Fake Fertilizers : नकली खाद, बीज की मार किसान हलकान

Fake Fertilizers : दिनरात मेहनत कर के खेतों में अनाज पैदा करने वाला किसान कभी सरकार की नीतियों से, कभी खादबीज की किल्लत से, तो कभी उपज का वाजिब दाम न मिलने से परेशान रहता है. बड़े पदों पर रहने वाले लोगों से ले कर आम आदमी तक यह नही सोचते कि उन के अच्छा खाने से ले कर पहनने तक में किसानों की भूमिका सब से प्रमुख होती है. अगर किसान खेतो में उत्पादित अनाज व अन्य वस्तुएं बाजार में न बेचे तो कुछ ही दिनों में बड़ेबड़े उद्योगपति और व्यवसायी से ले कर सभी की अनाज के बिना हालत देखते बनेगी, लेकिन इन सब के बावजूद लोग किसानों को ही बेवकूफ बना कर उन का शोषण करते हैं.

खेती के लिए किसानों की सब से बड़ी जरूरत अच्छे बीज और अच्छी क्वालिटी की खाद होती है. क्योंकि जितनी अच्छी वैरायटी का खाद व बीज होगा उत्पादन उतना ही अच्छा मिलेगा. लेकिन खाद और बीज के कालाबाजारी से जुडे व्यवसायी किसानों को लूटने में कोई कोरकसर नहीं छोडते हैं. कभी नकली बीज को अच्छी वैरायटी का साबित कर के ऊंचे दामों पर बेच देते हैं, तो कभी नकली खाद (Fake Fertilizers) व कीटनाशक. इस के बाद जब किसान इन का प्रयोग करता है तो अपेक्षा से कम उत्पादन मिलने पर वह निराश हो जाता है, जिस से उन की माली हालत दिन ब दिन खराब होती जाती है. इस वजह से कभीकभी किसान आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं.

इन दिनों नकली खाद (Fake Fertilizers) , उर्वरक, कीटनाशक और बीजों को ले कर पूरे देश में चर्चा है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा नें राज्य के कई जिलों में खुद ही छापेमारी कर ब्रांडेड कंपनियों के नाम से बनाए जा रहे नकली खाद और उर्वरक कारखानों का भंडाफोड़ किया. श्रीगंगानगर, राजस्थान में नकली खाद बनाने के गोरखधंधे पर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सख्त कार्रवाई की है. श्रीगंगानगर में उन्होंने खुद छापा मार कर नकली खाद फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया था. इस दौरान एक फैक्ट्री वाले ने रेड से बचने के लिए अपने नाम को कट्टे से ढक दिया, लेकिन मंत्री के नेतृत्व में आई टीम ने उन की पोल खोल दी.

इस अभियान में उन्होंने 14 नकली खाद (Fake Fertilizers) कंपनियों को सीज किया, जबकि 10 कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. इस मामले की जांच कर ने पर पता चला है कि ये नकली खाद कंपनियां देश के 16 राज्यों तक माल सप्लाई कर रही थीं. यह कोई छोटा धंधा नहीं, बल्कि एक बड़ा और संगठित रैकेट था. इस के बाद उन्होंने पुरे राजस्थान राज्य में कृषि विभाग नकली खादबीज की फैक्ट्रियों के धरपकड़ का अभियान चलाया.

जहां ज्यादातर छापों में वह खुद शामिल रहे और जांच के दौरान कई जिलों में चल रही नकली खाद उर्वरक (Fake Fertilizers) के कारखानों का भंडाफोड़ किया और उन के खिलाफ उन्होंने एफआईआर दर्ज कर दोषियों को जेल भिजवाया और यह साफ कह दिया कि जो भी दोषी होगा, चाहे वह अफसर हो या कारोबारी, किसी को बख्शा नहीं जाएगा. कार्रवाई लगातार जारी है और जल्द ही और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

कैसे बनती थी नकली खाद

राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा स्थानीय कृषि अधिकारी और किशनगढ़ थाने के प्रभारी भीखाराम काला को ले कर अचानक किशनगढ़ के समीप सिलोरा पंचायत समिति के छोटा उदयपुर कला गांव में नकली खाद (Fake Fertilizers) फैक्ट्री पर जा पहुंचे. वहां फैक्ट्री में मार्बल के बुरादे यानी स्लरी और मिट्टी को मशीनों से बारीक किया जा रहा था. इस के बाद मार्बल बुरादे को महीन मिट्टी में मिलाया जा रहा था. उसे उच्च ताप पर गरम किया जा रहा था. बाद में उस में अलगअलग रंग मिला कर अलगअलग खाद तैयार की जा रही थी.

Fake Fertilizers

मसलन काला रंग मिला कर डीएपी तैयार किया जाता था, सफेद रंग मिला कर एसएसपी, भूरे रंग से पोटाश तैयार किया जा रहा था. राजस्थान कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि नकली खाद (Fake Fertilizers) बनाने की ऐसी तीन दर्जन से भी अधिक फैक्ट्रियां सालों से पूरे राजस्थान में संचालित है. पुलिस का ध्यान इस ओर नहीं गया है. इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच होगी.

