गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बीज खुद तैयार करें

गन्ने की खेती में बीज गन्ने की अच्छी क्वालिटी यानी गुणवत्ता पैदावार बढ़ाने में काफी खास है.

किसान अच्छी गुणवत्ता के बीज का इस्तेमाल कर के गन्ने की अच्छी उपज हासिल कर सकते हैं. आमतौर पर जो गन्ना चीनी मिल में नहीं जाता है या आसपास जो भी बीज मिलता है, उसे ही किसान बीज के रूप में इस्तेमाल कर लेते हैं. लेकिन इस प्रकार के बीजों में कई तरह के दोष हो सकते हैं, जैसे 10 महीने से ज्यादा उम्र का गन्ना, बीज में दूसरी प्रजाति के गन्ने का मिला होना, कीट व रोग से ग्रसित गन्ना आदि. इसलिए हर गन्ना किसान को बोआई के लिए खुद बीज तैयार करना चाहिए.

उम्दा बीज की खासीयतें

* बीज गन्ने की आयु 8-10 महीने की होनी चाहिए.

* बीज गन्ने में पानी (नमी) 65 फीसदी से कम नहीं होना चाहिए.

* बीज गन्ना कीट व रोगमुक्त होना चाहिए.

* बीज गन्ने में ज्यादा ग्लूकोज होना चाहिए.

* बीज गन्ने के खेत में दूसरी प्रजाति के गन्ने की मिलावट नहीं होनी चाहिए.

* बीज गन्ने की आंख खराब नहीं होनी चाहिए.

* बीज गन्ने की कटाई सिंगल बड विधि द्वारा की जानी चाहिए और कटिंग्स तिरछी नहीं होनी चाहिए.

Sugarcane Seeds

बीज उत्पादन में ध्यान देने वाली बातें

* गन्ना उत्पादक किसान बोआई के लिए अच्छी प्रजातियों के गन्ना बीज नलकूप या ट्यूबवेल के पास के खेत में जरूरत के मुताबिक गन्ना बीज उत्पादन के लिए लगाएं.

* वर्तमान में अगेती प्रजाति को 0238 के गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ रहा है. इस प्रजाति के अस्वीकार होने पर गन्ना किसानों और चीनी मिल मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है. जरूरत इस बात की है कि को 0238 प्रजाति की गुणवत्ता, रोगरोधक कूवत, चीनी परता को लंबे अरसे तक बनाए रखा जाए और इस के साथसाथ इस के समान अन्य प्रजातियों को 0118, कोशा 08272 का भी विस्तार हो. जब तक हर किसान गन्ने का बीज अपने खेत में नहीं उगाएगा और गन्ना उगाने की ऐसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं करेगा, जिस से कि कम मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाली प्रजातियों के बीज का तेजी से विस्तार हो, तब तक अच्छी चीनी हासिल करने और उत्पादकता बनाए रखने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकेगा.

* गन्ने को बीज गन्ने में बदलने के लिए यह जरूरी है कि जिस खेत से गन्ना बीज ले जाना है, उस का वह हिस्सा बीज गन्ने के लिए चुनें, जो स्वस्थ हो, अच्छी पैदावार देने वाला हो और उस पर किसी रोग या कीट का हमला न हो. ऐसे इलाके को चुनने के बाद पानी रोकने के लिए मेंड़ बनाएं, जिस से इस में पानी लगाने के बाद पानी खेत के अन्य हिस्सों में न फैले. चुने गए क्षेत्र से बीज गन्ना हासिल करने से 1 हफ्ते पहले सिंचाई के जरीए 40 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर यूरिया के साथ इस्तेमाल करें और गन्ने का एक तिहाई भाग ही बीज गन्ने के रूप में इस्तेमाल करें, जिस से चुने हुए बीज गन्ने का जमाव अच्छा हो.

* चुने हुए खेत की पूरी तैयारी करने के बाद प्राथमिक पौधशाला से हासिल बीज गन्ना के सेट्स काटने से पहले चुने खेत में एक कोने पर बीज के इलाज के लिए जरूरत के मुताबिक एक गड्ढा तैयार करें और उस में पौलिथीन बिछा दें. गड्ढे में 1 फीसदी बाविस्टीन का घोल तैयार कर लें और इसी गड्ढे में बीज गन्ना सेट्स की कटाई शुरू करें, जिस से कटे सेट्स इस गड्ढे में जाते रहें और सेट्स का बीज उपचार अच्छी तरह से हो सके.

