किसानों की योजनाएं कागजों में नहीं, खेतों और किसानों के खातों में दिखनी चाहिए- श्याम सिंह राणा

“राज्य के आगामी बजट से पहले हरियाणा सरकार ने कृषि क्षेत्र की प्राथमिकताओं को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं. इस बारे में हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने स्पष्ट किया है कि- “सरकार किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी, लेकिन अब फोकस केवल बजट बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी, पारदर्शी और सकारात्मक नतीजों पर रहेगा.”

किसानों की सफलता कागजों पर नहीं, आमदनी में दिखनी चाहिए

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि किसानों की योजनाओं की सफलता कागजी आंकड़ों में नहीं, बल्कि खेतों और किसानों की आमदनी में दिखनी चाहिए.

चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ पिछले वित्तीय वर्ष में बजट उपयोग, चालू योजनाओं की प्रगति और आने वाले वर्ष की जरूरतों की विस्तार से समीक्षा की. अधिकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत हुए खर्च और प्रस्तावित प्रावधानों का का भी ब्यौरा दिया.

जल संरक्षण मुख्य मुद्दा: मेरा पानी मेरी विरासत

कृषि मंत्री ने कुछ योजनाओं के क्रियान्वयन पर असंतोष जताते हुए कमियों को दूर करने के निर्देश दिए. बैठक का प्रमुख एजेंडा जल संरक्षण रहा.

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि हरियाणा में लगातार गिरता भूजल स्तर गंभीर चेतावनी है. उन्होंने धान जैसी अधिक पानी लेने वाली फसलों के विकल्प अपनाने पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए.

पराली प्रबंधन को लेकर भी मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि किसानों की सुविधा और जिम्मेदारी से भी जुड़ा है.

मिट्टी जांच सिर्फ औपचारिकता नहीं, सार्थकता जरूरी

खेती से अच्छी पैदा लेने के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड योजना की समीक्षा करते हुए श्याम सिंह राणा ने कहा कि मिट्टी जांच सिर्फ औपचारिकता न बने, बल्कि इसके लिए किसानों के लिए सार्थक नतीजे दिखने चाहिए. खेत में बिजाई से लेकर कटाई तक किसानों की खेती के अच्छे परिणाम हों तथा फसल से अच्छा उत्पादन मिलना चाहिए. समय पर किसानों को वैज्ञानिकों की सलाह मिलनी चाहिए, ताकि उर्वरकों का संतुलित उपयोग हो और अच्छी पैदावार भी मिल सके.

ऑर्गेनिक खेती और आत्मनिर्भर खेती

कृषि मंत्री ने कहा कि ऑर्गेनिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को भविष्य की ‘जरूरत’ बताते हुए इस दिशा में व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रोत्साहन देने के निर्देश दिए. कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाना है. इसके लिए कृषि विभाग और किसानों के बीच तालमेल जरूरी है, जिसके सार्थक नतीजे मिलेंगे.

 

Rajasthan Guava Farming: अमरूद महोत्सव-2026 – 150 करोड़ रुपए की लागत से अमरूद प्रोसेसिंग प्लांट लगेगा

Rajasthan Guava Farming: राजस्थान के सवाई माधोपुर में बड़े पैमाने पर अमरूद की खेती होने के बाद भी यहां के यहां को किसानों को वांछित लाभ नहीं मिल पाता, लेकिन अब क्षेत्र में अमरूद प्रोसेसिंग प्लांट लगने से अमरूद उगाने वाले किसानों की जिंदगी में बहार आएगी.

जयपुर. सवाई माधोपुर का अमरूद आने वाले दिनों में क्षेत्र के किसानों की जिंदगी में बेहतरी लाएगा. राज्य सरकार द्वारा जिले में अमरूद का प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाएगा, जिससे देश-विदेश में इस फल और इससे बने उत्पादों की मांग बढ़ेगी.

पहली बार हुआ अमरूद महोत्सव

देश में पहली बार आयोजित अमरूद महोत्सव इस दिशा में प्रयासों का पहला कदम है. इसके सुखद परिणाम जल्द ही दिखने लगेंगे. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्य के कृषि, उद्यानिकी, ग्रामीण विकास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने 18 जनवरी को अमरूद महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में यह बात कही.

लोकसभा अध्यक्ष सवाई माधोपुर के 263वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित अमरूद महोत्सव एवं कृषि तकनीकी मेला-2026 के मुख्य अतिथि थे.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही है. इन्ही प्रयासों की कड़ी में सवाई माधोपुर में भारत में पहली बार अमरूद महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. इसमें देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसानों, कृषि उत्पाद व्यापारियों और कृषि यंत्र एवं तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों को साझा मंच उपलब्ध कराया गया है, ताकि वे अपने अनुभवों को साझा कर उन्नत कृषि को अपना सकें.

