Pusa Institute of Delhi : मनाया 122वां स्थापना दिवस

Pusa Institute of Delhi: कृषि क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा संस्थान), नई दिल्ली ने देश में अपनी एक अलग मिसाल कायम की है. 1 अप्रैल, 2026 को इस संस्थान का 122वां स्थापन दिवस था. आइए, जानते हैं कि इस मौके पर क्या खास हुआ :

1 अप्रैल, 2026 को भाकृअप- भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (Pusa Institute of Delhi), नई दिल्ली ने अपने 122वें स्थापना दिवस का भव्य आयोजन डा. बीपी पाल सभागार में किया. यह कार्यक्रम उत्साह, गरिमा तथा राष्ट्रीय विकास हेतु कृषि विज्ञान को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ.

यह अवसर कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं प्रसार के क्षेत्र में संस्थान के एक शताब्दी से अधिक समय के अग्रणी योगदान का स्मरण कराने वाला रहा जिस ने भारत की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

संसथान की उपलब्धियां गिनाईं

संस्थान के निदेशक डा. सीएच श्रीनिवास राव ने अपने संबोधन में संस्थान ने गत वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों एवं पहलों पर प्रकाश डाला. उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप संस्थान की रणनीतिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए जलवायु सहिष्णु कृषि, डिजिटल एवं इमर्सिव प्रौद्योगिकियों तथा किसान केंद्रित नवाचारों पर विशेष बल दिया.

उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में (एआईआरएफ 2025) में लगातार तीसरे वर्ष प्रथम स्थान प्राप्त किया, एसडीजी में द्वितीय स्थान, समग्र रूप से 24वां तथा अनुसंधान में 29वां स्थान प्राप्त किया. साथ ही संस्थान को एनएईएबी (2025–2030) से ए+ ग्रेड (3.64/4.00) प्राप्त हुआ तथा क्यूएस विश्व रैंकिंग 2026 (151–200 श्रेणी) में स्थान प्राप्त किया.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता रहीं मुख्य अतिथि

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं जिन्होंने कृषि स्थिरता एवं किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने में संस्थान के योगदान की सराहना की. उन्होंने ‘ग्रीन दिल्ली’ के निर्माण एवं जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में संस्थान की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया. साथ ही, उन्होंने वैज्ञानिक योगदानों एवं जनजागरूकता के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया.

उन्होंने किसानों के हित में संस्थान की भूमिका को रेखांकित करते हुए विकसित भारत के निर्माण में इस के योगदान की सराहना की तथा खाद्य आत्मनिर्भरता के संदर्भ में लालबहादुर शास्त्री के विचारों का उल्लेख किया.

दिल्ली सरकार के मंत्री रविंदर सिंह (इंद्राज) ने भी संस्थान को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए ‘ग्रीन दिल्ली’ के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया तथा इस दिशा में संस्थान के प्रयासों की सराहना की.

डा. एमएल जाट ने कहा

कार्यक्रम में डा. एमएल जाट सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. उन्होंने अपने संबोधन में दिल्ली सरकार एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने पर बल दिया, जिस से शहरी एवं अर्धशहरी कृषि संबंधी चुनौतियों का समाधान किया जा सके.

उन्होंने अपशिष्ट को उर्वरक में परिवर्तित करने जैसी नवाचारपूर्ण तकनीकों का उल्लेख किया जो सतत कृषि एवं अपशिष्ट प्रबंधन में सहायक हैं. उन्होंने मानव संसाधन विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए ‘भोजन ही औषधि है’ पर विशेष बल दिया.

डा. एमएल जाट ने किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा सलाह दी कि यदि गेहूं की फसल में डीएपी उर्वरक का प्रयोग हो चुका है, तो उन्हें धान की फसल में इस के अनावश्यक उपयोग से बचना चाहिए. उन्होंने बताया कि ऐसी वैज्ञानिक जानकारी से किसानों के खर्च में कमी आएगी और पोषक तत्त्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ेगी.

मुख्यमंत्री ने पूसा संस्थान (Pusa Institute of Delhi) द्वारा विकसित तकनीकों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा समारोह के दौरान ‘खाद्यान्न, पोषण एवं आजीविका सुरक्षा हेतु फसलों की उन्नत किस्में’ तथा ‘प्रिसिशन फ्लोरिकल्चर एवं लैंडस्केप डिजाइन’ नामक पुस्तकों का विमोचन भी किया.

लोग हुए सम्मानित

इस अवसर पर वर्ष 2025–26 के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों, तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीय कर्मियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया.

कार्यक्रम का समापन डा. आरएन पडारिया द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिस में उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया.

इस समारोह में भाकृअअनुसं के पूर्व निदेशकगण सहित अन्य गणमान्य अतिथि, कर्मचारी एवं छात्र भी उपस्थित रहे.

भाकृअअनुसं का 122वां स्थापना दिवस समारोह संस्थान की गौरवशाली विरासत का प्रतीक रहा तथा वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार एवं किसानकेंद्रित विकास के प्रति इस की प्रतिबद्धता को दोबारा स्थापित करता है, जो भारत के सतत एवं समृद्ध कृषि भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है.

Convocation : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का 64वां दीक्षांत समारोह

Convocation : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली का 64वां दीक्षांत समारोह (Convocation) विगत दिनों अत्यंत उत्साह के साथ संपन्न हुआ. इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि एवं समारोह (Convocation) के अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे.

विकसित कृषि और समृद्ध किसान

कृषि मंत्री ने कहा कि,- आईएआरआई केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की कृषि प्रगति का प्राण केंद्र है. उन्होंने कहा कि हरित क्रांति की ऐतिहासिक शुरुआत इसी भूमि से हुई और जब-जब देश खाद्यान्न संकट से जूझा, तब-तब पूसा ने समाधान प्रस्तुत किया.

उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि, ‘विकसित कृषि और समृद्ध किसान’ इस संकल्प की आधारशिला है. कृषि न केवल अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका और आत्मनिर्भरता का आधार भी है.

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा- आप केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि भविष्य के कृषि-नेता हैं

केंद्रीय कृषि मंत्री ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आप केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि भविष्य के कृषि-नेता हैं. आपकी खोजें आने वाली पीढ़ियों की थाली भरेंगी.”

उन्होंने कृषि में 5 प्रतिशत वृद्धि दर बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए विज्ञान-आधारित, टिकाऊ एवं समावेशी कृषि मॉडल अपनाने का आह्वान किया. जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण, जल संकट एवं पोषण सुरक्षा जैसी चुनौतियों के समाधान हेतु नवाचार और अनुसंधान को अनिवार्य बताया.

कम लागत वाली तकनीकों का हो विकास

उन्होंने जल-संरक्षण एवं माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों के प्रसार, मृदा स्वास्थ्य संवर्धन, प्राकृतिक खेती, जैविक इनपुट, ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट कृषि, तथा छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए कम लागत वाली तकनीकों के विकास पर बल दिया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘Lab to Land’ केवल नारा नहीं, बल्कि प्रत्येक वैज्ञानिक का दायित्व है.

‘Job Seeker’ के बजाय ‘Job Creator’ बनें

युवा शक्ति की भूमिका रेखांकित करते हुए कृषि मंत्री जी विद्यार्थियों को ‘Job Seeker’ के बजाय ‘Job Creator’ बनने की प्रेरणा दी. उन्होंने एग्री-स्टार्टअप, एग्री-प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को बाजार से जोड़ने तथा भारत को कृषि निर्यात में अग्रणी बनाने का आह्वान किया. साथ ही संस्थान के पुनर्विकास की योजना का उल्लेख करते हुए अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, एग्री-इनोवेशन पार्क, स्टार्टअप इनक्यूबेशन हब एवं हरित परिसर के विकास की जानकारी दी.

सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने क्या कहा

इस अवसर पर डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कहा कि, भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है और जलवायु-स्मार्ट कृषि, जैव प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल नवाचारों के माध्यम से देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है.

संस्थान के निदेशक का क्या है कहना

संस्थान के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव ने जानकारी दी कि, इस वर्ष कुल 470 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 290 एम.एससी./एम.टेक. तथा 180 पीएच.डी. छात्र शामिल हैं. डॉ. अनुपमा सिंह, अधिष्ठाता एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा) ने विद्यार्थियों को आजीवन शिक्षार्थी बने रहने और बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया.

मिले पुरस्कार

विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों को विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए गए. 5 पीएच.डी. एवं 5 एम.एससी. छात्रों को मेरिट मेडल प्रदान किए गए. पीएच.डी. श्रेणी में सम्राट पाल (पादप रोग विज्ञान), पार्था चंद्र मंडल (कृषि रसायन), अर्कप्रवा रॉय (मृदा विज्ञान), तमिल सेल्वन एस. (जैवरसायन) एवं स्वीटी मुखर्जी (कृषि प्रसार शिक्षा) को सम्मानित किया गया.

एम.एससी. श्रेणी में खुशबू देवी (सस्य विज्ञान), नुसरत जहां (कृषि प्रसार शिक्षा), अनंता बाग (आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन), मंझा नायक ई. (बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) तथा नवोधया जे.वी. (पादप कार्यिकी) को मेरिट मेडल प्रदान किए गए.

वर्ष 2025 के लिए ‘भा.कृ.अनु.प.–भा.कृ.अनु.सं. सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार’ एवं ‘नाबार्ड–प्रो. वी.एल. चोपड़ा स्वर्ण पदक’ पीएच.डी. कार्यक्रम में राकेश वी. (कीट विज्ञान) तथा एम.एससी. कार्यक्रम में सुमन बर्मन (कीट विज्ञान) को प्रदान किए गए.

वैज्ञानिक संकाय को भी उनके उत्कृष्ट अनुसंधान योगदान हेतु सम्मानित किया गया. पांचवां डॉ. एच.के. जैन स्मृति युवा वैज्ञानिक पुरस्कार डॉ. वेदा कृष्णन एवं डॉ. रोआफ अहमद पर्रे को प्रदान किया गया.

द्विवार्षिक अवधि 2023–24 का 24वां सुकुमार बसु स्मृति पुरस्कार डॉ. टी.के. भट्टाचार्य, निदेशक, ICAR-NRC on Equines को प्रदान किया गया. वर्ष 2025 का पांचवां नाबार्ड शोधकर्ता पुरस्कार डॉ. रघुबर साहू को प्रदान किया गया.

कई मंत्री रहें उपस्थित

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी व रामनाथ ठाकुर विशिष्ट अतिथि रहे. इनके अलावा कार्यक्रम में डॉ. एम. एल. जाट, महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सहित कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षकगण, विद्यार्थी, अभिभावक, किसान प्रतिनिधि एवं मीडिया के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.

समारोह (Convocation) का समापन ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ के प्रेरक उद्घोष के साथ हुआ.और यह विश्वास व्यक्त किया गया कि आईएआरआई के स्नातक देश-विदेश में कृषि नवाचार के अग्रदूत बनकर भारत की कृषि उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे.

Convocation : 13 फरवरी को होगा IARI का 64वां दीक्षांत समारोह

Convocation: नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026, आईसीएआर– भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली का 64वां दीक्षांत समारोह 13 फरवरी, 2026 को आयोजित किया जाएगा. दीक्षांत कार्यक्रम में अनेक संकायों के स्नातक, परास्नातक और पीएच.डी. विद्यार्थियों को डिग्रियां और मेडल प्रदान किए जाएंगे.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान 13 फरवरी को होने वाले दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. वे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और नवाचार कर रहे युवा कृषि वैज्ञानिकों को संबोधित करेंगे और उन्हें देश के कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए प्रेरित करेंगे.

इन लोगों की रहेगी मौजूदगी

दीक्षांत समारोह (Convocation) में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर भी मौजूद रहेंगे, जो कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन करेंगे तथा सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करेंगे. इसी क्रम में आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट तथा आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डालेंगे.

नवाचारों को मिलेगा सम्मान, मिलेंगी डिग्रियां

समारोह के दौरान कृषि अनुसंधान, प्राकृतिक खेती, जलवायु-स्मार्ट कृषि, डिजिटल एग्रीकल्चर तथा ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्यार्थियों व शोधार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा. कुल 470 छात्र-छात्राओं को उनकी कड़ी मेहनत और सफल शैक्षणिक यात्रा के लिए डिग्रियां प्रदान की जाएंगी.

इनमें 290 एम.एससी./एम.टेक. के विद्यार्थी शामिल हैं, जिनमें 126 छात्राएं और 164 छात्र हैं, जबकि 180 पीएच.डी. विद्यार्थी (70 छात्राएं और 110 छात्र), जिनमें 2 विदेशी विद्यार्थी भी सम्मिलित हैं, अपने-अपने मास्टर एवं डॉक्टोरल कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद मंच पर आकर डिग्री प्राप्त करेंगे, जो आईएआरआई की अकादमिक उत्कृष्टता और वैश्विक आकर्षण को और मजबूत करता है.

कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ता भारत

दीक्षांत समारोह (Convocation) न केवल विद्यार्थियों के लिए उपलब्धि का अवसर होगा, बल्कि यह संकेत भी देगा कि भारत का कृषि क्षेत्र नई पीढ़ी के हाथों नवाचार, ज्ञान और तकनीक आधारित विकास की ओर तेजी से अग्रसर है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का मार्गदर्शन युवा कृषक-वैज्ञानिकों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए प्रेरक ऊर्जा का काम करेगा.

आईएआरआई निभा रहा प्रमुख भूमिका

आईएआरआई, नई दिल्ली 121 वर्ष पुराना अग्रणी संस्थान है, जो हरित क्रांति का केंद्र और कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं प्रसार का प्रमुख अग्रदूत रहा है. संस्थान ने देश के करोड़ों लोगों की खाद्य, पोषण एवं आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाई है तथा 1923 से शुरू हुए अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से एक सदी से अधिक समय से उत्कृष्टता की परंपरा को बनाए रखा है.

आईएआरआई को मिला ‘A ‘ ग्रेड

आईएआरआई को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से 2023–2028 की अवधि के लिए ‘A’ ग्रेड तथा आईसीएआर के राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड (NAEAB) से 2025–2030 के लिए 3.64/4.00 (A+ समतुल्य) स्कोर के साथ मान्यता प्राप्त हुई है, जो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है.

वर्ष 2025 की NIRF रैंकिंग में संस्थान ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि नव आरंभ SDG रैंकिंग में आईएआरआई नई दिल्ली को आईआईटी मद्रास के बाद दूसरा स्थान मिला.

