भारत की कृषि सिर्फ हल और बीज से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच, दीर्घकालिक शोध और किसानों के साथ गहरे संवाद से आगे बढ़ी है. प्रयोगशालाओं में जन्मे विचार जब खेतों तक पहुंचते हैं, तब वे केवल फसल नहीं, बल्कि किसान की आय, आत्मनिर्भरता और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करते हैं. Padma Award 2026

पद्म पुरस्कार 2026 के संदर्भ में, कृषि वैज्ञानिक उन बदलावों के सच्चे सूत्रधार हैं जिन्होंने भारतीय खेती को पारंपरिक दायरे से निकालकर वैश्विक पहचान दिलाई. जानिएं ऐसे कृषि वैज्ञानिकों के बारे में –

डॉ. अशोक कुमार सिंह: बासमती की खुशबू से वैश्विक पहचान

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा के पूर्व निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह को बासमती चावल की उन्नत किस्मों के विकास के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है. उन्होंने पूसा बासमती 1509 और 1692 जैसी किस्में विकसित कीं, जो कम समय में तैयार होती हैं, रोग-रोधी हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रखती हैं. Padma Award 2026

इस नवाचार से किसानों को फसल चक्र में विविधता का मौका मिला—धान के बाद आलू, मटर, मक्का और सूरजमुखी जैसी फसलें संभव हुईं, जिससे आय कई गुना बढ़ी.

डॉ. पी. एल. गौतम: बीजों के संरक्षक

डॉ. पी. एल. गौतम ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और PPVFRA के अध्यक्ष के रूप में किसानों के बीज अधिकारों को मजबूत किया. उन्होंने पारंपरिक किस्मों के पंजीकरण, जीन बैंक और जैव संसाधनों के संरक्षण की ऐसी व्यवस्था बनाई, जिससे किसान और वैज्ञानिक एक-दूसरे के सहयोगी बने, प्रतिस्पर्धी नहीं.

डॉ. गोपाल त्रिवेदी: पूर्वी भारत की कृषि शिक्षा को नई दिशा

राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा, बिहार) के पूर्व कुलपति डॉ. गोपाल त्रिवेदी ने कृषि शिक्षा को जमीन से जोड़ा. उन्होंने लीची, मखाना, सिंघाड़ा और शीतकालीन मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों को धान-गेहूं के चक्र से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया. Padma Award 2026

डॉ. के. रामासामी: कृषि शिक्षा का आधुनिकीकरण

तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. के. रामासामी ने जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य और किसान-वैज्ञानिक संवाद को मजबूत किया. उनके प्रयासों से शोध सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेतों तक पहुंचा.

डॉ. एन. पुन्नियमूर्ति: पशुपालन को वैज्ञानिक आधार

तमिलनाडु पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (TANVASU) के पूर्व डीन डॉ. एन. पुन्नियमूर्ति ने पशु स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप दिया. उनके शोध से लाखों पशुपालकों की आय और पशुओं की उत्पादकता बढ़ी.

इन सभी वैज्ञानिकों का योगदान इस बात का प्रमाण है कि जब शोध किसान की ज़रूरतों से जुड़ता है, तब वह नीति, शिक्षा और उत्पादन—तीनों को नई दिशा देता है. पद्म पुरस्कार 2026 केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है जिसमें कृषि को प्रयोगशाला से निकालकर खेत, किसान और बाजार तक पहुँचाया गया. Padma Award 2026

ये वैज्ञानिक आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश देते हैं कि भारतीय कृषि का भविष्य नवाचार और जमीनी सच्चाई से जुड़ाव में ही निहित है.

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