाता है.

Straw Reaper : स्ट्रा रीपर फसल अवशेष का बनाए भूसा

Straw Reaper: खेतीबारी में स्ट्रा रीपर (Straw Reaper) एक ऐसा कृषि यंत्र है जो एक ही बार में खेत में खड़े फसल अवशेष (गेहूं या धान की पराली) को काट कर उस का भूसा बनाने का काम करता है. ये वही फसल अवशेष होते हैं, जिन्हें गेहूंधान जैसी तैयार फसल को कंबाइन हार्वैस्टर से काटा जाता है और बाद में बचे हुए गेहूंधान के डंठलों को इस स्ट्रा रीपर से एक घुमावदार ब्लेड से काटा जाता है. घूमती हुई रील उन्हें औगर की ओर धकेलती है. डंठलों को औगर और गाइड ड्रम द्वारा मशीन में पहुंचाया जाता है, जो थ्रैशिंग सिलैंडर तक पहुंचते हैं. वहां डंठलों की छोटेछोटे टुकड़ों में कटिंग हो जाती है. उस का भूसा बन जाता है और ठीक पीछे लगा डबल ब्लोअर भूसे के धूल के कणों को साफ करते हुए ड्रम में ले जाता है.

योद्धा स्ट्रा रीपर (Straw Reaper)

इस यंत्र को चलाने के लिए कम से कम 50 हौर्सपावर की जरूरत होती है. इस योद्धा स्ट्रा रीपर की बास्केट में 35 ब्लेड और थ्रैशिंग के लिए 272 ब्लेड लगे होते हैं.

स्ट्रा रीपर (Straw Reaper) की खासीयतें

* ईंधन की कम खपत होती है.

* स्पेयर पार्ट्स हर जगह आसानी से मिल जाते हैं.

* हैवी ड्यूटी रियर हुक.

* हैवी ड्यूटी गियर बौक्स.

यंत्र लंबे समय तक सुरक्षित रहे, इस के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पीयू पेंट का इस्तेमाल किया जाता है.

यंत्र की अन्य खूबियों के लिए या किसी दूसरी जानकारी के लिए आप उन के फोन नंबर 91-1628 284188 या मोबाइल नंबर 7087222588 पर बात कर सकते हैं.

किसान करें पराली प्रबंधन, अन्यथा लगेगा जुर्माना

बस्ती : फसलों के अवशेष जलाने से पैदा होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए पराली प्रबंधन जरूरी है. उक्त जानकारी देते हुए संयुक्त कृषि निदेशक अविनाश चंद्र तिवारी ने मंडल के जनपदों में किसानों को जागरूक करते हुए फसल अवशेष न जलाए जाने का सुझाव दिया है.

उन्होंने यह भी बताया कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वराशक्ति कमजोर होती है और पैदावार में गिरावट आती है. कंबाइन हार्वेस्टर के साथ एसएमएस यंत्र का प्रयोग करें, जिस से पराली प्रबंधन कटाई के समय ही हो जाए. इस के विकल्प के रूप में अन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र जैसे- स्ट्रा रीपर, मल्चर, पैड़ी स्ट्रा चापर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, स्ट्रा रेक व बेलर का भी प्रयोग कंबाइन हार्वेस्टर के साथ किया जाए, जिस से खेत में फसल अवशेष बंडल बना कर अन्य उपयोग में लाया जा सके.

उन्होंने आगे बताया कि कंबाइन हार्वेस्टर के संचालक की जिम्मेदारी होगी कि फसल कटाई के साथ फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्रों का प्रयोग करें, अन्यथा कंबाइन हार्वेस्टर के मालिक के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी.

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पराली जलाए जाने की घटना पाए जाने पर संबंधित को दंडित करने, क्षति पूर्ति वसूली जैसे 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए 2,500 रुपए, 02 से 05 एकड़ के लिए 5,000 रुपए और 05 एकड़ से अधिक के लिए 15,000 रुपए तक पर्यावरण कंपनसेशन की वसूली एवं पुनरावृत्ति होने पर अर्थदंड की कार्यवाही का प्रावधान है.