Sugarcane Seeds

सेट्स कटाई के दौरान यह जरूर देखें कि कोई बीज किसी रोग या कीड़े से प्रभावित न हो, ऐसे सेट्स को अलग कर लें.

* अच्छी क्वालिटी के बीजों की पैदावार के लिए जमीन उपचार, बोआई, सिंचाई, उर्वरक और फर्टीलाइजर और कीट रोग नियंत्रण सभी काम गन्ना उत्पादक तकनीक के मुताबिक ही करें. साथ ही रोगों और कीटों की रोकथाम के लिए पौधशाला पर खास ध्यान दें.

* बीजों का उपचार बाविस्टीन, कार्बंडाजिम, माइक्रोजिम व ट्राइकोडर्मा से करने से पहले 52-54 डिगरी सेंटीग्रेड गरम पानी में 2 घंटे तक करें, जिस से घासीप्ररोह, उकठा, कंडुआ व लालसड़न रोग की रोकथाम हो सके.

बोआई सिंगल बड द्वारा ट्रैंच विधि से आंख से आंख की दूरी 2 फुट और लाइन से लाइन की दूरी 4.5 फुट रख कर करें. ट्रैंच में मिट्टी का इस्तेमाल 2-3 सेंटीमीटर से ज्यादा न करें. बीजों को मिट्टी से ढकने के बाद जरूरत के मुताबिक हलकी सिंचाई करें.

* पोषक तत्त्वों का इस्तेमाल व कीड़ों व रोगों की रोकथाम दूसरी फसलों की तरह करें. इस तरह 0238 प्रजाति को काफी समय तक किसानों के हित में उपयोगी बनाए रखने में मदद मिलेगी.

* तैयार नर्सरी से बीजों की कटाई से पहले सिंचाई के साथसाथ 40 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से दें. इस से बीजों की क्वालिटी अच्छी हो जाती है.

गन्ने की खेती को आसान बनाते यंत्र

आमतौर पर गन्ने की बोआई शरदकाल में 15 अक्तूबर से 15 नवंबर माह के बीच या वसंत के मौसम में 15 फरवरी से 15 मार्च तक की जाती है. पहले साल गन्ना बीज से फसल बोआई की जाती है, उस के बाद अगले 2 सालों तक फसल काटने के बाद ठूंठ बचते हैं, उन ठूंठों में से दोबारा अंकुरण होता है और पैदावार मिलती है. इसे पेड़ी या खूंटी फसल कहते हैं.

पहली बार फसल पैदावार के मुकाबले दूसरे व तीसरे साल फसल उपज में कुछ कमी आ जाती है, लेकिन अगर फसल प्रबंधन का खास ध्यान रखा जाए तो ये फसलें भी पहले साल जैसी पैदावार दे सकती हैं.

गन्ने की खेती में काम आने वाले कृषि यंत्रों का प्रयोग कर किसान अपनी लागत में तो कमी ला ही सकता है, बल्कि अधिक मुनाफा भी कमा सकता है.

गन्ना लोडर

यह यंत्र गन्ने की कटाई के पश्चात इसे मिल पर पहुंचाने के लिए ट्रौली में लोड करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. यह यंत्र 55 हौर्सपावर की क्षमता या इस से अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टरों के हाइड्रोलिक के सहारे से संचालित होता है, जो 5 मीटर की ऊंचाई पर गन्ने को आसानी से लोड कर देता है. इस के मजबूत स्टील फ्रेमों से एक बार में अधिक गन्ने को लादा जा सकता है.

गन्ना लोडर से जहां कटाई के बाद गन्ने की क्षति को कम किया जा सकता है, वहीं 90 फीसदी मानव श्रम में कमी लाते हुए लागत में भी कमी लाई जा सकती है. इस मशीन की बाजार में अनुमानित कीमत 4 लाख रुपए से ले कर 6 लाख रुपए तक है.

गन्ने की खेती में रिजर

यह गन्ने की बोआई में प्रयोग आने वाला एक यंत्र है, जो ट्रैक्टर में कल्टीवेटर की तरह फिट किया जाता है. यह किसी भी सामान्य क्षमता के ट्रैक्टर से जोड़ कर चलाया जा सकता है.