अमरूद सस्ता लेकिन स्वास्थ्यवर्धक, महोत्सव से इसकी जानकारी बढ़ेगी

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि बेशक अमरूद एक सस्ता फल है, लेकिन बहुत अधिक स्वास्थ्यवर्धक है. अमरूद महोत्सव जैसे आयोजन के जरिए लोगों को इस फल के स्वास्थ्य से जुड़े लाभों के बारे में जानकारी मिलेगी. इससे बनने वाले अचार, जूस, पल्प, मिठाई आदि भी इस मेले में प्रदर्शित किए गए हैं.

उन्होंने आगे कहा कि यहां अमरूद के लाभ, इसकी खेती की नई तकनीक और उन्नत किस्मों तथा प्रसंस्करण की विधियों की जानकारी का आदान-प्रदान हो रहा है. उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री ने महोत्सव के दौरान सवाई माधोपुर में अमरूद का प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की घोषणा की है. जब किसी कृषि उत्पाद का संवर्धन होता है, तभी किसान की वास्तविक आय बढ़ती है. इस प्रकार यह आयोजन क्षेत्र के अमरूद के किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने में महत्त्वपूर्ण साबित होगा.

अमरूद की प्रोसेसिंग से किसानों की बढ़ेगी कमाई

सवाई माधोपुर की धरती पर 150 करोड़ रुपए की लागत से अमरूद का प्रोसेसिंग प्लांट लगने से किसानों को अतिरिक्त मुनाफा होगा. इस समय राजस्थान में कुल 14 हजार हेक्टेयर अमरूद के बगीचों में से 11 हजार हेक्टेयर अकेले इस जिले में हैं. उन्होंने कहा कि सवाई माधोपुर का अमरूद यहीं पर खपाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा की सरकार की है.

डॉ. मीणा ने कहा कि राजस्थान के अमरूद के किसानों की इस फल से आमदनी सालाना करीब 600-700 करोड़ रुपए है और अब किसानों की आय बढ़ाने की मंशा के अनुरूप हमारा लक्ष्य अमरूद से आमदनी को 1,500-1,600 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष करना है. सवाई माधोपुर में किसानों को अपना फल बेचने के लिए दिल्ली, बड़ौदा आदि जगहों पर नहीं जाना पड़ेगा. प्रोसेसिंग प्लांट लगने से आस-पास के जिलों के साथ ही पड़ोसी प्रदेशों के अमरूद के किसानों को भी लाभ होगा.

600 करोड़ रुपए की लागत से होने अनेक विकास कार्य

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में सवाई माधोपुर में 600 करोड़ रुपए की लागत के विकास कार्य करवाएगी. उन्होंने कहा कि इस वर्ष मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों का काफी नुकसान हुआ. इससे बचाव के लिए सूरवाल बांध के पानी को बनास नदी में छोड़ने के लिए 110 करोड़ रुपए की लागत से एक चैनल बनाया जाएगा. इससे जिले में सिंचाई के लिए भी अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सकेगा.

कृषि तकनीक और योजनाओं का लाभ उठाएं किसान

डॉ. मीणा ने अमरूद महोत्सव में आए किसानों से कहा कि किसान कृषि यंत्रों, बागबानी, उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों, वैज्ञानिकों आदि के साथ संवाद करें और महोत्सव में लगे लगभग 250 स्टॉल्स को देखकर एक-दूसरे से उन्नत कृषि की तकनीकी और किस्मों की जानकारी लें. राज्य तथा केंद्र सरकार की कृषि एवं पशुपालन से जुड़ी योजनाओं, विशेषकर फसल बीमा और मंगला पशु बीमा योजना का लाभ लेने का भी सुझाव दिया. इसके अलावा केंद्र सरकार की ‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ योजना के का भी लाभ उठाएं.

इसके अलावा सिंचाई की अनेक योजनाओं के तहत सिंचाई क्षेत्र बढ़ेगा. सवाई माधोपुर-करौली में सिंचित क्षेत्र बढ़कर 1.60 लाख हैक्टेयर हो जाएगा. Rajasthan Agriculture Development

Agricultural Innovation : जमीनी कृषि नवाचार का अनोखा मौडल

Agricultural Innovation : 5 अगस्त, 2025 को ‘भारत निर्माण यात्रा ‘ के अंतर्गत देश के 11 अनेक राज्यों से आए 25 उच्च शिक्षित युवाओं ने ‘मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सैंटर,’ चिकलपुटी (कोंडागांव) का दौरा किया.