यदि कोई किसान बिना पराली को हटाए रबी के बोआई के समय जीरो टिल सीड कम फर्टीड्रिल या सुपर सीडर का प्रयोग कर सीधे बोआई करना चाहता है, तो ऐसे किसानों को कृषि विभाग द्वारा निःशुल्क डीकंपोजर उपलब्ध कराया जाता है. इस के लिए किसान संबंधित उपसंभागीय कृषि प्रसार अधिकरी या राजकीय कृषि बीज भंडार से संपर्क कर डीकंपोजर प्राप्त कर सकते हैं. पराली से देशी खाद तैयार करने और फसल अवशेष को गोशाला में दान करने के लिए प्रेरित किया गया है.

नरवाई प्रबंधन के लिए सुपरसीडर या हैप्पी सीडर, मिल रहा 50 फीसदी अनुदान

कटनी : वर्तमान में अधिकतर किसान अपनी फसल की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से करते हैं. फसल कटाई के बाद खेत में पड़ी नरवाई में आग लगा दी जाती है, जिस के कारण वायु प्रदूषण के साथसाथ मिट्टी में उपस्थित लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं. इस वजह से खेत की उत्पादकता कम हो रही है एवं खेत धीरेधीरे बंजर हो रहे हैं. बिना नरवाई में आग लगाए और बिना खेत की तैयारी किए अगली फसल धान, गेहूं व दलहन की सीधी बोआई हैप्पी सीडर व सुपर सीडर कृषि यंत्र से की जा सकती है.

हैप्पी सीडर को 50 एचपी के ट्रैक्टर से आसानी से चलाया जा सकता है. हैप्पी सीडर में एक रोटर लगा होता है, जिस पर लेच लगे होते हैं, जो खड़े हुए भूसे को काटकाट कर गिराते हैं और पीछे से बोनी हो जाती है. कटा हुआ भूसा सतह पर फैल जाता है एवं 2 कतारों के बीच का खड़ा हुआ भूसा समय के साथसाथ धीरेधीरे सड़ कर कार्बनिक पदार्थ में बदल जाता है. भूसे की सतह के कारण वाष्पीकरण कम होता है, हैप्पी सीडर के उपयोग से एक सिंचाई की भी बचत होती है. हैप्पी सीडर के प्रयोग से खेत तैयार करने की लागत में भी कमी आती है. सुपरसीडर को चलाने के लिए 60 एचपी के ट्रैक्टर की जरूरत होती है.

सुपर सीडर में भी एक रोटर लगा रहता है, जो भूसे को काट कर मिट्टी में दबा देता है और पीछे से बोनी हो जाती है. इस के प्रयोग से भी खेत तैयार करने की लागत में कमी आती है.

उपसंचालक कृषि ने बताया कि हैप्पी सीडर की कीमत लगभग 2 लाख रुपए एवं सुपर सीडर की कीमत 2 से ढाई लाख रुपए है. शासन द्वारा यंत्र पर प्रदाय अनुदान राशि लघु सीमांत अनुसूचित जाति जनजाति एवं महिला किसानों को कीमत का 50 फीसदी एवं सामान्य व बड़े किसानों को कीमत का 40 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है.

हैप्पी सीडर पर 65 हजार से 80 हजार रुपए एवं सुपर सीडर पर 80 हजार से 1.50 लाख रुपए है. यंत्र प्राप्ति के लिए आवेदन कृषि अभियांत्रिकी विभाग के पोर्टल पर अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं. इन यंत्रों के प्रयोग से कृषि लागत में कमी आती है एवं मुनाफा भी बढता है.

अधिक जानकारी के लिए संपर्क  एनएल मेहरा, सहायक कृषि यंत्री, जबलपुर से उन  के मोबाइल नंबर 8889479405  और वीवी मौर्य, सहायक कृषि यंत्री, कटनी से उन के मोबाइल नंबर 9425469228 से संपर्क किया जा सकता है.