Kisan Sarathi Fund : राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

Kisan Sarathi Fund : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली की कृषि ज्ञान प्रबंधन इकाई (AKMU) ने 23 सितंबर, 2025 को ‘किसान सारथी कोष (Kisan Sarathi Fund) के माध्यम से कृषि परामर्श निर्माण’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया. यह कार्यशाला आईसीएआर परियोजना ‘किसान सारथी 2.0 : संवर्द्धन, संचालन, अनुरक्षण एवं सहयोग’ के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसे आईसीएआर एवं डिजिटल इंडिया कार्पोरेशन द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किया जा रहा है.

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डा. सीएच श्रीनिवास राव, निदेशक, आईसीएआर–आईएआरआई उपस्थित रहे. इस अवसर पर डा. अनिल राय, एडीजी (आईसीटी), आईसीएआर, डा. राजेंद्र प्रसाद, निदेशक, आईसीएआर–आईएएसआरआई, अनिंद्य बनर्जी, सलाहकार (डिजिटल एग्रीकल्चर), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा डिजिटल इंडिया कार्पोरेशन एवं दिल्ली स्थित विभिन्न आईसीएआर संस्थानों के अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे.

इस कार्यशाला में आईसीएआर संस्थानों एवं सहयोगी संगठनों से लगभग 75 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य रबी फसलों के लिए परामर्शों का संयुक्त रूप से निर्माण एवं प्रमाणीकरण करना था.

इस अवसर पर डा. सीएचनश्रीनिवास राव, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने कृषि विस्तार सेवाओं के आधुनिकीकरण में डिजिटल उपकरणों की महत्ता पर बल देते हुए कहा, “किसान सारथी 2.0 एक परिवर्तनकारी मंच है, जो किसानों को स्थानीय, समय पर एवं विश्वसनीय परामर्श उपलब्ध कराता है. इस का उपयोग किसानों के कल्याण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जिस से अनिश्चितताओं को कम किया जा सकेगा, निर्णय क्षमता में सुधार होगा और जलवायु जोखिमों के प्रति लचीलापन बढ़ेगा. ऐसे नवाचारों के माध्यम से हम एक डिजिटल रूप से सशक्त कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बढ़ रहे हैं.”

डा. अनिल राय ने मंच के तकनीकी नवाचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “किसान सारथी केवल एक परामर्श मंच नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों, विस्तारकर्मियों एवं किसानों के बीच एक गतिशील सेतु है. किसान सारथी कोष (Kisan Sarathi Fund) को एक केंद्रीकृत ज्ञान भंडार के रूप में शामिल किए जाने से यह सुनिश्चित होगा कि परामर्श क्षेत्र विशिष्ट, फसल विशिष्ट एवं आवश्यकता आधारित हों और किसानों की जिज्ञासाओं का त्वरित समाधान मिल सके. तकनीक और ज्ञान प्रबंधन का यह एकीकरण कृषि विस्तार में सटीकता, गति एवं समावेशिता ले कर आएगा.”

डा. अमरेंद्र कुमार, प्रभारी, एकेएमयू, आईसीएआर–आईएआरआई ने जानकारी दी, “किसान सारथी 2.0 एक उन्नत बहुभाषी एवं बहु चैनल आईसीटी मंच है, जिसे फसल, बागबानी, पशुपालन और मत्स्यपालन से संबंधित समयबद्ध एवं आवश्यकता आधारित कृषि परामर्श देने के लिए विकसित किया गया है. यह मंच किसानों को सही भाषा, सही स्थान और सही समय पर सटीक जानकारी प्रदान करता है, जिस से वे बेहतर उत्पादनशीलता एवं लाभप्रदता के लिए सूचित निर्णय ले सकें.”

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में परामर्श निर्माण एवं प्रसार पर व्यावहारिक प्रशिक्षण, उपयोगकर्ता प्रबंधन एवं अनुमोदन प्रक्रिया पर मार्गदर्शन तथा किसान सारथी कोष (Kisan Sarathi Fund) का परिचय शामिल था. इन व्यावहारिक अभ्यासों ने प्रतिभागियों को एक अधिक उत्तरदायी एवं किसान केंद्रित परामर्श प्रणाली के निर्माण हेतु आवश्यक कौशल प्रदान किए.

कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी प्रतिभागी डिजिटल नवाचारों का उपयोग कर के किसानों तक समयबद्ध, स्थानीयकृत एवं प्रभावी सूचना वितरण सुनिश्चित करेंगे और इस प्रकार आत्मनिर्भर कृषि एवं डिजिटल इंडिया की व्यापक दृष्टि को साकार करने में योगदान देंगे.

Seminar : पूसा संस्थान में हुआ किसान वैज्ञानिक गोष्ठी का आयोजन

Seminar : 2 अगस्त,2025 को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के कृषि अभियांत्रिकी सभागार में पीएम किसान कार्यक्रम के अंतर्गत एक किसान वैज्ञानिक गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस गोष्ठी में अनुसूचित जाति परियोजना एवं संस्थान के अंगीकृत गांवों के 200 किसानों ने भाग लिया.

इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी की और किसान सभा को संबोधित किया. इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के कृषि अभियांत्रिकी सभागार में किया गया, जिस में पूसा संस्थान की अनुसूचित जाति परियोजना एवं संस्थान के अंगीकृत गांवो एवं निकटवर्ती जिलों के 200 किसानों, पूसा संस्थान के वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त के अंतर्गत 9.70 करोड़ से अधिक किसानों को 20,500 करोड़ रुपए की सम्मान राशि हस्तांतरित की.

इस संस्थान के कृषि प्रौद्योगिकी आकलन एवं स्थानांतरण केंद्र के प्रभारी डा. अनिल कुमार सिंह ने संयुक्त निदेशक (प्रसार) डा. रविंद्र पडारिया, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डा. सी विश्वनाथन, जल प्रौद्योगिकी केंद्र के परियोजना निदेशक डा. पी ब्रह्मानंद सहित उपस्थित वैज्ञानिकों, स्टाफ और किसानों का स्वागत किया.

इस के बाद वैज्ञानिक किसान परिचर्चा शुरू हुई. जिस में डा. प्रवीण उपाध्याय, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग ने समन्वित खेती प्रणाली तकनीकी पर चर्चा की. साथ ही, डा. प्रलय भौमिक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अनुवांशिकी संभाग ने बासमती धान की उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकी,  डा. विनोद कुमार शर्मा प्रधान वैज्ञानिक ने मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन संभाग ने समेकित पोषण प्रबंधन जैसे विषयों पर किसानों को जानकारी दी.

अगले सत्र में तीन और विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की गई. इस सत्र में डा. विग्नेश एम, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अनुवांशिकी संभाग ने मक्का उत्पादन प्रौद्योगिकी, डा. एसपी सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, अनुवांशिकी संभाग ने श्रीअन्न की महत्ता एवं उत्पादन प्रौद्योगिकी, डा. बिष्णु माया, वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादप रोगविज्ञान संभाग ने खरीफ फसलों के मुख्य रोगों विशेषकर धान में बकानी रोग के नियंत्रण पर चर्चा की.

डा. पी ब्रह्मानंद, परियोजना निदेशक, जल प्रौद्योगिकी केंद्र ने किसानों को जल संरक्षण और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के तरीके बताए. संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डा. सी विश्वनाथन ने अपने किसानों को संस्थान द्वारा शोध से उत्पन्न नवीन प्रौद्योगिकियों को अपनाने की सलाह दी. संयुक्त निदेशक (प्रसार) ने किसानों को संगठन बना कर उद्यमिता और मार्केटिंग के क्षेत्र में भी कार्य करने की सलाह दी. अगले सत्र में किसानों को संस्थान के खेतों में, जहां विभिन्न विषयों के अनुसंधान चल रहे थे, भ्रमण कराया गया और उन्हें लाइव प्रदर्शनों और अनुसंधान प्रयोगों के माध्यम से खेतीबारी के अन्य विषयों पर जानकारी दी गई.

