स्वस्थ बीज ही स्वस्थ पौध का आधार है. बासमती धान का बीज (Basmati Paddy Seed) तैयार करने की तकनीक बता रहे हैं:

खेती की तैयारी :

बासमती धान एक स्वपरागित फसल है, शुद्ध बीज के लिए धान की अन्य किस्मों व अन्य फसलों की आपस में दूरी 3 मीटर होनी चाहिए. फूल आने से 15 दिन पहले फसल दूरी के काम को किया जा सकता है.

नर्सरी का चयन :

नर्सरी यानी पौधशाला के लिए सिंचाई व पानी निकासी वाली समतल जमीन को चुनना चाहिए. ध्यान रखें कि पिछले मौसम में उस जमीन पर धान की कोई अन्य किस्म की फसल न ली गई हो.

बीज की मात्रा और उपचार :

एक एकड़ खेत की रोपाई के लिए 6 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है. बीज फसल के लिए आधारीय बीज या प्रजनक बीज का ही इस्तेमाल करें.

बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान बेहतरीन क्वालिटी वाला आधारीय बीज मुहैया कराता है. एक किलोग्राम बीज के लिए 25 वर्गमीटर जगह लेनी चाहिए और 2 किस्मों के बीच नर्सरी क्यारियों का फासला 2 मीटर होना चाहिए.

बोआई :

एक ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन व 20 ग्राम कार्बेंडाजिम के घोल में 10 किलोग्राम बीज को 24 घंटे के लिए भिगोना चाहिए. इस के बाद इस को 24 घंटे के लिए जूट के बोरे में भर कर छायादार जगह पर रखें.

इस तरह बीज अंकुरित हो जाएगा. खेत में 2×1.5 मीटर आकार की क्यारियों में अच्छी तरह से कीचड़ बना कर लेवलिंग कर के उस में इस बीज को छिड़क देना चाहिए. नर्सरी की देखभाल व उर्वरक का इस्तेमाल सामान्य नर्सरी की तरह करना चाहिए. 20-30 दिन की नर्सरी का इस्तेमाल रोपाई के लिए करना चाहिए.

रोपाई :

अच्छी तरह से पडलिंग कर के समतल खेत में बीज फसल की रोपाई रस्सी की सहायता से लाइनों में करनी चाहिए. पौध को उखाड़ने से पहले क्यारियों में पानी भर लेना चाहिए. एक ग्राम कार्बंडाजिम प्रति लीटर पानी का घोल बना कर उस में पौध का उपचार जरूर करें या पौध उखाड़ने से एक हफ्ते पहले एक ग्राम कार्बंडाजिम प्रति वर्गमीटर की दर से नर्सरी में पानी भर कर डाल देना चाहिए.

पौध की रोपाई करते समय 1-2 सेंटीमीटर पानी खेत में रखें और पौध को ज्यादा गहरा न रोपें. बासमती धान की रोपाई 20×20 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए. 10 लाइनें लगाने के बाद एक लाइन का फासला चलनेफिरने के लिए खाली रखें.

बीज फसल में रोगिंग सब से अहम काम है. इस में खेत में लगातार समयसमय पर खाली लाइन में घूमना चाहिए. तना, पत्ती, फैलाव व ऊंचाई के आधार पर फालतू पौधों को खेत से बाहर निकाल देना चाहिए.

कोई भी अन्य किस्म और उसी किस्म का कोई भी बड़ा या छोटा पौधा सभी को हटा देना चाहिए. एक समान पौधों को ही खेत में रहने देना चाहिए.

फूल आने के समय छंटाई बहुत जरूरी है. इस समय पहले व देर में फलने वाले पौधों को भी निकाल देना चाहिए. आखिरी छंटाई, कटाई से पहले करनी चाहिए.

खाद व फसल सुरक्षा :

सामान्य फसल के लिए खाद व उर्वरकों की तय मात्रा का ही इस्तेमाल बीज फसल में भी किया जाएगा. बीज फसल के खेत को पूरी तरह से साफ रखें और किसी भी प्रकार के कीट या बीमारी की समस्या के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से केमिकलों का इस्तेमाल करें. हर हालत में बीज फसल को खरपतवारों, कीट व बीमारियों से मुक्त रखना चाहिए.

कटाई व मढ़ाई :

दानों का रंग सुनहरा पड़ने पर धान की कटाई खेत की सतह से 6-8 इंच ऊपर से करनी चाहिए. फसल को सुखा कर मढ़ाई कर लेनी चाहिए.

बीज फसल की 2 त्रिपाल पर मढ़ाई करनी चाहिए. इस में पहले 1-2 बार ड्रम पर पीटना चाहिए और बाकी दानों को दूसरे त्रिपाल पर पीटना चाहिए. दूसरे त्रिपाल वाले धान को बीज के लिए इस्तेमाल न कर के बेचने के लिए मंडी भेज देना चाहिए. पहले त्रिपाल पर जो दाने होंगे वे लंबे अच्छे स्वस्थ होंगे. इस तरह बिना मशीनों के ग्रेडिंग भी हो जाएगी. इस धान को अच्छी तरह सुखा कर कपड़े के थैले में रख दें और इस पर लेवल लगा दें, जिस से बीज की सही पहचान हो सके.

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