लाइसैंस कहीं का और धंधा कहीं ओर

इस नकली खाद (Fake Fertilizers) के कारोबार के खुलासे में यह भी निकल कर आया की राजस्थान और आसपास के इलाकों में चल रही नकली 34 खाद कंपनियों में से ज्यादातर ने दिल्ली और तमिलनाडु से लाइसैंस ले रखा था ताकि, शक न हो और आसानी से नकली खाद तैयार की जा सके.

कई राज्यों तक फैला हुआ है गोरखधंधे का जाल

राजस्थान कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा नें बताया कि पकड़ी गई फैक्ट्रियों में अलगअलग ब्रांड के कट्टे पाए गए, जिन में नकली खाद (Fake Fertilizers) को भर कर ब्रांड नाम से बेचा जाता था. प्रदेश के जिस क्षेत्र में जिस ब्रांड की डिमांड अधिक होती, वहां उस ब्रांड का ठप्पा लगा कर नकली खाद यहां से भेजा जाता था. उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि नकली खाद किन क्षेत्रों में भेजा जा रहा था. बड़ेबड़े प्लांट सालों से यहां पर लगे हुए हैं. अब पूरे मामले की गहराई से जांच होगी.

उन्होंने आगे फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों से भी बातचीत की. इन में ज्यादातर मजदूर बिहार और उत्तर प्रदेश के पाए गए. उन्होंने जायजा लेने के बाद जब अधिकारियों से पूछा कि डीएपी का क्या रेट है तो कृषि अधिकारियों ने बताया कि 1600 से 1800 रुपए में नकली डीएपी बाजार में बेचा जा रहा है.

उत्तर प्रदेश में भी खाद उर्वरक और बीजों को ले कर बड़ी कार्यवाही

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही नें खाद की कालाबाजारी, तय मूल्य से ज्यादा बेचने सहित नकली खादबीज का धंधा करने वालों की धरपकड़ के लिए खुद ही सीतापुर जिले में छापा मारा. जहां उन्होंने कई फर्मों में कमियां पाए जाने पर तुरंत कार्यवाही की. कृषि मंत्री ने बताया कि जैन इंटरप्राइजेज, सीतापुर स्टौक में गड़बड़ी, गलत रजिस्टरिंग, रिटेलर्स को कम मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराना और अन्य उत्पादों की टैगिंग पाई गई. दुकान को तुरंत सील कर कार्रवाई हुई. श्रीबालाजी एग्रो ट्रेडर्स में गड़बड़ी मिलने पर दुकान को सील किया गया.

इस के साथ ही, अन्य दुकानों में एएनवी एग्रो एंड कैमिकल्स, न्यू अय्यूब खाद भंडार, न्यू अंसारी खाद भंडार और तराई बीज भंडार शामिल हैं. इन दुकानों को निरीक्षण के दौरान मौके से भागने और अभिलेख न दिखाने पर सील किया गया. कृषि मंत्री ने बताया कि लखनऊ में कमियों पर सीधी कार्रवाई की गई है. लखनऊ की खाद स्टोरेज फर्म में किसानों को निर्धारित दर 266.50 रुपए प्रति बैग से अधिक दर पर यूरिया बेचने की पुष्टि हुई है. पाल खाद भंडार, कल्याणपुर बिक्री रजिस्टर में किसानों के बारे में दी गई जानकारी अधूरी मिली है. दुकान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इस दौरान उन्होंने जिला कृषि अधिकारी मंजीत कुमार को रद्द कर दिया. इस संबंध में कृषि मंत्री ने खुद सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा की.

Fake Fertilizers

इस मामले के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि खादों की बिक्री केवल पीओएस मशीन के माध्यम से हो और बिक्री किसानों की फसल की जरूरतों के अनुसार ही की जाए. औद्योगिक इकाइयों द्वारा सब्सिडी वाले नीम कोटेड यूरिया का दुरुपयोग न हो, इस के लिए सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा. सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि उर्वरकों के वितरण और बिक्री की नियमित समीक्षा कर सख्त निगरानी रखें. उन्होंने कहा किसी भी तरह की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी.

कृषि मंत्री के इस कार्यवाही के तुरंत बाद मंत्री के निर्देश से संयुक्त निदेशक उर्वरक डा. आशुतोष मिश्र सक्रिय दिखे. उन्होंने सभी जिलों के जिला कृषि अधिकारीयों को निर्देशित किया की खाद उर्वरक के सभी प्रतिष्ठानों की जांच की जाए. इस के बाद प्रदेश के सभी जिलों में अधिकारियों नें ताबड़तोड़ छापे मारे. इस दौरान जांच टीमों को कई तरह की गड़बड़ियां मिली.