Mango Varieties : आईएआरआई द्वारा विकसित उन्नत आम किस्मों को बढ़ावा

Mango Varieties : पूसा आम प्रक्षेत्र दिवस 14 जुलाई, 2025 को आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के फल एवं बागबानी प्रौद्योगिकी प्रभाग के एमबी7 प्रक्षेत्र में आयोजित किया गया. इस प्रक्षेत्र दिवस में आम उद्योग से जुड़े किसानों, संकाय सदस्यों और छात्रों ने भाग लिया. यह कार्यक्रम आउटरीच कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया था जिस का उद्देश्य आईएआरआई द्वारा विकसित उन्नत आम संकरों को बढ़ावा देना था.

पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के हितधारकों की भागीदारी के साथ, इस कार्यक्रम ने कृषि नवाचार और अत्याधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए आईएआरआई की प्रतिबद्धता पर जोर दिया.

इस कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए, आईसीएआरआईएआरआई के निदेशक और कुलपति डा. चौ श्रीनिवास राव ने उपस्थित लोगों को आम की खेती की तकनीकों में नवीनतम सुधारों के बारे में जानकारी प्रदान की. साथ ही, उन्होंने आईएआरआई की आम किस्मों के बारे में किसानों और लाइसैंसधारियों से आए फीडबैक पर विचार और उसे शामिल करने, विशेष रूप से पौधों की संख्या बढ़ाने और उपभोक्ता स्तर पर इन नई किस्मों की पहुंच बढ़ाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया, ताकि उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके.

संयुक्त अनुसंधान निदेशक डा. विश्वनाथन चिन्नुसामी ने आम पर आउटरीच कार्यक्रम के समग्र लक्ष्यों के बारे में जानकारी प्रदान की. उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच तालमेल बना कर गुणवत्तापूर्ण आम रोपण सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने के इस पहल के उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया. इन प्रयासों पर जोर देने का उद्देश्य आम की खेती के एक अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी वातावरण को बढ़ावा देना है.
फल और बागबानी प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख डा. ओपी अवस्थी ने कार्यक्रम में आए सदस्यों और किसानों का स्वागत करते हुए विभाग की उपलब्धियों, विशेष रूप से आम की किस्मों के विकास, के बारे में जानकारी दी.

इस आउटरीच कार्यक्रम की आम परियोजना के प्रधान वैज्ञानिक और प्रधान अन्वेषक डा. जय प्रकाश ने उच्च घनत्व वाले रोपण के लिए उपयुक्त आईएआरआई के नवीन आम संकरों की किस्मों के प्रदर्शन और प्रमुख विशेषताओं के बारे में विस्तार से बताया.

Mango Varietiesउन्होंने भाग लेने वाले राज्यों के किसानों और लाइसैंसधारियों के अलगअलग समूहों के साथ आईएआरआई परिसर के छात्रों और संकाय सदस्यों का परिचय कराया, जिस से वहां मौजूद लोगों में सामुदायिक भावना और साझा उद्देश्य को बढ़ावा मिल सके.

इस कार्यक्रम ने आईएआरआई  की उल्लेखनीय आम किस्मों यानी आम्रपाली, मल्लिका, पूसा अरुणिमा, पूसा प्रतिभा, पूसा सूर्या, पूसा पीताम्बर और पूसा लालिमा को प्रदर्शित करने के लिए एक बेहतरीन मंच के रूप में काम किया. किसानों की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली और कई लोगों ने उपज और अपना लाभ बढ़ाने के साधन के रूप में इन किस्मों को अपने बागों में अपनाने की उत्सुकता दिखाई.

इस पहल का उद्देश्य न केवल उपभोक्ताओं तक अच्छी गुणवत्ता वाले फलों की पहुंच बढ़ाना है, बल्कि सप्लाई चैन में सुधार हेतु प्रगतिशील दृष्टिकोण को भी दर्शाता है. राष्ट्रीय बागबानी बोर्ड और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के साथ सहयोगात्मक प्रयासों से निर्यात के अवसरों को बढ़ावा मिलने से आम की खेती में सतत विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है.

इस कार्यक्रम के दौरान शैक्षिक सामग्री और मल्टीमीडिया विज्ञापन ने मिल कर   यह पक्का किया कि मुख्य संदेश बड़े स्तर पर दर्शकों तक पहुंचे. गतिशील बाजार रुझानों और उपभोक्ता वरीयताओं के प्रति आईएआरआई की स्वीकृति, कृषि के विकसित होते परिदृश्य और आधुनिक खानपान संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए कस्टम-टैलिंग रणनीतियां इस में हुए सुधार को दिखलाती है.

फील्ड डे यानी प्रक्षेत्र दिवस केवल आम की किस्मों की एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि एक प्रतिस्पर्धी कृषि वातावरण की चुनौतियों के बीच फलनेफूलने के लिए तैयार जानकार और अनुकूलनशील किसानों को विकसित करने का एक ठोस प्रयास था.

डा. चौ. श्रीनिवास राव ने आईएआरआई द्वारा विकसित नए आम संकरों को अपनाने वाले किसानों के अनुभवों को उजागर करने वाली सफलता की कहानियों के विकास और व्यापक पहुंच के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाने का सुझाव दिया. इस के अलावा  जून, 2026 में होने वाले राष्ट्रीय आम दिवस कार्यक्रम के आयोजन का भी सुझाव दिया.

दिल्ली क्षेत्र में विकसित कृषि संकल्प अभियान

Viksit Krishi Sankalp Abhiyan: 12 जून, 2025 को कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली एवं कृषि इकाई, विकास विभाग, दिल्ली सरकार के द्वारा विकसित कृषि संकल्प अभियान का 15 वें दिन का कारवां दिल्ली देहात के नांगल ठकरान एवं बाजितपुर गांव (अलीपुर ब्लौक, दिल्ली) में पहुंचा.

इस कार्यक्रम के शुरुआत में डा. डीके राणा, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली ने सभी वैज्ञानिकों एवं किसानों का स्वागत करते हुए बताया कि तकनीकों एवं अनुसंधान को किसानों के खेतों पर पहुंचाने में कृषि विज्ञान केंद्रो का महत्वपूर्ण योगदान है. खेती व किसानों को समृद्ध करने के लिए “लैब टू लैंड” विजन के साथ ज्ञान की किरण आज खेतों तक पहुंच रही है और अनुसंधान पर वैज्ञानिक किसानों के साथ सीधा संवाद कर के समस्या आधारित किसानों को जानकारी दे रहे हैं.

इसी क्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डा. राम स्वरूप बाना ने जल संरक्षण की तकनीकियों पर विशेष ध्यान देते हुए विस्तृत जानकारी साझा की. साथ ही, उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है उन क्षेत्र में किसान संरक्षित तकनीक अपना कर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को खेती की तरफ आना है तो हमें पारंपरिक तकनीकी को छोड़ कर आधुनिक खेती को अपनाना होगा. इसी क्रम उन्होंने बाजरा की वैज्ञानिक खेती की विस्तृत जानकारी किसानों के साथ साझा की.