यह मशीन गन्ने की बोआई के लिए निर्धारित दूरी पर नालियां बनाता है. गहराई का निर्धारण ट्रैक्टर चालक द्वारा किया जाता है. इस मशीन में श्रम शक्ति की अधिक आवश्यकता होती है. इस से 8 घंटे में 2 एकड़ खेत की बोआई में 15-20 आदमियों की जरूरत होती है.

इस मशीन से बोआई में पहले गन्ने को टुकड़ों में काटा जाता है. साथ ही, इस की कटाई के बाद टुकड़े की नालियों में रोपाई की जाती है, फिर ऊपर से खाद का बुरकाव किया जाता है. इस के उपरांत इन नालियों को गिरा कर पाटा लगाया जाता है. इस यंत्र से बोआई करने में लागत व श्रम अधिक लगता है. इस यंत्र की अनुमानित कीमत 50,000 रुपए है.

गन्ने की खेती में पावर वीडर

गन्ने की फसल की गुड़ाई व खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रयोग किया जाने वाला यह यंत्र मानव श्रम में बचत का अच्छा साधन है. इस यंत्र की कीमत 70,000 से एक लाख रुपए तक है, जो डीजल इंजन से संचालित होता है.

इस यंत्र में 2 हत्थे लगे होते हैं. इस मशीन द्वारा किसान एक दिन में तकरीबन एक एकड़ खेत की गुड़ाई आसानी से कर सकता है.

प्रगतिशील किसान राममूर्ति मिश्र ने 2 एकड़ खेत में गन्ना बोया है. वे पावर वीडर के द्वारा गन्ने की खेती में गुड़ाई व खरपतवार नियंत्रण के ऊपर होने वाले मानव श्रम के खर्च में 80 फीसदी कमी लाने में सफल रहे हैं.

उन का कहना है कि पावर वीडर से गुड़ाई करने में प्रतिघंटा एक लिटर डीजल की खपत है, जिस पर महज 300 रुपए खर्च होता है और श्रमिकों से गुड़ाई कराने में एक एकड़ में 25 श्रमिकों की जरूरत पड़ती है, जिस पर तकरीबन 10,000 रुपए का खर्चा आता है. इस तरह न केवल किसान मशीनों का प्रयोग कर गन्ने की खेती को आसान बना सकते हैं, बल्कि लाभदायक भी बना सकते हैं.

अधिक जानकारी के लिए इस पते पर संपर्क कर सकते हैं :

सूरत सिंह, श्रीजी हैवी प्रोजैक्ट वर्क्स लि., शुगर केंद्र्र क्राप सोल्यूशन, ए-504, अंधेरीकुर्ला रोड, अंधेरी ईस्ट मुंबई-400049, मोबाइल नंबर  है: 9416853266.

शीत ऋतु में गन्ने की वैज्ञानिक खेती

गन्ना एक नकदी फसल है, जिस से गुड़, चीनी, शराब आदि बनाए जाते हैं. वहीं दूसरी ओर ब्राजील देश में गन्ने का उत्पादन सब से ज्यादा होता है. भारत का गन्ने की उत्पादकता में संपूर्ण विश्व में दूसरा स्थान है.

गन्ने को मुख्यत: व्यावसायिक चीनी उत्पादन करने वाली फसल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो कि विश्व में उत्पादित होने वाली चीनी के उत्पादन में तकरीबन 75 फीसदी योगदान करता है, शेष में चुकंदर, मीठी ज्वार इत्यादि फसलों का योगदान है.

गन्ने का प्रयोग बहुद्देशीय फसल के रूप में चीनी उत्पादन के साथसाथ अन्य उत्पाद जैसे कि पेपर, इथेनाल एल्कोहल, सैनेटाइजर, बिजली उत्पादन व जैव उर्वरक के लिए कच्चे पदार्थों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

उपयुक्त भूमि, मौसम व खेत की तैयारी

उपयुक्त भूमि : गन्ने की खेती मध्यम से भारी काली मिट्टी में की जा सकती है. दोमट भूमि, जिस में सिंचाई की उचित व्यवस्था व जल का निकास अच्छा हो और जिस का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच हो, गन्ने के लिए सर्वोत्तम  है. उपयुक्त मौसम में गन्ने की बोआई वर्षा में दो बार की जा सकती है.