संतकबीर नगर जिले में जांच के दौरान उर्वरक की 26 दुकानों की जांच की गई और 10 नमूने लिए गए. वहीं एक दुकान का लाइसैंस रद्द कर 4 दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया. रामपुर जिले में गड़बड़ी मिलने पर खाद की 7 दुकानों के लाइसैंस रद्द किए गए. बहराइच जिले में खाद की 58 दुकानों पर छापे के दौरान एक का लाइसैंस रद्द किया गया. रायबरेली में 11 खाद दुकानदारों को नोटिस जारी कर चार के लाइसैंस रद्द किए गए. इस तरह से प्रदेश के कई जिलों में नकली खाद (Fake Fertilizers) और बीज के कार्यवाही की गई.

नकली खादबीज से किसान परेशान

देश की 70 फीसदी जनसंख्या खेती पर आधारित है और उन की गाढ़ी कमाई और मेहनत नकली खाद और बीज के चलते बेकार चली जाती है. अब किसान देशभर में विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों से मिल कर उन से असली और नकली के फर्क की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, कहीं ऐसा न हो असली खादबीज की जगह वह अपने खेतों में नकली खादबीज का प्रयोग कर डालें और बाद में उन्हें पछताना पड़े.

किसानों ने बताया कि नकली बीजों, खाद उर्वरक और कीटनाशकों के कारण पूरी फसल खराब हो जाती है. किसानों का कहना है कि नकली बीज से केवल हमें आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ता है, लेकिन नकली खाद उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग किए जाने पर यह मिट्टी और पर्यावरण पर सीधा बुरा प्रभाव डालते हैं, जिस से किसानों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है.

देश में अधिकतर किसान छोटे और मझोले जोत के हैं. इसलिए वह खेती में काम आने वाली चीजों को इस भरोसे से उधार ले कर खरीदते हैं कि जब फसल तैयार होगी तो उसे बेच कर उधार चुकता कर देंगे. लेकिन जब नकली उत्पादों के चलते जब फसल नहीं होती, तो उन पर भारी कर्ज और मानसिक तनाव आ जाता है. किसानों ने यह भी बताया कि नकली रसायनों से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है, जिस से अगली फसलों पर भी असर पड़ता है. यह संकट न सिर्फ आम किसानों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि तकनीक की समझ रखने वाले उन्नत किसानों को भी नुकसान पहुंचा रहा है.

ऐसे करें असली व नकली में फर्क

उत्तर प्रदेश के संयुक्त निदेशक उर्वरक डा. आशुतोष मिश्र ने नकली खादबीज से बचने के लिए कहा कि किसान सरकारी गोदामों से खरीददारी कर सकते हैं, जो उन्हें प्राइवेट दुकानों की अपेक्षा सस्ते दर पर या सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जा रहा है. इस के अलावा किसान जहां से भी खादबीज खरीदें उस की रसीद अवश्य प्राप्त करें. इस से खादबीज में किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर खादबीज बेचने वाले दुकानदारों की शिकायत आसानी से की जा सकती है.

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डा. आशुतोष मिश्र ने डीएपी के असलीनकली होने के सवाल पर बताया डीएपी के कुछ दानों को हाथ में ले कर तंबाकू की तरह उस में चूना मिला कर मलने पर यदि उस में से तेज गंध निकले जिसे सूंघना मुश्किल हो जाए तो समझें कि ये डीएपी असली है. डीएपी को पहचानने की एक और सरल विधि है, यदि हम डीएपी के कुछ दाने धीमी आंच पर तवे पर गरम करें और यदि ये दाने फूल जाते हैं, तो समझ लें यही असली डीएपी है. डीएपी की असली पहचान यह है कि इस के कठोर दाने भूरे काले और बादामी रंग के होते हैं और नाखून से आसानी से नहीं टूटते हैं.

यूरिया के मामले में उन्होंने बताया कि यूरिया की असली पहचान है इस के सफेद चमकदार और लगभग समान आकार के कड़े दाने. इस का पानी में पूरी तरह घुल जाना और इस के घोल को छूने पर ठंडा सा महसूस होना ही इस की असली पहचान है. यूरिया को तवे पर गरम करने से इस के दाने पिघल जाते हैं. यदि हम आंच तेज कर दें और इस का कोई अवशेष न बचे तो समझ लें यही असली यूरिया है.

डा. आशुतोष मिश्र ने आगे बताया कि सुपर फास्फेट की असली पहचान है इस के सख्त दाने और इस का भूरा काला बादामी रंग. इस के कुछ दानों को गरम करें यदि ये नहीं फूलते हैं, तो समझ लें यही असली सुपर फास्फेट है ध्यान रखें कि गरम करने पर डीएपी व अन्य कौम्प्लैक्स के दाने फूल जाते हैं, जबकि सुपर फास्फेट के नहीं इस प्रकार इस की मिलावट की पहचान आसानी से की जा सकती है.