डा. श्रवण कुमार सिंह ने दिल्ली के आसपास क्षेत्र के लिए सब्जियों की विभिन्न प्रजातियां, जो दिल्ली क्षेत्र में अच्छा उत्पादन दे सकें के साथसाथ पोषण से संबंधित जितनी भी तकनीकियां हैं, जैसे किचन गार्डन की स्थापना करना और उस में लगने वाले मौसम के अनुसार सब्जियां और मानव पोषण के लिए संतुलित आहार आदि के साथ संरक्षित खेती की सारी जानकारी किसानों के साथ साझा की. डा. श्रवण कुमार सिंह ने संरक्षित खेती पर विशेष जोर दिया और उन्होंने बताया कि छोटे से छोटे जगह में भी आप हाईटैक नर्सरी बना कर अच्छा उत्पादन कर युवा किसान इस में अच्छी आय प्राप्त सकते हैं.

डा. श्रवण हलधर, प्रधान वैज्ञानिक (किट विज्ञान) ने किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन की विभिन्न प्रथाएं जैसे कीटों की निगरानी, लाभदायक एवं हानिकारक कीटो की पहचान, प्रभावी विधियों का चयन, जैविक नियंत्रण को अपनाना,  यांत्रिक उपकरणों का उपयोग सहित रासायनिक नियंत्रण के साथ वैज्ञानिक की सलाह से कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए.

इसी क्रम में डा. समर पाल सिंह ने खारे पानी और लवणीय मिट्टी का किस तरह से सुधार किया जा सकता है एवं खारे पानी में होने वाली फसलें जैसे पालक, जौ, सरसों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी. इसी के साथ उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए किसानों से आग्रह किया.

डा. नीरज ने धान की सीधी बोआई, खरपतवार प्रबंधन, पोषक तत्वों के प्रबंधन आदि की जानकारी देते हुए पूसा संस्थान विभिन्न प्रजातियों के बारे में भी बताया. डा. ऋतु जैन प्रधान वैज्ञानिक (फूल विज्ञान) ने ड्रेन एवं स्वेज के पानी से फूलों की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

डा. राकेश कुमार विज्ञानी (बागबानी) ने बागबानी की जानकारी देते हुए नए बाग की स्थापना के साथसाथ विभिन्न तकनीकियों जैसे मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई पद्धति, कम समय में अधिक आय के साथसाथ विदेशी सब्जियों खेती की जानकारी दी.

कैलाश, कृषि प्रसार विशेषज्ञ ने कृषि में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) व डिजिटल कृषि के प्रभावी उपयोग पर विचार साझा किए, जिस से किसानों को वैज्ञानिक जानकारी समय पर मिल सके.

इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली के वैज्ञानिकों ने आगामी खरीफ फसलों से संबंधित आधुनिक तकनीकों की जानकारी के साथ मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार संतुलित खादों के प्रयोग, प्राकृतिक खेती, प्राकृतिक खेती के घटक, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की सारी जानकारी किसानों के साथ साझा की. इस कार्यक्रम के अंत में बृजेश कुमार, मृदा विशेषज्ञ ने किसानों को मिट्टी पानी जांच की जानकारी देते हुए किसानों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया व उन से आग्रह किया कि ये संदेश अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाए.
इस कार्यक्रम के दौरान, किसानों के प्रश्नों एवं समस्याओं के लिए विशेष सत्र का आयोजन कर के संतुष्ट जवाब एवं अमूल्य सुझाव दिए गए.

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान राष्ट्रीय विस्तार कार्यक्रम कार्यशाला

नई दिल्ली : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा खरीफ 2024 की ट्रांसफर औफ टैक्नोलौजी (ToT) गतिविधियों की समीक्षा कार्यशाला का सफल आयोजन 16, मई 2025 को वर्चुअल माध्यम से किया गया.

इस कार्यशाला की अध्यक्षता आईएआरआई के निदेशक डा. सीएच श्रीनिवास राव ने की. इस अवसर पर आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, झांसी स्थित केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय और 16 स्वयंसेवी संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया.

यह पहल आईएआरआई का प्रमुख साझेदारी कार्यक्रम है, जिस का उद्देश्य प्रगतिशील कृषि अनुसंधान और जमीनी स्तर पर उस के कार्यान्वयन के बीच की खाई को पाटना है. उल्लेखनीय है कि इस साल 3 नए स्वयंसेवी संगठनों को कार्यक्रम में शामिल किया गया, जो विभिन्न जलवायु क्षेत्रों और सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस से कार्यक्रम की पहुंच और समावेशिता को और अधिक बल मिला है.

इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए डा. सीएच श्रीनिवास राव ने कहा कि तकनीकी जानकारी के प्रसार के जरीए भारत के किसानों को मजबूत बनाया जा सकता है, जिस से कृषि का सतत विकास संभव है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और स्वयंसेवी संगठनों की यह अनोखी साझेदारी ही किसानों तक सही समय पर सही तकनीक पहुंचाने का मूलमंत्र है.

उन्होंने सभी सहभागियों की सक्रिय भागीदारी और योगदान की सराहना की और बताया कि कार्यशाला में 28 विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं, जिन में पूर्व सीजन की उपलब्धियां और आगामी सीजन की योजनाएं शामिल थीं. डा. सीएच श्रीनिवास राव ने सभी हितधारकों से इस गति को बनाए रखने और आईएआरआई की नवीनतम किस्मों एवं तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण को सुनिश्चित करने का आग्रह किया.

उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तकनीकों को ढालने के लिए मजबूत फीडबैक तंत्र और सहभागी दृष्टिकोण को अपनाना आवश्यक है. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय कृषि का भविष्य साझेदारी आधारित नवाचार और खेतस्तर की सहभागिता में शामिल है. आईएआरआई इस आंदोलन का नेतृत्व वैज्ञानिक उत्कृष्टता और जमीनी भागीदारी के साथ करता रहेगा.

इस कार्यक्रम की शुरुआत में डा. एके सिंह, प्रभारी, कैटैट, आईएआरआई ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और डा. आरएन पडारिया, संयुक्त निदेशक (प्रसार), आईएआरआई ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया.

इस कार्यशाला के अंतर्गत एक विशेष संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिस में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए. कार्यशाला का समापन तकनीकी हस्तांतरण में कार्यक्षमता, समावेशिता और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, के साथ हुआ, जिस से आईएआरआई की कृषि विकास और विस्तार क्षेत्र में लीडरशिप की भूमिका और मजबूत होगी.

Convocation : पूसा में हुआ 63वां दीक्षांत समारोह

Convocation: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली का 63वां दीक्षांत समारोह पिछले दिनों 17 मार्च से 22 मार्च, 2025 को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NASC) के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम हौल में आयोजित किया गया. इस दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री, शिवराज सिंह चौहान रहे.

इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री (कृषि एवं किसान कल्याण) भगीरथ चौधरी और राम नाथ ठाकुर थे. इस अवसर पर कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक देवेश चतुर्वेदी, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के कुलपति एवं निदेशक डा. सीएच श्रीनिवास राव, डीन एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा) डा. अनुपमा सिंह, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान), संयुक्त निदेशक (प्रसार), परियोजना निदेशक डब्ल्यूटीसी, संयुक्त निदेशक (प्रशासन), आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक और पूसा संस्थान के पूर्व निदेशक एवं डीन भी उपस्थित थे.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रसार में नवाचार और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रसिद्ध है. हमारी पहल, रणनीतियां और नीतियां न केवल राष्ट्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार की गई हैं, बल्कि वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने के लिए भी केंद्रित हैं.