कृषि यंत्र (Agricultural Machinery) से करें सीधी बोआई

आजकल ज्यादातर गेहूं, धान जैसी फसलों की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से की जाती है. हार्वेस्टर से फसल के सिर्फ ऊपरी हिस्से को ही काट लिया जाता है और बाकी अवशेष खेत में ही पड़ा रह जाता है. उस अवशेष को ज्यादातर किसान जला देते हैं जिस से आबोहवा भी दूषित होती है और खेत की मिट्टी को भी अच्छाखासा नुकसान होता है. साथ ही, खेत की मिट्टी के अनेक उपजाऊ तत्त्व खत्म हो जाते हैं.

वहीं दूसरी तरफ कुछ किसान ऐसे भी हैं जो समझदारी से काम लेते हैं. वे इन अवशेषों को खेत में न जला कर या तो इन्हें खेत में जोत कर खाद बना देते हैं या उस नरवाई वाले खेत में ही हैप्पी सीडर या जीरो टिलेज जैसी मशीनों से सीधे गेहूं की बोआई करते हैं. इस से उन्हें कई फायदे होते हैं.

पहला फायदा तो यह होता है कि इन कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से बोआई करने पर फसल अवशेषों की जमीनों में मिल कर खाद बन जाती है. दूसरा फायदा यह होता है कि खेत तैयार करने के लिए कई बार जुताई करनी होती है तो जुताई का खर्चा बचता है. साथ ही, खेत में देने वाले पानी की भी बचत होती है. तीसरा फायदा समय की बचत होती है और बेहतर पैदावार भी मिलती है.

जीरो टिलेज यंत्र से बोआई

गेहूं की बोआई करने के लिए आमतौर पर खेत की कई बार जुताई करनी पड़ती है जिस में काफी समय बेकार हो जाता है. इस देरी से बचने के लिए धान कटने के बाद खेत में जीरो टिलेज मशीन से सीधे बोआई कर सकते हैं.

इस मशीन में साधारण सीड ड्रिल मशीन की तरह खाद और बीज के लिए अलगअलग 2 बौक्स लगे होते हैं. एक बौक्स में खाद भरी जाती है और दूसरे बौक्स में बीज भरा जाता है. इस यंत्र से 9 या 11 लाइनों में बोआई की जाती है.

बोआई करने के लिए मशीन में नीचे की तरफ नुकीले फाड़ लगे होते हैं जो बारीक लाइन में बीज बोने के लिए खुदाई करते चले जाते हैं. खादबीज वाले बक्सों से जुड़ी प्लास्टिक की लगी पाइपों के जरीए खाद व बीज खेत में गिरते चले जाते हैं. इस यंत्र में खादबीज तय दूरी पर सही मात्रा में गिरते हैं.

जीरो टिलेज का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि धान की कटाई के बाद बिना खेत को जोते ही सीधे इस यंत्र की मदद से बोआई की जाती है जिस से खादबीज एकसाथ ही लग जाता है. दूसरा फायदा यह होता है कि खेत की जुताई न करने पर खेत में नमी बनी रहती है. फसल में कम पानी की जरूरत होती है.

इस यंत्र को 35 से 45 हौर्सपावर या इस से ज्यादा पावर के ट्रैक्टर के साथ इस्तेमाल किया जाता है.

कृषि यंत्र (Agricultural Machinery)

हैप्पी सीडर यंत्र से बोआई

इस यंत्र में जीरो टिलेज मशीन जैसे सभी गुण मौजूद हैं. इस की खासीयत यह है

फसल कटाई व थ्रैशिंग (Harvesting and Thrashing) यंत्र महिंद्रा हार्वेस्टर

फसल की कटाई व थ्रैशिंग का काम अब कृषि यंत्रों से होने लगा है. ज्यादातर किसानों द्वारा ट्रैक्टर का इस्तेमाल करना सामान्य सी बात हो गई है और लगता है कि इसी बात को ध्यान में रखते हुए महिंद्रा कृषि यंत्र निर्माता कंपनी ने ट्रैक्टर के सहयोग से चलने वाला हार्वेस्टर बनाया है, जो फसल की कटाई और थ्रैशिंग का काम आसानी से करता है.