उन्होंने आगे पोटाश के असली नकली होने के सवाल पर बताया कि पोटाश की असली पहचान है इस का सफेद कड़ाका इसे नमक और लाल मिर्च जैसा मिश्रण. पोटाश के कुछ दानों को नम करें यदि ये आपस में नही चिपकते हैं, तो समझ लें कि ये असली पोटाश है. पोटाश के पानी में घुलने पर इस का लाल भाग पानी में ऊपर तैरता रहता है.

नकली बीज के मसले पर उन का कहना है कि नकली बीज ऐसे बीज होते हैं, जो देखने में असली और प्रमाणित बीज जैसे ही लगते हैं, लेकिन वास्तव में उन की गुणवत्ता बहुत खराब होती है. इन में अंकुरण दर कम होती है, पौधों की बढ़वार कमजोर होती है और उत्पादन भी अपेक्षित मात्रा में नहीं मिलता. ये बीज भारतीय बीज अधिनियम 1966 के अनुसार, निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते. कुछ मामलों में नकली बीज पुराने या खराब भंडारण वाले भी होते हैं, जिन की अंकुरण क्षमता तकरीबन खत्म हो चुकी होती है. उन्होंने बताया की नकली बीज का सब से बड़ा असर किसानों की आय पर पड़ता है उपज कम हो जाती है. इस से किसानों को बाजार में अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता और उन की सालभर की कमाई पर बुरा असर पड़ता है.

यहां करें शिकायत

उन्होंने कहा कि किसानों को खाद उर्वरक या बीज के नकली होने का जरा भी शक हो तो कृषि महकमें के अधिकारीयों को सूचित करें. जिस से समय रहते आवश्यक कदम उठाया जा सके. उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के अलावा जिला अधिकारी को भी सूचित किया जा सकता है.

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खादबीज पर क्या बोले जिम्मेदार

देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नकली खाद बीजों के कारोबार पर चिंता जातते हुए कहा कि किसान की सब से बड़ी पीड़ा है घटिया बीज और नकली कीटनाशकों से होने वाला नुकसान. जो कोई भी अमानक बीज या कीटनाशक बनाएगा या बेचेगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस दिशा में हम कड़ा कानून बनाएंगे, ऐसे लोगों को हम छोड़ेंगे नहीं.

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मीडिया से कहा कि किसानों को यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरकों की बिक्री निर्धारित खुदरा मूल्य पर ही कराई जाएगी. किसी भी दशा में किसानों को ऊंची कीमत पर उर्वरक बेचने या अन्य उत्पादों की अनिवार्य टैगिंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि किसानों को उर्वरकों की हर एक बिक्री पर रसीद उपलब्ध कराई जाएगी और अगर कोई थोक या फुटकर विक्रेता नियमों का उल्लंघन करता है तो उस के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि अमानक बीज, खाद व कीटनाशक बनाना और बेचना किसानों की आय को दोगुनी करने के उद्देश्य को असफल करने की गहरी साजिश का हिस्सा है. इस में शामिल हर चेहरे को बेनकाब करना जरूरी है ताकि, किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, खाद व कीटनाशक मिल सके.

उन्होंने आगे कहा कि नकली खादबीज के कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. किसान का बेटा हूं. यह बर्दाश्त नहीं कर सकता कि अमानक खादबीज बेचकर किसानों को ठगा जाए. ऐसा करने वालों को स्पष्ट चेतावनी है कि इस काले कारोबार को तुरंत बंद कर दें या नतीजे भुगतने को तैयार रहें.

देश भर में नकली कृषि उत्पादों के तेजी से फैलते नेटवर्क को ले कर राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन (आरकेपीए) ने गहरी चिंता जताई है. एसोसिएशन का कहना है कि यह संकट अब सिर्फ किसानों की आय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और देश की आंतरिक सुरक्षा तक को प्रभावित कर सकता है. इसे “अभूतपूर्व और खतरनाक रूप से व्यवस्थित” बताते हुए एसोसिएशन तुरंत और कठोर कार्रवाई की मांग की है.

आरकेपीए ने बताया कि नकली उर्वरक, कीटनाशक, बीज और कृषि उपकरणों का एक बड़ा और संगठित नेटवर्क देश में सक्रिय है. यह गिरोह नियामक कमजोरियों, ढीले कानूनों और सीजनल डिमांड का फायदा उठा कर किसानों को नकली उत्पाद बेच रहा है.

Fertilizers : नकली और घटिया गुणवत्ता वाले उर्वरकों को जड़ से खत्म करना है

Fertilizers : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर नकली व निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरकों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इस पर तुरंत और सख्त कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं. यह पत्र देश भर में नकली उर्वरकों की बिक्री और सब्सिडी वाले उर्वरकों की कालाबाजारी व जबरन टैगिंग जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से जारी किया गया है.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र में कहा है कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की आय में स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण उर्वरक सही समय पर, सुलभ दरों पर और मानक गुणवत्ता के साथ उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है.

