बेबीकौर्न (Baby Corn) मक्के के भुट्टे की शुरू की अवस्था है जिस में भुट्टे को परागण होने से पहले की कोमल अवस्था में तोड़ लिया जाता है. बेबीकौर्न से स्वादिष्ठ व्यंजन बनाए जाते हैं. इस का इस्तेमाल सब्जी, सलाद के साथ अचार, सूप, पकौड़े व अन्य चायनीज व्यंजन बनाने में भी किया जाता है. आजकल बेबीकौर्न की मांग बढ़ गई है. इस के चलते इस की कीमत भी अच्छी मिल रही है.
बेबीकौर्न बहुत ही पौष्टिक होता है. इस में कैल्शियम और फास्फोरस की अधिक मात्रा के साथ प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट व विटामिन भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, साथ ही इस के पौधे से पशुओं के लिए हरा चारा मिलता है और साइलेज तैयार किया जाता है.
किसान इस की खेती में रुचि ले कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. आमतौर पर एक हेक्टेयर में 14-15 क्विंटल की उपज होती है जबकि कुछ किसान 19 क्विंटल तक की उपज भी ले रहे हैं.
मिश्रित से खेती मुनाफा
किसान मिश्रित खेती में बेबीकौर्न के साथ ही गाजर, मूली, गोभी, पालक व धनिया वगैरह सब्जियों के अलावा फूलों की खेती भी कर के दोहरी कमाई कर रहे हैं. महिलाएं प्रोसेसिंग के द्वारा बेबीकौर्न से अचार, मुरब्बा, जैम, खीर, हलवा, बर्फी वगैरह बना रही हैं.
यहां हम बेबीकौर्न की वैज्ञानिक खेती के बारे में चर्चा कर रहे हैं:
आबोहवा:
मक्के की तरह बेबीकौर्न की फसल को भारत में बारिश के मौसम में उगाया जाता है. उत्तर भारत में अधिक गरमी के समय तापमान बढ़ने से भुट्टे का विकास तेजी से होता है. बाजार में बेबीकौर्न का अलग बीज आता है.
जमीन:
इस की खेती बलुई से ले कर भारी मिट्टी तक सभी तरह की मिट्टियोें में की जाती है. ज्यादा पैदावार के लिए जीवांश वाली उपजाऊ मिट्टी और दोमट मिट्टी वाले खेत अच्छे माने जाते हैं. खेत में पानी निकासी का इंतजाम भी होना चाहिए.
गरमी के दिनों में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करने के बाद 2-3 बार हैरो या कल्टीवेटर से जुताई करनी चाहिए, ताकि मिट्टी पूरी तरह भुरभुरी हो जाए और जमीन में नमी बनी रहे.
बीज और उर्वरक:
औसतन 25-30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की जरूरत होती है. बोआई करने से पहले बीज को थाइरम या कैप्टान से उपचारित कर लेना चाहिए.
बेबीकौर्न की अच्छी फसल के लिए 130-150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50-60 किलोग्राम फास्फोरस और 40-50 किलोग्राम पोटाश की प्रति हेक्टेयर जरूरत पड़ती है.
बसंत में उगाई गई फसल में 8-10 दिन के अंतर से लगातार सिंचाई करते रहना चाहिए.
फसल सुरक्षा
बेबीकौर्न की फसल को दीमक, माहू, तना बेधक, तना मक्खी, कटुआ कीट काफी नुकसान पहुंचाते हैं.
दीमक से इस फसल को बचाने के लिए क्लोरोपाइरीफास दवा की 2-3 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ इस्तेमाल करें. इस के अलावा अन्य कीटों की रोकथाम के लिए वैज्ञानिकों की सलाह पर बाजार से कीटनाशक ला कर इस्तेमाल करें.
नर मंजरी तोड़ना
मक्के की फसल से बेबीकौर्न की उपज लेने के लिए सब से अहम काम नर मंजरी तोड़ना होता है. पौधों में फूल आने से पहले ही नर मंजरी को तोड़ देना चाहिए. नर मंजरी तोड़ने से अधिक भुट्टे बनते हैं और परागण न होने से भुट्टे की क्वालिटी भी अच्छी रहती है.
बेबीकौर्न की तुड़ाई
बेबीकौर्न की फसल तेजी से बढ़ती है. समय से बेबीकौर्न को पौधे से निकालना चाहिए. तुड़ाई रोजाना सुबह के समय करनी चाहिए. तुड़ाई में देरी होने से भुट्टे की कोमलता और क्वालिटी में कमी आ जाती है.
फसल बोने के 50-60 दिन बाद भुट्टे तोड़े जा सकते हैं. तुड़ाई सिल्क निकलने के 2-3 दिन बाद कर सकते हैं. बेबीकौर्न को छील कर बाजार में बेचना चाहिए.Baby Corn