महिंद्रा बैक पैक हार्वेस्टर

यह यंत्र ट्रैक्टर पर लगा होता है. बैक पैक हार्वेस्टर गेहूं, चावल, जई और इसी तरह की दूसरी फसलों की कटाई करता है. यह यंत्र छोटे और मध्यम दर्जे के किसानों के लिए बड़े ही काम का है. इस के इस्तेमाल से किसान खुद अपनी फसल की कटाई, गहाई के अलावा दूसरे किसानों की फसल कटाई वगैरह का भी काम कर सकता है, जिस में अतिरिक्त आमदनी हो सकती है.

इस यंत्र की खूबी : यह बैक पैक हार्वेस्टर दमदार, मजबूत और खेती के काम के लिए भरोसेमंद है. इसे खास तरीके से बनाया गया है, जो ट्रैक्टर पर आसानी से रखा जा सकता है. छोटे खेतों में भी इसे आसानी से मोड़ा जा सकता है. इस के कटर बार 7 फुट के बने हैं. कम पुरजे और आसान तकनीक से बनाए गए इस हार्वेस्टर को इस्तेमाल करना आसान है.

चूंकि यह हार्वेस्टर ट्रैक्टर से संचालित होता है, इसलिए किसानों को जरा भी कठिनाई नहीं आती.

महिंद्रा ट्रैक्टर के साथ फायदे : 540 आरपीएम पर ज्यादा पीटीओ शक्ति (पावर) मौजूद होने के चलते ईंधन की खपत कम होती है. ड्रम में फंसी सामग्री अवशेषों को आसानी से बाहर फेंक देता है.

ट्रैक्टर माउंटेड कंबाइन हार्वेस्टर

गेहूं, धान जैसी फसलों की कटाई और उन की थ्रैशिंग के लिए महिंद्रा कंबाइन हार्वेस्टर बेहतर काम करता है. फसल काटते समय ट्रैक्टर हार्वेस्टर पर माउंटेड होता है, जिस के द्वारा ही हार्वेस्टर सही दिशा में चलता है.

फसल कटने के दौरान अनाज यंत्र में लगे टैंक में इकट्ठा होता जाता है और शेष भूसा व अवशेष खेत में ही रह जाते हैं. जब टैंक अनाज से भर जाता है, तो हार्वेस्टर में लगे पाइप के जरीए इसे किसी दूसरे ट्रैक्टरट्रौली में भर लिया जाता है.

यह कंबाइन हार्वेस्टर फसल की कटाई, थ्रैशिंग व अनाज की सफाई करता है. साथ ही, अनाज को बोरों में भी भरता है. हार्वेस्टर का मौडल बी. 525 है.

जब फसल की कटाई का काम नहीं है, उस दौरान ट्रैक्टर से कंबाइन हार्वेस्टर को उतार लिया जाता है और ट्रैक्टर से खेती के दूसरे काम किए जा सकते हैं.

इस हार्वेस्टर का महिंद्रा के ट्रैक्टर अर्जुन (नोवो) 605 के साथ बेहतर तालमेल है, जिस में 57 एचपी की शक्ति (पावर) है. इस में ईंधन की खपत कम होती है और इसे ट्रैक्टर के साथ जोड़ना और हटाना भी आसान है.

अधिक जानकारी के लिए आप ट्रोल फ्री नंबर 18004256576 पर बात कर सकते हैं.

धान की कटाई से ले कर भंडारण तक

भारत दुनिया में धान उत्पादन की दृष्टि से सब से बड़े देशों में गिना जाता है. देश में आधे से अधिक खेती योग्य जमीनों पर धान की खेती की जाती है. धान उत्पादन को खेती में बीते वर्षो में बड़े शोध व तकनीकी का उपयोग होने से उत्पादन बड़ी तेजी से बढ़ा है, लेकिन धान की फसल के तैयार होने के बाद किसानों को कटाई, मड़ाई, सुखाई व भंडारण की सही जानकारी न होने की वजह से कुल उत्पादन का 10 फीसदी तक का नुकसान उठाना पड़ता है.

धान की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए किसानों को उस की तकनीकी जानकारी होना बेहद जरूरी हो जाता है, जिस से कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

अगर किसान खेती से ले कर भंडारण तक की उन्नत तकनीकी का इस्तेमाल करें, तो वह धान से न केवल अच्छा उत्पादन प्राप्त करेगा, बल्कि उसे अच्छी आय भी होगी.