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 (जो कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत आते हैं) के तहत नकली व निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक की बिक्री प्रतिबंधित है.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र लिख कर निम्नलिखित निर्देश राज्यों को जारी किए हैं :

– किसानों को सही स्थान और उन जगहों पर जहां इन की जरुरत है, पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना राज्यों की जिम्मेदारी है. इसलिए राज्य कालाबाजारी, अधिक मूल्य पर बिक्री और सब्सिडी वाले उर्वरकों के डायवर्जन जैसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी व  तुरंत कार्रवाई करें.

– उर्वरक के निर्माण व बिक्री की नियमित निगरानी और सैंपलिंग व परीक्षण के माध्यम से नकली एवं निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों पर सख्त नियंत्रण किया जाए.

– पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनोउर्वरक अथवा जैवउत्तेजक उत्पादों की जबरन टैगिंग को तुरंत रोका जाए.

– दोषियों के विरुद्ध लाइसैंस रद्द, प्राथमिकी पंजीकरण सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और मामलों का प्रभावी अनुसरण कर दंड सुनिश्चित किया जाए.

– राज्यों को फीडबैक व सूचना तंत्र विकसित कर किसानों/किसान समूहों को निगरानी प्रक्रिया में शामिल करने, और किसानों को असली और नकली उत्पादों की पहचान हेतु जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि उपर्युक्त दिशानिर्देशों के अनुसार एक राज्यव्यापी अभियान शुरू  कर नकली और घटिया गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट्स की समस्या को जड़ से समाप्त किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज्य स्तर पर इस कार्य की नियमित निगरानी की जाएगी तो यह किसानों के हित में एक प्रभावी और स्थायी समाधान सिद्ध होगा.

प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को प्रोत्साहन जरूरी

सिंगरौली : मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा है कि उर्वरक की मांग बढ़ने पर डीएपी के स्थान पर एनपीके, एएसपी लिक्विड यूरिया नैनो यूरिया के प्रयोग के लिए किसानों को प्रेरित करें. एनपीके कौम्प्लेक्स के माध्यम से भी खेत में पोटैशियम की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित की जा सकती है. कालाबाजारी, अवैध भंडारण, नकली उर्वरक की संभावना रहती है. पुलिस का सहयोग लेते हुए निरीक्षण और चेकिंग की व्यवस्था को बढ़ाया जाए. कालाबाजारी करने वालों, मिलावट, मिस ब्रांडिंग और नकली उर्वरक खपाने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाए. उर्वरक अवैध परिवहन पर नियंत्रण के लिए एक जिले से दूसरे जिले में उर्वरक मूवमेंट पर सतत निगरानी रखें.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री निवास से सोयाबीन उपार्जन, खाद उपलब्धता और वितरण की वीडियो कौंफ्रेंसिंग में कलक्टर व कमिश्नर से चर्चा कर उक्त निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि खरीफ 2024-25 के लिए प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का प्राइस सपोर्ट स्कीम में मध्य प्रदेश को सोयाबीन उपार्जन की दी गई स्वीकृति के लिए आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश में उपार्जन के समुचित बेहतर प्रबंध करने के निर्देश अधिकारियों को दिए.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि आवश्यकतानुसार डीएपी के स्थान पर एनपीके, लिक्विड नैनो यूरिया के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जाए.

उन्होंने कलक्टरों को निर्देशित किया कि राजस्व अमला जनप्रतिनिधियों के साथ फसलों की क्षति आंकलन सुनिश्चित करें. खाद भंडारण के लिए डबल लौक की आवश्यकता होने पर कृषि उत्पादन आयुक्त से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने अमानक स्तर का खादबीज विक्रय, भंडारण और परिवहन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए. रबी 2024-25 के लिए खरीफ 2024 के अनुसार ही उर्वरक वितरण के लिए पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करें.

उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में रबी 2024-25 के लिए भी पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं. सभी जिला कलक्टर बेहतर तैयारी कर लें, वितरण व्यवस्था में कोई गड़बड़ी न हो, इस के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से समन्वय कर कार्रवाई सुनिश्चित करें.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप प्राकृतिक खेती को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाए. एनपीके और लिक्विड नैनो यूरिया के उपयोग के लिए किसानों को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करें. किसानों द्वारा इन के उपयोग से देश की अन्य राष्ट्रों पर निर्भरता भी कम होगी.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने खरीफ 2024 में एनपीके का उपयोग 45 फीसदी होने पर खुशी जताई, जो कि वर्ष 2023-24 में महज 26 फीसदी था. उन्होंने प्राइस सपोर्ट स्कीम पर सोयाबीन उपार्जन की कार्रवाई संवेदनशीलता से करने को कहा है.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा के अतिरिक्त सोयाबीन का उपार्जन प्रदेश सरकार करेगी. प्रदेश में 25 सितंबर से ई-उपार्जन पोर्टल पर किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. अधिक से अधिक किसानों से पोर्टल पर पंजीयन कराया जाए. आगामी 20 अक्तूबर तक किसानों का पंजीयन होगा. इस के बाद उपार्जन के लिए स्लाट बुकिंग की कार्रवाई 21 दिसंबर तक होगी. किसानों से 25 अक्तूबर से 31 दिसंबर, 2024 तक सोयाबीन का उपार्जन प्रदेश के 1400 केंद्रों पर किया जाएगा.