यह यात्रा उन उभरते प्रोफैशनलों के लिए है, जो इंजीनियरिंग, स्थापत्य कला, पत्रकारिता, फिल्म निर्माण, सामाजिक विज्ञान और प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं और अब देश के जमीनी परिवर्तन में सहभागी बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

प्राकृतिक ग्रीनहाउस एक मजबूत, स्वदेशी विकल्प

इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा प्राकृतिक ग्रीनहाउस मौडल, जिसे मां दंतेश्वरी हर्बल फार्मस और रिसर्च सैंटर ने पौलीहाउस के महंगे और प्लास्टिक आधारित विकल्प के स्थान पर विकसित किया है. यह नवाचार प्लास्टिक के 40 लाख रुपए की लागत में तैयार होने वाले एक एकड़ के पौलीहाउस की तुलना में मात्र 2 लाख रुपए  प्रति एकड़ की लागत से तैयार होता है और पारिस्थितिकीय संतुलन, कम जल उपयोग और दीर्घकालिक टिकाऊ खेती की दृष्टि से उत्कृष्ट माना जा रहा है.

इस यात्रा दल का नेतृत्व कर रहे अनुराग ने उन्हें आस्ट्रेलियन टीक (MDAT-16) के साथ अंतरवर्तीय काली मिर्च की जैविक खेती, हल्दी, इंसुलिन प्लांट और टीक वृक्षों के माध्यम से होने वाली प्राकृतिक नाइट्रोजन स्थिरीकरण प्रक्रिया से अवगत कराया.

ईथनो मैडिको फारेस्ट और 340 दुर्लभ औषधीय प्रजातियों का संरक्षण

इस फार्म के निदेशक अनुराग त्रिपाठी और एमडी बोटैनिकल्स की निदेशक अपूर्वा त्रिपाठी ने सभी प्रतिभागियों को फार्म के भीतर विकसित “मैडिको फारेस्ट” का अवलोकन कराया. जहां 22 दुर्लभ, विलुप्तप्राय औषधीय वनस्पतियों का उन के प्राकृतिक रहवास में संरक्षण और संवर्धन कर उन के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है.

इस के अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि यहां 340 से अधिक औषधीय व सुगंधित पौधों की प्रजातियों की खेती की जाती है, जिस से बस्तर के सैकड़ों आदिवासी परिवारों को सतत आजीविका प्राप्त हो रही है. यह फार्म परंपरागत ज्ञान, जैविक खेती, विज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीताजागता संगम बन चुका है.

महिला किसानों की खास भूमिका

इस अवसर पर यात्रियों ने फार्म से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों की प्रमुख जसमती नेताम से बातचीत की, जिन्होंने महिला किसानों की भूमिका और स्थानीय हर्बल अर्थव्यवस्था, हर्बल इकौनोमी  में उन के योगदान की विस्तार से जानकारी दी. साथ ही, बस्तर के स्थानीय आदिवासी किसान प्रतिनिधियों कृष्णा नेताम, शंकर नाग, समली बाई, बिलची बाई आदि से हुई बातचीत ने युवाओं को जमीनी नवाचार, परंपरागत खेती और स्थानीय नेतृत्व की वास्तविकताओं से परिचित कराया.

दिन भर की यह यात्रा पारंपरिक सादे बस्तरिया भोजन के साथ संपन हुई. जो स्वयं खेतों के मध्य प्रकृति की गोद में दोना पत्तल पर परोसा गया. इस ने यात्रा के अनुभव को न केवल जानकारीपूर्ण बल्कि, आत्मिक रूप से भी समृद्ध किया. इस संपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में फार्म की समर्पित टीम शिप्रा, केविन, ऋषिराज, बलई और माधुरी का योगदान सराहनीय रहा.

एक यात्रा, जो आशा और नवाचार का सेतु बनी

भारत निर्माण यात्रा के आयोजनकर्ताओं प्रियांक पटेल, आलोक साहू, तुपेश चंद्राकर, रचना एवं आशीष को मां दंतेश्वरी हर्बल ग्रुप हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करता है, जिन के प्रयासों से देश के युवा नवचिंतकों को बस्तर की धरती से जोड़ने और ‘स्वदेशी नवाचार’ का प्रत्यक्ष अनुभव कराने का यह अवसर संभव हुआ. यह यात्रा न केवल एक शैक्षणिक खोज थी, बल्कि यह भविष्य के भारत निर्माण की नींव रखने वाले विचारों, सिद्धांतों और लोगों के साथ सीधा संवाद भी सिद्ध हुई.

मत्स्यपालन क्षेत्र में हैं रोजगार की अपार संभावनाएं: राजीव रंजन सिंह

गुवाहाटी : मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्यपालन विभाग ने असम के गुवाहाटी में ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों की बैठक 2025’ का आयोजन किया. इस की अध्यक्षता मत्स्यपालन, पशुपालन, डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने की.

पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत वाली प्रमुख परियोजनाओं की शुरुआत की, जिस के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में आत्मनिर्भर मत्स्यपालन क्षेत्र बनाने की मंशा जाहिर की.  इन परियोजनाओं से मत्स्यपालन क्षेत्र में लगभग 4,530 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मत्स्यपालन लाभार्थियों को राष्ट्रीय मातिस्यकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) पंजीकरण प्रमाणपत्र, केसीसी कार्ड, सर्वश्रेष्ठ एफएफपीओ और मत्स्यपालन स्टार्टअप के लिए पुरस्कार सहित प्रमाणपत्र भी  दिए. साथ ही, क्षेत्रीय विकास की गति को जारी रखने और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग ने सिक्किम राज्य में जैविक मत्स्यपालन और जलीय कृषि के विकास के लिए सिक्किम के सोरेंग जिले में जैविक मत्स्यपालन क्लस्टर को अधिसूचित किया.

केंद्रीय मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मत्स्यपालन क्षेत्र की अपार संभावनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि प्रजातियों के विविधीकरण, मछली उत्पादन में 20-25 फीसदी की वृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने व रोजगार सृजन के लिए उत्पादन खपत के अंतर को कम करने की जरूरत है.

उन्होंने राज्यों को क्षेत्र विशेष की कमियों को दूर करने के लिए राज्य केंद्रित योजनाएं बनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया. केंद्र सरकार की  प्रमुख पहलों में मत्स्यपालन और अवसंरचना विकास कोष का लाभ उठाना, एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्रों के जरीए नवाचार को बढ़ावा देना, असंगठित क्षेत्र को औपचारिक बनाना, ब्रूड बैंक विकसित करना और केंद्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान और केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान में प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण देना शामिल है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पंचायती राज, उपराज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने जोर दे कर कहा कि किसानों की आय को दोगुना करना केवल कृषि को संबंधित क्षेत्रों, विशेष रूप से मत्स्यपालन के साथ एकीकृत कर के ही संभव है.

उन्होंने आगे कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना हमारी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक  है, जिस में भूमि और संसाधन सीमाओं को दूर करने के लिए बायोफ्लोक और रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम जैसी नई जलीय कृषि पद्धतियों को अपनाने पर हमें जोर देना है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और अल्पसंख्यक कार्य, उपराज्य मंत्री जौर्ज कुरियन ने पूर्वोत्तर क्षेत्र और केरल में एकीकृत मछलीपालन की पारंपरिक प्रथाओं का जिक्र किया, जिस में टैपिओकासहमछलीपालन और सूअरसहमछलीपालन शामिल है, जिन्हें बेहतर दक्षता के लिए आधुनिक तकनीकों के साथ पुनर्जीवित किया गया है.

राज्य मंत्री जौर्ज कुरियन ने मछली उत्पादन को बढ़ाने और क्षेत्र के मत्स्यपालन के क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा देने के लिए नई तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया.

इस सत्र में एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी डा. बिजय कुमार बेहरा द्वारा ‘पूर्वोत्तर राज्यों में मत्स्यपालन विकास के लिए पर्यावरणीय और पारिस्थितिक चुनौतियों’ और केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, गुवाहाटी के प्रधान वैज्ञानिक डा. बीके भट्टाचार्य द्वारा ‘पूर्वोत्तर राज्यों में खुले जल मत्स्यपालन संसाधनों का विकास’ पर व्यावहारिक चर्चाएं भी शामिल थीं, जिस ने क्षेत्र में इस सैक्टर के भविष्य पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किए.

इस सम्मलेन के अवसर पर असम सरकार के मत्स्यपालन मंत्री कृष्णेंदु पौल ने भारतीय मत्स्यपालन क्षेत्र में असम के महत्वपूर्ण योगदान पर चर्चा करते हुए बताया कि असम ने 4.75 लाख मीट्रिक टन का उल्लेखनीय मछली उत्पादन और लगभग 20,000 मीट्रिक टन का निर्यात किया, जिस से मछली किसानों और मछुआरों को काफी फायदा हुआ है.

उन्होंने आगे कहा कि राज्य की 90 फीसदी से अधिक आबादी मछली का सेवन करती है, इसलिए मत्स्यपालन असम की अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्थान रखता है. पहाड़ियों में उत्पादन, उत्पादकता और जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए पीएमएमएसवाई के तहत परियोजनाओं की पहचान की गई है, जिस का उद्देश्य संसाधनों का कायाकल्प और क्षेत्रीय विकास है.