फसल तैयार होने पर कैसे करें धान की कटाई

देश के अलगअलग राज्यों में धान की कटाई के लिए अलगअलग विधियों का इस्तेमाल किया जाता है. छोटे और मझोले किसान अकसर धान की कटाई हंसिए के द्वारा कटाई करते हैं, जबकि बड़े किसानों द्वारा रीपर या कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग किया जाता है.

धान की कटाई के लिए उपयोग में लाए जाने वाले हंसिया विधि से न केवल धान की क्षति कम होती है, बल्कि पुआल की मात्रा भी अधिक मिलती है. इस पुआल का उपयोग पशुओं के लिए चारे, खुंब उत्पादन, कंपोस्ट खाद इत्यादि के लिए किया जा सकता है.

Paddy harvesting
Paddy harvesting

किसानों को फसल के साथसाथ अन्य कई तरह के लाभ हंसिया द्वारा धान की फसल कटाई से मिल जाता है, पर बड़े भाग में हंसिया द्वारा धान कटाई में न केवल अधिक समय लगता है, बल्कि अधिक मजदूरों की जरूरत भी पड़ती है, इसलिए बड़े क्षेत्रफल में धान की फसल की कटाई के लिए ट्रैक्टर रीपर या कंबाइन का उपयोग किया जाना ज्यादा उचित होता है.

रीपर विधि से काटी गई धान की फसल को रीपर खेत में एक तरफ लगाती हुई जाती है, बाद में काटी गई फसल को किसानों द्वारा इकट्ठा कर इस की मड़ाई कर ली जाती है, जबकि अगर धान की फसल को कंबाइन से काटा जाए, तो उसी दौरान किसान के फसल की कटाईमड़ाई व ओसाई एकसाथ हो जाती है. लेकिन कंबाइन से धान काटने की दशा में चावल के टूटने का डर बना रहता है. कंबाइन से कटाई की दशा में पुआल की बहुत कम मात्रा किसान को मिल पाती है.

कंबाइन द्वारा धान की फसल की कटाई में समय, मेहनत व लागत में बचत की जा सकती है, लेकिन धान की गुणवत्ता में कमी आ जाती है.

धान की कटाई के पहले यह जरूरी हो जाता है कि किसान यह तय कर लें कि धान की फसल कटाई करने योग्य हो गई है या नहीं, इस के लिए यह तय करें कि कटाई के समय फसल में उचित नमी हो. यह नमी 20-22 फीसदी तक हो सकती है. इस से अधिक नमी की दशा में धान की कटाई करने पर चावल के टूटने का डर बना रहता है.

कटाई से पहले यह भी ध्यान रखें कि वातावरण में भी नमी न हो और अगर खेत में पानी भरा हो, तो कटाई के  8-10 दिन पूर्व खेत से पानी की निकासी कर देनी चाहिए.

यह भी कोशिश करें कि धान की फसल की कटाई में देरी न होने पाए, क्योंकि इस से बालियों के टूट कर गिरने का डर बना रहता है और चूहों व पक्षियों द्वारा इसे नुकसान पहुंचाया जा सकता है.

अगर हंसिए के द्वारा फसल की कटाई की जा रही है, तो बालियों को एक दिशा व एक सीध में रखें, जिस से मड़ाई के समय व्यवधान न उत्पन्न हो.

कटाई के बाद धान की फसल को वर्षा से बचाना चाहिए. धान की अलगअलग किस्मों को अलगअलग काट कर इकट्ठा करना उचित होता है. कटाई के बाद धान की फसल को खेत में ज्यादा दिनों तक सूखने के लिए न छोड़ें.

आमतौर पर धान की अगेती किस्में 110-115 दिन पर, मध्यम किस्में 120-130 दिन तक व देर से पकने वाली फसल 130 दिन के बाद काटने योग्य हो जाती हैं.

धान की मड़ाई

डा. राकेश शर्मा के मुताबिक, धान की फसल की कटाई के पश्चात उस की बालियों व दानों का पुआल से अलग करना मड़ाई कहा जाता है. यह काम मजदूरों द्वारा, पशुओं या ट्रैक्टर से चलने वाले यंत्रों के माध्यम से किया जा सकता है.