हम उन्नत तकनीकों और उच्च स्तरीय मानव संसाधन के माध्यम से विज्ञान और समाज में प्रगति को प्राथमिकता देते हैं. आईएआरआई ने 12 से अधिक दशकों में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान और शिक्षा के लिए उत्कृष्टता के एक प्रतिष्ठित केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है. पूसा संस्थान के शैक्षणिक कार्यक्रम की यात्रा साल 1923 में शुरू हुई थी और पिछले एक सदी से इस ने अपनी गौरवशाली परंपरा को बनाए रखा है.

पिछले साल स्नातकोत्तर विद्यालय का नाम बदल कर स्नातक विद्यालय किया गया था. अब तक, इस संस्थान ने कुल 11,731 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की हैं, जिन में एसोसिएटशिप, एम.एससी., एम.टेक., और पीएच.डी. डिग्रियां शामिल हैं, साथ ही विभिन्न देशों के 512 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भी उपाधियां प्रदान की गई हैं. इस 63वें दीक्षांत समारोह के दौरान, कुल 399 छात्रों को उन की कड़ी मेहनत और सफलता के उपलक्ष्य में डिग्रियां प्रदान की गईं, जिन में 233 एम.एससी, 166 पीएच.डी, और 5 विदेशी छात्र शामिल हैं.

अनुसंधान की उपलब्धियां:

साल 2024 के दौरान, 10 विभिन्न फसलों में कुल 27 फसल किस्मों को विकसित और जारी किया गया. इन में 16 प्रजातियां और 11 संकर किस्में शामिल हैं.

आईसीएआर – आईएआरआई के द्वारा विकसित 10 जलवायु सहिष्णु और बायोफोर्टिफाइड फसल किस्मों को राष्ट्र को समर्पित किया गया. इन में 7 अनाज एवं मोटे अनाज, 2 दलहनी फसलें और 1 चारे की किस्म शामिल हैं.

Convocationआईएआरआई ने बासमती धान के उत्पादन और व्यापार में उत्कृष्ट योगदान दिया है, जिस में उन्नत किस्मों के विकास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. पूसा बासमती किस्में, जैसे पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 1692, पूसा बासमती 1509 और जीवाणु झुलसा  व ब्लास्ट रोग प्रतिरोधी उन्नत बासमती किस्में पीबी 1847, पीबी 1885 और पीबी 1886, भारत से 5.2 मिलियन टन बासमती धान निर्यात में लगभग 90 फीसदी योगदान देती हैं. वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत को बासमती धान निर्यात से 48,389 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई है. वहीं, अप्रैल, 2024 से नवंबर, 2024 के दौरान बासमती धान निर्यात से 31,488 करोड़ रुपए की आय हुई है.

बासमती धान की खेती के कारण भूजल स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, आईएआरआई ने दो शाकनाशी सहिष्णु बासमती धान किस्में, पीबी 1979 और पीबी 1985, विकसित और जारी की हैं. ये किस्में प्रत्यक्ष बीजाई के लिए उपयुक्त हैं, जिस से गिरते भूजल स्तर की समस्या और रोपाई में किए गए धान से उत्पन्न ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी.

इस के अलावा दो अल्पावधि गैरबासमती धान किस्में, पूसा 1824 और पूसा 2090 विकसित और जारी की गई हैं. ये किस्में फसल कटाई के बाद की कृषि गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय प्रदान करेगी. इस से खेतों की समय पर सफाई में सहायता मिलेगी, जिस से पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और सिंधु गंगा के मैदान में गेहूं की अगली फसल की समय पर बोआई सुनिश्चित हो सकेगी. वर्तमान में आईएआरआई के अनुसार गेहूं किस्मों की खेती लगभग 9 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है, जिस से देश के अन्न भंडार में लगभग 40 मिलियन टन गेहूं का योगदान हो रहा है.

हमारे अनुसंधान कार्यक्रम ने पोषण सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया है और 8 बायोफोर्टिफाइड फसल किस्में विकसित की हैं. एक ब्रेड गेहूं (एच आई 1665) और एक ड्यूरम गेहूं एच आई-8840  अधिक आयरन और जिंक युक्त जो केंद्रीय क्षेत्र के लिए, दो ब्रेड गेहूं किस्में उच्च प्रोटीन (एच डी 3390 उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए और एच डी 3410 दिल्लीएनसीआर क्षेत्रों के लिए ), 2 बायोफोर्टिफाइड मक्का संकर, जिन में एक बहुपोषक संकर, पूसा बायोफोर्टिफाइड मक्का संकर 5 शामिल है, जिस में α-टोकोफेरौल (21.60 पीपीएम), विटामिन ए (6.22 पीपीएम), हाई लाइसिन ( 4.93 फीसदी )  और ट्रिप्टोफैन ( 1.01फीसदी ) की उच्च मात्रा है, 2 डबल जीरो (शून्य इरूसिक एसिड और ग्लूकोसिनोलेट) सरसों किस्में – पूसा सरसों 35 और पूसा सरसों 36, 1 सोयाबीन किस्म (पूसा 21), जो कि कुनीट्ज कुन्तिज ट्रिप्सिन इन्हिबीटर (KTI) की कम मात्रा वाली किस्म है.

येलो वेन मोजेक वायरस प्रतिरोधी और एनेशन लीफ कर्ल वायरस प्रतिरोधक भिंडी की दो किस्में पूसा भिंडी-5 और डीओएच-1 विकसित किस्में और जारी की गई हैं. ये किस्में कीटनाशकों के उपयोग को कम करने और खेती की लागत को घटाने में मदद करेगी.

संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सब्जी फसलों की उन्नत किस्में खीरा सीवी, पूसा पार्थेनोकार्पिक खीरा-6, पूसा पार्थेनोकार्पिक खीरा संकर-1, खरबूजा सीवी, पूसा सुनहरी और पूसा शारदा, टमाटर संकर पूसा रक्षित, पूसा चेरी टमाटर-1, करेला सीवी, पूसा संरक्षित करेला-2 और समर स्क्वैश सीवी, पूसा श्रेयस विकसित किस्में और जारी की गई हैं.

सब्जी फसलों की उन्नत गुणवत्ता वाली बीज उपलब्ध कराने के लिए, ब्रीडर बीज नियमित रूप से राष्ट्रीय बीज निगम और राष्ट्रीय बागबानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान को सप्लाई किए जा रहे हैं. वर्ष 2024-25 के दौरान, विभिन्न सब्जी किस्मों और संकरों के लिए 17 समझौता ज्ञापन निजी बीज कंपनियों के साथ हस्ताक्षरित किए गए हैं.

गेंदा की एक नई किस्म पूसा बहार और ग्लेडियोलस की मध्यम मौसम वाली किस्म पूसा सिंदूरी को केंद्रीय किस्म विमोचन समिति द्वारा जारी करने की सिफारिश की गई है. इस के साथ ही, देश में पहली बार, आम के दो बौने जड़वृक्ष पूसा मूलव्रंत-1 और पूसा मूलव्रंत-2 जारी किए गए हैं. ये जड़वृक्ष कलमी आम के पौधों की ऊंचाई को कम करने में सहायक होंगे और बागों के बेहतर प्रबंधन में मदद करेंगे.

आईसीएआर – आईएआरआई द्वारा छोटे किसानों के लिए 1.0  हेक्टेयर क्षेत्र का एकीकृत कृषि प्रणाली मौडल विकसित किया गया है, जिस में फसल उत्पादन, डेयरी, मछली पालन, बतख पालन, बायोगैस संयंत्र, फलदार वृक्ष और कृषि वानिकी को शामिल किया गया है. यह मौडल प्रति हेक्टेयर हर साल लगभग 3.8 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ उत्पन्न करने और 628 मानव दिवस का रोजगार सृजित करने की क्षमता रखता है.

