DAP stock : किसानों को आने वाले सीजन में खाद की किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए भारत ने किसानों के लिए बहुत जरूरी डीएपी खाद की बड़ी खरीद का फैसला किया हैं. सरकार को लगता है कि ईरान में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में खाद की सप्लाई पर असर पड़ सकता हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने रिकॉर्ड 13.5 लाख टन डायरेक्ट एक्टेड फॉस्फेट आयात का फैसला लिया हैं. यह अब तक की सबसे बड़ी डीएपी डील मानी जा रही हैं.
क्यो हुइ DAP इतनी महत्वपूर्ण ?
डाय-अमोनियम फॉस्फेट, जिसे डीएपी कहा जाता है, खेती में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख उर्वरकों में से एक है. किसान फसलों को जरूरी पोषक तत्व देने और बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए इसका उपयोग करते हैं. यह खाद पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने और फसल की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. भारत में खेती बड़े पैमाने पर होती है, इसलिए हर साल डीएपी की बहुत मांग रहती है. लेकिन घरेलू उत्पादन जरूरत के मुकाबले कम होने की वजह से देश को इसका बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता हैं.
पहले से ही तैयारी क्यों?
वैश्विक स्तर पर खाद की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है. ईरान के संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है. इस आशंका को ध्यान में रखते हुए, भारत पहले से ही बड़ा स्टॉक जमा करने में जुटा है, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो.
इंडियन पोटाश लिमिटेड ने की एक बड़ी डीएपी डील
इंडियन पोटाश लिमिटेड ने एक बड़ी डीएपी डील को अंतिम रूप दिया है. इस डील में, कंपनी ने पश्चिमी तट के लिए 7.65 लाख टन डीएपी 930 डॉलर प्रति टन के भाव पर खरीदा है, जबकि पूर्वी तट के लिए 5.81 लाख टन डीएपी 935 डॉलर प्रति टन की दर से खरीदने का समझौता किया गया है.
इंडियन पोटाश लिमिटेड ने अप्रैल में 12 लाख टन डीएपी आयात के लिए टेंडर जारी किया था, लेकिन कंपनियों से कुल 23 लाख टन के ऑफर मिले. कई सप्लायर्स ने कम कीमत पर सप्लाई की पेशकश की, जिसके बाद इंडियन पोटाश लिमिटेड ने खरीद बढ़ाकर 13.5 लाख टन कर दी.
कोन से देशे से अयेगी DAP खाद?
सुत्रो के मुताबिक भारत को डीएपी खाद की सप्लाई मुख्य रूप से सऊदी अरब, रूस, मिस्र और मोरक्को से मिलेगी. टेंडर से जुड़े दस्तावेजों में यह शर्त रखी गई है कि सभी खेपों को 15 अगस्त तक रवाना करना होगा.
वैश्विक बाजार में खाद की कीमतें बढ़ सकती हैं
भारत की इस रिकॉर्ड खरीद का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पडा हैं. बड़ी मात्रा में डीएपी खरीदने से वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ने की संभावना है, जिससे खाद की कीमतों में तेजी आ सकती है. ऊर्जा और शिपिंग लागत पहले से बढ़ी हुई है, ऐसे में आने वाले समय में उर्वरकों के दाम और महंगे हो सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना हैं कि भारत की इस बड़ी खरीद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में डायरेक्ट एक्टेड फॉस्फेट खाद की कीमतों और उपलब्धता पर असर देखने को मिल सकता हैं.
पहले यूरिया की भी हुई थी बड़ी खरीद
भारत ने हाल ही में यूरिया खाद की रिकॉर्ड मात्रा में खरीद की थी. पिछले महीने एक टेंडर के माध्यम से लगभग 25 लाख टन यूरिया आयात किया गया था. इसकी कीमतें दो महीने पहले की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई थीं.
किसानों को राहत देने पर सरकार का फोकस
सरकार किसानों को खेती के मौसम में खाद की कमी से बचाना चाहती है. इसलिए, वह बड़े पैमाने पर उर्वरकों का स्टॉक रख रही है, ताकि आपूर्ति प्रभावित होने पर भी खेती बिना रुके जारी रहे.