शरदकालीन बोआई अक्तूबरनवंबर में इस फसल की बोआई करते हैं और फसल 10 से 14 माह में तैयार होती है. वसंतकालीन बोआई फरवरी से मार्च माह तक फसल बोते हैं. यह फसल 10 से 12 माह में तैयार होती है.

नोट : शरदकालीन गन्ने वसंत में बोए गए गन्ने से 25-30 प्रतिशत व ग्रीष्मकालीन गन्ने से 30-40 प्रतिशत अधिक पैदावार देता है.

खेत की तैयारी

खेत की ग्रीष्मकाल में 15 अप्रैल से 15 मई के पूर्व एक गहरी जुताई करें. इस के पश्चात 2 से 3 बार देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई कर के और रोटावेटर व पाटा चला कर खेत को भुरभुरा, समतल और खरपतवाररहित कर लें. रिजर की सहायता से 3 से 4.5 फुट की दूरी पर 20-25 सैंटीमीटर गहरी कूंड़ें बनाएं.

उपयुक्त किस्म, बीज का चयन व तैयारी गन्ने के सारे रोगों की जड़ अस्वस्थ बीज का उपयोग ही है. गन्ने की फसल उगाने के लिए पूरा तना न बो कर इस के 2 या 3 आंख के टुकड़े काट कर उपयोग में लाएं. गन्ने की ऊपरी भाग की अंकुरण क्षमता 100 प्रतिशत, बीच में 40 प्रतिशत और निचले भाग में केवल 19 प्रतिशत ही होती है. 2 आंख वाला टुकड़ा सर्वोत्तम रहता है.

Sugarcaneगन्ना के बीज का चुनाव करते समय बरतें सावधानियां

* उन्नत जाति के स्वस्थ निरोग शुद्ध बीज को ही लें.

* गन्ना बीज की उम्र लगभग 8 माह या कम हो, तो अंकुरण अच्छा होता है. बीज ऐसे खेत से लें, जिस में रोग व कीट का प्रकोप न हो. जिस में खादपानी समुचित मात्रा में दिया जाता रहा हो.

* जहां तक हो, नरमगरम हवा उपचारित (54 सैंटीग्रेड और 85 प्रतिशत आर्द्रता पर 4 घंटे) या टिश्यू कल्चर से उत्पादित बीज का ही चयन करें.

* हर 4-5 साल बाद बीज बदल दें, क्योंकि समय के साथ रोग व कीट लगने में वृद्धि होती जाती है.

* बीज काटने के बाद कम से कम समय में बोनी कर दें.

गन्ने की उन्नत जातियां

को. 05011 (कर्ण-9), को.से. 11453, को.षा. 12232, को.षा. 08276, यू.पी. 05125, को. 0238 (कर्ण-4), को. 0118 (कर्ण-2), को.से. 98231, को.शा. 08279, को.शा. 07250, को.शा. 8432, को.शा. 96269 (शाहजहां), को.शा. 96275 (स्वीटी) आदि. ये जातियां उत्तर प्रदेश के लिए संस्तुत की गई हैं.

गन्ना बोआई का सब से उपयुक्त समय 

अक्तूबरनवंबर महीना ही क्यों चुनें

* फसल में अग्रवेधक कीट का प्रकोप नहीं होता.

* फसल वृद्धि के लिए अधिक समय मिलने के साथ ही अंतरवर्तीय फसलों की भरपूर संभावना.

* अंकुरण अच्छा होने से बीज कम लगता है और कल्ले अधिक फूटते हैं.

* अच्छी बढ़वार की वजह से खरपतवार कम होते हैं.

* सिंचाई जल की कमी की दशा में, देर से बोई गई फसल की तुलना में नुकसान कम होता है.

* फसल के जल्दी पकाव पर आने से कारखाने जल्दी पिराई शुरू कर सकते हैं.

* जड़ फसल भी काफी अच्छी होती है.

बीज की मात्रा

75-80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर 2 आंख वाले टुकड़े लगेंगे.

बीजोपचार

बीजजनित रोग व कीट नियंत्रण के लिए कार्बंडाजिम 2 ग्राम प्रति लिटर पानी व क्लोरोपायरीफास 5 मिलीलिटर प्रति लिटर की दर से घोल बना कर आवश्यक बीज का 15 से 20 मिनट तक उपचार करें.