यह प्रणाली अपशिष्ट पुनर्चक्रण और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि इस में एक इकाई के उपउत्पादों को दूसरी इकाई के इनपुट के रूप में उपयोग किया जाता है, जिस से संसाधनों की दक्षता बढ़ती है.

इसी प्रकार से, आईसीएआर – आईएआरआई द्वारा सीमांत किसानों के लिए 0.4 हेक्टेयर क्षेत्र का एकीकृत कृषि प्रणाली मौडल विकसित किया गया है. इस मौडल में पौलीहाउस खेती, मशरूम उत्पादन, फसल उत्पादन और बागबानी एंटरप्राइज को शामिल किया गया है. यह मौडल 1.76 लाख रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष तक का शुद्ध लाभ उत्पन्न करने की क्षमता रखता है.

आईसीएआर – आईएआरआई द्वारा विकसित पूसा एसटीएफआर मीटर एक कम लागत वाला, उपयोगकर्ता के अनुकूल, डिजिटल एंबेडेड सिस्टम और प्रोग्रामेबल उपकरण है. इस एक ही उपकरण के माध्यम से द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों सहित कुल 14 महत्वपूर्ण मृदा पैरामीटर का परीक्षण किया जा सकता है.

संस्थान द्वारा विकसित पूसा डिकंपोजर एक पर्यावरण अनुकूल और किफायती माइक्रोबियल समाधान है, जो फसल अवशेषों के इनसीटू और एक्ससीटू प्रबंधन के लिए प्रभावी है. यह खेत में ही फसल अवशेषों, विशेष रूप से पराली के तेजी से अपघटन को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया गया है. कृषि अपशिष्ट को पौधों के पोषक तत्वों और ह्यूमस से भरपूर जैविक खाद में बदला जा सकता है. पूसा डिकंपोजर अब एक रेडी-टू-यूज पाउडर फार्मूलेशन में भी विकसित किया गया है, जो पूरी तरह से पानी में घुलनशील है और मशीन स्प्रेयर की मदद से आसानी से उपयोग किया जा सकता है.

आईसीएआर – आईएआरआई कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वाली तकनीकों और इनपुट उपयोग दक्षता बढ़ाने वाली तकनीकों के विकास व पहचान पर कार्य कर रहा है, जिस से नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त किया जा सके. नीम तेल लेपित यूरिया के उपयोग से नाइट्रस औक्साइड (N₂O) उत्सर्जन में लगभग 9 फीसदी की कमी लाई जा सकती है.

इसी तरह, ओलियोरेसिन लेपित यूरिया के उपयोग से धान में मीथेन उत्सर्जन 8.4 फीसदी और नाइट्रस औक्साइड (N₂O) उत्सर्जन 11.3 फीसदी तक कम हुआ है. गेहूं में नाइट्रस औक्साइड (N₂O) उत्सर्जन में 10.6 फीसदी की कमी देखी गई है. डायरेक्ट सीडेड राइस न केवल कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वाली तकनीक है, बल्कि इस में पानी उपयोग दक्षता भी अधिक होती है.

आईएआरआई उत्तर-पश्चिम भारत में धान और गेहूं की पराली जलाने की निगरानी और भारत में फसल अवशेष जलाने की स्थिति का रोजाना थर्मल सैटेलाइट रिमोट सैंसिंग के माध्यम से विश्लेषण करता है. धान और गेहूं जलाने की घटनाओं पर दैनिक बुलेटिन तैयार कर केंद्र एवं राज्य सरकार के हितधारकों को भेजे जाते हैं, ताकि वे आवश्यक नीतिगत और प्रशासनिक कदम उठा सकें.

पूसा फार्म सन फ्रिज, जिसे आईएआरआई द्वारा विकसित किया गया है, एक औफ ग्रिड, बिना बैटरी वाला सौर ऊर्जा चालित प्रशीतित एवं वाष्पीकरणीय शीतलन संरचना है. इस तकनीक का उद्देश्य कृषि क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित कोल्ड स्टोरेज प्रदान करना है, जिस से नाशवंत कृषि उत्पादों का भंडारण किया जा सके.

“पूसा मीफ्लाई किट” और “पूसा क्यूफ्लाई किट” तैयार उपयोग किट है, जो क्रमशः फलों और कुकुरबिट सब्जियों में फल मक्खी के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए विकसित की गई है. यह किट पराफेरोमोन इम्प्रेग्नेशन तकनीक का उपयोग कर के बैक्ट्रोसेरा प्रजाति की नर फल मक्खियों को आकर्षित और समाप्त करने में सक्षम है. एक बार लगाने पर, यह किट पूरे मौसम तक प्रभावी रहती है, जिस से फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन में वृद्धि होती है और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को रोका जा सकता है.

“पूसा व्हाइटफ्लाई अट्रैक्टेंट” एक नवीन प्रलोभक (ल्यूर) है, जिसे खेतों और बागवानी फसलों में सफेद मक्खियों को आकर्षित करने के लिए विकसित और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया गया है. इसे पीले स्टिकी ट्रैप्स के साथ उपयोग किया जा सकता है और यह समेकित कीट प्रबंधन और जैविक कृषि का एक महत्वपूर्ण घटक है.

Convocation

संस्थान का पूसा समाचार है खास, 6 भाषाओं में मिलती है जानकारी:

संस्थान ने वीडियो आधारित विस्तार मौडल “पूसा समाचार” विकसित किया है, जिस का उद्देश्य दूरदराज के किसानों तक कृषि सलाह पहुंचाना है. यह एक साप्ताहिक कार्यक्रम है, जो हिंदी, तेलुगु, कन्नड़, तमिल, बांग्ला और उड़िया सहित छह भाषाओं में उपलब्ध है और हर शनिवार शाम 7 बजे यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किया जाता है. इस की कुल दर्शक संख्या लगभग 1.3 मिलियन है.

पूसा व्हाट्सएप पर घर बैठे मिलती है सलाह:

‘पूसा व्हाट्सएप सलाह (9560297502) सेवा भी शुरू की गई है, जिस से किसान अपने प्रश्न पूछ सकते हैं और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त कर सकते हैं.

कृषि मेले में मिली ढेरों जानकारी :

संस्थान ने नवीनतम तकनीकों के प्रदर्शन और हितधारकों के बीच परस्पर सीखने को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक पूसा कृषि विज्ञान मेला आयोजित किया. इस वर्ष, यह मेला दिनांक 22 फरवरी से 24 फरवरी, 2025 के दौरान आयोजित किया गया था. इस का मुख्य विषय “उन्नत कृषि – विकसित भारत” था. इस मेले में एक लाख से अधिक किसानों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया था.

किसानों को मिला सम्मान:
संस्थान ने 41 किसानों को उन के नवाचारों के लिए “आईएआरआई फैलो” और “आईएआरआई इनोवेटिव फार्मर्स” के रूप में सम्मानित किया.

Agricultural Science Fair: दिल्ली में तीनदिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेला

22 फरवरी, 2025 को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली द्वारा आयोजित तीनदिवसीय “पूसा कृषि विज्ञान मेला 2025” का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया. इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक, आईएआरआई के निदेशक डा. सीएच श्रीनिवास राव, उपमहानिदेशक डा. डीके यादव सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान भाईबहन, कृषि वैज्ञानिक, कृषि उद्यमी, स्टार्टअप के प्रतिनिधि, खाद्य प्रसंस्करणकर्ता आदि उपस्थित रहे.