धान की फसल की कटाई के पश्चात मड़ाई का काम जितना जल्दी हो सके, उतना जल्दी कर लेना उचित होता है. अगर धान की मड़ाई मजदूरों के द्वारा की जाती हो, तो उसे लकड़ी या लोहे के पाइपों पर पटक कर धान की बाली को छुड़ाया जा सकता है. इस विधि से धान मड़ाई करने से चावल के टूटने की संभावना बहुत कम होती है.

इस के अलावा पशुओं के द्वारा भी धान की फसल की मड़ाई की जा सकती है. इन दोनों विधियों से धान मड़ाई करने में ज्यादा मेहनत व मजदूर की आवश्यकता होती है, जबकि धान मड़ाई वाले थ्रैशर से धान की मड़ाई करने में मेहनत व लागत में बहुत कमी आ जाती है.

इस विधि से धान मड़ाई करने में धान से बेकार चीजें अलग हो जाती हैं, जिस से इस की सफाई भी साथसाथ हो जाती है.

धान की मड़ाई के बाद इस की ओसाई कर दें, जिस से धान में मिश्रित भूसा में धूलकण इत्यादि अलग हो जाएं. ओसाई के लिए ओसाई में काम आने वाले पंखे की सहायता ली जाती है.

मड़ाई के बाद धान को सुखाना

डा. राकेश शर्मा के मुताबिक, चूंकि धान की फसल की कटाई 20-22 फीसदी की नमी की अवस्था में की जाती है, परंतु इस नमी की अवस्था में न तो धान को भंडारित किया जा सकता है और न ही इस की कुटाई की जा सकती है. ऐसी स्थिति में चावल टूटने न पाए, धान की नमी को कुटाई योग्य करना अनिवार्य हो जाता है, इसलिए धान को खुली धूप में फर्श, चटाई या तिरपाल पर फैला कर सुखा लेना चाहिए. अब तो धान को सुखाने के लिए कई तरह के यंत्र भी बाजार में उपलब्ध हैं.

धान सुखाते समय यह ध्यान देना चाहिए कि सूरज की रोशनी बहुत तेज न हो, क्योंकि इस से धान के टूटने की समस्या बढ़ जाती है.

भंडारण की विधि

डा. राकेश शर्मा के मुताबिक, किसान धान की मड़ाई के तुरंत बाद उस की कुटाई नहीं करवाते और बहुत से किसान उसे अच्छे बाजार मूल्य के इंतजार में भंडारित कर के रखते हैं.

ऐसे में भंडारित किए गए धान की क्षति न होने पाए, इस की जानकारी किसानों को होना नितांत जरूरी है. अगर किसान अपने धान की फसल का भंडारण करना चाहते हैं, तो उस में नमी की मात्रा 12 फीसदी से ले कर 14 फीसदी के बीच रखनी चाहिए.

भंडारण के दौरान यह सुनिश्चित कर लें कि भंडारित किए गए अनाज को चूहे या कीड़ों के नुकसान से बचाया जा सके, इस के लिए जरूरी प्रबंध पहले ही कर लेना उचित होता है.

धान की फसल के भंडारण के लिए बोरियों या बखार का उपयोग किया जा सकता है. जिस जगह पर धान का भंडारण किया जा रहा है, वहां कोशिश करें कि हवा का आवागमन हो रहा हो और भंडारण स्थल पर नमी न हो.

फसलों की करे कटाई, गहाई व सफाई : कंबाइन हार्वेस्टर

यह एक बड़ा व महंगा बहुपयोगी व उन्नत कृषि उपकरण है, जो खड़ी फसलों जैसे गेहूं, धान, चना, सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी व मूंग की कटाई, कुटाई (दौनी) व दानों की सफाई में काम आता है. इस मशीन का उपयोग करने से एक ओर जहां श्रम लागत घटती है, वहीं समय की भी बचत होती है. इस मशीन के उपयोग से किसान खेती के कामों को आसानी से कर के अपना मुनाफा बढ़ा सकता है.