खाद और उर्वरक

फसल के पकने की अवधि लंबी होने के कारण खाद और उर्वरक की आवश्यकता भी अधिक होती है. इसलिए खेत की अंतिम जुताई से पहले 20 टन सड़ी गोबर या कंपोस्ट खाद खेत में समान रूप से मिला देना चाहिए.

इस के अतिरिक्त 180 किलोग्राम नत्रजन (323 किलोग्राम यूरिया), 80 किलोग्राम फास्फोरस (123 किलोग्राम डीएपी) और 60 किलोग्राम पोटाश (100 किलोग्राम म्यूरेट औफ पोटाश) प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए. फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बोआई के समय प्रयोग करें और नत्रजन की मात्रा को इस प्रकार प्रयोग करें. गन्ने में नत्रजन की कुल मात्रा को चार समान भागों में बांट कर बोवनी के क्रमश: 30, 90, 120 और 150 दिन में प्रयोग करें.

वसंतकालीन गन्ना

गन्ने में नत्रजन की कुल मात्रा को 3 समान भागों में बांट कर बोवनी क्रमश: 30, 90 और 120 दिन में प्रयोग करें.

नत्रजन को उर्वरक के साथ नीमखली के चूर्ण में मिला कर प्रयोग करने में नत्रजन उर्वरक की उपयोगिता बढ़ती है. साथ ही, दीमक से भी सुरक्षा मिलती है. 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट व 50 किलोग्राम फेरस सल्फेट 3 वर्ष के अंतराल में जिंक व आयरन सूक्ष्म तत्त्व की पूर्ति के लिए आधार खाद के रूप में बोआई के समय उपयोग करें.

जल प्रबंधन :

सिंचाई व जल निकास

गरमी के दिनों में भारी मिट्टी वाले खेतों में 8-10 दिन के अंतर पर और सरदी के दिनों में 15 दिन के अंतर से सिंचाई करें. हलकी मिट्टी वाले खेतों में 5-7 दिनों के अंतर से, जबकि गरमी के दिनों में 10 दिन के अंतर से सिंचाई करें.

सिंचाई की मात्रा कम करने के लिए गरेड़ों में गन्ने की सूखी पत्तियों की पलवार की 10-15 सैंटीमीटर की तह बिछाएं. गरमी में पानी की मात्रा कम होने पर एक गरेड़ छोड़ कर सिंचाई दे कर फसल बचावें. कम पानी उपलब्ध होने पर ड्रिप सिंचाई (टपक विधि) से करने से भी 60 प्रतिशत पानी की बचत होती है.

गरमी के मौसम में फसल 5-6 महीने तक की होती है, स्प्रिंकलर (फव्वारा) विधि से सिंचाई कर के 40 प्रतिशत पानी की बचत की जा सकती है. वर्षा के मौसम में खेत में उचित जल निकास का प्रबंध रखें. खेत में पानी के जमा होने से गन्ने की बढ़वार और रस की क्वालिटी प्रभावित होती है.

खाली स्थानों की पूर्ति

कभीकभी पंक्तियों में कई जगहों पर बीज अंकुरित नहीं हो पाता है. इस बात को ध्यान में रखते हुए खेत में गन्ने की बोआई के साथसाथ अलग से सिंचाई स्रोत के नजदीक एक नर्सरी तैयार कर लें. इस में बहुत ही कम अंतराल पर एक आंख के टुकड़ों की बोआई करें. खेत में बोआई के एक माह बाद खाली स्थानों पर नर्सरी में तैयार पौधों को सावधानीपूर्वक निकाल कर रोपाई कर दें.

खरपतवार प्रबंधन :

अंधी गुड़ाई

गन्ने का अंकुरण देर से होने के कारण कभीकभी खरपतवारों का अंकुरण गन्ने से पहले हो जाता है. इस के नियंत्रण के लिए एक गुड़ाई करना आवश्यक होता है, जिसे अंधी गुड़ाई कहते हैं.

निराईगुड़ाई

आमतौर पर प्रत्येक सिंचाई के बाद एक गुड़ाई आवश्यक होगी. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि ब्यांत अवस्था (90-100 दिन) तक निराईगुड़ाई का काम निबटा लें.

मिट्टी चढ़ाना

वर्षा प्रारंभ होने तक फसल पर मिट्टी चढ़ाने का काम पूरा कर लें (120 से 150 दिन).