आवश्यकतानुसार इस में परिवर्तन भी किया जा सकता है. किसानों को भुगतान औनलाइन किया जाएगा. प्रदेश में 7 जिले सिंगरौली, दतिया, भिंड, कटनी, मंडला, बालाघाट, सीधी को छोड़ कर बाकी सभी जगह सोयाबीन का उपार्जन होगा. इन जिलों से प्रस्ताव आने पर सोयाबीन उपार्जन पर विचार किया जाएगा.

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में कुछ स्थानों में भारी वर्षा से फसलों को हानि हुई है. कलक्टर क्षतिग्रस्त फसलों का सर्वे करा कर किसानों को फसल बीमा और अन्य लाभ देना सुनिश्चित करें. सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित उचित मूल्य दुकानों से खाद्यान्न वितरण की सतत निगरानी करें. वितरण में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्यवाही करें. सड़कों से निराश्रित गौवंश को हटाने के लिए भी प्रभावी कार्यवाही करें.

मुख्यमंत्री ने वीडियो कौंफ्रेंसिंग के माध्यम से मंत्रियों, सांसद और विधायकों से संवाद किया. वीडियो कौंफ्रेंसिंग के दौरान कलक्ट्रेट के एनआईसी से कलक्टर चंद्रशेखर शुक्ला, पुलिस अधीक्षक निवेदिता गुप्ता, सीईओ जिला पंचायत गजेंद्र सिंह नागेश, आयुक्त नगर निगम डीके शर्मा, डिप्टी कलक्टर माइकेल तिर्की, उपसंचालक, कृषि, आशीष पांडेय, जिला आपूर्ति अधिकारी पीसी चंद्रवंशी, उपायुक्त सहकारिता पीके मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे.

असली उर्वरक (Fertilizer) की पहचान

आजादी से पहले कैमिकल खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता था या बहुत कम मात्रा में होता था. उस समय कैमिकल उर्वरकों के स्थान पर कार्बनिक और हरी खादों पर निर्भरता ज्यादा थी. आज हालात इस के ठीक उलट हैं. अब कैमिकल खादों पर निर्भरता ज्यादा है और कार्बनिक व हरी खादों पर न के बराबर. इस में कोई शक नहीं कि इस से फसलों की पैदावार बढ़ी है, मगर बदले में जल, जमीन और भोजन सब जहरीला हो गया है.

कैमिकल खादों व उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से समूचे जीवजगत के वजूद पर संकट मंडराने लगा है. एक सर्वे के मुताबिक, देश में 1960-61 में कैमिकल उर्वरकों का इस्तेमाल प्रति हेक्टेयर 2 किग्रा होता था, जो 2008-09 में बढ़ कर 128.6 किलोग्राम हो गया था.

मौजूदा समय में आंकड़ा इस से बहुत ऊपर है, जिस से मांग के बराबर आपूर्ति नहीं हो पाती है. नतीजतन, मिलावटखोर नकली उर्वरक बेच कर अपनी जेब तो भरते हैं, मगर किसानों को आएदिन चपत लगाते रहते हैं.

नकली उर्वरकों के इस्तेमाल से फसलों पर उम्मीद के मुताबिक नतीजा देखने को नहीं मिल पाता है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ जाता है. इस बारे में जब किसान विक्रेता से शिकायत करता है तो विक्रेता पल्ला झाड़ लेता है. ऐसे में जरूरी यह है कि किसान मिलावटी, नकली या असली उर्वरक का भेद आसानी से समझ सकें इसलिए कुछ ऐसे कैमिकल उर्वरकों की जांच के तरीके बताए गए हैं, जिन को अपना कर आप असली या नकली उर्वरक की पहचान कर ठगी के शिकार होने से बच सकते हैं:

यूरिया

* यह सफेद, चमकदार और तकरीबन समान आकार के गोल दाने वाला होता है.

* यह पानी में पूरी तरह से घुल जाता है और घुलने के बाद छूने पर ठंडा प्रतीत होगा.

* यह गरम तवे पर रखने पर जल्दी पिघल जाता है. आंच को तेज करने पर कुछ भी नहीं बचेगा.

डीएपी 

* यह सख्त, दानेदार, भूरा, काला, बादामी रंग लिए हुए, नाखून से तोड़ने पर आसानी से टूट जाता है.