इस के अलावा जापान के जेआईसीए द्वारा समर्थित असम मत्स्य विकास और ग्रामीण आजीविका परियोजना, समग्र जलीय कृषि विकास पर ध्यान केंद्रित करती है और यह क्षेत्र के लिए स्थायी आजीविका पैदा कर रही है और जमीनी स्तर पर अच्छी तरह से प्रगति कर रही है.

अरुणाचल प्रदेश सरकार के मत्स्यपालन, कृषि, बागबानी, एएचवीडीडी मंत्री गेब्रियल डेनवांग वांगसू ने मत्स्यपालन विकास में राज्य की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया और पीएमएमएसवाई के तहत छोटे और शिल्पकार किसानों को समर्थन देने पर जोर दिया.

मंत्री गेब्रियल डेनवांग वांगसू ने अरुणाचल प्रदेश में एक समर्पित शीत जल मत्स्यपालन संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव रखा और बीज उत्पादन के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए एकमुश्त अनुदान की वकालत की. खुले पानी में मत्स्यपालन और टिकाऊ तौरतरीकों को अपनाने के अवसरों का जिक्र करते हुए उन्होंने हिमालयी राज्यों की अनूठी ताकतों को संबोधित करने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई योजना का भी आह्वान किया.

मिजोरम सरकार के मत्स्यपालन मंत्री पु. ललथनसांगा ने राज्य में मत्स्यपालन विकास में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मंजूरी और राशि जारी करने में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया. पीएमएमएसवाई के तहत तालाबों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प को शामिल करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया, क्योंकि ये गतिविधियां मिजोरम के मत्स्यपालन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं.

इस के अलावा कम उत्पादकता का समाधान निकालने, गुणवत्ता वाले बीज एवं चारे की उपलब्धता में सुधार करना और मछली किसानों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने आदि की पहचान उन प्रमुख क्षेत्रों के रूप में की गई, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है.

मणिपुर सरकार के मत्स्यपालन, समाज कल्याण, कौशल, श्रम, रोजगार और उद्यमिता मंत्री एच. डिंगो सिंह ने राज्य में मत्स्यपालन और जलीय कृषि क्षेत्र पर पीएमएमएसवाई की सफलता को स्वीकार किया. हैचरी, बायोफ्लोक सिस्टम, तालाब, केग कल्चर की स्थापना, सजावटी मछलीपालन, मछली कियोस्क, मूल्यवर्धित उद्यम, रोग निदान सुविधाएं और कोल्ड स्टोरेज इकाइयों की स्थापना से मणिपुर में सामूहिक रूप से बुनियादी ढांचे और अवसरों में बढ़ोतरी हुई है.

त्रिपुरा सरकार के मत्स्यपालन मंत्री सुधांशु दास ने बताया कि राज्य में मछली उत्पादन की क्षमता 2 लाख है, जिस में 38,594 हेक्टेयर क्षेत्र मछलीपालन के लिए है. वर्तमान में 85,000 मीट्रिक टन उत्पादन की तुलना में मांग 117,000 मीट्रिक टन है, जिस की कमी पश्चिम बंगाल, असम और आंध्र प्रदेश से आयात कर के पूरी की जाती है.

मंत्री सुधांशु दास ने बताया कि त्रिपुरा में 98 फीसदी आबादी मछली का सेवन करती है. उन्होंने बायोफ्लोक और मोतीपालन से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की, जिस में इस क्षेत्र की मौसमी निर्भरता को एक प्रमुख कारण बताया.

सिक्किम सरकार के कृषि, बागबानी, पशुपालन व पशु चिकित्सा सेवाएं, मंत्री पूरन कुमार गुरुंग ने पीएमएमएसवाई से राज्य को होने वाले महत्वपूर्ण लाभों पर प्रकाश डाला, जिस में ट्राउट रेसवे हैचरी, जलीय कृषि प्रणाली और सजावटी मछलीपालन जैसी गतिविधियां शामिल हैं.

उन्होंने रेसवे और सजावटी मछली इकाइयों के निर्माण जैसे लंबित प्रस्तावों के लिए समर्थन का अनुरोध किया और मत्स्यपालन प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की मांग की. सिक्किम की जैविक स्थिति पर जोर देते हुए उन्होंने अतिरिक्त समर्थन का आह्वान किया और राज्य के मत्स्य विकास के लिए आईसीएआर संस्थानों के महत्व पर जोर दिया.

नागालैंड सरकार के मत्स्यपालन और जलीय संसाधन मंत्री ए. पंगजंग जमीर ने राज्य के मत्स्य संसाधनों, खासकर नए तालाबों और टैंकों के विकास की महत्वपूर्ण संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने और मछली किसानों की आय को बढ़ाने के लिए एक प्रमुख रणनीति के रूप में एकीकृत मछलीपालन की शुरुआत पर जोर दिया. इस क्षेत्र की इकोटूरिज्म की आशाजनक संभावनाओं की भी पहचान की गई और पहाड़ी क्षेत्रों में मछली परिवहन में सुधार के अवसरों को भविष्य के विकास के क्षेत्र के रूप में देखा गया है.

मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में सचिव डा. अभिलक्ष लिखी ने अपने मुख्य भाषण में पीएमएमएसवाई के तहत 1,700 करोड़ सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र को आवंटित की गई. साथ ही, 2,000 करोड़ रुपए किनकिन क्षेत्रों को दिए जाएंगे, इस पर भी प्रकाश डाला.

उन्होंने 3 प्रमुख क्षेत्रों पर ज्यादा जोर दिया, जिन में डिजिटलीकरण के माध्यम से मत्स्यपालन को औपचारिक बनाना, राज्य के अधिकारियों से इसे प्राथमिकता देना, ब्याज अनुदान और ऋण गारंटी जैसे वित्तीय साधनों के साथ मत्स्यपालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि को बढ़ावा देना और एफएफपीओ और स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एकीकृत खेती को आगे बढ़ाना शामिल है. उन्होंने युवा स्टार्टअप का समर्थन करने और मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अंतराल को दूर करने का भी आह्वान किया, जिस का लक्ष्य 12 लाख टन है.

मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार में संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने भारतीय मत्स्यपालन क्षेत्र की उपलब्धियों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस में उत्पादन, उत्पादकता, आय और निर्यात जैसे प्रमुख पहलुओं पर जोर दिया गया.

इस रिपोर्ट में पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रचुर संसाधनों पर भी ध्यान दिया गया. साथ ही, रिपोर्ट में पूर्वोत्तर क्षेत्र में मौजूदा चुनौतियों और कमियों का भी जिक्र किया गया. भविष्य में इस के विकास के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण और फोकस क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई.

 

फार्म एन फूड अवार्ड ने किसानों का बढ़ाया हौसला

फार्म एन फूड पत्रिका देश के किसानों को न केवल खेतीकिसानी से जुड़ी जानकारी मुहैया कराती है, बल्कि आम बोलचाल की भाषा में यह पत्रिका खेतीबारी की नई तकनीकी, बागबानी, पशुपालन, कुक्कुटपालन, मत्स्यपालन, डेरी व डेरी उत्पाद, फूड प्रोसैसिंग, खेती वगैरह से जुड़ी मशीनों सहित खेत से बाजार सहित ग्रामीण विकास और किसानों की सफलता की कहानियों और अनुभवों को अन्नदाता किसानों तक अपने लेखों और समाचारों के जरीए पहुंचाने का काम करती रही है.

यही वजह है कि इस पत्रिका का प्रसार देश में तेजी से बढ़ रहा है और खेती में रुचि रखने वाले पाठकों की तादाद में भी तेजी से इजाफा हो रहा है. पिछले 2 सालों से जब देश और दुनिया कोरोना के कहर से जूझ रही थी, उस दशा में भी ‘फार्म एन फूड’ ने किसानों का साथ नहीं छोड़ा है, क्योंकि यह पत्रिका किसानों को प्रिंट और डिजिटल दोनों ही में खेतीबारी से जुड़ी तकनीकी जानकारियां देने का काम कर रही है. इतना ही नहीं, यह पत्रिका न केवल लेखों के जरीए किसानों की मददगार बनी हुई है, बल्कि समयसमय पर उन का सम्मान कर के किसानों के प्रयासों और अनुभवों को लोगों की नजर में लाने का काम करती रही है. इसी क्रम में किसानों के सम्मान के लिए पिछले कई सालों से फार्म एन फूड अवार्ड का आयोजन देश भर के अनेक राज्यों में होता रहा है.

साल 2021 में यह आयोजन मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट में राज्य स्तरीय फार्म एन फूड एग्री अवार्ड के नाम से किया गया, जिस के आयोजन में जल योद्धा के नाम से मशहूर उमाशंकर पांडेय ने मुख्य सहयोगी की भूमिका निभाई जिन्हें २६ जनवरी २०२३ को भारत सरकार ने ‘पदम श्री सम्मान’ से भी नवाजा है .

15 दिसंबर, 2021 को मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित चित्रकूट के कामदगिरी मुख्य द्वार स्थित सभागार में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश से आए तकरीबन 100 किसानों का जमावड़ा गवाह बना और खेती में नवाचार और तकनीकी के जरीए बदलाव लाने वाले किसानों को सम्मानित किया गया. इस मौके पर मुख्य अतिथि मदन दास ने कहा कि पानी और शुद्ध पर्यावरण जीवन की मूलभूत आवश्यकता है.

