इंटीग्रेटेड खेती केवल अनाज तक सीमित न रहकर पशुपालन के साथ समन्वित होनी चाहिए. यह बात शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री ने कही. उन्होंने आगे कहा कि ऊंट, Camel Milk and Integrated Farming घोड़े और भेड़ जैसे पशुओं को पर्यटन, स्वास्थ्य और आजीविका से जोड़कर प्रासंगिक बनाना जरूरी है.

समन्वित कृषि प्रणाली से खेती बनती लाभकारी

इंटीग्रेटेड खेती को केवल अनाज उत्पादन तक सीमित रखना अब समय के अनुसार नहीं है, बल्कि इसमें फल, सब्जी एवं पशुपालन विशेषकर राजस्थान जैसे राज्य में ऊंट, भेड़ और बकरीपालन को भी सम्मिलित करना आज की जरूरत है. समन्वित कृषि प्रणाली अपनाने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ खेती अधिक लाभकारी बनेगी. Camel Milk and Integrated Farming

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा

-शीघ्र ही बीकानेर स्थित भाकृअनुप के विभिन्न संस्थानों के साथ एक महत्त्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे और उन्हें समयबद्ध रूप से प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा.

-विशिष्ट फसलों, उन्नत बीजों, औषधीय खेती, विशेष रूप से खेजड़ी के महत्त्व और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा.

-इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से मिलेगा सहयोग.

‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान : लाभकारी कदम

ऊंटनी का दूध स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है और इसके सेवन से मधुमेह जैसी बीमारियों के प्रबंधन में सहायता मिल सकती है. केंद्रीय कृषि मंत्री ने केंद्र द्वारा संचालित ‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान की सराहना करते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया.

उन्होंने राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र की विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों जिसमें, भाकृअनुप संस्थानों की ‘उन्नत कृषि एवं पशुधन प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी’, ऊंट फार्म में नवजात (टोरडियों) की देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी कार्यों व उष्ट्र डेयरी में स्वच्छ उत्पादन, प्रसंस्करण एवं संकलन से जुड़ी वैज्ञानिक गतिविधियों और उष्‍ट्र संग्रहालय का अवलोकन किया और उनकी सराहना की.

रेगिस्तान का जहाज है खास

शिवराज सिंह चौहान ने स्मरणीय उद्यान में पौधा रोपण और ऊंटगाड़ी की सवारी भी की और मौके पर मौजूद रहे डॉ. एम. एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, नई दिल्ली, ने कहा कि यदि बीकानेर में स्थित भाकृअनुप के सातों संस्थान एक टीम के रूप में कार्य करें, तो थार क्षेत्र में स्थायी विकास एवं खुशहाली सुनिश्चित हो सकती है.

डॉ. एम. एल. जाट ने ‘रेगिस्तान का जहाज’ कहे जाने वाले ऊंट के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलते परिवेश में ऊंटों की उपयोगिता को और अधिक प्रासंगिक सिद्ध करने की आवश्यकता है. ऊंट को बहुआयामी पशु के रूप में स्थापित करने और उसके संरक्षण, आजीविका और आर्थिक उपयोग से जुड़े पहलुओं पर प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए वैज्ञानिकों को अनुसंधान में नवाचार अपनाने को प्रोत्साहित किया. Camel Milk and Integrated Farming

कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनिल कुमार पूनिया, निदेशक, एनआरसीसी, बीकानेर, ने केंद्र में संचालित अनुसंधान गतिविधियों और ऊंटनी के दूध के प्रति सामाजिक जागरूकता व इसे प्रोत्साहित करने हेतु चलाए जा रहे ‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान की जानकारी दी. Camel Milk and Integrated Farming

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