रासायनिक नियंत्रण

बोआई के पश्चात अंकुरण से पहले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए एट्राजीन 2.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 600 से 800 लिटर पानी में घोल बना लें और बोआई के एक सप्ताह के अंदर खेतों में समान रूप से इस घोल का छिड़काव कर दें.

खड़ी फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए 2-4-डी सोडियम साल्ट 2.8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 600 से 800 लिटर पानी का घोल बना कर बोआई के 45 दिन बाद छिड़काव करें.

सकरी मिश्रित खरपतवार के लिए 2-4-डी सोडियम साल्ट 2.8 किलोग्राम मैट्रीब्यूजन 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 600 से 800 लिटर पानी का घोल बना कर बोआई के 45 दिन बाद छिड़काव करें.

उपरोक्त नीदानाशकों के उपयोग के समय खेत में नमी आवश्यक है.

अंतरवर्ती खेती

गन्ने की फसल की बढ़वार शुरू के 2-3 माह तक धीमी गति से होती है. गन्ने की 2 कतारों के बीच का स्थान काफी समय तक खाली रह जाता है. इस बात को ध्यान में रखते हुए यदि कम अवधि की फसलों को अंतरवर्ती खेती के रूप में उगाया जाए, तो निश्चित रूप से गन्ने की फसल के साथसाथ प्रति इकाई अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो सकती है. इस के लिए निम्न फसलें अंतरवर्ती खेती के रूप में उगाई जा सकती हैं.

शरदकालीन खेती

गन्ना+आलू (1:2), गन्ना+प्याज (1:2), गन्ना+मटर (1+1), गन्ना+धनिया (1:2) गन्ना+चना (1:2), गन्ना+गेंहू (1:2).

वसंतकालीन खेती

गन्ना+मूंग (1+1), गन्ना+उड़द (1+1), गन्ना+धनिया (1:3), गन्ना+मेथी (1:3).

गन्ने की कटाई

फसल की कटाई उस समय करें, जब गन्ने में सुक्रोज की मात्रा सब से अधिक हो, क्योंकि यह अवस्था थोड़े समय के लिए होती है. जैसे ही तापमान बढ़ता है, सुक्रोज का ग्लूकोज में परिवर्तन प्रारंभ हो जाता है और ऐसे गन्ने से शक्कर व गुड़ की मात्रा कम मिलती है.

कटाई से पहले पकाव का सर्वेक्षण करें इस के लिए रिफ्लैक्टोमीटर का उपयोग करें. यदि माप 18 या इस के ऊपर है, तो गन्ना परिपक्व होने का संकेत है. गन्ने की कटाई गन्ने की सतह से करें.

अधिक उपज लेने के लिए प्रमुख बिंदु

गन्ना फसल के लिए 8 माह की आयु का ही गन्ना बीज उपयोग करें. शरदकालीन गन्ना (अक्तूबरनवंबर माह) की ही बोआई करें.

गन्ना की बोआई कतार से कतार की दूरी 120-150 सैंटीमीटर दूरी पर गीली कूंड पद्धति से करें. बीजोपचार (फफूंदनाशक कार्बंडाजिम 2 ग्राम प्रति लिटर और कीटनाशक क्लोरोपायरीफास 5 मिलीलिटर प्रति लिटर 15-20 मिनट तक डुबा कर) ही बोआई करें.

जड़ प्रबंधन के तहत ठूंठ जमीन की सतह से काटना, गरेड़ तोड़ना, फफूंदनाशक व कीटनाशक से ठूंठ का उपचार, गेप फिलिंग, संतुलित उर्वरक (एनपीके-300:85:60) का उपयोग करें. गन्ने की फसल की कतारों के मध्य कम समय में तैयार होने वाली फसलों चना, मटर, धनिया, आलू, प्याज आदि फसलें लें खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सक्रिय तत्त्व की दर से बोआई के 3 से 5 दिन के अंदर करें और 2-4-डी 750 ग्राम प्रति हेक्टेयर सक्रिय तत्त्व 35 दिन के अंदर छिड़काव करें.

गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में टपक सिंचाई पद्धति को प्रोत्साहन दिया जाए. गन्ना क्षेत्र विस्तार के लिए गन्ना उत्पादक किसानों के समूहों को शुगर केन हारवेस्टर, पावर बडचिपर व अन्य उन्नत कृषि यंत्रों को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाना चाहिए.