आज अधिकांश पानी प्रदूषित हो गया है. पर्यावरण अशुद्ध हो गया है. उन्होंने यह भी कहा कि किसान अन्नदाता है, स्वराज्य का मुखिया है. हमें किसानों के लिए, उन की आवश्यकताओं के लिए तैयार रहना चाहिए. मैं दिल्ली प्रैस को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने चित्रकूट में राज्य स्तरीय पुरस्कार दे कर किसानों को सम्मानित किया है. किसानों का सम्मान करना गौरव की बात है.

महोबा नगरपालिका के चेयरमैन, प्रतिनिधि सौरभ तिवारी ने कहा कि किसान राजाओं का राजा है. जय जवान जय किसान ही असली भारत है. वहीं युवा किसान नेता गणेश विश्व ने कहा कि भारत की खुशहाली का रास्ता खेत और खलिहान से हो कर गुजरता है. जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के जल योद्धा सम्मान से सम्मानित किसान पैरोकार उमाशंकर पांडेय ने कहा कि धरती पर हर किसी को सीना तान कर चलने का अधिकार है.वह किसान है. धरती से धनधान्य पैदा करने वाले किसान को ही धरतीपुत्र कहा गया है. किसानों को हीनभावना त्याग कर अपने पूर्वजों की भांति राष्ट्र और समाज के लिए सदैव नवाचार करते रहना चाहिए.

किसान अरविंद ने कहा कि किसान पलायन को रोकना होगा. वहीं किसान कल्लू यादव ने कहा कि सरकार और समाज को किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए, ताकि अच्छे बीज मिलें, समय पर पानी मिले और बाजार का सही भाव मिले.

खेतीबारी और जड़ीबूटी के जानकार ओपी मिश्र ने कहा कि आज जब किसानों के लिए खेतीबारी से जुड़े साहित्य का अभाव हो गया है, ऐसे में फार्म एन फूड पत्रिका द्वारा आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग कर किसानों के लिए लेखों के जरीए जानकारियों का खजाना खोल दिया है.

उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फार्म एन फूड अवार्ड पा कर यह पता चला कि अगर किसान उन्नत तकनीकी का उपयोग करे तो वह कभी भी घाटे में नहीं रहेगा. उन्होंने इस तरह के आयोजन को बेहद सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से किसानों का मनोबल बढ़ता है. बस्ती जिले से आए प्रगतिशील किसान राममूर्ति मिश्र ने कहा कि वे पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से दिल्ली प्रैस की पत्रिकाओं के नियमित पाठक रहे हैं. दिल्ली प्रैस ने देश के हर तबके को ध्यान में रख कर पत्रिकाएं निकाली हैं.

उस ने समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है. उन्होंने कहा कि वे साल 2009 से फार्म एन फूड पत्रिका के नियमित पाठक हैं. इस पत्रिका में जितने सारगर्भित ढंग से किसानों के लिए जानकारियां दी जाती हैं, वह खेतीबारी से जुड़ी किसी अन्य पत्रिका में आज तक पढ़ने को नहीं मिलीं. किसान विजेंद्र बहादुर पाल ने कहा कि किसान तभी प्रगति कर सकता है, जब वह आधुनिक तकनीक और उन्नत कृषि प्रणाली का उपयोग करे. इस के लिए सरकार भी तमाम योजनाएं संचालित कर रही है. किसान इन योजनाओं का लाभ ले कर घाटे की खेती से उबर सकते हैं.

सेना के रिटायर्ड व प्रगतिशील किसान अमित विक्रम त्रिपाठी ने दिल्ली प्रैस की पत्रिका फार्म एन फूड के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि मीडिया द्वारा किसानों के लिए इतने बड़े स्तर पर आयोजन फार्म एन फूड के किसानों के विकास के समर्पण की प्रतिबद्धता प्रदर्शित करता है. सम्मानित हुए कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र, थरियांव, फतेहपुर के वैज्ञानिक डा. जितेंद्र सिंह एवं डा. साधना वैश को कृषि क्षेत्र में किए गए उपलब्धिपूर्ण कामों के लिए राज्य स्तरीय फार्म एन फूड एग्री अवार्ड से सम्मानित किया गया. फतेहपुर के किसानों के प्रोत्साहन के लिए प्रदान किया गया.

वैज्ञानिक डा. जितेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में किसानों के बीच उपलब्धिपूर्ण कामों के साथ पहचान बनाने और बुंदेलखंड में कृषि विकास के स्थायीकरण की मुहिम पर साल 2005 से 2012 तक लगातार किसानों के साथ काम करने व 8 तकनीकी मौडल, जो किसानों को आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाने का मौडल है, को गांव व किसानों के बीच स्थापित करने के लिए यह अवार्ड दिया गया.