उद्घाटन भाषण में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प पूरा करने के लिए लगातार कृषि के क्षेत्र में हम काम कर रहे हैं. मैं भी किसान हूं, मेरे खेत में कद्दू लगा है, शिमला मिर्च भी है और टमाटर भी है. जब क्रौप बंपर आती है, तो कीमतें कई बार गिरती हैं. मैं फूलों की खेती भी करता हूं, गेहूं और धान की खेती भी करता हूं. मैं ऐसा किसान नहीं हूं कि मंत्री हूं तो साहब बन गया हूं, मैं महीने में 2 बार अपने खेत में पहुंचने की कोशिश करता हूं.

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर (ICAR) को बधाई देते हुए कहा कि आज जो किस्में दिखाई हैं, वे अपनेआप में बड़ी उपलब्धि हैं. वैज्ञानिक दिनरात मेहनत कर रहे हैं.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि हमारी 6 सूत्रीय रणनीति है. नंबर एक है उत्पादन बढ़ाना. उत्पादन बढ़ाने के लिए सब से प्रमुख चीज है अच्छे बीज. अच्छे बीज की वैरायटी बनाने का काम आईसीएआर (ICAR) कर रही है. हम कोशिश कर रहे हैं कि कैसे अच्छे बीज किसानों तक पहुंचें. ब्रीडर सीड, फाउंडेशन सीड के लिए हम तरीका निकालें कि कैसे वे किसान तक पहुंचें. बीज पहुंचाने के लिए विज्ञान और किसान को जोड़ना पड़ेगा. लैब टू लैंड, यह हम ने एक प्रयोग शुरू किया है आधुनिक कृषि चौपाल.

उन्होंने आईसीएआर (ICAR) को निर्देशित किया कि इस काम को अपने हाथ में ले ले. अगले महीने से आधुनिक कृषि चौपाल आईसीएआर (ICAR) करेगा.

कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि दूसरा प्रमुख काम है, उत्पादन लागत घटाना. उत्पादन बढ़ने से लागत घटती है. इस संबंध में कई योजनाएं भी हैं.

उन्होंने बताया कि 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भागलपुर में किसान सम्मान निधि के तहत किसानों के खाते में राशि भेजेंगे.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि मैं बिहार में मखाना उत्पादकों के बीच जाऊंगा, मखाना कैसे बोते हैं, वे देखेंगे. इस के पहले मैं सुपारी उत्पादकों के बीच गया था. अभी मैं ने पूसा में इंटीग्रेटेड फार्म देखा. एक हेक्टेयर में मछलीपालन, मुरगीपालन, तालाब था.

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि हमें किसानों की लागत का इंतजाम भी करना है. किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा 3 लाख से बढ़ा कर 5 लाख रुपए कर दी गई है. इस से फलसब्जी के किसान को फायदा मिलेगा.

उन्होंने बताया कि तीसरा कार्य है, उत्पादन का ठीक दाम देना. इस के लिए लगातार एमएसपी (MSP) पर बढ़ोतरी की गई है. किसान का गेहूं, चावल तो सरकार खरीदेगी ही, मसूर, उड़द, तुअर भी पूरी खरीदी जाएगी. इन चीजों का उत्पादन तब बढ़ेगा, जब उन को अच्छे दाम मिले. किसान जहां बेचता है, वहां सस्ता बिकता है और दिल्लीमुंबई में आ जाए तो महंगा हो जाता है. अभी टमाटर के रेट कम हो गए. हम ने योजना बनाई है कि नेफेड के माध्यम से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च केंद्र सरकार चुकाएगी, जिस से किसान को ठीक दाम मिलें.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सोयाबीन के रेट घटे, तो बाहर से आने वाले तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी 27.5 फीसदी कर दी. चावल के निर्यात पर प्रतिबंध था, हम ने उसे हटाया और एक्सपोर्ट ड्यूटी कम की. बीच का मुनाफा जो है, वह घटना चाहिए, इस को ले कर हम वर्कआउट कर रहे हैं.

मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मैं किसान संगठनों से नियमित मिलता हूं, मैं आज कुरुक्षेत्र जाऊंगा, चंडीगढ़ भी जाऊंगा. मुझे किसानों से सुझाव मिलते हैं.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्हें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बताया कि लाल मिर्ची की कीमत कम हो गई है. हम ने तय किया कि लाल मिर्ची को हम एमआईएस (MIS) योजना के तहत खरीदने की अनुमति देंगे.

उन्होंने कहा कि इसी तरह चौथा प्रमुख कार्य है कि जब प्राकृतिक आपदा में फसल खराब होती है, उस के लिए हम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से मदद करते हैं. किसानों को जो लोन मिलता है, वह 7 लाख करोड़ से बढ़ कर 25 लाख करोड़ रुपए हो गया है.

शिवराज सिंह ने किसान भाइयों को आमंत्रित किया कि जो सुझाव हो, दीजिए, उसे हम वर्कआउट करेंगे.

उन्होंने कहा कि विकसित भारत तभी बनेगा, जब कृषि उन्नत होगी. आज जो नई किस्म का प्रदर्शन हुआ है, कोशिश होगी कि जल्दी से जल्दी वह किसान तक पहुंचें.

उन्होंने बताया कि मैं ने मध्य प्रदेश में किसान के लिए योजना बनाई, तो किसान के बीच बैठ कर बनाई. मैं कल मखाने के पोखर में उतरूंगा और देखूंगा कि कैसे मखाने की खेती होती है. इसलिए अब वैज्ञानिक भी खेत में उतरेंगे.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक समय था, जब भारत को अमेरिका से पीएल 480 गेहूं मंगवा कर खाना पड़ता था, जबकि आज भारत कई देशों का पेट भर रहा है. ये हमारे किसानों की मेहनत से हुआ है. ऐसे कई प्रयत्न हमें करने हैं.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक बात और है कि अपने देश में कोई चीज हो न हो, 5 साल, 12 महीने चुनाव की तैयारी चलती रहती है. सालभर नहीं हुआ, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के चुनाव हुए, फिर लोकसभा चुनाव, फिर महाराष्ट्र, झारखंड, जम्मूकश्मीर, हरियाणा के चुनाव और उस के बाद दिल्ली का दंगल. इस चुनाव की तैयारी में सारे काम ठप हो जाते हैं, प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्री, अधिकारी सब चुनाव में लग जाते हैं. लांग टर्म की प्लानिंग नहीं हो पाती. अगर संशोधन कर के ये तय कर दिया जाए कि सभी चुनाव एक बार में होंगे, तो कैसा रहेगा? आओ, इस किसान मेले में संकल्प लें कि 5 साल में एक बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव होना चाहिए, ताकि सभी लोग जनता की सेवा में लग सकें.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने “नवोन्मेषी कृषक” और “अध्येता कृषक” पुरस्कारों से किसानों को सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी खेती में नई तकनीकों को अपना कर अनुकरणीय कार्य किए हैं.

मेले के दौरान किसानों को नवाचारों और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. मेले में किसानों के लिए उन्नत बीज, जैविक खाद, जलवायु अनुकूल तकनीक, ड्रोन स्प्रे तकनीक, स्मार्ट सिंचाई तकनीक और बाजार लिंकेज जैसी महत्वपूर्ण जानकारी 300 से अधिक स्टाल के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है. इस आयोजन से किसानों को नई तकनीकों को अपनाने, वैज्ञानिकों से सीधे बात करने और अपनी खेती को लाभदायक बनाने के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला है.