Employment : भारत में मुरगीपालन का चलन तेजी से पनप रहा है. इस रोजगार की शुरुआत कम पैसों से भी की जा सकती है. इस काम को ग्रामीण इलाकों में आसानी से किया जा सकता है.

कारोबार शुरू करने से पहले यह जरूर तय कर लें कि आप किस तरह की मुरगीपालन का काम करना चाहते हैं. मुरगीपालन कारोबार 2 तरह का होता है. पहला अंडों के लिए और दूसरा चिकन (मांस) के लिए. अंडों के कारोबार के लिए आप को लेयर मुरगियां पालनी होंगी और चिकन कारोबार के लिए ब्रायलर मुरगियां पालनी होंगी.

मुरगीपालन का काम कम पैसे, कम जगह और कम मेहनत से शुरू किया जा सकता है. मुरगीपालन शुरू करने से पहले किसी योग्य जगह से ट्रेनिंग ले लें तो यह काम और आसान हो जाता है साथ ही, मुरगीपालन में सही लाभ भी मिलता है. इस काम के लिए हमें सही नस्लों का चयन करना चाहिए.

अपने वातावरण व इलाके के मुताबिक मुरगी की नस्ल का चुनाव करें. आजकल बाजार में अनेक संकर नस्ल की मुरगियां भी मौजूद हैं जो अंडा व मांस दोनों के लिए काफी उम्दा हैं.

कई बार आम लोगों में यह भी धारणा होती है कि फार्मों के अंडे के मुकाबले देशी मुरगियों के अंडे ज्यादा पौष्टिक होते हैं. लेकिन पोल्ट्री वैज्ञानिकों का मानना है कि देशी के मुकाबले फार्म वाली मुरगी के अंडे ज्यादा उम्दा होते हैं क्योंकि उन्हें फार्म में वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाता है, फार्मों में मुरगियों को संतुलित आहार भी दिया जाता है और उन के खानेपीने के साथसाथ बेहतर रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाता है जबकि घरेलू देशी मुरगीपालन में ऐसा नहीं होता. उस में कई बार बचाखुचा खाना खाती हैं, गंदा पानी पीती हैं और साफसफाई का ध्यान नहीं रखा जाता.

अंडा और मांस के लिए मुरगीपालन

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मुरगीपालन परियोजना, हैदराबाद के द्वारा 3 खास प्रजाति विकसित की गई हैं. यह प्रजातियां अंडे और मांस दोनों के लिए लाभदायक हैं. आमतौर पर देखा जाता है कि बहुत से मुरगीपालक सामान्य मुरगियों का पालन करते हैं जिन की नस्ल के बारे में उन्हें भी जानकारी नहीं होती. बेहतर है कि वह जानकारी ले कर ही संकर नस्ल की प्रजाति का पालन करें जिस से अंडे और मांस दोनों के कारोबार में फायदा मिले.

ग्रामप्रिया : यह दोहरी उपयोगिता वाली प्रजाति है. इस का मतलब यह है कि यह अंडा और मांस दोनों के लिए उपयोगी है. 18 महीने में यह 240 से 250 अंडे तक दे सकती है और इस का वजन 1.5 किलोग्राम से 2 किलोग्राम होता है.

श्रीनिधि प्रजाति : यह प्रजाति ग्रामीण प्रजाति की मुरगी के मुकाबले 230-250 अंडे देती है. श्रीनिधि मुरगियों का वजन 2.5 किलोग्राम से ले कर 5 किलोग्राम तक का होता है जो कि ग्रामीण प्रजाति की मुरगियों से बहुत ज्यादा है. इसलिए यह दोहरी उपयोगिता प्रजाति में गिनी जाती है. इस के मांस और अंडे दोनों से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है. इन प्रजातियों की मुरगियां तेजी से बढ़ती हैं.

वनराजा : वनराजा प्रजाति की मुरगियां भी ग्रामीण परिवेश के लिए काफी अच्छी मानी जाती हैं. यह मुरगी 120 से 130 अंडे 3 महीने में देती है. देशी मुरगीपालन के लिए यह 3 विकसित प्रजातियां बहुत ही फायदेमंद साबित हुई हैं. आप भी अगर देशी मुरगी पालना चाहते हैं तो यह तीनों प्रजातियों को जरूर अपनाएं. सही मुरगीपालन की विधि से ज्यादा मुनाफा कमाएं.

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