* इस का दाना गरम तवे पर रखने पर फूल जाता है.

* दानों को ले कर तंबाकू की तरह उस में चूना मिला कर रगड़ने पर तेज असहनीय गंध आती है.

पोटाश

* दाने पिसे नमक और लाल मिर्च के मिश्रण के कण जैसा होता है.

* कणों को पानी में घोले जाने पर लाल भाग हमेशा पानी के ऊपर तैरता पाया जाता है.

* कणों को नम कर दिया जाए तो आपस में कभी भी चिपकता नहीं है.

सुपर फास्फेट

सुपर फास्फेट सब से ज्यादा सिंगल सुपर फास्फेट के रूप में बाजार में मिलता है. कई बार यह दानेदार के अलावा चूर्ण के रूप में भी मिल जाता है.

सिंगल सुपर फास्फेट यानी एसएसपी में 16 फीसदी फास्फोरस पाया जाता है. इस दानेदार उर्वरक को अकसर डीएपी व एनपीके में मिलावट के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. इस के असली होने की पहचान इस तरीके से भी कर सकते हैं:

* यह सख्त दानेदार, भूरा, काला बादामी रंग वाला और नाखूनों से आसानी से टूटने वाला उर्वरक है.

* इस उर्वरक को अगर तवे पर गरम किया जाए तो डीएपी की तरह फूलता नहीं है.

जिंक सल्फेट

देखने में जिंक सल्फेट की तरह ही मैग्नीशियम सल्फेट भी होता है. यही वजह है कि अकसर जिंक सल्फेट में मैग्नीशियम सल्फेट की मिलावट कर दी जाती है. इस से असली जिंक सल्फेट को पहचान पाना बहुत ही मुश्किल काम हो जाता है. हालांकि 2 तरीके से जिंक सल्फेट में की गई मिलावट की जांच मुमकिन है:

* जिंक सल्फेट के घोल में अगर कास्टिक का पतला घोल मिला दिया जाए तो सफेद, मटमैला रंग का मांड़ जैसा घोल हो जाता है. इस में गाढ़ा कास्टिक का घोल मिलाने पर अवक्षेप पूरी तरह से घुल जाता है, जबकि जिंक सल्फेट के स्थान पर मैग्नीशियम सल्फेट के घोल को मिलाने पर ऐसा नहीं होता है.

* डीएपी के घोल में अगर जिंक सल्फेट के घोल को मिला दिया जाए तो थक्केदार घना अवशेष हो जाता है, जबकि मैग्नीशियम सल्फेट के घोल को मिलाने पर ऐसा नहीं होता है.

ध्यान देने वाली बातें

* यूरिया, डीएपी, एनपीके, म्यूरेट औफ पोटाश, सिंगल सुपर फास्फेट वगैरह प्रमुख उर्वरकों की बोरी 50 किलोग्राम की होती है. बेहतर होगा कि खरीदते समय वजन जरूर करवा लें, क्योंकि अगर मिलावट की गई होगी तो कम या ज्यादा होने का डर होता है.

* उर्वरकों को खरीदते समय विक्रेता से रसीद जरूर लेनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की मिलावट मालूम होने पर पुख्ता प्रमाण के साथ शिकायत दर्ज कराई जा सके.

* उर्वरकों की खाली बोरी कभी भी किसी विक्रेता को नहीं देनी चाहिए, क्योंकि खाली बोरी मिल जाने पर विक्रेता का काम काफी हद तक आसान हो जाता है.

* नकली या मिलावटी उर्वरकों के पाए जाने पर तत्काल अपने जिला स्तर के कृषि अधिकारियों को लिखित रूप से सूचित करना चाहिए.

उर्वरकों (Fertilizers) के असली व नकली की पहचान है जरुरी

खेती में प्रयोग में लाए जाने वाले कृषि निवेशों में से सब से मंहगी सामग्री रासायनिक उर्वरक है. उर्वरकों के शीर्ष उपयोग की अवधि हेतु खरीफ एवं रबी के पूर्व उर्वरक विनिर्माता फैक्टरियों और विक्रेताओं द्वारा नकली एवं मिलावटी उर्वरक बनाने एवं बाजार में उतारने की कोशिश होती है. इस का सीधा असर किसानों पर पड़ता है.

नकली एवं मिलावटी उर्वरकों की समस्या से निबटने के लिए समयसमय पर विभागीय अभियान चला कर जांचपड़ताल की जाती है, फिर भी यह आवश्यक है कि खरीदारी करते समय किसान उर्वरकों की शुद्धता मोटेतौर पर उसी तरह से परख लें, जैसे बीजों की शुद्धता, बीज को दांतों से दबाने पर कट और किच्च की आवाज से, कपड़े की गुणवत्ता उसे छू कर या मसल कर और दूध की शुद्धता की जांच उसे उंगली से टपका कर लेते हैं.