यह मशीन 2 प्रकार की होती है. एक आटोमैटिक कंबाइन हार्वेस्टर और दूसरी ट्रैक्टर से चलने वाला कंबाइन हार्वेस्टर मशीन.

आटोमैटिक कंबाइन हार्वेस्टर में सभी काम के लिए पूरी मशीनरी फिट रहती है, जो  इंजन व अन्य भागों को चलाती है. इस के चलते फसल की कटाई, व दानों की सफाई का काम आसानी से होता है. वहीं ट्रैक्टर चालित कंबाइन हार्वेस्टर को ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जाता है. यह मशीन ट्रैक्टर के पीटीओ से चलती है. ट्रैक्टर से कंबाइन को चला कर फसल की कटाई की जाती है. यह मशीन फसल को ज्यादा ऊपर से काटती है. फसल काटने के बाद जो फसल अवशेष खेत में खड़ा रह जाता है, बाद में इस के तूड़े से भूसा बनाया जा सकता है या उसे खेत में ही जोत कर खाद बनाई जा सकती है. लेकिन खाद केवल धान जैसी अवशेष से ही बन सकती है, क्योंकि धन की पराली कुछ नरम होती है जिस के गल कर खाद बनने में कम समय लगता है, जबकि अन्य फसलों के साथ ऐसा नहीं है.

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन के उपयोग से किसान प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं और समय रहते फसलों की कटाई कर सकते हैं. कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से किसान खेत में आड़ीतिरछी पड़ी फसल को भी काट सकते हैं. कंबाइन हार्वेस्टर मशीन का उपयोग करने से मजदूरों की समस्या दूर होती है, साथ ही कम समय में ज्यादा काम किया जा सकता है.

जौन डियर डब्ल्यू70 ग्रेन हार्वेस्टर

100 हौर्सपावर 14 फुट की चौड़ाई में फसल कटाई का काम करता है. इस से 4 सिलैंडर है. पूरी तरह आटोमैटिक और अनेक फसल गेहूं, धान, सोयाबीन, मटर, सूरजमुखी, धनियां, सरसों जैसी फसलों में काम आने वाला हार्वेस्टर है.

इस में इंधन टैक की क्षमता 240 लिटर है.

महिंद्रा हार्वेस्टर मास्टर एच-12, 4डब्ल्यूडी

(ट्रैक्टर माइटेढ़ कंबाइन हार्वेस्टर)

यह हार्वेस्टर ट्रैक्टरों की महिंद्रा अर्जुन नोवो सीरीज के लिए परफैक्ट मिलान के तौर पर महिंद्रा द्वारा डिजाइन किया गया है. यह बहुफसलीय हार्वेस्टर है.

यह कम इंधन की खपत तेजी से काम करने वाला हार्वेस्टर है.

करतार कंबाइन हार्वेस्टर

कृषि के कंबाइन हार्वेस्टर के लगभग आधा दर्जन मौडल हैं जो अलगअलग कैपिस्टि के हैं. इन में करतार 76 हौर्सपावर व 101, हौर्सपावर के हार्वेस्टर हैं.

जिस में करतार 4000 मौडल 14 फुट की चौड़ाई में फसल काटता है, करतार 3500 मौडल 7.5 फुट/9.75 फुट आदि चौड़ाई में फसल की कटाई करता है.

इन में हर मौडल की कुछ अलग खूबियां हैं. इस की अधिक जानकारी के लिए आप मोबाइल नंबर 91-80683-41637 पर या उन की वैबसाइट www.kartarcombine.com  पर भी देख सकते हैं.

दशमेश 912 हार्वेस्टर

यह मल्टीक्रौप हार्वेस्टर है. 55 से 75 हौर्सपावर की शक्ति वाले यह हार्वेस्टर 12 फुट की चौड़ाई में फसल काटता है. यह ट्रैक्टर माइटेड हार्वेस्टर है.

इस के अलावा सोनालिका हार्वेस्टर, लैंडफोर्स हार्वेस्टर, कुबौटा हार्वेस्टर, प्रीत आदि अनेक कंपनियों के हार्वेस्टर बाजार में उपलब्ध हैं. किसान अपनी सुविधानुसार इन का लाभ ले सकते हैं.