उन्होंने बताया कि मौडल गांव की सफलता की कहानी को आईसीएआर की वैबसाइट पर भी देखा जा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि इस अवार्ड से पूर्व भी खेतीबारी के लिए किए जा रहे कामों के लिए उन्हें बुंदेलखंड गौरव अवार्ड 2018 व आयुक्त चित्रकूट धाम मंडल, बांदा द्वारा प्रशस्तिपत्र प्रदान किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि जल योद्धा उमाशंकर पांडेय व प्रगतिशील किसान, जिन्होंने गांव और खेत में लाभकारी खेती के मौडल स्थापित किए हैं, उन के कामों के चलते यह अवार्ड मिला. गृह विज्ञान की वैज्ञानिक डा. साधना वैश को महिला सशक्तीकरण, पोषण सुरक्षा और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे कामों के लिए फार्म एन फूड एग्री अवार्ड दे कर सम्मानित किया गया.

इस मौके पर उन्होंने सभी किसानों के साथ ही फार्म एन फूड और दिल्ली प्रैस समूह का आभार व्यक्त किया. किसानों की सफलता व अनुभवों का आदानप्रदान आकर्षण का केंद्र रहे फार्म एन फूड अवार्ड में प्रगतिशील किसानों द्वारा अपने कृषि उत्पाद और नवाचारों के बारे में जानकारी दी गई. कार्यक्रम में आए किसानों को किसान राम मूर्ति मिश्र ने जैविक खेती की जानकारी दी और बताया कि किसान जैविक विधि से खेती कर के न केवल लागत में कमी ला सकते हैं, बल्कि डेढ़ से दोगुना आमदनी भी ले सकते हैं.

चित्रकूट के किसानों ने औषधीय खेती से आमदनी बढ़ाने के टिप्स दिए और बताया कि उन्होंने किस तरह से चित्रकूट में औषधीय खेती करने वाले किसानों को बिचौलियों के चंगुल से नजात दिला कर उन की आमदनी को दोगुना किया है. किसान बने फार्म एन फूड के वार्षिक ग्राहक फार्म एन फूड द्वारा किसानों के लिए आयोजित किए गए कार्यक्रम में आए तकरीबन 100 किसानों को दिल्ली प्रैस की तरफ से इस पत्रिका की सैंपल कौपी मुफ्त उपलब्ध कराई गई.

पत्रिका में छपे ज्ञानवर्धक लेखों को पढ़ कर कई किसान पत्रिका की विशेष स्कीम के तहत वार्षिक ग्राहक भी बने. इस मौके पर किसानों का कहना था कि खेतीबारी से जुड़ी इतनी अच्छी पत्रिका के ग्राहक बन उन्हें देशभर के किसानों और कृषि विशेषज्ञों के अनुभवों और सु?ावों के बारे में घर बैठे जानकारी मिलेगी. इतना ही नहीं, कई किसानों का कहना था कि पत्रिका के रजिस्टर्ड डाक से मिलने के कारण उन्हें शहर तक पत्रिका के लिए भागदौड़ से भी छुटकारा मिल रहा है.

पुरस्कार पा कर खिले चेहरे:  डा. जितेंद्र सिंह, कृषि वैज्ञानिक, डा. साधना वैश, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान), उमाशंकर पांडेय, जलग्राम जखनी, बांदा, गणेश प्रसाद मिश्र, ओम प्रकाश मिश्र (हर्बल मैडिसनल प्लांट ऐक्सपर्ट), डा. शिव प्रेम याज्ञिक (क्षेत्रीय इतिहासकार, बुंदेलखंड क्षेत्र, कर्बी), विजेंद्र बहादुर पाल, बस्ती, अमित विक्रम त्रिपाठी, बस्ती, राहुल अवस्थी (जैविक किसान, कृषि सलाहकार) बांदा, अखिलेश्वर सिंह (फूलों की खेती) बांदा, सीए अंकित अग्रवाल, अरविंद चतुर्वेदी, गंगा प्रसाद पांडेय, रामकुमार शुक्ल, सुरेखा (कृषि व समाज कार्य), अरविंद छिरौलिया,

अंबिका प्रसाद यादव (गनीवा फार्म कुरिया), रामकेश यादव, श्रवण कुमार पांडेय, संजय कुमार यादव, रामबाबू मिश्रा, देवनाथ अवस्थी, गणेश प्रसाद मिश्र, शिवसागर सिंह राजपूत, महेश कुमार मिश्र, सौरभ तिवारी, ललित कुमार पांडेय, संतोष त्रिपाठी, महानंद सिंह पटेल, अमरनाथ सिंह पटेल, चंदन सिंह पटेल, रामराज सिंह, सचिन तुलसा त्रिपाठी (कृषि पत्रकार) को पुरस्कार मिले.