किसानों के बीच प्रचलित उर्वरकों में से प्रायः डीएपी, जिंक सल्फेट, यूरिया और एमओपी नकली व मिलावटी रूप में बाजार में उतारे जाते हैं. खरीदारी करते समय किसान इस की प्रथमदृष्टया परख सरल विधि से कर सकते हैं और अगर उर्वरक नकली पाया जाए, तो इस की पुष्टि किसान सेवा केंद्रों पर उपलब्ध टेस्टिंग किट से की जा सकती है.

टेस्टिंग किट किसान सेवा केंद्रों पर उपलब्ध होती हैं. ऐसी स्थिति में कानूनी कार्यवाही किए जाने के लिए इस की सूचना जिले के उप कृषि निदेशक (प्रसार) या जिला कृषि अधिकारी एवं कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश को दी जा सकती है.

यूरिया पहचान विधि

यूरिया के असली होने की पहचान की उस के दाने सफेद चमकदार, लगभग समान आकार के होते हैं. इस के दाने पानी में डालने पर पूरी तरह घुल जाते हैं और घोल छूने पर ठंडी अनुभूति. जब यूरिया के दाने को गरम तवे पर रखा जाता है, तो यह पिघल जाता है.

एकचैथाई टेबल स्पून यूरिया में 8 से 10 बूंद सिल्वर नाइट्रेट मिलाने पर अगर यूरिया पूरी तरह घुल जाता है और बिलकुल पारदर्शी गोल प्राप्त होता है, तब यूरिया असली है. यदि सिल्वर नाइट्रेट मिलने पर घोल में दही जैसे थक्के बन जाते हैं, तब यूरिया नकली है.

डीएपी (डाई) पहचान विधि

असली डीएपी की पहचान है कि यह सख्त, दानेदार, भूरा, काला, बादामी रंग और नाखूनों से आसानी से नहीं टूटता है. डीएपी के कुछ दानों को ले कर तंबाकू की तरह उस में चूना मिला कर मलने पर तेज गंध निकलती है, जिसे सूंघना असहनीय हो जाता है. असली डीएपी को तवे पर धीमी आंच में गरम करने पर दाने फूल जाते हैं.

डीएपी के 4 से 5 दाने ले कर और उस में बुझा चूना मिलाने पर अत्यंत तीक्ष्ण गंध आती है. यदि तीक्ष्ण गंध नहीं निकलती है, तब डीएपी नकली हो सकती है

आधा चम्मच पिसा हुआ डीएपी लें. उस के ऊपर 10 मिलीलिटर आसुत जल और एक मिलीलिटर संद्रप्त नाइट्रिक एसिड डालें. यदि डीएपी पूरी तरह घुल जाती है और घोल का रंग पारदर्शी रहता है, तब डीएपी शुद्ध है. अगर डीएपी पूरी तरह नहीं घुलता है और घोल का रंग मटमैला रहता है, तब डीएपी अशुद्ध है.

सुपर फास्फेट पहचान विधि

यह सख्त दानेदार, भूरा काला, बादामी रंगों से युक्त और नाखूनों से आसानी से न टूटने वाला उर्वरक है. यह चूर्ण के रूप में भी उपलब्ध होता है. इस दानेदार उर्वरक की मिलावट बहुधा डीएपी एवं एनपी के मिक्सचर उर्वरकों के साथ की जाने की संभावना बनी रहती है.

परीक्षण

इस दानेदार उर्वरक को यदि गरम किया जाए, तो इस के दाने फूलते नहीं हैं, जबकि डीएपी व अन्य कम्प्लैक्स के दाने फूल जाते हैं. इस प्रकार इस की मिलावट की पहचान आसानी से कर सकते हैं.

जिंक सल्फेट पहचान विधि

जिंक सल्फेट में मैग्नीशियम सल्फेट प्रमुख मिलावटी रसायन हैं. भौतिक रूप में समानता के कारण नकलीअसली की पहचान कठिन होती है. अगर एक फीसदी जिंक सल्फेट के घोल में 10 फीसदी सोडियम हाईड्रौक्साइड का घोल मिलाया जाए, तो यह थक्केदार घना अवक्षेप बन जाता है. मैग्नीशियम सल्फेट के साथ ऐसा नहीं होता.

जिंक सल्फेट के घोल में पतला कास्टिक 10 फीसदी का घोल मिलाने पर सफेद, मटमैला माड़ जैसा अवक्षेप बनता है, जिस में गाढ़ा कास्टिक 40 फीसदी का घोल मिलाने पर अवक्षेप पूरी तरह घुल जाता है. यदि जिंक सल्फेट की जगह पर मैग्नीशियम सल्फेट है, तो अवशेष नहीं घुलेगा.

एमओपी (पोटाश खाद) पहचान विधि

यह सफेद कणाकार, पिसे नमक और लाल मिर्च जैसा मिश्रण होता है. इस के कण नम करने पर आपस में चिपकते नहीं हैं और पानी में घोलने पर खाद का लाल भाग पानी में ऊपर तैरता है.